शतावरी के 20 फायदे एवम् उपयोग ( shatavari benefit in hindi )

शतावरी के फायदे - shatavari ke fayde



शतावरी के फायदे - shatavari benefits in Hindi ने के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं, इसलिए इसका उपयोग कम लोग ही कर पाते हैं । इस लेख में बताने जा रहे हैं कि शतावरी क्या है, शतावरी के फायदे क्या हैं, शतावरी का सेवन कैसे किया जा सकता है।




आयुर्वेद में शतावरी को एक बहुत ही लाभ दायक औषधि के रूप में जाना जाता है । इससे अनेक बीमारियों की रोकथाम, और उपचार किया जाता हैं।




shatavari
Shataver ki jad


शतावरी क्या होती है




शतावरी एक औषधीय जड़ी-बूटी है। इसकी लताएं फैलने वाली होती है। एक ही बेल के नीचे लगभग 100 - 150  जड़ें होती हैं। यह जड़े आकर में लगभग 30 से 100 सेमी तक लम्बी, तथा 1 से 2 सेमी मोटी होती हैं। इन जड़ों के दोनों किनारे नोकदार होते हैं।



शतावरी की जड़ों के ऊपर भूरे रंग का, पतला छिलका होता है। इस छिलके को उतार देने के बाद अन्दर सफेद रंग की जड़ें निकलती हैं। इन जड़ों के बीचोबीच में सख्त रेशा होता है, इसे निकाल कर उपयोग में लाया जाता है ।



शतावरी दो प्रकार की होती हैं,



1. विरलकन्द शतावर




इस शतावरी के कन्द आकार में छोटे, मांसल, फूले हुए तथा एक गुच्छे के रूप में होते हैं। इसके कन्द का काढ़ा बनाकर उपयोग किया जाता है।



2. कुन्तपत्रा शतावर



यह शतावरी का एक झाड़ीनुमा पौधा होता है। इसके कन्द आकार में छोटे, व कुछ मोटे होते हैं। इसके फूलों का रंग सफेद होता हैं, फल गोल होते हैं। कच्चे फल हरे रंग के होते हैं और पकने पर लाल रंग के हो जाते हैं।



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शतावरी को अनेक नाम से जाना जाता है ।



अंग्रेजी - Wild asparagu



हिंदी - शतावर, सतावरि, सतमूली, शतावरी, 



संस्कृत- शतावरी, शतपदी, शतमूली, महाशीता, तालमूली,



उर्दू - सतावरा



उड़िया - चोत्तारु, मोहनोले



गुजराती - एकलकान्ता, शतावरी



तमिल -  किलावरि, पाणियीनाक्कु



तेलगु - छल्लागडडा, एट्टावलुडुटीगे



बंगाली- शतमूली, सतमूली



पंजाबी - बोजान्दन, बोजीदान



मराठी- अश्वेल, शतावरी



मलयालम - शतावरि, तावलि



नेपाली - सतामूलि, कुरीलो



अरबी - शकाकुल



शतावरी के फायदे (stavar ke fayde )





1. अपच की समस्या में शतावरी की जड़ के फायदे (Benefits of Shatavari in Indigestion in Hindi)





खाना ठीक से नहीं पच रहा हो तो शतावरी का उपयोग करना फायदेमंद होता है । 5 मिली शतावर की जड़ के रस को शहद, और दूध के साथ मिला कर सेवन करने से अपच जैसी समस्या नहीं रहती है।



2. पेट दर्द में शतावरी के उपयोग (Shatavari Uses in Hindi)





पित्त के कारण होने वाले पेट दर्द में भी शतावरी का फायदा करता है। 10 मिली शतावरी के रस में 10-12 ग्राम शहद मिलाकर प्रतिदिन लेने से लाभ होता है।




3. शारीरिक दुर्बलता  में शतावरी के फायदे (shatavari benefits in Weakness in Hindi)





जो लोग कमजोर शरीर वाले होते है या शरीर में कमजोरी  महसूस करते हैं, वे लोग शतावरी को घी में पकाकर शरीर की मालिश करें, इससे कमजोरी दूर होकर शरीर पुष्ट होता है । सामान्य कमजोरी दूर करने में शतावरी बहुत ही फायदेमंद होती हैं।




4. पौरुष शक्ति में शतावरी चूर्ण के फायदे (shatavari churn ke fayde)





दूध के साथ शतावरी चूर्ण की खीर बनाकर खाने से पौरुष शक्ति में वृद्धि होती है।




shatvari ki jad
शतावरी




5. सांसों के रोग में शतावरी के लाभ (shatavari ke fayde)





शतावरी पेस्ट एक भाग, घी एक भाग, तथा दूध चार भाग लेकर इन्हें घी में पकाकर इसकी 5-10 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से सांस से संबंधित रोग, रक्त से संबंधित रोग, सीने में जलन, वात और पित्त दोष, और बेहोशी की समस्या में फायदा मिलता है।







6. प्रीग्नेंसी में शतावरी के फायदे (benefit of shatavari in prignancy )




गर्भवती महिलाओं के लिए शतावरी के बहुत फायदे होते हैं। शतावरी, सोंठ, अजगंधा, मुलैठी तथा भृंगराज इन पांचों को समान मात्रा में लेकर इनका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की 1-2 ग्राम की मात्रा में लेकर बकरी के दूध के साथ सेवन करें। इससे गर्भस्थ शिशु स्वस्थ रहता है।



7. बवासीर में शतावरी के फायदे (shatavari ke fayde)



बवासीर में शतावरी का उपयोग करने से अच्छे परिणाम  मिलते है। 2-4 ग्राम शतावरी चूर्ण को दूध के साथ उपयोग करने से फायदा होता है।



8. पेचिश में फायदेमंद शतावरी का प्रयोग ( uses of shatavari in hindi )




ताजी शतावर को दूध के साथ पीस छान लें। इसका सेवन दिन में 3-4 बार करने से पेचिश में फायदा होता है । शतावरी से बने घी का सेवन करने से पेचिश में फायदा होता है।



9. अनिद्रा रोग में शतावरी के फायदे (Benefits of shatavari in Insomnia in Hindi)




अनेक लोगों को नींद ना आने की समस्या रहती है। वह लोग 2-4 ग्राम शतावरी के चूर्ण को दूध में पकाकर ऊपर से इसमें घी मिलाकर सेवन करने से नींद ना आने की समस्या समाप्त होती है।



10. शतावरी चूर्ण के फायदे स्वप्न दोष में (Shatavari churn benefits in hindi)




स्वप्न दोष को ठीक करने के लिए ताजी शतावर की जड़ का चूर्ण 250 ग्राम में 250 ग्राम मिश्री को मिलाकर कूट-पीस कर इसकी 6-10 ग्राम चूर्ण को, 250 मिली दूध के साथ सुबह-शाम लेने से स्वप्न दोष दूर होता है, शतावर चूर्ण का पूरा फायदा लेने की लिए इसका उपयोग उचित मात्रा में करें ।



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11. सर्दी-जुकाम में शतावरी का उपयोग ( shatavari ka upyog)




शतावरी का उपयोग सर्दी-जुकाम में भी फायदा करता है।  शतावरी की जड़ का काढ़ा 15-20 मिली मात्रा में पीने से फायदा मिलता है।



अधिक जोर से बोलने, अधिक बोलने पर, आवाज का बैठना आम बात है। ऐसी समस्या में शतावर, खिरैटी, को मधु के साथ चाटने से फायदा होता है।



12. सूखी खांसी में शरातवरी के फायदे ( shatavari benefits in hindi)




सूखी खांसी के रोग के लिए, 10 ग्राम शतावरी, 10 ग्राम अडूसे के पत्ते, और 10 ग्राम मिश्री को 150 मिली पानी के साथ उबाल लें। इसे दिन में 3 बार लेने से सूखी खांसी समाप्त हो जाती है।



13. सिर दर्द में फायदेमंद है शतावरी (shatavari ke fayde)




शतावरी सिर दर्द से भी फायदा करता है। शतावर की ताजी जड़ का रस निकाल कर इस रस में समान मात्रा में तिल का तेल डालकर उबाल कर रख लेवे । इस तेल से सिर की मालिश करने से सिर दर्द, और आधासीसी का दर्द दूर होता है।



14. पथरी के रोग में शतावरी के फायदे ( shatavari benefits in hindi)




पथरी के रोग से परेशान व्यक्ति 20-30 मिली शतावरी के जड़ से बने रस में समान मात्रा में गाय के दूध को मिलाकर पिने से पुरानी पथरी भी जल्दी गल कर बाहर निकल जाती है ।



15. नाक के रोग में शतावरी का प्रयोग (Uses of Shatavari for Nasal treatment in Hindi)




शतावर चूर्ण के फायदे नाक संबंधी रोगों के उपचार के काम आता है । नाक के रोग में 5 ग्राम शतावरी चूर्ण को 100 मिली दूध में पकाकर, छानकर पीने से नाक के रोग समाप्त होते हैं।



16.  शतावरी के इस्तेमाल से रतौंधी में लाभ (Benefits of Shatavari in Night Blindness in Hindi)




शतावरी के प्रयोग से रतौंधी में भी फायदा होता है। इसके लिए घी में शतावरी के मुलायम पत्तों को भूनकर सेवन करने से लाभ होता है।



17. शतावरी का प्रयोग दस्त में (Shatavari benefits in hindi)




लोग दस्त से परेशान रहते हैं, तो 5 ग्राम शतावरी घी का सेवन करें। इससे दस्त पर रोक लगती है।



18. मूत्र विकार में शतावरी के फायदे ( Shatavari benefit in hindi) 




कई लोग बार-बार पेशाब आने से परेशान रहते हैं, ऐसे में 10-30 मिली शतावर के जड़ का काढ़ा बना लें। इसमें मधु और चीनी मिलाकर पीने से लाभ होता है।



पेशाब की जलन की समस्या में 20 ग्राम गोखरू पंचांग में बराबर मात्रा में शतावर मिला लें। इसे आधा लीटर पानी में उबाल कर इसे छानकर 10 ग्राम मिश्री और 2 चम्मच शहद मिला कर रख लें। इसे थोड़ा-थोड़ा दिन में तीन बार पिलाने से पेशाब की जलन की समस्या और बार-बार पेशाब आने की समस्या में लाभ मिलता है।



19. बुखार में शतावरी में फायदे (shatavari ke fayde)




शतावर और गिलोय की समान मात्रा के 10 मिली रस में थोड़ा गुड़ मिलाकर पिने से बुखार में फायदा होता है। इसका 20-40 मिली काढ़ा में 2 चम्मच शहद मिलाकर सेवन करने से बुखार में फायदा होता है।




20. शतावरी का उपयोग घाव में (use of shatavari )




शतावरी के 20 ग्राम पत्ते का चूर्ण बनाकर 40 ग्राम घी में तल कर और अच्छी तरह पीस कर घाव पर लगाने से पुराने घाव भी ठीक हो जाते है।



इस लेख में शतावरी के फायदे - shatavri benefit in hindi एवम् इसके उपयोग के बारे में वर्णन किया गया है, इस लेख का मूल उद्देश्य लोगो को आयुर्वेद के प्रति जागरूक करना है, किसी गंभीर रोग में और इसकी मात्रा का अंदाजा सही से न हो पाए तो इसका प्रयोग किसी चिकित्सक की सलाह से करें ।

धन्यवाद ।


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