Monday, 23 April 2018

नीम का उपयोग त्वचा रोग मे कैसे करें ( Neem ka upyog kaise karen)

Neem ka upyog
Neem ka ped


नीम के पेड़ के लाभ ( नीम tree in Hindi)



इस लेख में आपको यह बताने जा रहे हैं कि नीम का उपयोग त्वचा रोग मे कैसे करें ।नीम, त्वचा औषधीय कामो ( neem medicinal uses ) में उपयोग की जाती है । नीम के उपयोग (Neem ke upyog) से त्वचा की चेचक जैसी भयंकर बीमारिया नही होती तथा इससे रक्त शुद्ध होता है । नीम स्वास्थवर्धक एवं आरयोग्यता प्रदान करने वाला है। ये सभी प्रकार की व्याधियों को हरने वाला है, इसे मृत्यु लोक का कुल्पवृक्ष कहा जाता है। चरम रोग मे इसका विशेष महत्व है। 

भारत में नीम का उपयोग एक औषधि के रूप में किया जाता है, आज के समय में बहुत सी एलोपैथिक दवाइयां नीम की पत्ती व उसकी छल से बनती है । नीम के पेड़ की हर अंग फायदेमंद होता है, बहुत सी  बीमारियों का उपचार इससे किया जाता है । भारत में नीम का पेड़ घर में लगाना शुभ माना जाता है ।


नीम स्वाद में कड़वा होता है, लेकिन नीम जितनी कड़वी होती है, उतनी ही फायदे वाली होती है । यहां हम आपको नीम के गुण और उसके लाभ के बारे में बता रहे हैं । जिसे आप घर में ही उपयोग कर बहुत बीमारियों का उपचार कर सकते हैं ।


नीम का scintific name- azdirachta indika he तथा meliaceae कुल का पौधा है। आंग्रजी मे Neem को morgosa tree कहते है । 


नीम स्वास्थवर्धक तथा बीमारियो को दूर करने वाला पौधा है । नीम के उपयोग ( Neem ke upyog) से अनेक बीमारियां दूर होती हैं । वर्षा ऋतु मे नीम के कोमल पत्ते का विशेष महत्व इससे त्वचा रोग, चेचक, एवं कुष्ट रोग संबंधित बीमारिया नही होती है ।  


नीम के उपयोग ( Neem ke upyog) से रक्त शुद्ध होता है । जो व्यक्ति नीम का साग नियम पूर्वक खाता रहता है उसे विषैले जंतु द्वारा काटने पर कोई नुकसान नही होता है । Neem एक बहुत ही बढ़िया कीटाणु नाशक है तथा रक्त शोधक के गुण पाये जाते है । 


नीम 10-20 मीटर ऊचा घना शाखायुक्त तथा सदा हरा रहने वाला पौधा है इसके पत्ते 20-35 सेमी लंबे किनारो पर कटे होते है । तथा फल चिकने 3-8 सेमी लंबे होते है इसका बीज अंडाकार एकल एवम् नुकीला होता है । नीम के पेड़ पर फूल जनवरी से अप्रैल  में आते हैं ।


नीम के रसायनिक संघटन:



नीम की लकड़ी मे टैनिन, तेल ग्लू - कोसाइड, nimatone, निबोलीन, baklectone पाया जाता है । नीम की छाल में टैनिन, स्टिग्मास्टिरोल, लयुपिओल, कंपेसटीरोल, A & B एमाएरीन, निमबीन एवं मीथाइल क्लूनेट पाया जाता है। इसके पत्ते मे निम्बनीन, निमबीन, निम्बेन्दीओल पाया जाता है।


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नीम के पत्ते के फायदे (neem ke patte ke fayde)




नीम मलेरिया,सर्दी खांसी,शुगर,अलसर आदि बीमारी में काम आता है । यह लीवर, किडनी में भी फायदा करती है । नीम के पत्ते का प्रयोग करने से स्किन के दाग धब्बे दूर होते है । नीम के अत्यधिक प्रयोग करने से एलर्जी हो सकती है ।



त्वचा रोग में नीम का उपयोग ( Neem ka upyog) में कैसे करें:



1.चेचक में नीम का उपयोग (Neem ka upyog in hindi):





नीम की लाल रंग की कोमल पत्ती 7 नग, कालीमिर्च 7 नग आपस मे कूट ले ओर एक महीने तक नियम पूर्वक इस तरह नीम खाने से एक साल तक चेचक नही निकलती । चेचक के दानो की जलन शांत करने के लिए नीम के 5-10 बीज की गिरी पानी मैं घिस कर लेप करते है ।

                   
Neem ke patte, Neem ka ped,
नीम की पत्ती


  • अगर चेचक के दानो मे गर्मी हो तो Neem की 10 ग्राम कोमल पत्तिया पीस कर पतला लेप लगाना चाहिए।


  • अगर चेचक निकलते समय रोगी को बेचैनी हो तो नीम की हरी पत्तियो का 10-12 mg रस सुबह, दोपहर, शाम पिलाना चहिये ।चेचक के दने सूखने पर छोटे छोटे गड्ढे के निशान बन जाते हैं, इस निशानों पर नीम का तेल या नीम के बीजो की गिरी घिस कर लगाने से दाग मिट जाते है ।



    •  चेचक के रोगी के यदि बाल झड़ जाए तो कुछ दिन तक सिर मे नीम तेल लगाने से बाल फिर से उग सकते है ।


    • नीम की जड़ की ताजी छाल और नीम के बीज की गिरी 10-10 ग्राम, दोनो को अलग अलग नीम के ताजे पत्तो के साथ पीस कर भली प्रकार मिलालें, मिलते समय ऊपर से नीम का रस मिलते जाए और उबटन तैयार कर ले । ये उबटन खुजली, फुंसी, शरीर से आने वाली दुर्गन्ध आदि विकारो को दूर करता है।



    2. श्वेत कुष्ठ में नीम का उपयोग (Neem ka upyog) :



    • ताजी नीम की पत्ती 5 नग और हरा आंवला 10 ग्राम लें सुबह सूर्योदय के पूर्व ही ताजे जल मे पीस छान कर पी लें ।


    • नीम की पत्ती फूल व फल को बराबर मात्रा मे मे लेकर जल मिला कर पीस ले इसकी 2 ग्राम मात्रा जल के साथ सेवन करने श्वेत कुष्ट मे लाभ होता है ।

    नीम का उपयोग
    Neem ki niboli



    3. गलित रोग में नीम की पत्ती का उपयोग ( Neem ki patti ka upyog ) :


    • रोगी को नीम की पत्ती उबाल कर स्नान करना चाहिए । नीम के तेल मे नीम की रख मिला कर घाव पर लगाने से लाभ होता है । रोगी को साल भर नीम के पेड़ के नीचे सोना चाहिये तथा बिस्तर पर नीम की ताजी पत्तिया बिछानी चाहिए । और नीम की लकड़ी का दातुन करना चाहिए । 


    • कुष्ट के  सुबह उठ कर लगातार 10 मिली नीम का स्वारस पीना चाहिए । पूरे शरीर मे नीम का तेल तथा नीम के स्वारस की मालिश करनी चाहिये ।


    • नीम की गिरी से भी कुष्ट रोग का उपचार किया जा सकता है, रोगी को पहले दिन एक गिरी दूसरे दिन दो गिरी, इसी तरह 1-1 गिरी बढाते हुए 100 गिरी तक खिलाये, फिर घटाते हुए  एक गिरी तक आ जाएं । फिर इसका सेवन करना बंद कर दें । अन्य खाने मे चने की रोटी व घी के अतिरिक्त कुछ ना ले ।


    • नीम की गिरी को 100 मिली नीम के तेल मे मोम डाल कर गर्म करे,जब दोनो चीज़े अच्छी तरह से मिल जाए तो इसे उतार कर इसमे 10 ग्राम राल का चूर्ण मिलाए, ये मलहम आग से जाले घवो के लिए भी उपयोगी है                                                 


    • नीम का तेल 50 ग्राम में 10 ग्राम कपूर मिला कर घाव पर रखने से घाव ठीक होता है ।


    • भगंदर जैसे घाव मे नीम व कपूर मिला कर बत्ती अंदर रखने से लाभ होता है । 



     4. चर्म रोग में नीम के पत्ते खाने के लाभ (Neem ke patte khane ke labh ):



    • फोड़ा, फुंसी, दाद, खुजली, छाजन आदि रोगों के लिये पुरने नीम वृक्ष की सूखी छाल को बारीक पीस कर रख ले, 3 ग्राम चूर्ण को 250 मिली पानी मे रात को भिगो कर रख दे, सुबह छान कर शहद मिला कर रोगी को दे ।


    • नीम पत्ते के रस मे कपड़े की पट्टी भिगो कर बांध कर बदलते रहने से एग्जिमा ठीक हो जाता है।


    • गीली छाज में नीम के 10 पत्ते पीस कर बंधने से लाभ होता है ।


    • बरसात के दिनों मे बच्चो को फोड़े फुंसी आदि हो जाती है इसके उपचार के लिए 5-10 नीम की निबोली पकी को पानी के साथ दो-तीन बार देने से फोड़े फुंसिया नष्ट हो जती हें।



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    5. दाद में नीम के upyog (Neem ke upyog) :  



    • नीम के 7-10 पत्ते पीस ले उसमे दही मिला कर लेप करने से दाद मे आराम मिलता है।


    • नीम पत्ती के रस मे गंधक, सुहागा, कत्था, नीला थोथा, कलौंजी बराबर मात्रा मे पीस घोट कर गोली बना ले, गोली को पानी मे घिस कर रोज लगाए लाभ होगा ।


    नीम के अन्य गुण फायदे व उसके उपयोग ( neem ke gun fayde tatha upyog)



    1. वजन कम करने में नीम के उपयोग (neem ke upyog)



    अगर आप वजन कम करने को आवश्यकता महसूस करते है, तो प्रतिदिन नीम का जूस पीना शुरू कर देना चाहिए, इससे शरीर का मेटाबोलिज्म नियंत्रित होगा जिससे शरीर में फैट में नहीं जमा होगा और वजन कम होने लगेगा ।



    2.  रक्त शर्करा में नीम के उपयोग



    नीम के पत्ते में एक ऐसा तत्व होता है जो रक्त में उपस्थित शुगर को नियंत्रित करता है । डायबटीज वालों के लिए ये रामवाण औषधि है । रोजाना नीम के पत्ते खाने से इंसुलीन की मात्रा शरीर मे बड़ जाती है । प्रतिदिन नीम की पत्तियों के रस को निकालकर सुबह खाली पेट पीने से रक्त में शर्करा की मात्रा नियमित हो जाती है ।



    3.  कैंसर में नीम के उपयोग




    एक जानकारी के अनुसार यह माना गया है कि नीम में प्रोटीन होता है, जो खून में उपस्थित कैंसर के बैक्टीरिया से लड़ता है तथा उन्हें ख़तम करता है । नीम का जूस रोज सुबह पीने से शरीर में मौजूद सभी विषेले तत्व बाहर निकल जाते है । रोजाना नीम के जूस का सेवन करने से  कैंसर की बीमारी से भी बचे रह सकते है ।



    4. संक्रमण से रक्षा करने में नीम के उपयोग  



    अनेक बार शरीर में तरह तरह के संक्रमण हो जाते है, जिसके कारण दाद, खुजली आदि होने लगती है, कभी कभी फंगस के कारण भी संक्रमण होता है, जिससे बचने के लिए नीम को कूट कर इसके पेस्ट का प्रयोग कर सकते है । दाद, खाज, खुजली में नीम का तेल बहुत ही फायदे वाला साबित होता है ।



    5. दांतों में नीम का उपयोग  




    नीम का डंठल ( दातून ) का उपयोग सदियों से हमारे देश में दांतों को दातुन करने के लिए किया जाता है । नीम के एंटीबायोटिक गुण के कारण दांतों से जुडी अनेक समस्याएं समाप्त कर देता है । इससे दांत मजबूत व चमकदार बनते है ।



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    6. रक्त के प्रवाह को नियमित करने में नीम के उपयोग 




    नीम रक्त नलिकाओं में गंदगी एकत्रित नहीं होने देता, जिससे रक्त का प्रवाह शरीर में बेहतर बना रहता है । इससे खून भी साफ रहता है । नीम का जूस रोज पीने से शरीर में खून से संबंधी समस्या समाप्त हो जाती है ।




    7. पेट रोग में नीम का उपयोग ( pet rog men neem ka upyog)



    पेट में जलन, अल्सर, गैस जैसी समस्या से नीम का  पानी पीकर छुटकारा पाया जा सकता  किया जा सकता है । पेशाब में जलन होने पर नीम की पत्तियों को खाली पेट चबाना चाइये, ऐसा करने से जल्दी फायदा मिलता है ।



    नीम के कुछ विशेष उपयोग (neem ke upyog)




    • नीम का पौधा घर में ऐसी जगह पर लगायें , जहाँ से सम्पूर्ण घर में  उसकी हवा पहुंच सके।



    • घर के मुख्य द्वार पर नीम का पौधा लगाना  शुभ माना गया   है ।



    • नीम की दातुन जरूर करनी चाहिए, ऐसा करने से दांतों साफ रहते हैं तथा आवाज कि समस्या नहीं रहती है ।



    • नीम की लकड़ी के पलंग पर सोने से त्वचा से जुड़ी परेशानी से बचा का सकता है । 



    • नीम के तेल और छाल के उपयोग से कुष्ठ रोग से दूर रहा जा सकता है । 



    • अगर शनि का प्रकोप हो या दशा अच्छी न हो तो नीम की लकड़ी की माला धारण करें ।



    • नीम के पत्तों की माला बनाकर टांगने से नकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश नहीं करती ।


    नीम के इतने सारे फायदे है कि इसे आप अपनी डेली लाइफ में शामिल कर सकते है । नीम को उपयोग में लाकर अनेक बीमारियों से बचा जा सकता है , अगर आप स्वस्थ रहना चाहते है तो नीम का उपयोग प्रतिदिन सुबह करना प्रारंभ कर दें, इससे आप अनेक बीमारियों से बचे रह सकते हैं ।



    नीम के पत्ते के नुकसान (neem ke patte ke nuksan)





    एक जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, प्रतिदिन तीन मिलीग्राम से ज्यादा नीम के पत्तों का रस पीने से मेल शुक्राणु नष्ट हो सकते हैं। अध्ययन के अनुसार, नीम का रस ना केवल स्पर्म को गति को कम कर सकता है बल्कि कुछ ही देर के अंदर ही सारे मानव शुक्राणु को भी खत्म कर सकता है। एक अध्ययन में ये भी ज्ञात हुआ है कि नीम के पत्तों के रस का शुक्राणु की मॉर्फलोजी पर कोई असर नहीं डालती है।




    अध्ययनों के अनुसार, रोजाना दो मिलीग्राम से भी कम नीम के पत्तों का रस आसानी से पिया जा सकता है । इसका रस पीने से पहले पहले किसी चिकित्सक से सलाह अवश्य लें लेवें । नीम के जुड़े  को रोजाना पीने से बचना चाहिए । अन्यथा इससे यौन स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ सकता है। एक जरूरी जानकारी यह है कि नीम के पत्तों का रस बनाने से पहले नीम के पत्ते पानी में भिगोकर अवश्य रखें।



    ऊपर बताये गए अनेक फायदों के बाद भी कुछ लोगों को नीम का उपयोग ( Neem ka upyog) नही करना चाहिए, जो लोग कमजोर काम शक्ति वाले होते है, वे नीम का उपयोग न करे, या वो लोग जो लोग सुबह से ही शराब आदि का सेवन करते है, वे लोग भी नीम का सेवन न करे । फिर भी बहुत थोड़ी मात्रा मे ( 2-3 ग्राम ) नीम के चूर्ण का उपयोग किया जा सकता है। कुछ विशेष तथा असाध्य रोगों मे नीम का सेवन डॉक्टर की सलाह लेने पर ही करें ।


    इस लेख में त्वचा रोग, चेचक एवं कुष्ट रोगों में नीम का उपयोग ( Neem ka upyog) कैसे करें का वर्णन किया गया है । आशा करते हैं कि यह लेख आपको अवश्य पसंद आया होगा ।

    धन्यवाद।

                                 

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