Tuesday, 6 August 2019

इमली खाने के फायदे जानकर दंग रहे जाएंगे ( Imli khane ke fayde)

इमली का पेड़
इमली का पेड़


इमली के उपयोग ( Imli ke upyog)



इमली खाने के फायदे व स्वास्थ्य लाभ के बारे में जानकारों द्वारा  अच्छी तरह अध्ययन किया गया है, कि यह पूरे शरीर में सूजन को कम करने, दृष्टि में सुधार, श्वसन तंत्र को ठीक करने, त्वचा रोग  को ठीक करने और पाचन तंत्र में सुधार की क्षमता रखता है ।

इमली खाने से हृदय के स्वास्थ्य में सुधार, बवासीर के इलाज और परजीवियों और कृमियों से बचाने के लिए, कोलेस्ट्रॉल को कम करने में फायदा कर सकता है।

इमली का वैज्ञानिक नाम Tamarindus indica L. है। इमली का पेड़ अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों, विशेष रूप से यह सूडान का मूल निवासी है। हालाँकि, इसकी खेती अपने अद्वितीय स्वाद और पौशक्ता के कारण दुनिया के लगभग सभी क्षेत्रों में फैल गई है।

इमली को निम्न नामों से जाना जा है ।

अंग्रेजी    -  Tamarind

संस्कृत    -  अमलिका

गुजराती  -  आंब्ली

हिंदी       -  इमली

बंगाली    -  तेतुला

मराठी   -   चिंच

फारसी  -  तिमिर हिंदी

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इमली के गुण धर्म:


कच्ची इमली  खट्टी, वतनाशक, पितनाशक, काफनाशक, तथा रुधिर विकारों को हरती है ।

पकी इमली गरम, रूखी,  अग्निदीपक, कफ व वात नाशक होती है ।

इमली के बीज प्रमेह नाशक, आमतिसार, व अतिसार में लाभ दायक होती है ।


इमली, इमली के पत्ते
इमली व इमली के पत्ते

इमली खाने के फायदे:


1. अतिसार में इमली के उपयोग (tamarind in hindi):




  • इमली के 10 से 15 पत्ते के रस की की मात्रा को 400 मिली पानी में उबालकर जब चौथा भाग बाकी रह जाय तो इस कवाथ को रोगी को पिलाने से आमतिसर ठीक होता है ।



  • इमली के पत्ते के रस को थोड़ा गरम करके रोगी को पिलाने से भी आमातिसार में लाभ मिलता है ।



  • इमली के बीज की मिंगी का चूर्ण सुबह शाम पानी के साथ फेंकी देने से आमातीसार व अतिसार में फायदा होता है ।



  • पुराने इमली के वृक्ष की जड़ की छल व कालीमिर्च की बराबर मात्रा लेकर दोनो को छाछ के साथ पीस कर मात्र के आकार की गोलियां बना लें ।  इन गोलियों की 1 से 2 नग दिन में तीन बार सेवन करने से आम अतिसार में तुरंत लाभ होता है ।



  • इमली के 12 से 15 ग्राम छिलके तथा 6 ग्राम जीरा व थोड़ी सी ताड़ की शक्कर  लेकर इन तीन को पीस के तीन से चार घंटे के अंतराल पर फेंकी लेने से पुराने से पुराना आमाातिसार ठीक हो जाता है ।



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2. पेट दर्द में इमली के फायदे( imli ke Fayde):



इमली की छाल तथा सेंधा नामक को मिट्टी के बर्तन में रख कर जला लें, इसकी 125  मिली ग्राम मात्रा का सेवन करने से पेट दर्द में फायदा होता है ।


Imli, kachhi imli
इमली



3. बहुमूत्र में इमली के फायदे( Imli ke fayde):



इमली के  बीज की 10 ग्राम मात्रा को सुबह पानी में भिगोकर रख दें, शाम के समय इसका छिलका उतार कर इमली कि मींगी का सेवन कर ऊपर से गए का दूध पीने से बहूमुत्र की समस्या ठीक हो जाती है ।


4. लू के असर में इमली का फायदा(Imli ka Fayda):


  • इमली के फल के गूदे को तंदे जल के साथ पीसकर सिर पर लगाने से लू का असर खत्म हो जाता है । यह प्रयोग अगर मुंडे सिर पर किया जाय तो उत्तम है ।


  • पकी इमली को पानी में मसल कर इस पानी में कपड़ा भिगोकर शरीर को कुछ समय तक पौछने से लू में राहत मिलती है व मूर्छा में भी फायदा होता है ।



5. पित्त विकार में इमली के प्रयोग( Imli ke upyog):



  • इमली के कोमल पत्तियों की सब्जी बनाकर खाने से दह तथा पित्त विकार समाप्त होते है ।

  • इमली व मिश्री का शरबत मिलाकर पीने से  हृदेय की जलन समाप्त होती है ।

  • 25 ग्राम छुआरे व 10 ग्र इमली को एक किलो दूध में उबालकर तथा छानकर पीने से जलन व घबराहट समाप्त होती है ।


6. दाद, फोड़े, फुंसियां में इमली खाने के फायदे( Imli khane ke fayde ):



  • इमली के बीज की पुल्टिस बनाकर फुंसी पर बांधने से  फुंसी ठीक हो जाती हैं ।

  • दस ग्राम इमली के पत्ते की पुल्टिस बनाकर बांधने से फोड़ा पक कर टूट जाता है ।

  • इमली के बीजों को नीबू के रस को पीसकर दाद पर लगाने से दाद दूर होता है ।



Imli, kachchi imli
Kachhi imli



अन्य प्रयोग:



  • इमली को पानी में घोल कर कुल्ला करने से पित्त के कारण हुआ मुंह पाक ठीक हो जाता है ।


  • इमली के फूलों की पुल्टिस आंखों पर बांधने से  आंखो की सूजन उतर जाती है ।


  • दस ग्राम इमली को 150 मिली पानी में भिगो कर, घोल छान कर शक्कर मिलाकर पीने से सिरदर्द में आराम मिलता है ।


  • पकी हुई इमली का पानी बनाकर पीने से आंतों के घाव ठीक होते हैं व भूख बढ़ती है ।


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विशेष प्रयोग:


पुरानी इमली का गूदा एक किलो को दो किलो जल में भिगोकर, अगले दिन सुबह दो तीन उबले देने के बाद नीचे उतार कर थोड़ा ठंडा होने के बाद मसल कर छान लें, फिर इसमें दो किलो खंड मिलाकर चासनी बना लें । इस गरम चासनी को छानकर ठंडा होने के बाद बोतल में भरकर फ्रिज में रख दें । इस चासनी की 10 से 40 ग्राम मात्रा तीन तीन घंटे बाद सेवन करने से  उल्टी, पित्त, लू, अजीर्ण, तृष्णा, मंदाग्नि व शराब का नशा दूर होता है । इस लेख में इमली खाने के फायदे का वर्णन किया गया है, आशा करते हैं कि यह लेख आपको पसंद आया होगा ।

धन्यवाद ।


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Wednesday, 17 July 2019

जामुन के गुण, 8 फायदे, उपयोग तथा हानियां ( Jambul in hindi)

Jamun ka ped
जामुन का पेड़


जामुन का परिचय:


जामुन को जम्बु फल के नाम से भी जाना जाता है । जामुन का पेड़ अथवा वृक्ष से सभी लोग परिचित होंगे, इसका पेड़ हमेशा हरा रहने वाला अधिकतम 100 फिट ऊंचा व 12 फिट गोलाई तक का होता है । जामुन के फूल हरा रंग लिए सफेद रंग खुशबू दार होते है । इसके पेड़ पर अप्रैल से जून तक फूल आते हैं व जून जुलाई में फल लगते है । जामुन के बीज में  एक उड़नशील तेल, क्लोरोफिल, वसा, राल, एल्ब्यूमिन आदि तत्व पाए जाते है । जामुन की गुठली में मधुमेह निवारक तत्व पाए जाते है । जामुन की छाल में टेनीन नमक पदार्थ पाया जाता है जो कि 12 प्रतिशत होता है तथा एक गोंद भी पाया जाता है ।

जामुन के सभी अंग जामुन के पत्ते, जामुन की लकड़ी, जामुन की छाल, जामुन के फल का गूदा, जामुन की गुठली, आदि सभी औषधीय कामो में उपयोग किए जाते हैं । जामुन का सिरका भी बनाया जाता है ।

जामुन को अंग्रेजी में Jambul, jaman के नाम से जाना जाता है, इसे मराठी में जांभूल, संस्कृत में जंबू, व बंगाली में कलाजाम कहते हैं।


जामुन के गुण (jamun ke gun):


जामुन फल अग्निवर्धक, पितशामक, स्तंभन, पाचन तथा लिवर को उत्तेजित करने वाला होता है । जामुन वातवर्धक भी होता है । जामुन की गिरी पाचन शक्ति को बढ़ाती है साथ ही यह रक्त एवम् मूत्र में उपस्थित शर्करा को नियंत्रित करती है । इसके अलवा जामुन का उपयोग मधुमेह, दांत के रोग, बवसीर, अतिसार, मुंह के छाले, पथरी रक्तपित्त आदि रोगों में किया जाता है ।


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जामुन के औषधीय फायदे (Jamun ke aushdhiye fayde):



1. मधुमेह में जामुन का फायदे (Jamun ke fayde):


  • जामुन के बीज का चूर्ण 300  मिली ग्राम से एक ग्राम तक दिन में तीन बार लेने से मूत्र में शक्कर का आना बंद हो जाता है ।


  • जामुन की जड़ सौ ग्राम जड़ को 250 ग्राम पानी में पीस कर इसमें 20 ग्राम मिश्री डालकर सुबह शाम भोजन से पहले सेवन करने से मधुमेह में फायदा होता है ।


  • पुष्ट जामुन पके हुए 250 ग्राम को उबलते हुए पानी में डालकर कुछ देर के लिए उबालें, इसे उतार कर ठंडा करें, फिर फलों को मसलकर कप्पड़ छान कर दीं में तीन बार सेवन करने से मधुमेह में फायदा होता है ।


  • जामुन के छाल की राख की 2 से 3 ग्राम की मात्रा का दिन में तीन बार सेवन करने से पेशाब में शक्कर आना रुक जाती है । यह मधुमेह के लिए एक अच्छी औषधि है ।

Jamun tree
Jamun 


2. दांत रोग में जामुन के फायदे (Jamun ke fayde):



  • जामुन के पत्ते की राख बनाकर दांतों व मसूड़ों पर रगड़ने से  फायदा होता है । व दांत मजबूत होते हैं ।


  • पके हुए जामुन के रस को मुंह में भर कर कुल्ला करने से दांतों का पायरिया ठीक हो जाता है ।



3. अर्श में जामुन का उपयोग (Jamun ka upyog ):



  • दस ग्राम जामुन के पत्ते को दो सौ पचास ग्राम गए के दूध में में घोटकर दिन में तीन बार सत दिन तक पीने से  अर्श में फायदा होता है ।


  • इसकी कोमल कोपलों के रस की बीस ग्राम मात्रा में थोड़ी सी शक्कर मिलाकर सेवन करने से अर्श में रक्त का आना रुक जाता है ।


4. पथरी में जामुन के फायदे ( Jamun ke fayde):



  • पके हुए जामुन लगातार कुछ दी खाने से गुर्दे की पथरी गलकर बाहर निकल जाती है ।


  • जामुन के 10 से 15 पत्तों का कल्क बनाकर इसमें 2 से 3 कालीमिर्च का चूर्ण छिड़क सुबह शाम कुछ दी सेवन करने से पथरी के टुकड़े होकर मूत्र द्वारा बाहर निकाल जाते हैं ।


  • जामुन के फल के दस ग्राम रस में 250 मिली ग्राम सेंधा नमक  मिलाकर दिन में दो बार लगातार कुछ दी सेवन करने से  गुर्दे की पथरी मूत्र मार्ग से बाहर हो जाती है । पथरी का यह असर दायक प्रयोग है ।

जामुन फल
जामुन


5. दस्त में जामुन के प्रयोग (Jamun ke prayog):



  • जामुन की गुठली खाने से दस्त में आराम मिलता है । आम की गुठली व कली हरड़ को बराबर मात्रा में भून कर खाने से दस्त में लाभ मिलता है ।


  • इसके ताजे कोमल पत्ते के रस के पांच से दस ग्राम रस में 10 ग्राम बकरी का दूध मिलाकर सेवन करने से अतिसार तथा आम वात में फायदा होता है ।


6. यकृत विकारों को दूर करता है जामुन:


जामुन के दस ग्राम सिरका रोज खाने से यकृत व तिल्ली की वृद्धि में फायदा होता है । यह फल सौम्य होता है, इसमें लोहे के अंश पाए जाते हैं जो शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है।


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7. मुंह के छाले में जामुन का उपयोग (Jamun ka upyog):


जामुन के 5 से 6 ताजा पत्ते जो मुलायम हों को पीस कर इसमें पानी मिलाकर कुल्ला करने से मुंह के भयंकर से भयंकर छाले भी ठीक हो जाते हैं ।


Jamun ka fal


8. जामुन खाने के नुकसान (Jamun khane se hania):



जामुन का पाचन देर से होता है । इस फल को खाने से पेट व फेफड़ों को हानियां होती हैं । यह कफ को बढ़ाता है।  इससे फेफड़ों में वायु भर जाती है । इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से भुखार आने की संभावना रहती है ।
जामुन को जब भी खाएं तो नमक मिलकर ही खाएं ।


विशेष:


हृदेय की धड़कन को सामान्य करने के लिए जामुन के फल का प्रयोग किया जाता है । इसे खाने से रक्त विकार दूर होकर फॉडे फुंसियां निकलना बंद हो जाते हैं । जामुन पित्त तथा अतिसार संबंधित रोग नष्ट होते है । जामुन गले के लिए बहुत फायदेमंद होता है, इससे गला साफ होता है । जामुन का शरबत पीने से उल्टी, दस्त, तथा बवासीर में लाभ मिलता है । तंग जुता पहनने से अथवा जुता काटने से पैर में जख्म हो जाता है तो जामुन की गुठली को पीस कर पैर में लगने से घाव भर जाता है ।

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Sunday, 23 June 2019

करी पत्ता के 11 जबरदस्त फायदे , बढ़ सकती है आंखों की रोशनी ( Kadi patta Ke Fayde)

kari patta ka ped
Kadi patte ka ped


करी पत्ता के फायदे, (Curry patta ke fayde)



करी पत्ता (Curry Patta), जिसे ज्यादातर कडी पत्ती (Kadi Patta) के रूप में जाना जाता है, का व्यापक रूप से भारतीय पाक कला में उपयोग किया जाता है । इन सुगंधित पत्तियों से न केवल खाने में सुगंध आती है, बल्कि ये अनेक स्वास्थ्य लाभ से भरी होती हैं। करी पत्ते के बारे में हम में से अधिकांश इनहे सुगंधित पत्तियों के उपयोग को जानते हैं; हालाँकि, ये पत्ते सदियों से अपने औषधीय गुणों के लिए उपयोग में आते हैं। करी पत्ते का उपयोग भारतीय घरों में खाने मसालों के रूप में सब्ज़ियों में प्रयोग किया जाता है । जो हमारे स्वास्थ के लिए काफी फायदेमंद होते हैं । इसका का प्रयोग खाने के स्वाद को बढ़ाने के लिए किया जाता है और इस करी पत्ते को मीठी नीम के नाम से भी जाना जाता है । इस लेख में आप को बताने जा रहे हैं कि करी पत्ता उपयोग करने के क्या फायदे हैं ।

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1. करी पत्ते का उपयोग बालों के लिए (curry curta for hair in hindi)



सब पहले आपको बता दें कि की करी पत्तियों के सेवन से हमारे बालों को काफी फायदा मिलता है | करी पत्ता पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जिसमें विटामिन, कैल्शियम और फास्फोरस प्रचुर मात्रा में पाया जाता है । जिसका प्रतिदिन सेवन से बालों को लम्बा, काला और घना बनाने में किया जा सकता है, और इसका पेस्ट बना कर अपने बालों की जड़ों पर लगा सकते हैं, साथ ही इसके के प्रयोग से डैंड्रफ भी दूर हो जाता है ।



kari Leavs
Kurry patta


2.  करीपत्ता का उच्च रक्त चाप में उपयोग ( kari patte ka upyog)


जिनको उच्च रक्तचाप की समस्या होती है, वह लोग अगर हर दिन करी पत्ते के चार पांच पत्ते सुबह के समय चबा कर खाएगें तो उन्हें उच्च रक्त से फायदा मिल सकता है।


3. करी पत्ते का पेट रोग में उपयोग ( Curry patte ka upyog)



जिन लोगों को दस्त की समस्या हो जाती है उनके लिए भी करी पत्ता काफी लाभदायक होता है । करी पत्ते की कुछ पत्ती पानी में उबालकर उस पानी को पी लेने से दस्त के रोगी को तुरंत लाभ मिल जाता है ।




4. आंखों में करी पत्ते के फायदे (Curry patte ke fayde)


अगर किसी की आँखों की रोशनी कम हो रही है या हो चुकी है उनके लिए करी पत्ता बहुत फायदेमंद होता है । करी पत्ते को धूप में सूखा कर उसका चूर्ण बना लें, और फिर हर रोज़ उसे पानी के साथ फांकी लेने से आँखों की रौशनी भी बड जाती है । रतौंधी के रोग में भी आराम मिलता है ।



5. करीपत्ता वजन को नियंत्रित कर सकता है ( Curry patta for weight los in hindi)



यहां करी पत्ते के कुछ लाभ या स्वास्थ्य लाभ हैं । करी पत्ता वजन कम करने में मदद करता है। अतिरिक्त वजन ये पत्तियां आपको पतला करने के लिए दो तरह से काम करती हैं। सबसे पहले, ये पत्ते शरीर को विषाक्त पदार्थों से छुटकारा पाने में मदद करते हैं और दूसरी बात यह है कि यह शरीर की जमीं हुए वसा को जलाने में मदद करते हैं।



6. कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता है करी पत्ता:


केलेस्टेरल के स्तर को कम करने में मदद करता है । कोलेस्ट्रॉल  के ऑक्सीकरण से एलडीएल (कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन) या शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल का निर्माण होता है । हालांकि, करी पत्ते, जो एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर हैं, कोलेस्ट्रॉल के ऑक्सीकरण को कम करने में मदद करते हैं। इस तरह खराब कोलेस्ट्रॉल या एलडीएल का स्तर नियंत्रित या कम हो जाता है।


7. मधुमेह में फायदा करता है करी पत्ता ( kurry patta ke fayde)



एक सर्वे में पाया गया है कि मधुमेह को नियंत्रित रखने में सहायता करता है । नियमित रूप से करी पत्तों का सेवन इंसुलिन उत्पादक कोशिकाओं को उत्तेजित करने में मदद करता है। ये कोशिकाएं रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रण में रखने में सहायता करती हैं ।


8.  गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्वास्थ्य को बनाए रखने में करी पत्ता के फायदे:



पाचन से परेशान हो रहे रहे हैं, तो करी पत्ते फायदेमंद साबित हो सकते हैं। करी पत्ते में मौजूद पाचक एंजाइम पाचन स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में सहायक होते हैं, और रेचक गुण आंत्रों को नियंत्रित करने में असरकारक होते हैं। अगर आप पेट में दर्द, गैस या दस्त जैसी परेशानियों से जूझ रहे हैं, तो करी पत्ता का प्रयोग करें।



9. तनाव कम करने में फायदा करता है:



हममें से अधिकांश लोग तनाव में रहते हैं, लेकिन हमारी व्यस्त जीवनशैली में इससे बचना मुश्किल हो जाता है। तनाव प्रमुख रोगों को जन्म दे सकता है, और ये पत्ते आपको तनाव को नियंत्रित करने में भी मदद कर सकते हैं। इन पत्तियों की सुगंध आपके मन और शरीर को शांत करके तनाव के लक्षणों को दूर करने में सहायता करती है।



कड़ी पत्ता
करी पत्ते



 10. आंखों की सेहत सुधारने में फायदा (Curry patta ke fayde):



विटामिन ए आपकी आंखों के लिए आवश्यक विटामिनों में से एक है। करी पत्ते इस विटामिन के साथ भरी हुई हैं और इस प्रकार अपने दैनिक आहार में इन पत्तियों को खाने से आपकी आंखों को स्वस्थ स्थिति में रखने में फायदा मिल सकता है।


11. नाक और छाती के रोग में फायदा



करी पत्ते विटामिन ए और सी से भरपूर होते हैं, और इन पत्तियों में जीवाणुरोधी, एंटीफंगल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं, जो कंजेशन, साइनसाइटिस,  खांसी और सर्दी के लक्षणों को कम करने में सहायक होते हैं।


दोस्तों आपको करीपत्ता के फायदे से संबंधित जानकारी कैसी लगी ? कृपया हमें कमेंट करके बताएं । लेख अच्छा लगा हो तो इसे ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें । अच्छे अच्छे स्वास्थ संबंधित जानकारी के बारे में पढ़ने के लिए हमें अवश्य फोलो करें -   Rand know desi health

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Monday, 10 June 2019

अनानास खाने के 8 फायदे एवम् नुकसान ( Ananas khane ke 8 fayde evam Nuksan)

Pineapple, Ananas,
Ananas


अनानास के फायदे (Pine apple benefit in hindi):




लेख में अनानास के फायदे व नुकसान के बारे में वर्णन करने जा रहे हैं । अनानास लगभग पूरे भारतवर्ष में पाया जाता है । मूलतः यह ब्राजील का आदिवासी पौधा है । भारत में इसकी खेती आसाम, बंगाल व समुद्रतटीय प्रदेशों में अधिक मात्रा में की जाती है । अनानास 2 फिट ऊंचा शकीय पौधा होता है । पौधे के शीर्ष मध्य भाग में  फल निकलता है जिसके मूल में पत्तों का पुंज होता है । इसका फल पककर नारंगी पीले रंग की हो जाता है । अनानास का पेड़ केवड़े या एलोवेरा से जैसे दिखते हैं । अनानास के पौधे के बीचोबीच एक छोटा कांड निकलता है, जो चारो तरफ से पत्तों के गुच्छों से ढका होता है । अनानास में ब्रोमोलिन्न नामक एक तत्व पाया जाता है जो हाजमे को मजबूत करता है । अनानास के फल के रस में अम्ल, शर्करा, विटामिन्स A तथा C पाए जाते हैं । इसमें दूध को जमाने वाला एक तत्व भी पाया जाता है ।

अनानास का वैज्ञानिक नाम Ananas comosus है, इसे इंग्लिश में pineapple कहते हैं । व हिंदी में अनानास एवम् संस्कृत में बहुनेत्र के नाम से जाना जाता है ।


Ananas ka ped, Ananas ka Paudha, Ananas ke patte
Ananas ka ped



अनानास के औषधीय गुण (Ananas ke aushdhiye gun):



अनानास के कच्चे फल के स्वरस में गर्भाशय उत्तेजक, व गर्भपात तत्व पाया जाता है । यह वात पित्त शामक, रेचन, अनमोल, दीपन, मुत्रल, रक्तपित्त शामक होता है ।

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1. मधुमेह में अनानास के जूस के फायदे ( Ananas ke juice ke fayde):



अनानास मधुमेह के लिए बहुत ही उपयोगी होता है । अनानास के सौ ग्राम रस में 10-10  ग्राम हरड़, बहेड़ा, आमला, तिल, गोखरू, तथा जामुन के बीज मिलाकर, सुखाकर इसके चूर्ण बना लें, इस चूर्ण की 3 ग्राम मात्रा सुबह शाम सेवन करने से मधुमेह व बहुमुत्र के रोगी को लाभ होता है, इसमें दूध चावल खाना फायदेमंद होता है, व नमक, खटाई, व लालमिर्च से परहेज़ करना है ।


2. पेट रोग में अनानास के जूस के फायदे (Ananas ke juce ke fayde):



  • अनानास के रस में इसकी आधी मात्रा में गुड़ मिलाकर सेवन करने से उदर में उपस्थित वात नश्ट हो जाता है, अगर पेट में बाल चला जाए तो अनानास का रस पीने से बाल गलकर शरीर से बाहर निकाल जाता है ।


  • परिपक्व अनानास के दस ग्राम रस में 125 मिली हिंग तथा सेंधा नमक 250 मिली, अदरक का रस 250 मिली, मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से पेट दर्द व गुल्म रोग में फायदा होता है ।


अनानास
अनानास



3. श्वास रोग में अनानास जूस के  फायदे ( pineapple juice fayde hindi):




  • अनानास के दस ग्राम पके हुए फल के  रस में पीपल की जड़, सौंठ व बहेडे का चूर्ण दो - दो ग्राम  तथा सुहागा भुना हुआ व शहद  मिलाकर उपयोग करने से श्वास रोग में जबरदस्त लाभ होता है ।

  • अनानास के जूस में बहेड़ा, मुलेठी व मिश्री मिलाकर सेवन करने से श्वास रोग में फायदा होता है ।

  • अनानास के फल के जूस में छोटी कटोरी की जड़, जीराआंवला की बराबर मात्रा का चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से श्वास रोग में लाभ होता है ।


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4. अजीर्ण( बदहजमी) में अनानास (Ananas ke fayde):




  • अनानास के फल के छोटे टुकड़े कर के इसमें सेंधा नमक व कालीमिर्च मिलाकर सेवन करने से अजीर्ण में फायदा होता है ।


  • भोजन करने के बाद यदि पेट फूल जाय तो  अनानास के के 20 से 25 ग्राम रस का सेवन करने से गैस बाहर निकाल जाती है व आराम मिलता है ।


  • अनानास के पके फल के सौ ग्राम रस में 1 से 2 नग दाख एवम् 125 मिली सेंधा नामक मिलकर सेवन करने से बदहजमी दूर होता है ।



5. मासिक धर्म की रुकावट में अनानास के उपयोग (Ananas ke upyog):




  • अनानास के कच्चे फल के रस में पीपल की छाल का चूर्ण एक ग्राम व गुड़ एक ग्राम मिलकर सेवन करने से मसिकधर्म की रुकावट ठीक होती है ।


  • अनानास के पत्ते का काढ़ा 40 से 50 मिली पीने से भी रुकावट दूर हो जाती है ।


6. पीलिया में अनानास के लाभ  (Ananas ke labh):


अनानास के पके फल का 10 ग्राम रस में 2 ग्राम हल्दी व 3 ग्राम मिश्री मिलाकर रोगी को देने से कमला के रोग में फायदा होता है ।


अनानास, अनानास फल
अनानास( Pineapple )


7. पित्त में अनानास का फायदा  (Ananas ka fayda):



  • अनानास का मुरब्बा बनाकर खाने से पित्त रोग में लाभ मिलता है । अनानास का मुरब्बा बनाने के लिए  इसके छोटे छोटे टुकड़े कर चुने के पानी में एक दी रख कर सूखा लें, जब ये सूख जाए तो  इसमें शक्कर की चासनी डाल कर मुरब्बा बना लें ।


  • अनानास का शरबत भी पित रोग को शांत करता है । अनानास का शरबत बनाने के लिए एक बैग अनानास का रस व दो भाग चासनी मिलाकर तैयार किया जाता है । अनानास के शरबत से दिल को भी ब्ल मिलता है ।



8. कृमि रोग में अनानास के फायदे ( Ananas ke Fayde):



  • अनानास के पत्ते के रस में शहद मिलाकर इसकी 3 से 10 ग्राम मात्रा प्रतिदिन सेवन करने से कृमि नष्ट हो जाते हैं ।


  • अनानास के पके फल के रस में खुरासनी अजवाइन, छुआरा का चूर्ण मिलाकर थोड़े से शाद के साथ मिलाकर  लगभग 5 से 10 ग्राम की मात्रा चता देने से बच्चों का किमी रोग दूर हो जाता है ।


अनानास के नुकसान ( Ananas ke Nuksan):

अनानास का प्रयोग अत्यधिक नहीं करना चाहिए, इसकी अधिकता से कंठ में नुकसान पहुंचता है व गले में खराश हो जाती है । अनानास के साइड इफेक्ट को दूर करने के लिए चीनी, नींबू, व अदरक के रस का सेवन फायदा करता है ।

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Sunday, 26 May 2019

अजमोद के गुण फायदे तथा उपयोग ( celery in hindi)

Ajmod plant
Ajmod ka paodha


अजमोद का पेड़ कैसा होता है (Ajmod ka ped kaisa hota he )


अजमोद के पौधे अजवाइन की तरह के 1 से 3 फिट ऊंचे होते है, अजमोद के पत्ते के किनारे कटे होते है, इस लेख में आपको अजमोद के गुण फायदे उपयोग एवम् देसी नुस्खों के बारे में बताने जा रहे हैं । अजमोद के बीज अजवाइन से मिलते जुलते होते हैं । इसके फूल सफेद रंग के छोटे छोटे छत्री के आकार के होते हैं । भारत में लगभग सभी जगह पाया जाता है । इसकी खेती विशेष रूप से बंगाल में सर्दियों में शुरू हो जाती है । अजमोद में कपूर जैसा एक पदार्थ पाया जाता है । इसके अलावा इसमें गंधक, उदंशील तेल, लवण, छार, लुआब, व गोंद आदि पाए जाते हैं ।

अजमोद को अंग्रेजी में  Celery seeds  व संस्कृत में अजमोदा, मराठी में ओमादा, व पंजाबी में अजमुद तथा बंगाली में आजमूद के नाम से जाना जाता है ।

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अजमोद के घरेलू नुस्खे (Ajmoda ke ghrelu nuskhe):



1. पेट दर्द में अजमोद का फायदा (Ajmod ke fayde):



  • इसकी 3 ग्राम मात्रा व 1 ग्राम काला नमक मिलाकर इसकी फंकी देने से पेट दर्द में आराम मिलता है ।


  • इसके तेल की 2 से 3 बूंदे, एक ग्राम सौंठ के चूर्ण को गरम पानी के साथ सेवन करने से पेट दर्द में आराम मिलता है ।


Celery seed in hindi
Ajmoda


2. उल्टी में अजमोदा के उपयोग (Ulti me ajmoda ke upyog )


  • कुछ औषधियों का स्वाद अच्छा नहीं होता है, उन औषधियों के साथ 2 से 5 ग्राम ajmod का चूर्ण सेवन करने से वमन( उल्टी) कि संभावना नहीं रहती है ।


  • उल्टी हो रही हो तो 2 से 5 ग्राम अजमोद के चूर्ण व 2-3 लौंग की कली मिलाकर पीस कर एक चम्मच शहद के साथ सेवन करने से वमन रुक जाती है ।

3. अर्श में फायदा करता है अजमोदा (Ajmod me fayda krta he ajmod) : 



Ajmod को कपड़े में बांध कर गरम करके सिकाई करने से अर्श में फायदा होता है ।


4. मूत्र विकार में अजमोदा के लाभ (Ajmoda ke labh) : 


अजमोद की जड़ का 2 से 5 ग्राम चूर्ण  सुबह शाम लेने से मूत्र विकार में फायदा होता है ।


5. अफारा मेंअजमोद के उपयोग ( Afara men ajmod ke upyog)



इसके 3 से 5 ग्राम चूर्ण को 10 ग्राम गुड़ के साथ सेवन करने से अफ़ारे में लाभ मिलता है ।


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6. हिचकी में फायदा (Ajmod ke fayde): 


अगर खाना खाने के बाद हिचकी आती हो तो इसके 10 से 15 दने मुंह में रखने से हिचकी रुक जाती  है ।


अजमोद के फूल
Ajmod ke phool


7. सूखी खांसी में उपयोग (ajmod ke upyog):  


Ajmod की थोड़ी सी मात्रा पान में डाल कर खाने से सूखी खांसी में लाभ होता है ।


8. श्वास में फायदा (Ajmod ke fayde): 


अजमोद श्वास में बहुत ही फायदे मंद है, यह उत्तेजक व बाल वर्धक होता है ।श्वास रोग में इसका उपयोग किया जाता है । इसकी 3 से 6 ग्राम मात्रा दिन में तीन बार सेवन करने से श्वास रोग में लाभ मिलता है ।


9. मस्तिष्क में अजमोदा के लाभ (Ajmod ke labh) : 


अजमोद मस्तिष्क व वातनाडियों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। अजमोद की जड़ की की कॉफी बनाकर पीने से लाभ होता है ।


अजमोद
अजमोद


10. बदन दर्द में लाभ (Ajmod ke labh): 



शरीर में दर्द व सूजन होने पर अजमोद की जड़ का क्वाथ दिन में दो तीन बार सेवन करने से फायदा होता है ।


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विशेष:



इस लेख में आप को अजमोद के औषधीय प्रयोग के बारे में बताया गया है, यह कुछ विशेष तरह के रोगियों को नुकसान भी कर सकता है, Ajmod खाने के बाद छाती में जलन पैदा करता है, इस लिए गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए । अप्समार के मरीजों का इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए । पूरे शरीर की पीड़ा के लिए बहुत उपयोगी होता है, अजमोद के तेल को उबालकर शरीर की मालिश करने से अत्यंत अधिक लाभ होता है । घरेलू नुस्खों से संबंधित और अधिक जानकारी के लिए इस वेबसाइट  पर क्लिक करें ।




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Tuesday, 14 May 2019

आम के 5 औषधीय उपयोग, फायदे एवम् नुकसान ( benefit of mango in hindi)

आम का पेड़
आम वृक्ष


आम के प्रयोग ( Aam ke prayog)


भारत में आम की पैदावार बहुत होती है, यह ग्रीष्म ऋतु का फल है । देश, आकर, रंग, रूप के अनुसार इसकी अनेक जातियां पाई जाती हैं, देशी आम में रेशा अधिक होता है, इस लिए इसे चूस कर खाया जाता है, जबकि कल्मी आम काफी गूदे दार होता है, इसे काट कर खाया जाता है, कच्चे आम का प्रयोग, आम की चासनी व आम का पना, व अचार बनाने के काम आता है । और पके आम का प्रयोग खाने में एवम् मेंगोशेक के रूप में किया जाता है । औषधीय प्रयोग में कलमी आम की अपेक्षा देसी आम यानि चूसने वाले बीजू आम का प्रयोग अधिक लाभकारी होता है ।

आम का वैज्ञानिक नाम Mangifera idica L. है, अंग्रेजी में इसे Mango  के नाम से जाना जाता है । इसे गुजरती में आंबों, बंगाली में आम्र अरबी में अंबज, पंजाबी में आंब कहते हैं ।


आम के गुण(Aam ke gun):



आम अनेक गुणों से भरपूर होता है आम के फल में अनेक विटामिन्स व मिनरल पाए जाते हैं । इसमें विटामिन ए, बी, व सी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। आम के फल की मज्जा रक्त शोधक, स्तंभन, कफ पित्त शामक, कच्चा आम  त्रिदोष कारक, पका आम वात पित्त शामक होता है । आम का बौर अर्थात आम का फूल दीपक, मलरोधक, वातकारक, शीतल, पित्त व कफ नाशक होता है । आम की जड़ रूचिकारक, कसैली, मालरोधक, वात पित्त व कफ का नाश करती है । आम की गुठली उल्टी, दस्त, हृदय के दर्द को दूर करती है । आम की गुठली का तेल रुख कड़वा तथा कसैला होता है, यह कफ व वात का नाश करता है ।



1. अतिसार में आम के फायदे (Aam ke fayde):


  • आम का गौंद व आम की गुठली की गिरी की बराबर मात्रा को मिलाकर इसकी एक ग्राम मात्रा एक दिन में दो तीन ग्राम सेवन करने से अतिसार में फायदा होता है ।

  • आम की गुठली की गिरी, बेलगीरी तथा मिश्री तीनो की बराबर लेकर चूर्ण बना लें,  इस चूर्ण की 3 से 6 ग्राम मात्रा पानी के साथ सेवन करने से अतिसार मिटता है ।


  • आम की गिरी की पांच ग्राम मात्रा सौ गरम जल में उबाल कर इसमें इतनी ही मात्रा में और गिरी मिलाकर पीस लें, इसका प्रयोग दिन में तीन बार दही के साथ सेवन करने से अतिसार में फायदा होता है।


  • आम की ताज़ी छाल को दही के पानी के साथ पीसकर पेट पर लगाने से लाभ होता है ।

Mango in hindi
Aam



2. लिवर की कमजोरी में आम का फायदा ( Amm ka fayda): 



यकृत कमजोर हो गया हो और इस कारण से भूख लगना बंद हो जाए, पतले दस्त होते हों, तो आम के पत्ते सूखे हुए 6 ग्राम को एक पाव जल में उबालें, जब आधा बाकी रह जाए तो इसे छान लेवें, प्रातः काल इसका सेवन दूध में मिलाकर पीने से फायदा होता है।



3. आम का तेल केश कल्प का काम करता है( Aam ka kesh kulp):



आम की गुठली का तेल सिर पर लगाने से सफेद बाल काले हो जाते हैं एवम् काले बाल जल्दी सफेद नहीं होते हैं । इससे बालों का जश्न भी बंद हो जाता है व रूसी की समस्या से भी निजात मिल जाती है ।


4. मधुमेह में आप के पत्ते के फायदे (Amm ke patte ke fayde):



छाया में सूखे आम के पत्ते एक ग्राम को आधा किलो पानी में उबालें, जब इसकी अधी मात्रा एक चौथाई रह जाए तो इस जल को छान कर सुबह शाम पीने से मधुमेह में लाभ होता है ।


5. हिचकी रोकने में कारगर हैं आम के पत्ते (Amm ke patte):



आम के पत्ते तथा धनिया दोनो को कूट कर इसकी 2 से 4 ग्राम मात्रा गुनगुने जल के साथ दिन में 2 से 3 बार  सेवन करने से हिचकी एक दम रुक जाती है ।


Mango tree in hindi
aam ka ped


आम के अन्य देसी घरेलू नुस्खे (Amm ke desi nuskhe):



  • आम की गोंद को बिवाई पर लगाने से बिवाई ठीक हो जाती है ।


  • आम के फूलों का नस्य लेने से नकसीर में फायदा होता है ।


  • आम के फल की छाल व पत्तों की बराबर मात्रा पीस कर मुंह में रखने से दांत व मसूड़े रोग रहित व मजबूत हो जाते हैं ।


  • आम के कोमल पत्ते व कालीमिर्च दोनो को पानी के साथ पीस कर गोलियां बनाकर रखे, भयंकर उल्टी दस्त भी इससे बंद हो जाते हैं ।


  • आम के फूल का काढ़ा या चूर्ण में एक चौथाई भाग मिश्री मिलाकर सेवन करने से पेचिस, प्रमेह, व जलन और पित्त के साइड इफेक्ट कम हो जाते हैं ।


  • 10 से 20 ग्राम आम के फूलों के रस में दस ग्राम खांड मिलाकर प्रयोग करने से पित्तविकर व प्रदर मिटता है ।


  • आम के फूलों के चूर्ण लगभग 10 ग्राम को दूध के साथ सेवन करने से काम शक्ति में वृद्धि होती है ।


  • ऐसा माना गया है कि आम में मक्खन से ज्यादा पोषक तत्व होते हैं, आम काप्रयोग उचित तरीके से करने से स्नायु तंत्र मजबूत होता है व शक्ति में वृद्धि होती है ।


  • आम के कल्प का सेवन करने से बहुत से रोगों में लाभ होता है । जिन लोगो को पुराना अतिसार, संग्रहनी, मंदाग्नि, अजीर्ण, वायुगोला, नसों में सूजन, वात व पित का निरंतर प्रकोप, कमजोर हृदय व कमजोर मस्तिष्क हो तो ऐसे व्यक्ति को आम के कल्प का सेवन करना चाहिए ।





  • आम के पत्ते की चाय - आम के दस पत्ते जो पेड़ पर पाक के पीले हो गए हों, को एक ली. पानी में एक दो इलायची डाल के पकाएं, जब पानी आधा बाकी रह जाए तो इसे उतार कर इसमें दूध व शक्कर डाल कर पिए, यह चाय पूरे शरीर को शक्ति देती है ।


  • आम वृक्ष का गोंद थोड़ा ग्राम करके फूड पर लगाने से  फोड़ा पककर फुट जाता है, और घाव आसानी से ठीक हो जाता है ।


  • आम की गुठली को जल के साथ पीसकर लगाने से बर, मधुमक्खी, बिच्छू, ततैया, मकोड़े आदि विशेले कीड़ों का दंश उतार जाता है ।


कच्चे आम
कच्चे आम


आम के अधिक खाने से नुकसान (Aam ke sevan se nuksan):



आम के कच्छे फल अधिक खाने से मदग्नी, रक्त विकार व नेत्ररोग आदि हो सकते हैं । आम के अधिक खाने से पाचन शक्ति खराब हो सकती है, अगर ऐसा हो तो ऊपर से दो तीन जामुन खा लें । जामुन न होने पर एक चुती नमक व पिसी सौंठ खा लें । आम का अधिक सेवन यकृत को नुकसान पहुंचता है, यकृत के रोगी को आम नहीं खाना चाहिए । आम खाने बाद ऊपर से पानी पीना नुकसान दायक हो सकता है, आम सेवन के बाद दूध पीना फायदेमंद होता है ।

इसी तरह के हैल्थ से संबंधित देसी नुस्खों को जानने के लिए Read more पर क्लिक करें ।


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Friday, 26 April 2019

लौंग के फायदे एवम् उपयोग (Laung ke Fayde evam Upyog)

Laung ke phool
लौंग के फूल

लौंग का परिचय:

इस लेख में आपको लौंग के फायदे एवम् उपयोग के बारे में बताने जा रहे हैं । लौंग की उत्पत्ति का मूल स्थान मलक्का द्वीप कहलाता है । लेकिन इसकी पैदावार भारत में दक्षिण भारत में केरल व तमिलनाडु में की जाती है । इसकी फूल व कलियां जब सूख जाती हैं तो इसको बाजार में लौंग के नाम से बेचा जाता है । लौंग के फूल बैंगनी रंग के व खुशबूदार होते हैं । लौंग को लवंग के नाम से भी जाना जाता है । आम तौर से लौंग का उपयोग मसाले के रूप में किया जाता है लेकिन इस लेख में आपको लौंग के फायदे व उपयोग के बारे में बताने जा रहे हैं ।

लौंग का वैज्ञानिक नाम है  syzygium aromaticum है ।  इसको छेत्र के अनुसार अलग  अलग नामों से जाना जाता है ।


Laung in english : Clove

संस्कृत : लवंड, देवकुसुम

हिंदी    : लौंग, लवंग

तेलगु   : कारावल्लू

बंगाली : लवंग

गुजरती: लवंग



लौंग के गुण (Cloves in hindi):



1. लौंग नेत्र के लिए लाभ दायक, कड़वी, ठंडी, चरपरी, रूचिकारक, पाचक, होती है ।

2.यह प्यास, वमन, पित्त, अफरा, श्वास, हिचकी, आदि रोगों को समाप्त करती है ।

3. लौंग का तेल वातनशक,अग्निवर्धक, कफ तथा दांत के दर्द का नाश करती है ।

4. लौंग खाने से भूख बढ़ती है, आमाशय की क्रियाशीलता को बढ़ाकर भोजन में रुचि उत्पन्न करता है ।

5. लौंग पेशाब खुलकर लाती है ।

6. लौंग मुंह की दुर्गं दूर करती है, व इसका तेल शरीर की दुर्गन्ध व दर्द को दूर करती है ।

7. लौंग पेट के कृमि को नष्ट करत है ।

8. यह चेतन शक्ति को जागृत करती है।

लौंग
लौंग



लौंग के औषधीय प्रयोग (Laung ke aushdhiye prayog):



1. कफ में लौंग के उपयोग (Kuf men Laung ke Upyog):


दो ग्राम लौंग को कूट कर इसको 125 मिली. पानी में उबाल लें, जब चौथा बहाग बाकी रह जाए  तो इसे आग से उतर कर छान लेवें, और इसको गरम ही पी लेवें । यह कफ निकालने की उत्तम औषधि है।



2. दमा में लौंग के फायदे (Dama me Laung Ke Fayde):



लौंग, आंकड़े के फूल तथा काला नमक बराबर मात्र में लेकर, चने के बराबर गोली बनाकर चूसने से दमा व श्वास नली के रोग दूर होते हैं ।


3. पेट के रोग में लौंग के फायदे (Laung Ke Fayde):


  • खट्टे दाकर हों अथवा बदहजमी हो तो लौंग , सौंठ, मिर्च पीपल अजवायन सभी की 10 -10 ग्राम मात्रा व 50 ग्राम सेंधा नमक, 50 ग्राम पीपली, 50 ग्राम मिश्री, इसका चूर्ण बनाकर चीनी मिट्टी के बरतन में रख कर नींबू का रस डाल कर तर कर लेवें, फिर इसे धूप में सूखा कर एयरटाइट डिब्बे में रख लेवें, भोजन के बाद इसके एक चम्मच का सेवन करने से बदहजमी, व खट्टे डकार आना बंद हो जाते हैं । मुंह का स्वाद अच्छा होकर भूख खुलकर लगती है ।


  • अजीर्ण व अम्ल रोग के लिए लौंग, अजवायन, सौंठ की 10 - 10 ग्राम मात्रा व सेंधा नमक 12 ग्राम सब को पीस कर चूर्ण बना लें, भोजन के बाद इसकी डेढ़ ग्राम मात्रा पानी के साथ सेवन करें ।


  • लौंग के दरदरे चूर्ण की 10 ग्राम मात्रा को आधा किलो उबलते हुए पानी में डालकर ढक दें, फिर इसे आधे घंटे बाद छान लें, इस जल की 25 से 50 ग्राम मात्रा दिन में तीन बार पीने से अपच दूर होती है व अग्नि प्रदीप होती है ।




4. अन्य उपयोग (Other Uses of Clove in Hindi):


  • लौंग को तांबे के बरतन में पीसकर इसको शहद में मिलाकर आंखों में अंजन करने से आंखों के सफेद भाग के रोग दूर हो जाते हैं ।


  • clove को मुंह में रखकर चूसने से मुंह की दुर्गन्ध दूर होती है ।


  • इसके के 2 से 4 नग पीसकर इसमें मिश्री मिलाकर पीने से हृदय की जलन समाप्त हो जाती है ।

Laung
Laung


  • 3 से 4 नग लौंग को आग पर भून कर, इसे पीस कर शहद मिलाकर चाटने से कुकुर खांसी में लाभ होता है


  • लौंग के चूर्ण एक ग्राम को मिश्री की चासनी या अनार के जूस में मिलकर चाटने से गर्भवती महिला को उल्टी होना बंद हो जाती है ।


  • दस ग्राम हल्दी व 5 से 6 लौंग को पीस कर लगाने से नासूर ठीक होता है ।


  • लौंग 2 नग व आधा ग्राम अफीम को पानी के साथ पीसकर गरम करके माथे पर लगाने से सिरदर्द ठीक हो जाता है ।

लौंग में यूजेनॉल नमक तत्व होता है, जो दांत दर्द जैसी स्वास्थ्य संबंधी बिमारियों को ठीक करने में सहायता करता है । लौंग की तासीर भी गर्म होती है, इसीलिए सर्दी में बहुत लाभदायक है । पेट दर्द के अलावा सिर दर्द ठीक करने में भी सहायक है लौंग । इसके लिए जब सिर में दर्द हो तो दर्द निवारक की जगह एक-दो लौंग गुनगुने पानी के साथ सेवन करें, थोड़ी ही देर में आराम मिल जाएगा। इसका अत्यधिक मात्र में सेवन न करें, इससे लिवर व आंतो में नुकसान पहुंचता है ।


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Thursday, 18 April 2019

उच्च रक्तचाप क्या है, इसके उपाय एवम् सावधानियां (High blood pressue ke upay evam savdhaniyan)

High blood pressure
High BP


उच्च रक्तचाप क्या होता है (highpertention in hindi ): 


उच्च रक्त चाप को हाइपरटेंशन भी कहते हैं । आम बोलचाल की भाषा में लोग है हाई ब्लड प्रेशर के नाम से जानते हैं (Hindi mai bp )। इस रोग के लक्षण बाहर से कुछ विशेष नहीं दिखाई देते हैं, लेकिन यह एक जानलेवा बीमारी है । जब रक्तचाप बिगड़ता है तो ये शरीर पर खतरनाक असर छोड़ता है । पहले रक्तचाप की समस्या उम्रदार लोगो को होती थी, लेकिन आजकल के खान पान व गलत जीवन शेली के कारण यह रोग काम उम्र के लोगों को भी होने लगा है ।

भारत में हर तीन व्यक्ति में से एक व्यक्ति उच्च रक्तचाप( high blood pressure) से पीड़ित रहता है । इसमें से 2/3 लोगो की उम्र 60 वर्ष से कम होती है । इस समय करोड़ों लोग उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं । इनमे से आधे लोग यह नहीं जानते कि उन्हें रक्तचाप की समस्या है । जिन लोगो को मालूम है वह चिकित्सा ही नहीं करवाते हैं ।

आर्युवेद से उच्च रक्तचाप को अच्छे ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है । व्यक्ति का रक्तचाप दैनिक क्रियाओं से प्रभावित होता है । जिन व्यक्तियों का रक्त चाप 120/139mm Hg होता है इसी स्थति को प्री हाईपरटेंशन कहा जाता है, जब रक्त चप 140/90 mm Hg होता है । ऐसी स्थति को हाईपरटेंशन के नाम से जाना जाता है । हाइपरटेंशन को साइलेंट किलर के नाम से भी जाना जाता है । कुछ मामलों में प्राइमरी उच्च रक्तचाप होने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाता है क्यों कि 90 प्रतिशत रोगियों में इसके लक्षण दिखाई नहीं देते हैं । जबकि सेकेंडरी हिपर्टेशन किसी रोग या बीमारी की वजह से हो सकता है । कुछ रोगियों में कुछ लक्षण दिखाई देते हैं ।


उच्च रक्तचाप के लक्षण (Uchch Raktchap ke lakshan):


चक्कर आना, सिरदर्द होना, उल्टी होना, भ्रम की स्थिति में रहना, दिखाई कम देना आदि अनेक तरह की परेशानी हो सकती हैं । अगर उच्च रक्तचाप का रोगी इलाज ठीक से न करवाएं तो बड़े हुए रक्तचाप से दिल, मस्तिष्क, गुर्दे, व आंखों पर विशेष रूप से असर होता है ।


1. लकवा (stroke)

2. हृदय घात (heart attack)

3. गुर्दे खराब होना ( Kidney failure)

4.अंधापन (Blindness)

5. दिमाग की नस फटना (Haemorrhage)


उच्च रक्तचाप से सावधानियां एवम् उपाय (high bp ke upay evam savdhaniyan):



किसी व्यक्ति को उच्च रक्त चाप की श्रेणी में तब रखा जाता है जब बीपी 140/90mmHg से अधिक हो । व लगतार कुछ दिन तक रहता हो । जब बीपी इससे कम हो तो खान पन में बदलाव करके इसे कम किया जा सकता है । रोगी को समय समय पर रक्तचाप की जांच करवाते रहना चाहिए, तथा बिना चिकित्सक की सलाह के दावा का सेवन नहीं करना चाहिए । अगर रक्त चप के रोगी नियमित रूप से योग व व्यायाम करें तो काफी हद तक इससे छुटकारा पाया जा सकता है । इसके लिए प्राणायाम, आसान, और ध्यान करना चाहिए । नित्य गायत्री मंत्र का जाप करने से भी लाभ होता है । संतुलित मात्रा में आहार का सेवन करें, फल व सब्जियों का सेवन मौसम के अनुसार करें । तीनो  समय का कहना जल्दी व निश्चित समय पर करें । जहां तक हो नींद पूरी लें । खुश रहना व हस्ट रहना उच्च रक्त चाप वालों के लिए बहुत ही फायदेमंद है ।

Uchch Raktchap
उच्च रक्तचाप


उच्च रक्तचाप से परहेज़:



1. खाने में कम नमक का प्रयोग करें ।

2. धूम्रपान व शराब का सेवन न करें ।

3. अपने वजन को नियंत्रित रखें ।

4. वसायुक्त आहार के सेवन से बचें ।

5. मोबाइल फोन का प्रयोग कम करें ।

6. तनाव से दूर रहें ।

7. लौकी के जूस का सेवन करें ।

8. अचार, पापड़, तले पदार्थ,आदि के सेवन से बचे ।

9.  सुबह शाम हल्का व्यायाम करें ।

10. नॉनवेज का सेवन कम करें । मछली का सेवन किया जा सकता है ।


उच्च रक्तचाप की आयुर्वेदिक औषधि:

उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए बाजार में आयुर्वेदिक औषधि उपलब्ध हैं, जैसे- मुक्ता वटी, मेधा वटी, अर्जुनारिष्ट, आदि । किन्तु किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का सेवन चिकित्सक के परामर्श लेने के बाद ही करें ।


उच्च रक्तचाप का देसी नुस्खा (Uchch raktchap ka desi nuskha):


उच्च रक्तचाप में अर्जुन की छाल का चूर्ण बहुत ही फायदे मंद होता है । अर्जुन की छाल के चूर्ण का हलुआ बनाकर सेवन करने से उच्च रक्त चाप नियंत्रित रहता है तथा इससे दिल की बड़ी हुई धड़कन भी कम होती है । अर्जुन की छाल के चूर्ण की चुटकी भर मात्रा जीभ पर रख लेने से भी रक्तचाप में आराम मिलता है ।


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