Wednesday, 30 May 2018

आँवले का उपयोग बुढ़ापा दूर रखने व जवानी बनाए रखने में सहायक है ( use of aonla in hindi )

आमला
Amla

आंवले का उपयोग बुढ़ापा दूर रखने व जवानी बनाए रखने मे सहायक, (use of aonla in hindi): 


आँमला उच्चकोटी का रसायन है । इसके बहुत से फायदे हैं, आमले का उपयोग ( Uses of amla in Hindi) बुढ़ापा दूर रखने व जवानी बनाए रखने मे सहायक है । यह रक्त से विषैले व हानिकारक पदार्थो को निकालने मे सक्षम है । और आमला जूस का फायदा  (Amla juice benefit in hindi) यह है कि इसका लगातार सेवन करने से दिल के रोगों व मधुमेह में फायदा होता है ।आंवलो के मौसम मे रोज सुबह व्यायाम या भ्रमण के पश्चात दो पके हुए पुष्ट आँवलों को चाबा कर खाये । अगर कछ आँवला ना खा सके तो आँवला का रस दो चम्मच तथा शहद दो चम्मच मिला कर पिये या इसका बारीक चूर्ण एक चम्मच को एक चम्मच शहद में रात को सोते समय आखरी वस्तु के रूप मे ले । इस तरह तीन छ: महीनों तक इसका सेवन करने से मनुष्य की काया पलट हो जाती है । 

आँवले का उपयोग बुढ़ापा दूर रखता है व जवानी बनाए रखता है, आँवले का निरंतर प्रतिदिन सेवन करने से पाचन शक्ति बढ़ जाती है । गहरी नींद आने लगती है । मर्दाना शति बढ़ती है, दाँत मजबूत होते है । बाल काले व चमक दार हो जाते है, मनुष्य बुढ़ापे मे भी जवान बना रहता है।

इसके रोग निरोधक गुण के कारण मनुष्य हमेशा निरोग रहकर नवयुवको की तरह जवान बना रहता है । आँवला इंडिया मे लगभाग सभी जगह पाया जाता है, ये समुद्र ताल से 4500 फिट की ऊँचाई तक पाया जाता है । उद्यानों मे पाए जाने वाले आँवले के फल बड़े व जंगली फल का आकार छोटा होता है । इसके वृक्ष की पत्तिया इमली के तरह की होती है । लेकिन थोड़ी बड़ी होती है । आँवला एक रसायन है सभी द्रव्यों मे श्रेष्ठ है। आँवले का वैज्ञानिक नाम Emblica officials  Gaertn. है । ये Euphobiaceae कुल का पौधा है । अंग्रेजी मे इसे Indian gooseberry, Emblic myrobalan कहते है । 

इसके सेवन से बुढ़ापा मनुष्य पर प्रभाव नही डाल पता । इसी लिए आर्युवेद मे आँवले को अमृत भी कहा जाता है  आँवले का वृक्ष औसत ऊँचाई का होता है । इसकी ऊँचाई 20 से 25 फिट होती है इसका ताना माध्यम से मोटा होता है । इसकी छाल पतली, परत छोड़ती हुई धूसर और हरिताभ होती है । इसके फूल छोटे छोटे पीले रंग गुच्छो में होते है । फल गोल कार आधे से एक इंच व्यास के होते है । फरवरी से मे तक इसमे फल आते है तथा अक्टूबर से अप्रैल तक फल लगते है ।


इसे  संस्कृत मे - आमलकी, धात्री, 

हिन्दी -अमला, आंवला,  

मराठी-अंवल काटी, आंवला

बंगाली- अंगला, आमलकी आदि कहते है।


रसायनिक संघटन:




आँवले मे विटामिन 'सी' अत्यधिक मात्रा मे पाया जाता है । मौसमी से बीस गुना अधिक विटामिन सी पाया जाता है । आँवले मे गेलिक एसिड अल्बुमिन, टेनिक एसिड, शर्करा कैल्शियम, सेलुलोस पाये जाते है । बीजो से भूरे रंग का तेल निकलता है जो की 16 प्रतिशत होता ।




Anwle ka ped
आमला पेड़

            


आँवले के जूस के लाभ (Amla juice benefit in hindi):






1. यह त्रिदोष नाशक है। इससे वात, पित, कफ का नाश होता है  

2. यह हृदय को बल देने वाला है

3. यह मूत्रल, रक्त शोधक व रुचिकर होने से आँवला प्रमेह, अतिसार, दाह, कामला, अम्लपित्त, रक्तपित्त, वात रक्त, बवासीर, अजीर्ण, अरूचि, खांसी, साँस की बीमारी को नष्ट करता है।

4. ये आंखों के लिए हितकारी, अग्निदीपक है ।

5.आँवला थोड़ा मधुर, तिक्त, कटु रस,शुक्र वर्धक है ।

6. रक्त वहानिआ बुढ़ापे मे भी लचीली बनी रहती है ।

7. चेहरे की झुर्रिया दूर हो जाती है । मनुष्य बुढ़ापे मे भी नौजवानो की तरह चुस्त दुरुस्थ व ताकत वर बना रहता है । 


आँवले का उपयोग: 

वैसे तो आमले का उपयोग आमले का मुरब्बा ( Amle ka murabba) व आमले का अचार (Amle ka achar ) बने में किया जाता है । आमले का उपयोग अनेक रोगों मे किया जाता है। जैसे:-


1. बालों मे उपयोग:




1.1. सूखे आँवले 30 ग्राम, बहेड़ा 10 ग्राम, लोह चूर्ण 10ग्राम, आम की गुठली गिरी 50 ग्राम रात को कढ़ाई मे भिगो कर रखे, बालो पर रोज लेप करने से छोटी आयु मे हुए सफेद बाल कुछ दिनों मे काले हो जाते है ।


1.2. आंवला, शिकाकाई, रीठा तीनो का क्वाथ बनाकर सिर धोने से बाल मुलायम लंम्बे  व घने होते है।


2. अम्ल पित(acidity):




आँवले का स्वारस 25 ग्राम की मात्रा में संभाग शहद के साथ सुबह शाम देने से अम्लपित की शिकायत दूर होती है तथा खट्टी डकारें आना बंद हो जाती है ।


3. कब्ज(constipation):




कब्ज में आँवले का प्रयोग त्रिफला चूर्ण के रूप मे किया जाता है । इससे लिवर बढ़ने,कब्ज बवासीर ,सिरदर्द, व बदहजमी रोग मैं लाभ होता है ।


4. नेत्ररोग:




4.1. पेड़ पर लगे आँवले मे छेद करने के बाद एक द्रव निकलता है इसे आँख के बाहर चारो और लगाने से आँख की शोथ मिटती है ।



4.2. आँवले की 20 से 50 ग्राम मात्रा को कूटे, आधा किलो पानी मे भिगो कर दो घंटे तक रख दे । फिर उबाल कर छानकर इस जल को दिन में तीन बार आंखों मे डालने से आंखों के रोग मे लाभ होता है।



4.3. आँवले 7 से 8 ग्राम कूट कर ठंडे पानी मे भिगो कर रख दे,दो-तीन दिन बाद आंवलो को निचोड़ कर फेक दे, फिर इस जल मे इतने ही और आँवले भिगो कर रख दे, दो - चार घंटे बाद एंको भी निचोड़ कर फेक दे, इस तरह से तीन बार करे । फिर इसी पानी को रोज आंखों मे डाले। इससे आंखों की फूली मिटता है । 

  



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5. नकसीर:




आंवला,जामुन, आम को बारीक पीस कर माथे पर लगाने से नकसीर इस प्रकार रुकती है जैसे जल के वेग के आगे बंधा लगा दिया हो ।


6. वमन(vomiting):



6.1. उल्टी रोकने के लिए आँवले का 10-20 ml रस मे 5-10 ग्राम मिश्री मिलाकर देने से आराम मिलता है ये दिन मे 2-3 बार दिया जा सकता है। तथा आँवले का 10-15 ग्राम चूर्ण भी पानी के साथ दिया जा सकता है।



6.2. आँवले के 20 ग्राम स्वारस मे एक चम्मच शहद तथा 10 ग्राम चंदन का चूर्ण मिला कर पिलाने से वमन मे आराम मिलता है।



Amle ke patti
Amla tree



7. योनि दाह (vaginal infection):




आँवले के 20 mg रस मे 5 ग्राम शक्कर व 10 ग्राम शहद मिला कर रोगी को देने से योनि में जलन मे आराम मिलता है ।


8. अर्श (piles):






आँवले को अच्छी तरह से पीस कर पीठी बना ले, इस पीठी से मिट्टी के बर्तन पर लेप करे, फिर इस बर्तन मे छाछ भर कर रख दे इस छाछ को एक दिन बाद रोगी को पिलाए इससे बवसीर मे लाभ होगा । अगर बवासीर के मस्सो मे अधिक रक्त निकलता है तो 4-8 ग्राम चूर्ण का सेवन दही की मलाई के साथ दिन मे दो बार करे, लाभ होगा।


9. सुजाक(Gonorroea):






आँवले का दो से पांच ग्राम चूर्ण एक गिलास पानी मे मिला कर पिलाने से व उसी जल की पिचकारी मूत्र इंद्री पर लगाने से सूजन व जलन शांत होती है।


10. स्वेत प्रदर(Leucorrhea)






आँवले के बीजो की 20 से 30 ग्राम मात्रा पानी के साथ पीस कर इस पानी को छान कर, इसमे दो चम्मच शहद व पिसी मिश्री मिला कर पिलाने से स्वेत प्रदर ठीक होता है


11. मंदाग्नि(Indigestion)




पके हुए आँवले का कद्दू कस कर लो इसमे उचित मात्रा मे काली मिर्च, सौंठ, सेंधा नामक, भुना जीरा, व हींग मिला कर मिक्स कर दे, इसे छाया मे सुखा कर सेवन करने से लीवर की वृद्धि नही होती है । पेट साफ रहता है अरुचि नही होती है, अग्नि प्रदीप्त होकर मन प्रसन्न रहता है ।


12. रक्त प्रदर (abnormal uterine bleeding):




आँवले का स्वारस 20 ग्राम एक ग्राम जीरा चूर्ण मिलाकर दिन मे दो बार सेवन करे। ताजा आंवला ना होने पर आँवला चूर्ण की 20 ग्राम मात्रा रात्रि मे भिगो कर सुबह सेवन करे। सुभाह भिगोकर रात को सेवन करे। पित्त प्रकोप के कारण होने वाले रक्त स्राव मे विशेष लाभ होता है।








विशेष:



आँवले के  सेवन (Uses of amla ) से रक्त वाहीनिओ मे लचक बनी रहती है । जिससे मनुष्य का हृदेय फेल नही होता, ना ही उच्च रक्तचाप (high blood pressure) होता है, साथ ही रक्त का थक्का भी नही जमता जिससे दिमाग की नसे नही फटती, आँवले के लगातार सेवन करने से रक्त वहीनिआ लचीली बनी रहती है, चेहरे की झुर्रिया दूर हो जाती है । मनुष्य वृद्धावस्ता मे भी जवान तथा ताकतवर बना रहता है । इस लिए यह बुढ़ापा दूर रखने व जवानी बनाए रखने  मे सहायक है।


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