Saturday, 16 March 2019

पलाश के औषधीय उपयोग एवम् टेसू का होली में महत्व( plash Flower Madicinal uses in hindi)

टेसू के फूल
पलाश के फूल


टेसू ( पलाश) के औषधीय उपयोग:


इस लेख में आप को टेसू यानि पलाश के औषधीय उपयोग एवम् टेसू का होली में महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं। वसंत ऋतु की आभा बिना टेशू के फूल के पूरी नहीं होती है । फाल्गुन पूर्णिमा आते-आते पलाश के फूल पूरी तरह पक जाते हैं । इनका रंग केसरी लाल, और बनावट दीपक की ज्योति की तरह ही होती है। इस टेसू को केसू, पलाश व ढाक कहा जाता है। इन दिनों पलाश के पेड़ की डालियों पर पत्तियां व फल नहीं होते हैं । बल्कि केवल फूल ही फूल दिखते  हैं । टेसू के फूल तोता की चोंच की तरह दिखने वाले फूल का आकार होने के कारण इसे किंशुक नाम से भी जाना जाता है ।

पुराने समय में इन्हीं पलाश के फूलों के रंगों से होली होती थी । होली पर इसके फूलों के रंगों का बड़ा महत्व रहा है। आज भी कुछ लोग त्वचा का नुकसान की जगह लाभ पहुंचाने वाले टेसू के फूलों से रंग निकालकर होली खेलते हैं। बृज में आज भी इसके पलाश के फूलों के रंग से होली खेली जाती है ।

होली के त्योहार में प्राकृतिक रंग बनाने में उपयोग किए जाने वाले केसू के फूल अब कुछ दिन तक अपनी रंगत को बिखेरने के बाद झड़ना शुरू हो जाते हैं । होली के त्योहार पर बाजार में रासायनिक रंगों की अधिकता होने से लोगो ने टेसू के फूलों को भूला दिया है।


पलाश के औषधीय प्रयोग (Plash flawer madicinal uses in hindi):



टेसू के बहुत से औषधीय उपयोग भी है । प्राचीन काल से ही इसका उपयोग दिव्य औषधि के रूप में किया जाता है । पलाश के पेड़ पर फरवरी से मई तक फूल आते हैं व इसका फलकाल मई से जून तक होता है । टेसू को पलाश, किंशुक, रक्त पुष्पक, ढाक, प्लासू आदि नामों से जाना जाता है । इसके पत्तों का उपयोग देना पत्तल बनाने के लिए किया जाता है । पलाश के फूल से अतिसार, प्रमेह, अर्श, रक्तपित्त कुष्ठ आदि रोगों का इलाज किया जाता है । पलाश के फूल मुत्रल, रक्तस्तंभक, दाह शामक, व स्तंभक होते हैं ।


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Plash Flower
Tesu ke Phool



1. नेत्र रोग में टेशू के फायदे (Teshu ke Fayde) :



टेसू की जड़ (ताजी) का अर्क निकाल कर आंखो में डालने से रतोंधी, फूली, मतियाबिंड आदि रोग ठीक होते हैं ।


2. किडनी के रोग में पलाश के फायदे(Plash ke Fayde):



  • पलाश की जड़ का रस निकाल कर इसमें थोड़ी सी गेंहू भिगो कर तीन दिन के लिए रख दें । फिर इन दोनों को पीस कर हलुआ बना कर खाने से प्रमेह, शीघ्र पतन, व कमजोरी दूर होती है ।


  • प्रमेह  - पलाश की कोपलों को तोड़कर धूप में सुखा लें, फिर इसको कूट - छान कर इसकी 8 से 9 ग्राम मात्रा को सुबह के समय सेवन करने से प्रमेह में लाभ होता है ।


  • टेशू के सूखी हुई कोपल, गोंद, छाल, तथा फूलों को मिलाकर चूर्ण बना लें, इस चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर, इस चूर्ण की 2 से 4 ग्राम मात्रा को शाम को दूध के साथ सेवन करने से मूत्र खुल कर होने लगता है । मूत्र होने पर परेशानी नहीं होती है ।


  • 20 ग्राम पलाश के फूलों को 200 ग्राम ठंडे पानी में रात भर के लिए भीगा रहने दें, इसमें सुबह थोड़ी मिश्री मिलाकर पिलाने से गुर्दे का दर्द व पेशाब में खून आना बंद हो जाता है ।


3. त्वचा रोग में केशु के फायदे (kesu ke Fayde) :



  • दाद - पलाश के बीजों को नींबू के रस के साथ पीस कर संक्रमित स्थान पर लगाने से दाद व खुजली का नाश होता है ।


  • घाव - पलाश की गोंद का चूर्ण घावों पर छिड़कने से घाव तुरंत भर जाते हैं ।


  • कुष्ठ - पलाश के बीज का तेल लगाने से कुष्ठ रोग में लाभ मिलता है । दूध में उबल हुए पलाश के बीज, रस कपूर, तथा गंधक व चित्रक की शुष्क करके इसका चूर्ण बनाकर इसके 2 ग्राम मात्रा एक महीने तक प्रतिदिन लेने से मंडल कुष्ठ में फायदा होता है ।



Dhak ka ped
Palash Tree


4. पेट रोग में पलाश के उपयोग (Palash ke Upyog):


  • अफरा - पलाश की शल व सौंठ का काढा बनाकर इसकी 30 सए 40 मिली ग्राम मात्रा दिन में दो बार पीने से पर दर्द व अफारे में फायदा होता है । पलाश के पत्ते का क्वाथ बनाकर इसकी 30 से 40 मिली. मात्रा पिलाने से भी अफरा व पेट दर्द में लाभ मिलता है ।


  • मंदाग्नि - टेसू की ताजी जड़ का अर्क निकाल कर इस अर्क की 4 से 5 बूंदे पान के पत्ते पर रख कर खाने से भूख तेज हो जाती है ।


  • उदर कृमि-पलाश के बीज चूर्ण की एक चम्मच मात्रा दिन में दो बार सेवन करने से पेट के कीड़े मर जाते हैं ।

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5. बाजीकरण में टेशू के लाभ (Palash ke Labh):



  • पलाश बीज चूर्ण 2 से 4 ग्राम मात्रा तथा बराबर मात्र में घी, आंवला चूर्ण, शर्करा बराबर मात्रा में में रात को सोने से पहले खाने से बल की वृद्धि होती है ।


  • पलाश के पांचों अंगो का चूर्ण चाय में शुष्क किया हुआ, शहद व एलोवेरा के साथ मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से निरोगी, बलशाली, व दीघायू होता है।


  • पलाश की काद के अर्क की 5 से 6 बूंद मात्रा दिन में दो बार सेवन करने से काम शक्ति प्रबल होती है ।


  • पलाश (टेसू) बीज के तेल की 2 से 4 बूंद को इंद्री पर लगाने से नपुंसकता समाप्त हो जाती है।



विशेष:


पलाश का धार्मिक महत्व के साथ पलाश का आर्युवेद में अलग ही महत्व है। ऊपर बताए ढाक के उपयोग के अलावा यह आनेक रोगों के उपचार के काम आता है । अगर पलाश के पांचों अंगों के भस्म की 1 से 2 ग्राम मात्रा गुनगुने दूध के साथ दिन में तीन बार खाना खाने के बाद सेवन करने से बवासीर में काफी फायदेमंद होता है । इसी तरह टेसू की जड़ को पीस कर इसके रस की 4 से 5 बूंद नाक में टपकाने से मिर्गी का दौरा ठीक हो जाता है ।

इस लेख का मूल उद्देश्य लोगो को आर्युवेद के प्रति जागरूक करना है । किसी भी गंभीर रोग में पलाश का उपयोग किसी चिकित्सक की सलाह लेकर ही करें ।





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