Sunday, 3 March 2019

बेल के उपयोग, फायदे एवम् औेषधीय गुण( bael ke upyog,fayde,)

बेल का पेड़
Bael tree in hindi


बेल का परिचय:


इस लेख में आपको बेल के उपयोग, फायदे, एवम् औषधीय गुण के बारे में बताने जा रहे हैं । बेल का पेड़ भारत में बहुतायत में पाया जाता है  है । बेल के वृक्ष की छाया ठंडी व रोगों से दूर रखने वाली होती है । बेल के गुण के कारण इसे पवित्र  माना जाता है । बेल में टेनिक एसिड, एक उड़न शील तेल एवम् एक चिकना लुआबदार पदार्थ पाया जाता है । बेल की जड़, बेल के पत्ते, और बेल की छाल में tenin व शक्कर को कम करने वाले पदार्थ पाए जाते हैं ।


बेल के गुण (Bael ke gun)


बेल की तासीर उष्ण होती है । बेल कफ व वात नाशक, दीपन, पाचक, मूत्र व शर्करा को काम करने वाला होता है । ये रक्तातिसर, अतिसार, मधुमेह श्वेत प्रदर, नाशक होता है । इसके बाल फल, आधपका फल, व पक्के फल, पत्ते, व बेल की जड़ में अलग अलग गुण होते हैं । बेल के पेड़ को अंग्रेजी में Bael fruit tree कहते हैं । हिंदी में बेल, विली, श्रीफल के नाम से जानते हैं ।


बेल के पेड़ के औषधीय प्रयोग(Bael ke ped ke aushdhiye prayog):



बेल के प्रयोग अनेक रोगों में किया जाता है लेकिन बेल का महत्व पेट रोग में बहुत है । जैसे संग्रहनी, अतिसार, आमतिसर, रक्त अतिसार पेट में जलन अम्लपित्त तथा मंदाग्नि आदि ।

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बेल फल व बेल के पत्ते
बेल फल व बेल के पत्ते



1. अतिसार में बेल के फायदे (atisar men bel ke fayde):



  • कच्चे बेल के फल को आग पर भून कर इसका गूदा निकाल लें, इस गूदा में मिश्री मिलाकर सेवन करने से अतिसार ठीक हो जाता है । इस विधि से आम अतिसार में भी फायदा होता है ।

  • पांच ग्राम बेल गिरी को घिस कर सौंफ के अर्क में मिला कर पिलाने से बच्चों के हरे पीले दस्त बंद हो जाते हैं ।

  • गर्भवती महिला (Pregnancy) अतिसार होने पर दस ग्राम बेल गिरी के पाउडर को चावल के मांड में पीस कर इसमें थोड़ी सी मिश्री मिलाकर दिन में दो से तीन बार सेवन करने से निश्चित रूप से लाभ होता है ।

  • चार लीटर जल में 200 ग्राम बेल गिरी को पकाकर जब इसकी मात्रा 1 किलो से कम रह जाए तो इसको छान कर, इसमें 200 ग्राम मिश्री मिलाकर  किसी बोतल में भर कर रख दें । अब इसकी 10 से 20 ग्राम मात्रा में 500 मिलीग्राम सौंठ मिला कर सेवन करने से अतिसार में अत्यधिक लाभ होता है ।

  • बेल का मुरब्बा खाने से पित्तातिसर मिटता है । पेट के सारे रोगों के लिए बेल का मुरब्बा सेवन योग्य है ।

बेल का मुरब्बा बनाने की विधि:

बेल का मुरब्बा बनाने के लिए निम्न सामग्री प्रयोग की जाती है । एक बेल फल का गूदा एक किलो, पिसी हुई इलायची एक चम्मच, केसर थोड़ा सा, डेढ़ किलो चीनी ।

सबसे पहले बेल फलों को धोकर कद्दूकस कर लें । फिर दबाकर पानी निकाल लें । अब इस गुदे में शक्कर डालें और अच्छी तरह मिला लें । जब चीनी पूरी तरह घुल जाए तो ऊपर से कपड़ा बांधकर धूप में रख देवें । इसे तब तक रखें जब तक चाशनी का रूप ना लेले । फिर इसे  छांव में रखे, इसके बाद इलायची और केसर मिला लें । अब  आपका स्वादिष्ट बेल फल का मुरब्बा तैयार हो गया है। ऐसा माना जाता है कि धूप में पकने वाले ये मुरब्बे दिमाग और आंखों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है ।


2. आमतिसार में बेल के उपयोग (bael ke upyog):



  • बेल की गिरी व आम की गुठली की मिंगी बराबर मात्रा लेकर पीस लें, इसकी दो से 4 ग्राम मात्रा को चावल की मानद या ठंडे पानी के साथ सुबह शाम लेने से लाभ अवश्य होगा । यह बहुत ही प्रभावशाली प्रयोग है।

  • बाल की गिरी व बराबर मात्रा में आम की गुठली की मींगी, बदाम की मिंगि व इसबगोल की भूसी सब की बराबर मात्रा मिलाकर पीस लें, इसकी 3 से चार चम्मच की मात्रा मिश्री के साथ मिलाकर सेवन करने से अतिसार, जीर्ण अतिसार, प्रवाहिका आदि में लाभ होता है ।

बेल फल
Bael fruit


3. रक्त अतिसार में बेल के फायदे (bael ke fayde):


  • बेल गिरी व धनियां संभाग लेकर इसमें दो भाग मिश्री मिलाकर चूर्ण बना लें, इस चूर्ण की 2 से 6 ग्राम मात्रा को ताजे जल के साथ सुबह शाम सेवन करने से रक्त अतिसार में बहुत लाभ होता है ।

  • बेल गिरी के 50 ग्राम गुदे को बीस ग्राम गुड़ के साथ सेवन करने से रक्त अतिसार में लाभ होता है ।


4. संग्राहनी में कच्चे बेल फल के फायदे (kachche bael fruit ke fayde):



  • कच्चे बेल फल को आग पर भून कर, इसका गूदा निकालकर, इसकी 10 से 20 ग्राम मात्रा में थोड़ी शक्कर या शहद मिलाकर सेवन करने से संग्रह्नी में फायदा होता है ।

  • 10 ग्राम बेल गिरी का चूर्ण, 6 ग्राम सौंठ चूर्ण, व 6 ग्राम पुराना गुड लेकर खरल में पीस लें, इसकी 3 ग्राम मात्रा दिन में तीन बार छाछ के साथ सेवन करने से फायदा होता है ।


5. मूत्र संक्रमण में बेल के उपयोग (bael ke upyog):



  • बेल के गुदे को दूध के साथ पीस कर, इसे छान कर चीनी के बूरे के साथ मिलाकर सेवन करने से पुराना मूत्र संक्रमण ठीक हो जाता है, अगर पेशाब रुक रुक कर होती हो तो इसमें भी बहुत लाभ करता है ।

  • बेल के 6 ग्राम ताजे पत्ते, 3 ग्राम सफेद जीरा व 6 ग्राम मिश्री को मिला का कूट लें, इस मिश्रण को खाकर ऊपर से पानी पीने से पूरी तरह से लाभ मिल जाता है । इसे खाने से मूत्र के अनेक रोग दूर हो जाते हैं ।

  • बेल की जड़ की 20 से 25 ग्राम मात्रा को रात में कूट कर, 500 ग्राम पानी में भिगो कर रख दे, सुबह इसे मसलकर, छानकर इसमें थोड़ी मिश्री मिलाकर पीने से मूत्र में जलन आदि की शिकायते दूर हो जाती हैं।


6. रक्तार्श में बेल के फायदे (bael ke fayde):




  • रोगी को मस्सों में दर्द हो तो बेल की जड़ का क्वाथ बनाकर हल्का गरम होने पर इसमें रोगी को इसमें बैठाने से शीघ्र ही दर्द दूर हो जाता है ।



  • बेल गिरी के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर इसकी चार ग्राम मात्रा ठंडे जल के साथ सेवन करने से शीघ्र फायदा होता है ।


7. मधुमेह में बेल के पत्तों का उपयोग( bael ke patte ka upyog):



  • रोज प्रातःकाल 10 ग्राम पत्तों के रस का सेवन करने से मधुमेह में फायदा मिलता है ।



  • बेल के पत्ते 10 नग, नीम के पत्ते 10 नग, तुलसी के पत्ते 5 नग, तीनों को पीस कर गोली बना ले, इसका नित्य प्रातः काल के साथ सेवन करने से शुगर में लाभ होता है ।

  • बेल के ताजे पत्तों के 10 से 20 नग को पीस कर इसमें 5 से 7 कालीमिर्च कूट कर मिला लें, इसको सुबह खाली पेट पानी के साथ सेवन करने से उम्मीद से अधिक लाभ होता है ।


8. कमजोरी दूर करने में बेल के उपयोग( Bael ke upyog):



  • बेल गिरी, असगंध, व मिश्री बराबर मिलाकर चूर्ण बना लें, इसका एक चौथाई केसर का अच्छा चूर्ण मिलाकर इसकी चार ग्राम मात्रा सुबह शाम खाकर ऊपर से दूध पीने से लाभ होता है । कमजोरी दूर होती है।



  • बेल गिरी के चूर्ण को मिश्री मिले दूध के साथ सेवन करने से कमजोरी, शारीरिक दुर्बलता,  खून की कमी  दूर होती है  ।


  • बेल के पत्ते के चूर्ण को 3 ग्राम मात्रा में थोड़ा सा शहद मिलाकर पीने से धातु की दुर्बलता दूर होती है ।


विशेष:


बेल का उपयोग पेट के रोगों के लिए बहुत ही लाभकारी है । बेल की तासीर ठंडी होती है । शरीर की दुर्गंध दूर करने के लिए  बेल के पत्तों का उपयोग किया जाता है । अगर शरीर में कहीं कांटा दस जाय तो बेल के पत्ते की पुल्टिस बनाकर बांधने से कांटा गलकर नष्ट हो जाता है । बेल के पत्तों का क्वाथ बनाकर पीने से ज्वर व सूखी खांसी में भी लाभ होता है ।


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