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Saturday, 9 June 2018

बकायन के 9 उपयोग, लाभ, और हानियां ( 9 uses, benefit, and side effects of bakayan in hindi)



बकायन के 9 उपयोग, लाभ और हानियां ( 9 uses, benefit, and side effects of bakayan in hindi) 



bakayan tree in hindi
Bakayan ka ped



बकायन (Bakayan) विशेषतः उत्तर भारत, पंजाब, तथा दक्षिण भारत मे बकायन के पेड़( Bakayan tree) पाये जाते है, ये हिमालय के निम्न प्रदेशो मे 2000-3000 फिट की उचाई तक होता है । बकायन का वृक्ष  नीम की भाँति माध्यम आकार के होते है । यह 20 से 40 फिट ऊंचे होते है । फागुन और चैत्र मास मे bakayan tree  से दूधिया रस निकलता है, ऐसी अवस्था में कोमल पत्तियो को छोड़ कर कोई भाग के क्वाथ अथवा रस का प्रयोग नही करना चाहिए । 


यहां पर हम आपको बकायन के उपयोग, लाभ और हानियां, के बारे मे बताने जा रहे  हैं। Bakayan ped काफी विषैला होता है । इस लिए इसके किसी भी भाग का  उपयोग सावधानी पूर्वक करना चाहिए। 



बकायन के फल की उपेक्षा बकायन की छाल व फूल कम विषैले, बकायन के बीज सबसे अधिक विषैले और बकायन के ताजे पत्ते कम विषैले व नुकसान रहित होते है । इस पोस्ट मे हम आपको बकायन के उपयोग, लाभ और हानियों के बारे में बताने जा रहे है ।


  
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Bakayan ped का वैज्ञानिक नाम Melia azedarach L. है । ये  meliaceae कुल का पेेेड़ है । अंग्रेजी में इसे Persian lilac, Bead tree कहते हैं । आम भाषा में इसे bakayan tree कहते हैं । इसे अलग अलग भाषाओ मे निम्न नामो से जाना जाता है ।



हिंदी    -  बकैन, महानीम, बकायन


संस्कृतमाहनिम्बदरेक

गुजराती -बकान, लिंमदो

मराठी   - बकाना निम्ब

बंगाली  - घोड़ा निम्ब

पंजाबी  - धरेक

फारसी  आजाद दरख़्त

अरबी   हरबित



बकायन के गुण(Bakayan ke gun):



1.  यह वात  पित नाशक होता है

2. बकायन से कुष्ट रोगों का इलाज किया जा सकता है

3. यह रक्त विकारो को दूर करता है

4. बकायन बवासीर मे बहुत उपयोगी है

5. यह चुहो के विष को दूर करता है 

6. इससे शवास रोगों का भी उपचार किया जाता है 

7. इससे  वमन, प्रमेह, गुल्म आदि रोगों का इलाज किया जा सकता है





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बकायन के औषधीय प्रयोग (Bakayan ke Aushdhiye fayde):




बकायन के उपयोग, लाभ और हानियां, बकायन से विभिन्न रोगों का उपचार किया  जाता  है । बवासीर, नेत्ररोग, मुह के छाले, पेट मे दर्द, आँतो के कीड़े, प्रमेह, श्वेतप्रदर, खुजली, पेट के कीड़े आदि, अर्श में तो बकायन का बहुत महत्व है । 




1. बवासीर (अर्श) में बकैन के लाभ (Bakayan ke fayde):





1.1. बकायन के सूखे बीजो को पीस कर इसकी दो ग्राम मात्रा पानी से सुबह शाम लेने से खूनी बादी दोनो प्रकार की बवासीर मे लाभ होता है।


1.2. इसके 8 से 10 पके फल के बीज जो की जमीन पर गिर जाते है, इन्हें लेकर पानी के साथ पीस कर झाड़ी बेर के आकार की गोली बना ले तथा छाया मे सुखाकर इसकी एक-एक गोली सुबह शाम बांसी जल के साथ सेवन करे, तथा 1 गोली गुड़ के पानी के साथ घिस कर मस्सो पर लगाने से मस्से झड़ जाते है


1.3.  बकायन के बीजो की गिरी तथा सौंफ बराबर मात्रा लेकर पीस ले । इसमे बराबर की मात्रा मे मिश्री मिला कर इसकी दो ग्राम की मात्रा दिन मे तीन बार सेवन करने से अर्श मे फायदे होते है ।



2. पेट के कीड़े में बकान के फायदे (Bakayan ke Fayde):




बकायन की 50 ग्राम ताजी छाल को कूट कर 300 मिली पानी मे क्वाथ बनाए जा चौथा हिस्सा रह जाये तो बच्चो को एक बड़ा चम्मच सुबह शाम 20 दिन तक पिलाने से आंत के कीड़े नष्ट हो जाते है ।



3. मुंह के छाले में बकायन के फायदे (Bakayan ke fayde):





20 ग्राम छाल को जला कर, 10 ग्राम सफेद कथे के साथ पीस कर मुह के अंदर बुरकने से लाभ होता है ।



4. आँखों के रोग में बकायन (Bakayan ke Fayde):





मोतिया बिंद या दृष्टि कमजोर होना आदि नेत्र विकार मे बकायन के एक कि. ग्राम ताजे पत्ते पीस कर, निचोड़ कर रस निकाल ले, इस रस को पथ्थर के खरल मे घोट कर सुखा ले, दुबारा फिर दो बार खरल करे । पीसते समय इसमे 3 ग्राम भीमसेनी कपूर मिला ले, इससे प्रातः शाम आंखों मे अंजन करने से मोतिबिन्द, तथा अन्य रोग जैसे आंखों मे लालिमा, आंखों से पानी निकलना, आंखों की कमजोरी, रोंहे आदि विकार दूर हो जाते ।




5. खुजली का बकायन के फायदे (Bakayan ke fayde):




5.1 .  इसके 10 से 20 ग्राम फूलो को पीस कर लेप लगाने से त्वचा के फोड़े फुंसी, खुजली आदि रोग मिटते है ।


5.2 . बकायन के 8 से 10 सूखे फलों को 50ग्राम सिरके मे पीस कर त्वचा पर लगाने से त्वचा के कृमि संबंधित रोग मिटते है ।



5.3 .  इसके 50 मिली रस को सिर पर लगाने से सिर की छोटी छोटी फुंसिया, पीप युक्त फुंसिया, सिर के चमड़े की पपडिया ठीक हो जाती  है । 



6. गर्भाशय के रोग में बकायन के पेड़ के फायदे (Bakayan tree benefit in hindi)





6.1 . बकायन को फूलो का 5 ग्राम रस की मात्रा एक चम्मच शहद के के साथ नियम पूर्वक सुबह शाम चाटने से मासिक धर्म की रुकावट दूर होती है ।


6.2 . गर्भाशय की शुद्धि के लिए बकायन की पत्ती के स्वारस रस की 10 ग्राम मात्रा मे अकरकरा के रस या चूर्ण की 3 ग्राम मात्रा मिला कर सुबह शाम खाली पेट पिलाने से लाभ होता है ।



6.3 . अगर मासिक धर्म मे रक्त प्रवाह जरूरत से ज्यादा हो रहा हो तो बकायन की पत्ती ( bakayan leaves in hindi) के स्वारस की 5 ग्राम मात्रा देने से मासिक धर्म नियंत्रित होता है । अगर मासिक धर्म मे अवरोध हो तो वह भी इससे ठीक हो जाता है ।






Bakayan ke beej
Bakayan ke beej



7. चोट की गांठ व सूजन (Bakayan ke Fayde in hindi): 





चोटिल स्थान पर रक्त जमने के कारण आयी सूजन पर बकायन के 10 से 20 पत्रो को पीस कर पुल्टिस बंधने से गाँठो का रक्त फैल कर लाभ होता है ।


8. गठिया में लाभ (Bakayan ke fayde in hindi):




इसके बीजो को सरसों के बीजो के साथ पीस कर लेप करने से गठिया मे लाभ मिलता है 



9. घाव में फायदा करता है (Bakayan ke Fayde in hindi):




बकायन के पत्तो के रस से घाव धोने पर लाभ होता है । घावो पर पर 8 से 10 पत्तो का लेप बनाकर लगाने से भी लाभ होता है, शरीर का अंग कट जाए तो भी इसके पत्तो को पीस कर इसका लेप करते है ।
        


विशेष:



बकायन पेड़ ( bakayan tree) का कोई भी भाग खाने की अधिकता, यकृत व अमाशय के लिए हानिकारक है, इसके अत्यधिक प्रयोग से होने वाले side efect  को  शांत  करने  के  लिए सौंफ़ खाना चाहिए, इसके विषैले गुण के कारण इसकी अधिक मात्रा का इस्तेमाल नही करना चाहिए, मजीठ व जावित्री गुणों मे इसके प्रतिनिधि द्रव्य है ।


बकायन का पेड़ ( bakayan tree in hindi) नीम की तरह छायादार तथा कड़वा होता है इसकी छाया फायदे मंद होती है, बकायन के पेड़ (bakayan tree ) के किसी  भी अंग का प्रयोग सावधानी पूर्वक अच्छे वैध की सलाह से करना चाहये, हमने  बकायन  के 9 उपयोग, लाभ और  हानियों  का वर्णन ऊपर किया है, उम्मीद करते है की आपको यह लेख पसंद आया होगा अत्यन्त गंभीर रोगों मे इसका इस्तेमाल  अच्छे  वैध की सलाह से करें, इस पोस्ट को लिखने का एक मात्र उद्देश्य लोगों को आर्युवेद के प्रति जागरूक  करना है।  


         

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