Saturday, 16 March 2019

पलाश के औषधीय उपयोग एवम् टेसू का होली में महत्व( plash Flower Madicinal uses in hindi)

टेसू के फूल
पलाश के फूल


टेसू( पलाश) का परिचय:


इस लेख में आप को टेसू यानि पलाश के औषधीय उपयोग एवम् टेसू का होली में महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं। वसंत ऋतु की आभा बिना टेशू के फूल के पूरी नहीं होती है । फाल्गुन पूर्णिमा आते-आते पलाश के फूल पूरी तरह पक जाते हैं । इनका रंग केसरी लाल, और बनावट दीपक की ज्योति की तरह ही होती है। इस टेसू को केसू, पलाश व ढाक कहा जाता है। इन दिनों पलाश के पेड़ की डालियों पर पत्तियां व फल नहीं होते हैं । बल्कि केवल फूल ही फूल दिखते  हैं । टेसू के फूल तोता की चोंच की तरह दिखने वाले फूल का आकार होने के कारण इसे किंशुक नाम से भी जाना जाता है ।

पुराने समय में इन्हीं पलाश के फूलों के रंगों से होली होती थी । होली पर इसके फूलों के रंगों का बड़ा महत्व रहा है। आज भी कुछ लोग त्वचा का नुकसान की जगह लाभ पहुंचाने वाले टेसू के फूलों से रंग निकालकर होली खेलते हैं। बृज में आज भी इसके पलाश के फूलों के रंग से होली खेली जाती है ।

होली के त्योहार में प्राकृतिक रंग बनाने में उपयोग किए जाने वाले केसू के फूल अब कुछ दिन तक अपनी रंगत को बिखेरने के बाद झड़ना शुरू हो जाते हैं । होली के त्योहार पर बाजार में रासायनिक रंगों की अधिकता होने से लोगो ने टेसू के फूलों को भूला दिया है।

पलाश के औषधीय प्रयोग (Plash flawer madicinal uses in hindi):


टेसू के बहुत से औषधीय उपयोग भी है । प्राचीन काल से ही इसका उपयोग दिव्य औषधि के रूप में किया जाता है । पलाश के पेड़ पर फरवरी से मई तक फूल आते हैं व इसका फलकाल मई से जून तक होता है । टेसू को पलाश, किंशुक, रक्त पुष्पक, ढाक, प्लासू आदि नामों से जाना जाता है । इसके पत्तों का उपयोग देना पत्तल बनाने के लिए किया जाता है । पलाश के फूल से अतिसार, प्रमेह, अर्श, रक्तपित्त कुष्ठ आदि रोगों का इलाज किया जाता है । पलाश के फूल मुत्रल, रक्तस्तंभक, दाह शामक, व स्तंभक होते हैं ।

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Plash Flower
Tesu ke Phool



1. नेत्र रोग में टेशू के फायदे (Teshu ke Fayde) :



टेसू की जड़ (ताजी) का अर्क निकाल कर आंखो में डालने से रतोंधी, फूली, मतियाबिंड आदि रोग ठीक होते हैं ।


2. किडनी के रोग में पलाश के फायदे(Plash ke Fayde):



  • पलाश की जड़ का रस निकाल कर इसमें थोड़ी सी गेंहू भिगो कर तीन दिन के लिए रख दें । फिर इन दोनों को पीस कर हलुआ बना कर खाने से प्रमेह, शीघ्र पतन, व कमजोरी दूर होती है ।


  • प्रमेह  - पलाश की कोपलों को तोड़कर धूप में सुखा लें, फिर इसको कूट - छान कर इसकी 8 से 9 ग्राम मात्रा को सुबह के समय सेवन करने से प्रमेह में लाभ होता है ।


  • टेशू के सूखी हुई कोपल, गोंद, छाल, तथा फूलों को मिलाकर चूर्ण बना लें, इस चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर, इस चूर्ण की 2 से 4 ग्राम मात्रा को शाम को दूध के साथ सेवन करने से मूत्र खुल कर होने लगता है । मूत्र होने पर परेशानी नहीं होती है ।


  • 20 ग्राम पलाश के फूलों को 200 ग्राम ठंडे पानी में रात भर के लिए भीगा रहने दें, इसमें सुबह थोड़ी मिश्री मिलाकर पिलाने से गुर्दे का दर्द व पेशाब में खून आना बंद हो जाता है ।


3. त्वचा रोग में केशु के फायदे (kesu ke Fayde) :



  • दाद - पलाश के बीजों को नींबू के रस के साथ पीस कर संक्रमित स्थान पर लगाने से दाद व खुजली का नाश होता है ।


  • घाव - पलाश की गोंद का चूर्ण घावों पर छिड़कने से घाव तुरंत भर जाते हैं ।


  • कुष्ठ - पलाश के बीज का तेल लगाने से कुष्ठ रोग में लाभ मिलता है । दूध में उबल हुए पलाश के बीज, रस कपूर, तथा गंधक व चित्रक की शुष्क करके इसका चूर्ण बनाकर इसके 2 ग्राम मात्रा एक महीने तक प्रतिदिन लेने से मंडल कुष्ठ में फायदा होता है ।



Dhak ka ped
Palash Tree



4. पेट रोग में पलाश के उपयोग (Palash ke Upyog):



  • अफरा - पलाश की शल व सौंठ का काढा बनाकर इसकी 30 सए 40 मिली ग्राम मात्रा दिन में दो बार पीने से पर दर्द व अफारे में फायदा होता है । पलाश के पत्ते का क्वाथ बनाकर इसकी 30 से 40 मिली. मात्रा पिलाने से भी अफरा व पेट दर्द में लाभ मिलता है ।


  • मंदाग्नि - टेसू की ताजी जड़ का अर्क निकाल कर इस अर्क की 4 से 5 बूंदे पान के पत्ते पर रख कर खाने से भूख तेज हो जाती है ।


  • उदर कृमि-पलाश के बीज चूर्ण की एक चम्मच मात्रा दिन में दो बार सेवन करने से पेट के कीड़े मर जाते हैं ।

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5. बाजीकरण में टेशू के लाभ (Palash ke Labh):



  • पलाश बीज चूर्ण 2 से 4 ग्राम मात्रा तथा बराबर मात्र में घी, आंवला चूर्ण, शर्करा बराबर मात्रा में में रात को सोने से पहले खाने से बल की वृद्धि होती है ।


  • पलाश के पांचों अंगो का चूर्ण चाय में शुष्क किया हुआ, शहद व एलोवेरा के साथ मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से निरोगी, बलशाली, व दीघायू होता है।


  • पलाश की काद के अर्क की 5 से 6 बूंद मात्रा दिन में दो बार सेवन करने से काम शक्ति प्रबल होती है ।


  • पलाश (टेसू) बीज के तेल की 2 से 4 बूंद को इंद्री पर लगाने से नपुंसकता समाप्त हो जाती है ।



विशेष:


पलाश का धार्मिक महत्व के साथ पलाश का आर्युवेद में अलग ही महत्व है। ऊपर बताए ढाक के उपयोग के अलावा यह आनेक रोगों के उपचार के काम आता है । अगर पलाश के पांचों अंगों के भस्म की 1 से 2 ग्राम मात्रा गुनगुने दूध के साथ दिन में तीन बार खाना खाने के बाद सेवन करने से बवासीर में काफी फायदेमंद होता है । इसी तरह टेसू की जड़ को पीस कर इसके रस की 4 से 5 बूंद नाक में टपकाने से मिर्गी का दौरा ठीक हो जाता है ।
इस लेख का मूल उद्देश्य लोगो को आर्युवेद के प्रति जागरूक करना है । किसी भी गंभीर रोग में पलाश का उपयोग किसी चिकित्सक की सलाह लेकर ही करें ।




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Sunday, 3 March 2019

बेल के उपयोग, फायदे एवम् औेषधीय गुण( bael ke upyog,fayde,)

बेल का पेड़
Bael tree in hindi


बेल का परिचय:


इस लेख में आपको बेल के उपयोग, फायदे, एवम् औषधीय गुण के बारे में बताने जा रहे हैं । बेल का पेड़ भारत में बहुतायत में पाया जाता है  है । बेल के वृक्ष की छाया ठंडी व रोगों से दूर रखने वाली होती है । बेल के गुण के कारण इसे पवित्र  माना जाता है । बेल में टेनिक एसिड, एक उड़न शील तेल एवम् एक चिकना लुआबदार पदार्थ पाया जाता है । बेल की जड़, बेल के पत्ते, और बेल की छाल में tenin व शक्कर को कम करने वाले पदार्थ पाए जाते हैं ।



बेल के गुण (Bael ke gun)


बेल की तासीर उष्ण होती है । बेल कफ व वात नाशक, दीपन, पाचक, मूत्र व शर्करा को काम करने वाला होता है । ये रक्तातिसर, अतिसार, मधुमेह श्वेत प्रदर, नाशक होता है । इसके बाल फल, आधपका फल, व पक्के फल, पत्ते, व बेल की जड़ में अलग अलग गुण होते हैं । बेल के पेड़ को अंग्रेजी में Bael fruit tree कहते हैं । हिंदी में बेल, विली, श्रीफल के नाम से जानते हैं ।


बेल के पेड़ के औषधीय प्रयोग(Bael ke ped ke aushdhiye prayog):



बेल के प्रयोग अनेक रोगों में किया जाता है लेकिन बेल का महत्व पेट रोग में बहुत है । जैसे संग्रहनी, अतिसार, आमतिसर, रक्त अतिसार पेट में जलन अम्लपित्त तथा मंदाग्नि आदि ।

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बेल फल व बेल के पत्ते
बेल फल व बेल के पत्ते



1. अतिसार में बेल के फायदे (atisar men bel ke fayde):



  • कच्चे बेल के फल को आग पर भून कर इसका गूदा निकाल लें, इस गूदा में मिश्री मिलाकर सेवन करने से अतिसार ठीक हो जाता है । इस विधि से आम अतिसार में भी फायदा होता है ।

  • पांच ग्राम बेल गिरी को घिस कर सौंफ के अर्क में मिला कर पिलाने से बच्चों के हरे पीले दस्त बंद हो जाते हैं ।

  • गर्भवती महिला (Pregnancy) अतिसार होने पर दस ग्राम बेल गिरी के पाउडर को चावल के मांड में पीस कर इसमें थोड़ी सी मिश्री मिलाकर दिन में दो से तीन बार सेवन करने से निश्चित रूप से लाभ होता है ।

  • चार लीटर जल में 200 ग्राम बेल गिरी को पकाकर जब इसकी मात्रा 1 किलो से कम रह जाए तो इसको छान कर, इसमें 200 ग्राम मिश्री मिलाकर  किसी बोतल में भर कर रख दें । अब इसकी 10 से 20 ग्राम मात्रा में 500 मिलीग्राम सौंठ मिला कर सेवन करने से अतिसार में अत्यधिक लाभ होता है ।

  • बेल का मुरब्बा खाने से पित्तातिसर मिटता है । पेट के सारे रोगों के लिए बेल का मुरब्बा सेवन योग्य है ।

बेल का मुरब्बा बनाने की विधि:

बेल का मुरब्बा बनाने के लिए निम्न सामग्री प्रयोग की जाती है । एक बेल फल का गूदा एक किलो, पिसी हुई इलायची एक चम्मच, केसर थोड़ा सा, डेढ़ किलो चीनी ।

सबसे पहले बेल फलों को धोकर कद्दूकस कर लें । फिर दबाकर पानी निकाल लें । अब इस गुदे में शक्कर डालें और अच्छी तरह मिला लें । जब चीनी पूरी तरह घुल जाए तो ऊपर से कपड़ा बांधकर धूप में रख देवें । इसे तब तक रखें जब तक चाशनी का रूप ना लेले । फिर इसे  छांव में रखे, इसके बाद इलायची और केसर मिला लें । अब  आपका स्वादिष्ट बेल फल का मुरब्बा तैयार हो गया है। ऐसा माना जाता है कि धूप में पकने वाले ये मुरब्बे दिमाग और आंखों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है ।


2. आमतिसार में बेल के उपयोग (bael ke upyog):



  • बेल की गिरी व आम की गुठली की मिंगी बराबर मात्रा लेकर पीस लें, इसकी दो से 4 ग्राम मात्रा को चावल की मानद या ठंडे पानी के साथ सुबह शाम लेने से लाभ अवश्य होगा । यह बहुत ही प्रभावशाली प्रयोग है।

  • बाल की गिरी व बराबर मात्रा में आम की गुठली की मींगी, बदाम की मिंगि व इसबगोल की भूसी सब की बराबर मात्रा मिलाकर पीस लें, इसकी 3 से चार चम्मच की मात्रा मिश्री के साथ मिलाकर सेवन करने से अतिसार, जीर्ण अतिसार, प्रवाहिका आदि में लाभ होता है ।

बेल फल
Bael fruit


3. रक्त अतिसार में बेल के फायदे (bael ke fayde):


  • बेल गिरी व धनियां संभाग लेकर इसमें दो भाग मिश्री मिलाकर चूर्ण बना लें, इस चूर्ण की 2 से 6 ग्राम मात्रा को ताजे जल के साथ सुबह शाम सेवन करने से रक्त अतिसार में बहुत लाभ होता है ।

  • बेल गिरी के 50 ग्राम गुदे को बीस ग्राम गुड़ के साथ सेवन करने से रक्त अतिसार में लाभ होता है ।


4. संग्राहनी में कच्चे बेल फल के फायदे (kachche bael fruit ke fayde):



  • कच्चे बेल फल को आग पर भून कर, इसका गूदा निकालकर, इसकी 10 से 20 ग्राम मात्रा में थोड़ी शक्कर या शहद मिलाकर सेवन करने से संग्रह्नी में फायदा होता है ।

  • 10 ग्राम बेल गिरी का चूर्ण, 6 ग्राम सौंठ चूर्ण, व 6 ग्राम पुराना गुड लेकर खरल में पीस लें, इसकी 3 ग्राम मात्रा दिन में तीन बार छाछ के साथ सेवन करने से फायदा होता है ।


5. मूत्र संक्रमण में बेल के उपयोग (bael ke upyog):



  • बेल के गुदे को दूध के साथ पीस कर, इसे छान कर चीनी के बूरे के साथ मिलाकर सेवन करने से पुराना मूत्र संक्रमण ठीक हो जाता है, अगर पेशाब रुक रुक कर होती हो तो इसमें भी बहुत लाभ करता है ।

  • बेल के 6 ग्राम ताजे पत्ते, 3 ग्राम सफेद जीरा व 6 ग्राम मिश्री को मिला का कूट लें, इस मिश्रण को खाकर ऊपर से पानी पीने से पूरी तरह से लाभ मिल जाता है । इसे खाने से मूत्र के अनेक रोग दूर हो जाते हैं ।

  • बेल की जड़ की 20 से 25 ग्राम मात्रा को रात में कूट कर, 500 ग्राम पानी में भिगो कर रख दे, सुबह इसे मसलकर, छानकर इसमें थोड़ी मिश्री मिलाकर पीने से मूत्र में जलन आदि की शिकायते दूर हो जाती हैं।


6. रक्तार्श में बेल के फायदे (bael ke fayde):




  • रोगी को मस्सों में दर्द हो तो बेल की जड़ का क्वाथ बनाकर हल्का गरम होने पर इसमें रोगी को इसमें बैठाने से शीघ्र ही दर्द दूर हो जाता है ।



  • बेल गिरी के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर इसकी चार ग्राम मात्रा ठंडे जल के साथ सेवन करने से शीघ्र फायदा होता है ।


7. मधुमेह में बेल के पत्तों का उपयोग( bael ke patte ka upyog):



  • रोज प्रातःकाल 10 ग्राम पत्तों के रस का सेवन करने से मधुमेह में फायदा मिलता है ।



  • बेल के पत्ते 10 नग, नीम के पत्ते 10 नग, तुलसी के पत्ते 5 नग, तीनों को पीस कर गोली बना ले, इसका नित्य प्रातः काल के साथ सेवन करने से शुगर में लाभ होता है ।

  • बेल के ताजे पत्तों के 10 से 20 नग को पीस कर इसमें 5 से 7 कालीमिर्च कूट कर मिला लें, इसको सुबह खाली पेट पानी के साथ सेवन करने से उम्मीद से अधिक लाभ होता है ।


8. कमजोरी दूर करने में बेल के उपयोग( Bael ke upyog):



  • बेल गिरी, असगंध, व मिश्री बराबर मिलाकर चूर्ण बना लें, इसका एक चौथाई केसर का अच्छा चूर्ण मिलाकर इसकी चार ग्राम मात्रा सुबह शाम खाकर ऊपर से दूध पीने से लाभ होता है । कमजोरी दूर होती है।



  • बेल गिरी के चूर्ण को मिश्री मिले दूध के साथ सेवन करने से कमजोरी, शारीरिक दुर्बलता,  खून की कमी  दूर होती है  ।


  • बेल के पत्ते के चूर्ण को 3 ग्राम मात्रा में थोड़ा सा शहद मिलाकर पीने से धातु की दुर्बलता दूर होती है ।


विशेष:


बेल का उपयोग पेट के रोगों के लिए बहुत ही लाभकारी है । बेल की तासीर ठंडी होती है । शरीर की दुर्गंध दूर करने के लिए  बेल के पत्तों का उपयोग किया जाता है । अगर शरीर में कहीं कांटा दस जाय तो बेल के पत्ते की पुल्टिस बनाकर बांधने से कांटा गलकर नष्ट हो जाता है । बेल के पत्तों का क्वाथ बनाकर पीने से ज्वर व सूखी खांसी में भी लाभ होता है ।


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Tuesday, 5 February 2019

ग्रीन टी पीने के 14 फायदे, उपयोग एवम् नुकसान ( Green tea peene ke fayde upyog evam nuksan)

ग्रीन टी का उपयोग (green tea ka upyog)


आज इस लेख के ज़रिए हम आपको ग्रीन-टी क्या है, ग्रीन टी के उपयोग, ग्रीन-टी पीने के फायदे और ग्रीन-टी के नुकसान के बारे में बताने जा रहे हैं । चाय पीने वाले लोगों में बीस प्रतिशत लोग ग्रीन टी पीते है । पुराने समय से ही भारत में इसे औषधी के रूप में प्रयोग किया जाता है । इंडियन मेडिकल साइंस में ग्रीन-टी या काे काफी फायदेमंद माना जाता है ।




Green tea
Green tea



ग्रीन-टी पीने के फायदे ( green tea peene ke fayde ) :



ग्रीन-टी में उपस्थित पोषक तत्व स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं । ग्रीन-टी वज़न कम करने के लिए फायदेमंद होती है । इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट, मेटाबॉलिज़्म को बढाकर वज़न कम करने में सहायता करते है । इसमें मौजूद सक्रिय यौगिक, फैट बर्निंग हॉर्मोन को प्रभावित करते हैं ।

यूके में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि ग्रीन-टी पीने से व मध्यम  व्यायाम करने से फैट ऑक्सीडेशन बढ़ता है, और मोटापे से बचाता है । वहीं, इंसुलिन संवेदनशीलता में भी सुधार लाता है। ग्रीन-टी में मौजूद ईजीसीजी (EGCG) जादू का काम करता है । ग्रीन-टी से मेटाबॉलिक रेट दर बढ़ जाता है, और हर समय  थोड़ी न थोड़ी कैलोरी कम होती है । यहां तक कि जब आप सो रहे होते हैं, तब भी कैलोरी का लॉस होता है ।

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1. मुंह के रोग में ग्रीन-टी ( green tea peene ke fayde ):



अध्ययनों के अनुसार, जो लोग ग्रीन-टी का सेवन करते हैं, उनके मुंह में किसी प्रकार का संक्रमण नहीं होता । एक भारतीय अध्ययन में बताया गया है कि किस प्रकार ग्रीन-टी, मसूड़ों के लिए वरदान है । ग्रीन-टी, बैक्टीरियल रोग व दांतों की मैल को नियंत्रित कर दांतों को खराब होने से बचाती है । हरी चाय में फ्लोराइड भी होता है, जो दांतों को खराब होने से बचाता है। यह चाय स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटन्स (Streptococcus mutans) नामक बैक्टीरिया से भी लड़ती है, जो आमतौर पर दांतों में पाए जाते हैं ।





ग्रीन टी
Green tea



2. डायबिटीज़ के लिए ग्रीन-टी पीने के फायदे ( green tee pine ke fayde)



ग्रीन-टी शरीर की कोशिकाओं को संवेदनशील करती है, ताकि वो चीनी को अच्छे से हजम कर सकें, और मधुमेह के प्रभाव को कम कर सकें । एक अध्ययन के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति पूरे दिन में छह या उससे अधिक कप ग्रीन-टी का सेवन करे, तो टाइप-2 डायबिटीज़ का ख़तरा कुछ प्रतिशत तक कम हो सकता है ।  इस बारे में अपने डॉक्टर से सलाह लेना भी ज़रूरी है, क्योंकि एक दिन में 6 कप ग्रीन-टी पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है ।

ग्रीन-टी, एंजाइम करियाशीलत को रोकता है, जिससे रक्त प्रवाह में अवशोषित चीनी की मात्रा कम हो जाती है । ग्रीन-टी खासकर के टाइप-2 डायबिटीज़ में ज़्यादा फायदेमंद है, क्योंकि इसमें एंटी-डायबिटिक गुण होता हैं ।


3. कोलेस्ट्रॉल के लिए ग्रीन-टी के फायदे ( green tea Peene ke fayde):



हार्वर्ड मेडिकल कॉलेज की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि ग्रीन-टी दिल की बीमारी से रक्षा कर सकता है । ग्रीन-टी हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है । जिससे ह्रदय रोग होने की आशंका कम हो जाती है, क्लस्ट्रोल के स्तर को कम कर देती है । अधिकांश अध्ययन ग्रीन-टी कैप्सूल के उपयोग पर किए गए हैं, लेकिन ग्रीन टी भी काफी फायदेमंद हो सकती है ।



Green tea
ग्रीन टी



4. रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है ग्रीन टी:



ग्रीन टी में मौजूद कैटेकिन (catechins) रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाता है, चाय इम्युनिटी को बढ़ाकर एंटीऑक्सीडेंट्स का काम करती है । ग्रीन-टी में ईजीसीजी रेगुलेटरी मौजूद होता है, और इम्यून सिस्टम को नियंत्रित करता है ।

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5. पाचन के लिए ग्रीन-टी (green tea for digetion in Hindi)



ग्रीन-टी में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट पाचन क्रिया को नियमित करता है। ग्रीन-टी में मौजूद कैटेकिन पाचन एंजाइम की क्रिया को धीमा करता है । इसका अर्थ है कि आंत पूरी कैलोरी को अवशोषित नहीं करती, जिससे वज़न कम करने में फायदा होता है । ग्रीन-टी में विटामिन-बी, सी और ई भी होता है,


6. कैंसर में ग्रीन-टी के फायदे (Green tea ke fayde )



एक और अध्ययन के अनुसार, ग्रीन-टी कई प्रकार के कैंसर (फेफड़े, त्वचा, स्तन, लिवर, पेट और आंत) से हमारी रक्षा करती है । ग्रीन-टी  कैंसर कोशिका के प्रसार को रोकती हैं । ईजीसीजी स्वस्थ कोशिकाओं को प्रभावित किए बगैर कैंसर कोशिकाओं को खत्म करता है, इस यह कैंसर के इलाज में मददगार साबित हो सकता है, कुछ शोध के अनुसार कैंसर के इलाज के समय एक दिन में चार कप ग्रीन-टी पीना लाभकारी साबित हो सकता है, लेकिन ऐसा करने से पहले चिकित्सक से परामर्श लेना ज़रूरी है ।


7. ब्लड प्रेशर में ग्रीन-टी के उपयोग ( green tea ke upyog ):



ऑक्सीडेटिव तनाव से खून में फैट बढ़ता है, जिससे धमनियों में सूजन आ जाती है और यह उच्च रक्तचाप का कारण बनता है वहीं, ग्रीन-टी पीने से इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट सूजन को कम करके रक्तचाप को कम करने में सहायता करता हैं,  यहां तक कि ग्रीन-टी हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को भी कम करता है, जिससे ह्रदय संबंधी परेशानियां कम होती हैं, ग्रीन-टी के सेवन से ब्लड प्रेशर नियंत्रित हो सकता है, लगातार सेवन करने से रक्तचाप में सुधार होता है । इसके अलावा, कम रक्तचाप के मरीज़ों में कोरोनरी हृदय रोग और दिल के दौरे का ख़तरा कुछ प्रतिशत तक कम हो सकता है ।




green tea in hidi
green tea

 

8. गठिया में ग्रीन - टी के उपयोग ( Green tea ke upyog ):



ग्रीन-टी में ईजीसीजी के एंटीऑक्सीडेंट गुण के कारण सूजन और गठिया दर्द को कम करती हैं । ग्रीन-टी हड्डियों के स्वास्थ्य में सुधार लाती है और ऑस्टिओ आर्थइराइटिस (Osteoarthri tis) में गुणकारी होती है, ग्रीन टी में मौजूद ईजीसीजी आर्थराइटिस पर काफ़ी प्रभावी होता है। ग्रीन-टी  रूमेटोइड गठिया (rheumatoid arthritis) में सूजन को कम करके आराम पहुंचाती है


9. तनाव में ग्रीन-टी के लाभ ( green tea ke labh ):




ग्रीन-टी में उपस्थित कैफीन (caffeine) तनाव को कम करने में अहम भूमिका निभती है । एक दिन में तीन से चार कप ग्रीन-टी का सेवन तनाव को कम कर सकता है ।


10. मानसिक स्वास्थ्य में ग्रीन-टी (Green tea ke upyog ) :



आपको जानकर आश्चर्य होगा, लेकिन यह सच है कि ग्रीन-टी आपके मानसिक स्वास्थ के लिए बहुत फायदेमंद  है । ग्रीन-टी में कैफीन होता है, कैफीन मस्तिष्क के लिए अवरोधक न्यूरोट्रांसमीटर की गतिविधि को रोकता है । जिस कारण यह न्यूरॉन्स में सुधार कर मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ाता है, इससे यादाश्त तेज़ होती है, और ब्रेन फंक्शन भी ठीक से होने लगता है,

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11. अल्ज़ाइमर के खतरे को कम करती है ग्रीन-टी:



ग्रीन-टी के सेवन से कई मानसिक बीमारियों का जोखिम भी कम होता है । अल्ज़ाइमर और पार्किंसंस उन्हीं कुछ बीमारियों में से एक है । उम्र के साथ होने वाली मानसिक बीमारी अल्ज़ाइमर बहुत ही आम होती जा रही है । इसमें दिन-प्रतिदिन व्यक्ति की याददाश्त कमज़ोर होने लगती है, और निर्णय लेने की क्षमता कम होने लगती है । वहीं, पार्किसन में मनुष्य के हाथ-पांव कांपने लगते हैं । ये दोनों बीमारियां उम्र होने पर होती हैं, लेकिन कभी-कभी यह छोटी उम्र में भी होती हैं और उम्र के साथ-साथ बढ़ती चली जाती है । ऐसे में ग्रीन-टी का सेवन इन दोनों बीमारी के खतरे को कम करती है ।


12. मोटापा कम करने में ग्रीन टी के फायदे ( green tea ke fayde ):



ग्रीन टी जिसे हरी चाय भी कहते है, मोटापा कम करने के लिये बहुत ही उपयोगी  है । अगर आप अधिक वजन और पेट की चर्बी से तंग आ चुके है, तो सुबह व रात को सोते समय एक एक कप ग्रीन टी का सेवन करें । रोजाना पी जाने वाली चाय की जगह अगर हम ग्रीन टी पीना शुरू कर दे तो ये वजन कम कर शरीर को फुर्तीला बनाने में फायदा करती है । ग्रीन टी पीने से मेटाबॉलिज्म रेट बड़ जाता है । मेटाबॉलिज्म रेट बढ़ने से वजन कम होता है ।


विशेष:



ग्रीन टी के फायदे के अलावा कुछ ग्रीन टी के नुकसान भी हैं । ग्रीन टी में कैफीन की मात्रा कॉफी की अपेक्षा बहुत कम होती है, लेकिन  फिर भी दिन भर में ग्रीन टी का अत्यधि‍क सेवन करने से अनेक बीमारियां सकती है। इससे पेट की समस्या, अनिद्रा, उल्टी, दस्त आदि हो सकते हैं । दिन में दो कप सेज्यादा ग्रीन टी पीना गर्भवती महिलाओं के लिए नुकसान दायक हो सकता है ।

ग्रीन टी का अधि‍क सेवन करने से भूख  कम हो जाती है, जिस कारण व्यक्ति सही डाइट नहीं ले पाता और शरीर को जरूरी मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिल पाते। जिससे व्यक्ति कमजोर हो जाता है । इस लिए ग्रीन टी का सेवन नियमित मात्रा में ही करें ।


धन्यवाद ।


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Saturday, 2 February 2019

गन्ने का रस पीने के फायदे, उपयोग व नुकसान (Ganne ke ras peene ke fayde evam upyog)

Ganna
गन्ने के पेड़


ईख का परिचय:


ईख के पौधे से सभी परिचित हैं । इसे गन्ने के नाम से भी जाना जाता है । गन्ना भारत की मुख्य फसलों में से एक है, इसे उष्ण प्रदेशों में उगाया जाता है । इसकी लाल, सफेद, काली आदि अनेक जातियां पाई जाती हैं । गन्ने का तना 6 से 12 फिट ऊंचा गोलाकार, स्थूल, तथा ग्रंथि युक्त होता है । गन्ने के रस में सुक्रोज, राल, वसा, लवाब, व जल होता है। गन्ने में कैलशियम ओगजेलेट पाया जाता है। ईख Poaceae कुल का पौधा है। गन्ने का विज्ञानिक नाम Saccharum officinarum । अंग्रेजी में इसे sugarcane के नाम से जाना जाता है। इसे भाषा के अनुसार अलग अलग नामों से जाना जाता है ।

हिंदी        : ईख, गन्ना

संस्कृत     : इक्छू, भुरिरस, असिपत्र

गुजरती    : शेरडी

मराठी।    : अंस

तेलगु       : चेरुकु

फारसी     : नैश्कर


गन्ने के गुण:



कच्ची ईख कफ कारक व प्रमेह उत्पन्न करने वाली होती है । आधी पकी ईख मीठी, वात हर, पित्तनशक होती है । पकी हुई ईख बलवर्धक, तथा रक्तपित्त नाशक होती है । गन्ने से निकला गुड मधुर, अग्निजनक, रूचिकारक व पुष्टि वर्धक होता है ।


गन्ने के घरेलू नुस्खे(Ganne ke Garelu Nuskhe) :



 1. अरुचि में गन्ने के रस के फायदे (ganne ke ras ke fayde) :



ईख के रस को आग पर गरम करके एक उफान आने दें । इसे थोड़ा ठंडा कर चीनी मिट्टी या कांच के बर्तन में भरकर रख लें । एक सप्ताह तक रखने के बाद इसे प्रयोग में लाएं । इसकी 1 0 से 20 ग्राम मात्रा पर्याप्त है । यह अरुचि को खतम करता है । यह उत्तम पाचक व स्वादिष्ट होता है ।

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गन्ने
Ganne


2. पीलिया में गन्ने के रस के फायदे (ganne ke ras ke fayde ):



ईख के टुकड़े करके इन्हे रात को बाहर या छत के ऊपर खुले में रख दें । सुबह उठकर कुल्ला करने के बाद इसका रस चूस कर सेवन करें । चर या पांच दिन में अत्यधिक लाभ होगा ।


3. पेट में दर्द में गन्ने के रस के उपयोग (ganne ke ras ke upyog):



गन्ने के रस की 5 किलो ग्राम मात्रा को चिकनी मिट्टी के बर्तन में भर, कर इसका मुंह कपड़े से बंद करके रख दें । एक सप्ताह बीत जाने के बाद इसे छान लें, व किसी बर्तन में भरकर रख दें । एक महीने बाद इसके सेवन करना है । इसकी दस ग्राम मात्रा, 2 ग्राम सेंधा नमक मिलाकर व थोड़ा ग्राम कर पीने से पेट का दर्द तुरंत ठीक हो जाता है ।


4.मूत्र विकार में ईख के उपयोग (ikh ke upyog):



  • ईख के ताजे रस को भर पेट पीने से मूत्र खुलकर होता है । इससे मूत्र संबंधी सभी विकार दूर हो जाते हैं ।



  • गन्ने की ताजी जड़ लेकर इसे उबालकर क्वाथ बनाकर पीने से मूत्र की जलन शांत होती है । एवम् मूत्र संबंधित विकार दूर हो जाते हैं ।

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5. जुकाम में गन्ने का रस पीने के फायदे (ganne ke ras pine ke fayde):



ईख का गुड 10 ग्राम व 40 ग्राम दही, मिर्च का चूर्ण 3 ग्राम, तीनों को मिलाकर प्रातः कल लगातार 3 दिन लेने से बिगड़ा हुआ जुकाम व नाक मुंह से दुर्गं आना, गला पक जाना, खांसी युक्त जुकाम खत्म हो जाता है ।


Ganna juice
गन्ने का जूस


6. अन्य रोगों में गन्ने के फायदे (ganne ke ras ke fayde):



1. ईख का पुराना गुड़ अदरक के साथ सेवन करने से कफ का नाश हो जाता है ।

2. ईख के रस को नाक में डालने से नकसीर में लाभ होता है ।

3. ईख का ताजा रस के साथ जों के सत्तू का प्रयोग करने से पीलिया रोग में फायदा होता है ।

4. गन्ने के रस को उबालकर, इसको ठंडा कर सेवन करने से अफरा ठीक हो जाता है ।

5. भोजन करने से पूर्व गन्ने के  रस का सेवन करने से पित्त में फायदा होता है ।

6.  गन्ने के रस को शहद में मिलाकर सेवन करने से पित्त के कारण होने वाली जलन समाप्त हो जाती है ।

7. गन्ने के गुड़ की पपड़ी खाने से हृदय मजबूत होता है ।

8. गन्ने के रस में आंवला और शहद मिलाकर सेवन करने से मूत्र संक्रमण मिटता है ।

9. खाना खाने से पूर्व ईख के रस का सेवन करने से खाना जल्दी पच जाता है ।

10. ईख के पुराने गुड़ को सौंठ के साथ पीने से वात संबंधी विकार दूर हो जाते हैं ।

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विशेष:



ऊपर बताए नुस्खों के अलावा ईख का रस अनेक रोगों के काम आता है । गन्ने की तासीर तंदी होने के बाबजूद गन्ने के रस से सिर दर्द , श्वास, रकतिसार, आदि का भी उपचार किया जा सकता है । ईख के गुड़ पांच ग्राम में अदरक या सौंठ या हरड़  इनमें से किसी एक के 5 ग्राम चूर्ण को मिलाकर, इसकी 10 ग्राम मात्रा सुबह शाम दूध के साथ सेवन करने से खांसी, श्वास, मुंह के रोग, गलरोग, जुकाम, अरुचि, बवासीर, आदि रोगों के विकार दूर हो जाते हैं । गन्ने का रस बहुत एनर्जी देता है, ईख का रस पीने से चुस्ती फुर्ती बनी रहती है ।

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Monday, 28 January 2019

पेट की गैस छुटकारा पाने के सरल आयुर्वेदिक घरेलू उपाय

पेट गैस के कारण 



आज के समय में लोग जिस तरह का खानपान  हैं उसका सीधा असर उनके पाचन तंत्र पर पड़ता है । पेट की सभी रोगों में सबसे ज्यादा लोग गैस से परेशान रहते हैं । कभी- कभी लंबे समय तक भूखे रहने के कारण या भारी भोजन करने के कारण से भोजन सही तरह से नहीं पच पाता और व्यक्ति को पेट में गैस या पेट में दर्द जैसी समस्यायें हो जाती है । अगर आप चाहे तो कुछ घरेलू उपाय अपनाकर भी इस गैस के कारण पेट में होने वाले दर्द से छुटकारा पा सकते हैं ।


पेट की गैस
पेट दर्द


पेट की गैस के घरेलू उपाय (pet ki Gas Ke Gharelu Upay)


1. नींबू के सेवन से पेट की गैस से छुटकारा (pet ki gas se Chhu tkara)




नींबू भोजन के पाचन में अच्छी भूमिका निभाता है, अगर आप पाचन तंत्र को सही रखना चाहते हैं तो इसके लिए नींबू का प्रयोग करें । भोजन के बाद एक गिलास पानी में आधा नींबू निचोड़ कर पिया जाए तो इससे पेट में गैस की समस्या नहीं होती । गैस होने पर एक चम्मच नींबू के रस में आधा चम्मच बेकिंग सोडा मिलाकर पानी में मिलाकर पीने से भी गैस की समस्या नहीं होती है । इस पानी का सेवन भोजन के बाद करें ।



2. काली मिर्च से पेट की गैस का उपचार (pet ki gas ka upchar)





काली मिर्च पाचन को अच्छा बनाने का काम करती है इसलिए यदि पेट में गैस की समस्या हो तो दूध में थोड़ी सी काली मिर्च मिलाकर सेवन करें । इससे गैस की समस्या में आराम मिलता है ।



3. हींग से पेट की गैस का घरेलू इलाज (pet ki gas ka ghrelu ilaj)




पेट की गैस को दूर करने में हींग का सेवन बहुत ही लाभदायक होता है । हींग में एक ऐसा तत्व पाया जाता है जो पेट में ज्यादा गैस बनने वाले बैक्टीरिया को खत्म करता है । अगर पेट में गैस के कारण दर्द हो रहा हो तो एक गिलास गर्म पानी में थोड़ी सी हींग मिलाकर उसका सेवन करने से आराम मिलता है । अगर छोटे बच्चों को गैस की समस्या हो तो एक चम्मच गुनगुने पानी में थोड़ी हींग मिलाकर नाभि पर हल्के हाथ से मालिश करने से पेट की गैस बाहर निकल जाती है ।

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4. पुदीने का सेवन पेट की गैस के रोग में (pet ki gas rog)




पुदीना पेट की गैस को दूर करने में काफी फायदेमंद है । इसके लिए आप पुदीने की चाय का सेवन भोजन से पहले कर सकते हैं । इससे भी पेट की गैस में लाभ मिलता है ।



5. गैस दूर करने के अजवाइन के प्रयोग (pet ki gas dur karne ke prayog)





यह गैस व पाचन में फायदेमंद होता है, पेट में गैस होने पर आधा चम्मच अजवाइन को पानी के साथ लेने की सलाह दी जाती है । एक चम्मच अजवाइन में चुटकी भर काला नमक मिलाकर भी सेवन करने से आराम मिलता है ।  छाछ में काला नमक और अजवाइन मिलाकर इसका सेवन करने से भी पेट में गैस की में फायदा मिलता है ।



6. जीरे से पेट की गैस दूर करने का उपचार (pet ki gas dur karne ke upay)




जीरे का पानी गैस को दूर करने का एक अच्छा घरेलू नुस्खा है । वास्तव में  जीरे में कुछ एसेंशियल ऑयल पाए जाते हैं जो लार ग्रंथियों को उत्तेजित करते हैं और भोजन के पाचन में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं, जीरे का सेवन करने से गैस बनने की समस्या से काफी हद तक समाप्त हो जाती है । इसका सेवन करने के लिए एक चम्मच जीरे को दो कप पानी में डालकर दस मिनट तक  उबालें और हल्का ठंडा होने दे, जब यह गुनगुना रह जाए तब इसका सेवन करें ।



7. अदरक से पेट की गैस के उपाय (pet ki gas ke upay)




पेट में गैस होने पर अदरक का इस्तेमाल करना बहुत ही फायदेमंद होता है । पेट में गैस होने पर एक चम्मच अदरक का पाउडर लेकर उसने एक चम्मच नींबू का रस मिलाकर इसका सेवन करें । इसके अलावा अदरक की चाय पीना भी फायदेमंद होता है ।


पेट की गैस
पेट रोग में अदरक



8.त्रिफला चूर्ण से पेट की गैस का रामबाण इलाज (pet ki gas ka ilaj)





जिन लोगों को हमेशा ही पेट में गैस के कारण पेट में दर्द रहता है, त्रिफला का सेवन कर सकते हैं । इसके लिए एक कप पानी को उबालकर उसमें एक चम्मच त्रिफला चूर्ण डालकर दस मिनट के लिए रख दें, और रात को सोने से पहले इस पानी का सेवन करें ।  इससे कुछ ही दिनों में पेट के गैस की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा ।

9. सौंफ से पेट की गैस का उपचार (pet ki gas ka upchar)




पेट में गैस की को दूर करने में सौफ एक बहुत अच्छा घरेलू नुस्खा है । इसके लिए आप सौंफ को पीसकर  एक कप पानी में पांच मिनट तक उबालें । पानी को ठंडा करने के बाद इसे छान लें । इस पानी को भोजन के बाद  सेवन करें ।


विशेष



जिन लोगों को हमेशा पेट में गैस की Problum रहती है, उन्हें कुछ बातों का ध्यान अवश्य रखना चाहिए । जैसे - खाना आराम से और चबाकर खाएं तथा बीच लंबे समय का अंतराल ना रखें । गैस के रोगी को बहुत अधिक तेल और मसालेदार भोजन से दूर रहना चाहिए । दिन भर में पानी कम से कम चर लीटर जरूर पिए । पानी शरीर के सभी विषाक्त पदार्थों को बाहर निकाल कर भोजन के पाचन में सहायता करता है । दिन में एक समय व्यायाम को दिनचर्या में अवश्य शामिल करें ।



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Saturday, 19 January 2019

बालों का झड़ना एवम् गंजेपन से छुटकारा पाने के घरेलू नुस्खे


बाल क्यों झड़ते हैं 

आजकल बहुत ज्यादा लोग अपने गंजेपन से या फिर बाल झडने की समस्या से परेशान हैं । बाल झडऩा एक आम बात है, लेकिन कम उम्र में बाल झडऩा किसी के लिए भी परेशानी का कारण बन सकता हैं । बालों की समय से पहले गिरने की समस्या यदि आनुवांशिक हो तो उसे एंड्रोजेनिक एलोपेसिया कहा जाता है । पुरुषों में बाल झडने की समस्या 22 से 25 की उम्र से शुरू हो जाती है । जबकि महिलाओं में इस प्रकार बाल गिरने की समस्या 30 की उम्र के बाद से शुरू होती है । इसके अलावा गलत खानपान और दवाई के साइड इफेक्ट से कम उम्र में बाल झडने की समस्या हो सकती है । इस लेख में हम आप को बालों का झड़ना एवम् गंजेपन से छुटकारा पाने के घरेलू नुस्खे के बारे में बताने जा रहे हैं ।




झड़ते बाल




व्यक्ति को सुंदर दिखने में बाल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । लोग बालों को झडने से रोकने के लिए और  उगाने के लिए विभिन्न तरह के नुस्खे भी अपनाते हैं। झड़ते बालों से छुटकारा पाने के लिए आर्युवेद में कुछ अचूक घरेलू नुस्खे हैं, इन्हीं के बारे में हम आपको इस लेख में बताने जा रहे हैं 



1. प्याज़ 



प्याज़ को काटकर या कद्दुकस करके बालों में उस  स्थान पर लगाये जहां से बाल  झड़ गए हों ऐसा करने से कुछ ही दिन में फिर से नये बाल उगने लगे गें । प्याज़ गंजे पन का रामबाण इलाज है ।
  

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2. केला




केला का भी  बाल उगाने में प्रयोग किया जाता है, केले की लुगदी बनाकर इसमें नींबू का रस मिला कर बालों पर लगाने से बाल फिर से उगने लगते हैं । केला भी गंजेपन का आर्युवेदिक इलाज है ।



Hair fall




3. उड़द दाल



बाल उगाने के लिए उड़द की दाल का भी उपयोग किया जाता है । उड़द की दाल को रात को उबाल कर रख दे सुबह इसको पीस कर इसका लेप सिर पर लगाएं, कुछ दिन लगाने से बाल दोबारा उगने लगते हैं । यह भी सिर के बाल गिरने का अच्छा इलाज है ।




4. जटामांसी



जटामांसी की जड़ों को नारियल के तेल के साथ उबालकर ठंडा होने के बाद रोज रात को सोने से पहले बालों में लगाएं । इससे असमय बालों का झड़ना रुक जाता है ।




5. नीम की पत्ती



नीम की पत्तियों और आंवले के चूर्ण को पानी में डालकर उबाल कर इस पानी से सिर धोएं । सप्ताह में कम से कम एक बार इस पानी से सिर को अवश्य धोएं । ऐसा करने से कुछ ही समय में बाल झड़ना बंद हो जाते है।  



Ganjapan




6. नारियल दूध



नारियल के दूध को ब्रश की सहायता से सिर पर लगाएं । इसके बाद सिर को तौलिये से ढक दें और करीब 20 मिनट के लिए इसे छोड़ दें । बाद में तौलिये को हटाकर बालों को ठंडे पानी से धो लें व शैंपू कर लेवें ।




7. जैतून तेल




जैतून के तेल को हल्का गर्म करके इसमें  एक चम्मच शहद और एक चम्मच दालचीनी पाउडर मिलाकर इसका पेस्ट बना लें । इस पेस्ट को सिर पर लगा लें । 15 मिनट बाद बाल गुनगुने पानी से सिर को धोये । कुछ ही दिनों में बाल झड़ने की समस्या समाप्त हो जाएगी । बालों को धोने के बाद बालों को अधिक न रगड़े इससे बाल टूटे व झड़ते हैं । बालों को मुलायम  तौलिए से धीमे धीमे पोंछे अथवा हाथों से धीमे धीमे रगड़े, अधिक तेज रगड़ने से बालों के टूटने व झडने का खतरा रहता है ।




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