Thursday, 19 September 2019

बहेड़ा के गुण फायदे उपयोग एवम् नुकसान ( baheda ke fayde)

baheda
baheda ka ped


बहेड़ा के गुण फायदे उपयोग एवम् नुकसान ( baheda ke fayde)



बहेड़ा पूरे भारतवर्ष में पाया जाता है, खासतौर से यह निचले पर्वतीय प्रदेशों mencadhik होता है, बहेडे के पेड़ सेफर्वरी मार्च में पत्ते झड़ते हैं । फिर इस पर तांबे के रंग की कोपल निकलती है, फिर इसके साथ ही मई में बहेदे के पेड़ पर फूल आते हैं, फिर फल बक्र अगली जनवरी फरवरी तक फल पक जाते हैं ।




बहेड़ा के पेड़ का स्वरूप



बहेड का वृक्ष 60 से 80 फिट तक ऊंचा होता है । बहीडे के फूल सफेद अथवा पीले रंग के होते हैं । इसका फल आधा इंच व्यास का होता है । फल सुख कर धारीदार वी पंचकोणीय जैसा हो जाता है । बहेड़ा में एक बीज निकलता है ।


रासायनिक संगठन ( Rasayanic sangthan)



बहेड़ा के फल में tanin, बी- सिस्टरोल, गेलिक एसिड, मैनिटोल, ग्लूकोज, ग्लैक्टोज, फ्रक्टोज, रेमनोंज, आदि तत्व पाए जाते हैं । बहेड़ा की बीज मज्जा में चमकीले पीत वर्ण का एक स्थिर तेल पाया जाता है ।


बहेड़ा का वैज्ञानिक नाम है Terminalia bellirika ( Gaertn.) Roxb.
यह comretaceae कुल का पौधा है । अंग्रेजी में इस baheda के नाम से जानते हैं।


इसके नाम के निम्न मीनिंग हैं ।


संस्कृत - विभितक, अक्ष, कर्श फल

हिंदी    - बहेड़ा

मराठी  - बहेड़ा

गुजराती - बहेड़ा

बंगाली   - बायडा

पाजाबी  - बेहड़ा

तेलगु     - वडिकाय

अरबी    - ब्लेलज


बहेड़ा के गुण (baheada ke gun)



बहेड़ा तीनों दोषों वात, पित्त कफ तीनों दोषों को हरने वाले होता है । लेकिन इसका प्रयोग कफ से उत्तपन्न रोगों को दूर करने में किया जाता है । बहेड़ा बालों की वृद्धि, आंखों के लिए फायदे, नाक के रोग, खून के दोष, गले के रोग, खांसी, एवम् हृदे रोग में फायदेमंद है । बहेड़ा के फल के बीज की मगज आंखों के फूली का नाश करती है । बहेड़ा के बीज कड़वे , वामन नाशक तरह वाथर होते हैं, यह ब्रोंकाइटिस में भी फायदे करता है । बहेड़ा के फल का छिलका कफ नाशक होता है । बहेड़ा की गिरी वेदनशमक तथा शोथ हर होती है ।


Baheda fruit in hindi
बहेड़ा फल




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बहेड़ा के फायदे (Baheda ke fayde)



1. आमाशय में बहेड़ा के फायदे ( Baheda ke Fayde)



बहेड़ा के फल के 3 से 6 ग्राम चूर्ण की मात्रा भोजन करने के पश्चात फेंकी लेने से पाचन शक्ति तीव्र होती है, पेट की अग्नि तीव्र होती है तथा आमाशय को ताकत मिलती है ।




2. नेत्र ज्योति में बहेड़ा के फायदे ( Baheda ke Fayde)




  • बहेड़ा व शक्कर का चूर्ण बराबर मात्रा में प्रतिदिन कने से नेत्र ज्योति में फायदा होता है ।


  • बहेड़ा की छाल का चूर्ण एवम् मधु के साथ उपयोग करने से आंखों की पीड़ा मिटती है ।



3. ज्वर की कमजोरी में बहेड़ा के फायदे ( Baheda ke Fayde)



बहेड़ा एवम् जवासा के 40 से 50 ग्राम काढ़े में एक चम्मच घी मिलाकर सुबह दोपहर शाम पीने से कफ तथा पित्त से होने वाले बुखार हट जाता है । और कमजोरी के कारण चक्कर आना व आंखो के सामने अधेरा आने की समस्या समाप्त हो जाती है ।


4. खांसी में बहेड़ा के फायदे (Baheda ke Fayde)




  • बहेड़ा के छिलके को चूसने से खांसी मिट जाती है ।


  • बकरी के दूध में बहेड़ा, कला नामक , अंदुसा पकाकर सेवन करने से सूखी वी तर खांसी में फायदा होता है ।



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5. श्वास रोग में बहेड़ा के फायदे (Baheda ke Fayde)




बहेड़ा की छाल एवम् हरड़ की छाल की बराबर मात्रा का चूर्ण बनाकर इसकी चार ग्राम मात्रा प्रतिदिन लेने से स्वास रोग वी खांसी में फायदा होता है ।


baheda
Baheda plant



6. मूत्र संक्रमण में बहेड़ा के फायदे (benefit of baheda in Hindi)



बहेड़ा के फल की मिंगी का तीन से चार ग्राम चूर्ण  इतनी ही मात्रा में इसमें शहद मिलाकर चाटने से मूत्र संक्रमण में फायदा होता है ।




7. नपुंसक्ता में बहेड़ा के फायदे (Baheda ke Fayde)




बाहेदे के चूर्ण की तीन ग्राम मात्रा में 6 ग्राम गुड़ मिलाकर सुबह शाम रोज खाने से नमपुनसक्ता ठीक हो जाती है, व्यक्ति फुर्तीला हो जाता है ।


8. बंद गांठ में बहेड़ा के फायदे (Baheda ke Fayde)



बहेड़ा के छिलके को अंडी के तेल में भूनकर फिर सिके में पीसकर बंद गांठ पर हल्के से लेप लगाने से दो से तीन दिन में बंद गांठ बैठ जाती है ।


9. पित्त शोथ में बहेड़ा के फायदे (Benefit of Baheda in hindi)



बहेड़ा के फल की में को पीसकर इसका लेप बनाकर पित्तशोथ पर लगाने से पित्तशोथ मेंफायदा होता है ।




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10. कंदू के रोग में फायदा करता है बहेड़ा (Baheda Benefit in Hindi)




बहेड़ा के फल की में का तेल कंडू रोग में फायदा करता है । ये जलन को भी शांत करता है । इस तेल की मालिश से खुजली तथा जलन समाप्त हो जाती है ।



11. दस्त में बहेड़ा के फायदे (Baheda ke Fayde)




  • बहेड़ा के पेड़ की छल 2 से 5 ग्राम वी एक से दो नग लोंग दोनों को पीस कर शहद के साथ तीन से चार बार चाटने से दस्त रुक जाते हैं ।



  • भुना हुआ बहेड़ा दो से तीन नग को पीस कर सेवन करने से  पुराने डस्त को भी बंद कर देता है ।


baheda ke patte
Baheda leavs 



 हरड़ बहेड़ा आंवला के फायदे (Benefit of harad baheda Amla)




आयुर्वेद के अनुसार ये तीन चीजे सही रहे तो मनुष्य स्वस्थ रहता है, इन्हें वात, कफ और पित्त कहा जाता है। जब ये गुण सही मात्रा एवं अनुपात में होते हैं तो हम दैहिक, दैविक एवं भौतिक सुख प्राप्त कर सकते हैं और जब इनका संतुलन ख़राब हो जाता है तब ये तीनों तरह की परेशानियाँ होने लगतीं हैं। वात, कफ तथा पित्त को पुनः संतुलित कर के हम न केवल शारीरिक बीमारियों को दूर कर सकते हैं बल्कि साथ ही मानसिक, आर्थिक एवं आध्यात्मिक  तरक्की भी कर सकते हैं। वात पित्त कफ को सही करने के लिए हमें त्रिफला की अवश्यता होती है ।


त्रिफला हरड़, बहेड़ा, तथा आंवला का मिश्रण होता है । हरड़ बहेड़ा आंवला अर्थात त्रिफला अर्थात तीन फल । हरड़, बहेड़ा एवं आंवला वे तीन फल हैं, जिनका ठीक तरह से प्रयोग कर हम वात, कफ एवं पित्त को फिर एस संतुलित कर सकते हैं।  त्रिफला के प्रयोग के द्वारा सफ़ेद हुए बाल पुनः काले होने लगते हैं । जबकि आधुनिक चिकित्सा शास्त्र के अनुसार जो बाल सफ़ेद हो गये हैं वे दुबारा काले नहीं हो सकते हैं ।




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त्रिफला चूर्ण बनाने की विधि:



त्रिफला बनाने के लिये सूखी हुई बड़ी हरड़, बहेड़ा और आंवला की आवश्यकता होती है। तीनों ही फल साफ एवं कीड़े लगे नहीं होने चाहिये। इनकी गुठली निकाल कर बचे हुये भाग का अलग-अलग चूर्ण बना लें। बारीक छने हुये तीनों प्रकार के चूर्णों को 1 : 2 : 4 के अनुपात में मिलाकर छान कर चूर्ण तैयार करलें । उदहारण के तौर पर यदि 10 ग्राम हरड का चूर्ण लेते हैं तो उसमें 20 ग्राम बहेड़े का चूर्ण और 40 ग्राम आंवले का चूर्ण मिलाएं ।  चूर्ण बनते समय इसके अनुपात का विशेष ध्यान रखें ।  एक बार में उतना ही चूर्ण तैयार करें जितना कि 3 से 4 महीने में समाप्त जाये। क्योंकि 4 महीने से अधिक पुराने चूर्ण की ताकत समाप्त  होने लगती है। जहां तक हो सके घर पर बने चूर्ण का ही प्रयोग करें ।


बहेड़ा के नुकसान (bahede ke nuksan)



बहेड़ा ( baheda) का उपयोग सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, बहेड़ा का उपयोग अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से पाचन खराब हो जाता है वी उल्टी होने की संभावना रहती है । इस लेख में बहेड़ा के फायदे एवम् इसके नुकसान का वर्णन किया गया है, आशा करते हैं कि यह लेख आप लोगो को अवश्य पसंद आया होगा ।



इस लेख का मूल उद्देश्य लोगों को आयुर्वेद के प्रति जागरूक करना है । किसी भी गंभीर रोग में इसका सेवन करने से पूर्व चिकित्सक की सलाह अवश्य  लें लेवें ।

धन्यवाद ।



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