Monday, 16 July 2018

हल्दी के औषधीय प्रयोग, एवम् फायदे (benefit of termeric)

साबुत हल्दी
Haldi



हल्दी के फायदे :



हल्दी का का औषधीय प्रयोग हमारे रसोई में बहुत पुराने समय से होता आया है । मसालो में हल्दी का विशेष स्थान है, सौन्दर्य प्रसाधनों मे इसका खास इस्तेमाल होता है । बिना हल्दी के भी मांगलिक कार्य पूरे नही होता है । इसको खाने से रोगप्रतिरोधक छमता बढ़ती है । ये कफ, पित का नाश करती है । सामान्यता हल्दी के पौधे  2 से 3 फिट ऊँचे होते हैं । मालाकार कुछ केले से मिलते  जुलते  हैं । आकार मे केले से छोटे होते हैं । इसके फूल पीले रंग के होते है । जमीन के अंदर इसके कन्द पीले रंग के होते है। कंदो को उबाल कर सुका लेते हैं । इसे ही हल्दी के रूप मे प्रयोग किया जाता है ।



हल्दी वाला दूध लगातार पीने से रक्त संचार अच्छा होता है, व रोग प्रतिरोधक छमता बड़ जाती है । यदि किसी को  किसी भी कारण से सूजन हो गई  हो तो तो हल्दी पानी मिलाकर पीने से ये समस्या दूर हो जाती है । अलग अलग गुणों के हिसाब से हल्दी की अनेक प्रजातिया होती हैं ।



1. यह सादी हल्दी मसालों के काम आती है, इसे दारू हल्दी कहते हैं ।


2. इसके पत्तों व कन्द में आम और कपूर की खुशबू आती है, इस लिए इसे आमा हल्दी कहते है ।

3. एक हल्दी बंगाली होती है, यह रंगने के काम आती है । इसेे जंगली हल्दी कहते है।




रसायनिक संघटन:



इसमे मुख्य घटक कुकुर्मिन नामक योगिक पाया जाता है । इसके अलावा इसमे 5 से 8 प्रतिशत तेल (जो की उड़ने वाला होता है ) टर्मरिक ऑयल तथा tarpinide पदार्थ होते हैं, इसके अलावा इसमे विटामिन A, प्रोटीन, खनिज पदार्थ, व carbohidrate होते हैं ।



हल्दी का औषधीय प्रयोग:



1. गठिया : 

 


दारू हल्दी की 10 से 20 ग्राम मात्रा का क्वाथ (कड़ा)  पीने से गठिया रोग मे आराम मिलता है ।



हल्दी
Haldi



2. चर्म रोग :




  • हल्दी के चूर्ण को मक्खन में मिलाकर रोग ग्रस्थ भाग पर  इसका लेप किया जाता है ।

  • दाद, खाज खुजली आदि व रक्त विकार में 3 से 5  ग्राम हल्दी चूर्ण को गोमूत्र के साथ दिन मे दो से तीन बार सेवन किया जाता है । 5 ग्राम हल्दी के साथ 2ग्राम मिश्री मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से भी लाभ होता है ।

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3. पेट दर्द:



हल्दी की जड़ 10 ग्राम छाल को 250 ग्राम पानी मे उबाल कर गुड़ मिला कर पिलाने से पेट दर्द मे आराम मिलता है ।



4. डायरिया:




दारू हल्दी की जड़ की छाल और सौंठ बराबर मात्रा मे मिला कर चूर्ण बना ले, इसकी 2 से 5 ग्राम की मात्रा में दिन मे तीन बार फंकी देने से डायरिया मिटता है ।



5. प्रमेह( डिस्चार्ज):



इसकी 2 से 5 ग्राम मात्रा को आँवले के रस व शहद के साथ मिला कर सेवन करने से सभी तरह का प्रमेह  ठीक हो जाता है ।



6. स्वेत प्रदर:



गुग्गुल का चूर्ण व हल्दी का चरण बराबर मात्रा मे मिला कर 5 से 10 ग्राम  सुबह शाम देने से लाभ होता है । हल्दी के चूर्ण को दूध मे उबाल कर तथा गुड़ मिला कर सेवन करने से भी श्वेत प्रदर में लाभ होता है ।


7. ज्वर : 


दारू हल्दी की जड़ का कड़वा सत्व मियादी बुखार उतरने के काम आता है । दारू हल्दी की जड़  के क्वाथ की 10 से 20 ग्राम मात्रा पिलाने से लगातार रहने वाला बुखार मे लाभ होता है व लिवर में होने वाली वृद्धि मे भी लाभ मिलता है


Haldi
पिसी हल्दी


8. खांसी, जुकाम:



भुनी हुई हल्दी का एक- दो ग्राम चूर्ण शहद के साथ चाटने से खाँसी में लाभ होता है । जुकाम मे हल्दी को जला कर इसके धुँए को रात मे सूंघते हैं । धुआँ सूंघने के कुछ देर तक पानी नही पीते हैं, इससे जल्दी लाभ होता है ।


9. पायरिया (दाँत रोग):



हल्दी, सरसों का तेल सेंधा नामक थोड़ी मात्रा में मिलाकर  सुबह शाम मसूड़ो की मालिश करने से पायरिया तथा दांतों के सभी प्रकार के रोग दूर हो जाते हैं ।





विशेष:



चेहरे पर यदि चमक चाहिये तो एक चम्मच बेसन में हल्दी और शहद मिलाकर चेहरे पर लगाये दस मिनट बाद चेहरे को धो लीजिये। इससे चेहरे की चमक बढ़ जायेगी और आप को ताजगी का अहसास होगा। सर्दी  के मौसम  फटी एड़ीयों की समस्या बहुत रहती है । इससे छुटकारा पाने के नारियल तेल में हल्दी मिलाकर गाढ़ा लेप बनाकर फटी एड़ियों पर लगये, इससे आपको आराम मिलेगा और आपकी एड़ियाँ भी ठीक हो जायेंगी । हल्दी से घाव भी  जल्दी भर जाते हैं  ।

इसमें  antibacterial व antiseftic गुण पाये जाते हैं । जिससे चोट या घाव जल्दी भर जाते हैं । यह रक्त को साफ करती है। रक्त का संचार अच्छा करती है। रक्त को जमने नहीं देती है और विषैले पदार्थों को शरीर से बाहर निकाल देती है ।
                   
     



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