Tuesday, 14 May 2019

आम के 5 औषधीय उपयोग, फायदे एवम् नुकसान ( benefit of mango in hindi)

आम का पेड़
आम वृक्ष


आम के प्रयोग ( Aam ke prayog)


भारत में आम की पैदावार बहुत होती है, यह ग्रीष्म ऋतु का फल है । देश, आकर, रंग, रूप के अनुसार इसकी अनेक जातियां पाई जाती हैं, देशी आम में रेशा अधिक होता है, इस लिए इसे चूस कर खाया जाता है, जबकि कल्मी आम काफी गूदे दार होता है, इसे काट कर खाया जाता है, कच्चे आम का प्रयोग, आम की चासनी व आम का पना, व अचार बनाने के काम आता है । और पके आम का प्रयोग खाने में एवम् मेंगोशेक के रूप में किया जाता है । औषधीय प्रयोग में कलमी आम की अपेक्षा देसी आम यानि चूसने वाले बीजू आम का प्रयोग अधिक लाभकारी होता है ।

आम का वैज्ञानिक नाम Mangifera idica L. है, अंग्रेजी में इसे Mango  के नाम से जाना जाता है । इसे गुजरती में आंबों, बंगाली में आम्र अरबी में अंबज, पंजाबी में आंब कहते हैं ।

आम के गुण(Aam ke gun):


आम अनेक गुणों से भरपूर होता है आम के फल में अनेक विटामिन्स व मिनरल पाए जाते हैं । इसमें विटामिन ए, बी, व सी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। आम के फल की मज्जा रक्त शोधक, स्तंभन, कफ पित्त शामक, कच्चा आम  त्रिदोष कारक, पका आम वात पित्त शामक होता है । आम का बौर अर्थात आम का फूल दीपक, मलरोधक, वातकारक, शीतल, पित्त व कफ नाशक होता है । आम की जड़ रूचिकारक, कसैली, मालरोधक, वात पित्त व कफ का नाश करती है । आम की गुठली उल्टी, दस्त, हृदय के दर्द को दूर करती है । आम की गुठली का तेल रुख कड़वा तथा कसैला होता है, यह कफ व वात का नाश करता है ।


1. अतिसार में आम के फायदे (Amm ke fayde):


  • आम का गौंद व आम की गुठली की गिरी की बराबर मात्रा को मिलाकर इसकी एक ग्राम मात्रा एक दिन में दो तीन ग्राम सेवन करने से अतिसार में फायदा होता है ।

  • आम की गुठली की गिरी, बेलगीरी तथा मिश्री तीनो की बराबर लेकर चूर्ण बना लें,  इस चूर्ण की 3 से 6 ग्राम मात्रा पानी के साथ सेवन करने से अतिसार मिटता है ।


  • आम की गिरी की पांच ग्राम मात्रा सौ गरम जल में उबाल कर इसमें इतनी ही मात्रा में और गिरी मिलाकर पीस लें, इसका प्रयोग दिन में तीन बार दही के साथ सेवन करने से अतिसार में फायदा होता है।


  • आम की ताज़ी छाल को दही के पानी के साथ पीसकर पेट पर लगाने से लाभ होता है ।

Mango in hindi
Aam



2. लिवर की कमजोरी में आम का फायदा ( Amm ka fayda): 


यकृत कमजोर हो गया हो और इस कारण से भूख लगना बंद हो जाए, पतले दस्त होते हों, तो आम के पत्ते सूखे हुए 6 ग्राम को एक पाव जल में उबालें, जब आधा बाकी रह जाए तो इसे छान लेवें, प्रातः काल इसका सेवन दूध में मिलाकर पीने से फायदा होता है।



3. आम का तेल केश कल्प का काम करता है( Aam ka kesh kulp):


आम की गुठली का तेल सिर पर लगाने से सफेद बाल काले हो जाते हैं एवम् काले बाल जल्दी सफेद नहीं होते हैं । इससे बालों का जश्न भी बंद हो जाता है व रूसी की समस्या से भी निजात मिल जाती है ।

4. मधुमेह में आप के पत्ते के फायदे (Amm ke patte ke fayde):


छाया में सूखे आम के पत्ते एक ग्राम को आधा किलो पानी में उबालें, जब इसकी अधी मात्रा एक चौथाई रह जाए तो इस जल को छान कर सुबह शाम पीने से मधुमेह में लाभ होता है ।

5. हिचकी रोकने में कारगर हैं आम के पत्ते (Amm ke patte):


आम के पत्ते तथा धनिया दोनो को कूट कर इसकी 2 से 4 ग्राम मात्रा गुनगुने जल के साथ दिन में 2 से 3 बार  सेवन करने से हिचकी एक दम रुक जाती है ।


Mango tree in hindi
aam ka ped


आम के अन्य देसी घरेलू नुस्खे (Amm ke desi nuskhe):



  • आम की गोंद को बिवाई पर लगाने से बिवाई ठीक हो जाती है ।


  • आम के फूलों का नस्य लेने से नकसीर में फायदा होता है ।


  • आम के फल की छाल व पत्तों की बराबर मात्रा पीस कर मुंह में रखने से दांत व मसूड़े रोग रहित व मजबूत हो जाते हैं ।


  • आम के कोमल पत्ते व कालीमिर्च दोनो को पानी के साथ पीस कर गोलियां बनाकर रखे, भयंकर उल्टी दस्त भी इससे बंद हो जाते हैं ।


  • आम के फूल का काढ़ा या चूर्ण में एक चौथाई भाग मिश्री मिलाकर सेवन करने से पेचिस, प्रमेह, व जलन और पित्त के साइड इफेक्ट कम हो जाते हैं ।


  • 10 से 20 ग्राम आम के फूलों के रस में दस ग्राम खांड मिलाकर प्रयोग करने से पित्तविकर व प्रदर मिटता है ।


  • आम के फूलों के चूर्ण लगभग 10 ग्राम को दूध के साथ सेवन करने से काम शक्ति में वृद्धि होती है ।


  • ऐसा माना गया है कि आम में मक्खन से ज्यादा पोषक तत्व होते हैं, आम काप्रयोग उचित तरीके से करने से स्नायु तंत्र मजबूत होता है व शक्ति में वृद्धि होती है ।


  • आम के कल्प का सेवन करने से बहुत से रोगों में लाभ होता है । जिन लोगो को पुराना अतिसार, संग्रहनी, मंदाग्नि, अजीर्ण, वायुगोला, नसों में सूजन, वात व पित का निरंतर प्रकोप, कमजोर हृदय व कमजोर मस्तिष्क हो तो ऐसे व्यक्ति को आम के कल्प का सेवन करना चाहिए ।





  • आम के पत्ते की चाय - आम के दस पत्ते जो पेड़ पर पाक के पीले हो गए हों, को एक ली. पानी में एक दो इलायची डाल के पकाएं, जब पानी आधा बाकी रह जाए तो इसे उतार कर इसमें दूध व शक्कर डाल कर पिए, यह चाय पूरे शरीर को शक्ति देती है ।


  • आम वृक्ष का गोंद थोड़ा ग्राम करके फूड पर लगाने से  फोड़ा पककर फुट जाता है, और घाव आसानी से ठीक हो जाता है ।


  • आम की गुठली को जल के साथ पीसकर लगाने से बर, मधुमक्खी, बिच्छू, ततैया, मकोड़े आदि विशेले कीड़ों का दंश उतार जाता है ।


कच्चे आम
कच्चे आम


आम के अधिक खाने से नुकसान (Aam ke sevan se nuksan):


आम के कच्छे फल अधिक खाने से मदग्नी, रक्त विकार व नेत्ररोग आदि हो सकते हैं । आम के अधिक खाने से पाचन शक्ति खराब हो सकती है, अगर ऐसा हो तो ऊपर से दो तीन जामुन खा लें । जामुन न होने पर एक चुती नमक व पिसी सौंठ खा लें । आम का अधिक सेवन यकृत को नुकसान पहुंचता है, यकृत के रोगी को आम नहीं खाना चाहिए । आम खाने बाद ऊपर से पानी पीना नुकसान दायक हो सकता है, आम सेवन के बाद दूध पीना फायदेमंद होता है ।

इसी तरह के हैल्थ से संबंधित देसी नुस्खों को जानने के लिए Read more पर क्लिक करें ।


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Friday, 26 April 2019

लौंग के फायदे एवम् उपयोग (Laung ke Fayde evam Upyog)

Laung ke phool
लौंग के फूल

लौंग का परिचय:
इस लेख में आपको लौंग के फायदे एवम् उपयोग के बारे में बताने जा रहे हैं । लौंग की उत्पत्ति का मूल स्थान मलक्का द्वीप कहलाता है । लेकिन इसकी पैदावार भारत में दक्षिण भारत में केरल व तमिलनाडु में की जाती है । इसकी फूल व कलियां जब सूख जाती हैं तो इसको बाजार में लौंग के नाम से बेचा जाता है । लौंग के फूल बैंगनी रंग के व खुशबूदार होते हैं । लौंग को लवंग के नाम से भी जाना जाता है । आम तौर से लौंग का उपयोग मसाले के रूप में किया जाता है लेकिन इस लेख में आपको लौंग के फायदे व उपयोग के बारे में बताने जा रहे हैं ।

लौंग का वैज्ञानिक नाम है  syzygium aromaticum है ।  इसको छेत्र के अनुसार अलग  अलग नामों से जाना जाता है ।


Laung in english : Clove

संस्कृत : लवंड, देवकुसुम

हिंदी    : लौंग, लवंग

तेलगु   : कारावल्लू

बंगाली : लवंग

गुजरती: लवंग



लौंग के गुण (Cloves in hindi):



1. लौंग नेत्र के लिए लाभ दायक, कड़वी, ठंडी, चरपरी, रूचिकारक, पाचक, होती है ।

2.यह प्यास, वमन, पित्त, अफरा, श्वास, हिचकी, आदि रोगों को समाप्त करती है ।

3. लौंग का तेल वातनशक,अग्निवर्धक, कफ तथा दांत के दर्द का नाश करती है ।

4. लौंग खाने से भूख बढ़ती है, आमाशय की क्रियाशीलता को बढ़ाकर भोजन में रुचि उत्पन्न करता है ।

5. लौंग पेशाब खुलकर लाती है ।

6. लौंग मुंह की दुर्गं दूर करती है, व इसका तेल शरीर की दुर्गन्ध व दर्द को दूर करती है ।

7. लौंग पेट के कृमि को नष्ट करत है ।

8. यह चेतन शक्ति को जागृत करती है।

लौंग
लौंग



लौंग के औषधीय प्रयोग (Laung ke aushdhiye prayog):


1. कफ में लौंग के उपयोग (Kuf men Laung ke Upyog):


दो ग्राम लौंग को कूट कर इसको 125 मिली. पानी में उबाल लें, जब चौथा बहाग बाकी रह जाए  तो इसे आग से उतर कर छान लेवें, और इसको गरम ही पी लेवें । यह कफ निकालने की उत्तम औषधि है।



2. दमा में लौंग के फायदे (Dama me Laung Ke Fayde):


लौंग, आंकड़े के फूल तथा काला नमक बराबर मात्र में लेकर, चने के बराबर गोली बनाकर चूसने से दमा व श्वास नली के रोग दूर होते हैं ।

3. पेट के रोग में लौंग के फायदे (Laung Ke Fayde):


  • खट्टे दाकर हों अथवा बदहजमी हो तो लौंग , सौंठ, मिर्च पीपल अजवायन सभी की 10 -10 ग्राम मात्रा व 50 ग्राम सेंधा नमक, 50 ग्राम पीपली, 50 ग्राम मिश्री, इसका चूर्ण बनाकर चीनी मिट्टी के बरतन में रख कर नींबू का रस डाल कर तर कर लेवें, फिर इसे धूप में सूखा कर एयरटाइट डिब्बे में रख लेवें, भोजन के बाद इसके एक चम्मच का सेवन करने से बदहजमी, व खट्टे डकार आना बंद हो जाते हैं । मुंह का स्वाद अच्छा होकर भूख खुलकर लगती है ।


  • अजीर्ण व अम्ल रोग के लिए लौंग, अजवायन, सौंठ की 10 - 10 ग्राम मात्रा व सेंधा नमक 12 ग्राम सब को पीस कर चूर्ण बना लें, भोजन के बाद इसकी डेढ़ ग्राम मात्रा पानी के साथ सेवन करें ।


  • लौंग के दरदरे चूर्ण की 10 ग्राम मात्रा को आधा किलो उबलते हुए पानी में डालकर ढक दें, फिर इसे आधे घंटे बाद छान लें, इस जल की 25 से 50 ग्राम मात्रा दिन में तीन बार पीने से अपच दूर होती है व अग्नि प्रदीप होती है ।



4. अन्य उपयोग (Other Uses of Clove in Hindi):


  • लौंग को तांबे के बरतन में पीसकर इसको शहद में मिलाकर आंखों में अंजन करने से आंखों के सफेद भाग के रोग दूर हो जाते हैं ।


  • clove को मुंह में रखकर चूसने से मुंह की दुर्गन्ध दूर होती है ।


  • इसके के 2 से 4 नग पीसकर इसमें मिश्री मिलाकर पीने से हृदय की जलन समाप्त हो जाती है ।

Laung
Laung


  • 3 से 4 नग लौंग को आग पर भून कर, इसे पीस कर शहद मिलाकर चाटने से कुकुर खांसी में लाभ होता है


  • लौंग के चूर्ण एक ग्राम को मिश्री की चासनी या अनार के जूस में मिलकर चाटने से गर्भवती महिला को उल्टी होना बंद हो जाती है ।


  • दस ग्राम हल्दी व 5 से 6 लौंग को पीस कर लगाने से नासूर ठीक होता है ।


  • लौंग 2 नग व आधा ग्राम अफीम को पानी के साथ पीसकर गरम करके माथे पर लगाने से सिरदर्द ठीक हो जाता है ।

लौंग में यूजेनॉल नमक तत्व होता है, जो दांत दर्द जैसी स्वास्थ्य संबंधी बिमारियों को ठीक करने में सहायता करता है । लौंग की तासीर भी गर्म होती है, इसीलिए सर्दी में बहुत लाभदायक है । पेट दर्द के अलावा सिर दर्द ठीक करने में भी सहायक है लौंग । इसके लिए जब सिर में दर्द हो तो दर्द निवारक की जगह एक-दो लौंग गुनगुने पानी के साथ सेवन करें, थोड़ी ही देर में आराम मिल जाएगा। इसका अत्यधिक मात्र में सेवन न करें, इससे लिवर व आंतो में नुकसान पहुंचता है ।


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Thursday, 18 April 2019

उच्च रक्तचाप क्या है, इसके उपाय एवम् सावधानियां (High blood pressue ke upay evam savdhaniyan)

High blood pressure
High BP


उच्च रक्तचाप की परिभाषा (highpertention in hindi):


उच्च रक्त चाप को हाइपरटेंशन भी कहते हैं । आम बोलचाल की भाषा में लोग है हाई ब्लड प्रेशर के नाम से जानते हैं (Hindi mai bp )। इस रोग के लक्षण बाहर से कुछ विशेष नहीं दिखाई देते हैं, लेकिन यह एक जानलेवा बीमारी है । जब रक्तचाप बिगड़ता है तो ये शरीर पर खतरनाक असर छोड़ता है । पहले रक्तचाप की समस्या उम्रदार लोगो को होती थी, लेकिन आजकल के खान पान व गलत जीवन शेली के कारण यह रोग काम उम्र के लोगों को भी होने लगा है ।

भारत में हर तीन व्यक्ति में से एक व्यक्ति उच्च रक्तचाप( high blood pressure) से पीड़ित रहता है । इसमें से 2/3 लोगो की उम्र 60 वर्ष से कम होती है । इस समय करोड़ों लोग उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं । इनमे से आधे लोग यह नहीं जानते कि उन्हें रक्तचाप की समस्या है । जिन लोगो को मालूम है वह चिकित्सा ही नहीं करवाते हैं ।

आर्युवेद से उच्च रक्तचाप को अच्छे ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है । व्यक्ति का रक्तचाप दैनिक क्रियाओं से प्रभावित होता है । जिन व्यक्तियों का रक्त चाप 120/139mm Hg होता है इसी स्थति को प्री हाईपरटेंशन कहा जाता है, जब रक्त चप 140/90 mm Hg होता है । ऐसी स्थति को हाईपरटेंशन के नाम से जाना जाता है । हाइपरटेंशन को साइलेंट किलर के नाम से भी जाना जाता है । कुछ मामलों में प्राइमरी उच्च रक्तचाप होने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाता है क्यों कि 90 प्रतिशत रोगियों में इसके लक्षण दिखाई नहीं देते हैं । जबकि सेकेंडरी हिपर्टेशन किसी रोग या बीमारी की वजह से हो सकता है । कुछ रोगियों में कुछ लक्षण दिखाई देते हैं ।


उच्च रक्तचाप के लक्षण (Uchch Raktchap ke lakshan):


चक्कर आना, सिरदर्द होना, उल्टी होना, भ्रम की स्थिति में रहना, दिखाई कम देना आदि अनेक तरह की परेशानी हो सकती हैं । अगर उच्च रक्तचाप का रोगी इलाज ठीक से न करवाएं तो बड़े हुए रक्तचाप से दिल, मस्तिष्क, गुर्दे, व आंखों पर विशेष रूप से असर होता है ।


1. लकवा (stroke)

2. हृदय घात (heart attack)

3. गुर्दे खराब होना ( Kidney failure)

4.अंधापन (Blindness)

5. दिमाग की नस फटना (Haemorrhage)


सावधानियां एवम् उपाय (high bp ke upay evam savdhaniyan):



किसी व्यक्ति को उच्च रक्त चाप की श्रेणी में तब रखा जाता है जब बीपी 140/90mmHg से अधिक हो । व लगतार कुछ दिन तक रहता हो । जब बीपी इससे कम हो तो खान पन में बदलाव करके इसे कम किया जा सकता है । रोगी को समय समय पर रक्तचाप की जांच करवाते रहना चाहिए, तथा बिना चिकित्सक की सलाह के दावा का सेवन नहीं करना चाहिए । अगर रक्त चप के रोगी नियमित रूप से योग व व्यायाम करें तो काफी हद तक इससे छुटकारा पाया जा सकता है । इसके लिए प्राणायाम, आसान, और ध्यान करना चाहिए । नित्य गायत्री मंत्र का जाप करने से भी लाभ होता है । संतुलित मात्रा में आहार का सेवन करें, फल व सब्जियों का सेवन मौसम के अनुसार करें । तीनो  समय का कहना जल्दी व निश्चित समय पर करें । जहां तक हो नींद पूरी लें । खुश रहना व हस्ट रहना उच्च रक्त चाप वालों के लिए बहुत ही फायदेमंद है ।

Uchch Raktchap
उच्च रक्तचाप


उच्च रक्तचाप से परहेज़:



1. खाने में कम नमक का प्रयोग करें ।

2. धूम्रपान व शराब का सेवन न करें ।

3. अपने वजन को नियंत्रित रखें ।

4. वसायुक्त आहार के सेवन से बचें ।

5. मोबाइल फोन का प्रयोग कम करें ।

6. तनाव से दूर रहें ।

7. लौकी के जूस का सेवन करें ।

8. अचार, पापड़, तले पदार्थ,आदि के सेवन से बचे ।

9.  सुबह शाम हल्का व्यायाम करें ।

10. नॉनवेज का सेवन कम करें । मछली का सेवन किया जा सकता है ।


उच्च रक्तचाप की आयुर्वेदिक औषधि:

उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए बाजार में आयुर्वेदिक औषधि उपलब्ध हैं, जैसे- मुक्ता वटी, मेधा वटी, अर्जुनारिष्ट, आदि । किन्तु किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का सेवन चिकित्सक के परामर्श लेने के बाद ही करें ।


उच्च रक्तचाप का देसी नुस्खा (Uchch raktchap ka desi nuskha):


उच्च रक्तचाप में अर्जुन की छाल का चूर्ण बहुत ही फायदे मंद होता है । अर्जुन की छाल के चूर्ण का हलुआ बनाकर सेवन करने से उच्च रक्त चाप नियंत्रित रहता है तथा इससे दिल की बड़ी हुई धड़कन भी कम होती है । अर्जुन की छाल के चूर्ण की चुटकी भर मात्रा जीभ पर रख लेने से भी रक्तचाप में आराम मिलता है ।


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Friday, 5 April 2019

जीवन में स्वास्थ रहने के उपयोगी सूत्र ( Health tips in hindi)

सवस्थ जीवन के टिप्स(swasth jeevan ke tips)

अपने स्वास्थ्य को अच्छा रखने के लिए कुछ बाते ध्यान रखने की जरूरत है । इस लेख में हम आप को कुछ टिप्स (Health tips in hindi) देने जा रहे है । सबसे पहले खुद का ख्याल रखना आवश्यक है । यदि आप रोग-रहित और एक स्वस्थ जीवन चाहते है, और अपने बुढ़ापे का भरपूर आनंद लेना चाहते हैं तो अपनी दिनचर्या बदल लें।

किसी ने कहा है स्वास्थ्य ही धन है। हर व्यक्ति स्वस्थ और रोग रहित रह सकता है, यदि वह कुछ नियमों का पालन करें, जैसे की हमें सुबह जल्दी उठाना चाहिए, सुबह खाली पेट दो तीन गिलास पानी पीना चाहिए, खुली हवा में घुमने जाना चाहिए,  हल्का व्यायाम जरूर करना चाहिए, नाश्ते में दूध, फ्रूट, शामिल करें व कम वसायुक्त पदार्थों का सेवन करें । इसके साथ ही नीचे स्वास्थ संबंधी कुछ टिप्स नीचे दिए जा रहे हैं, जिनका पालन कर आप स्वस्थ जीवन पा सकते हैं ।


जीवन के कुछ महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सूत्र(Jeevan ke swasthy sutra)


1. स्वस्थ व्यक्ति अपने जीवन में हमेशा प्रगति करने, दुखों से दूर, एवम् सुख प्राप्त करने में समर्थ होते हैं ।


2. स्वच्छ जीवन जीने बाल व्यक्ति लंबी उम्र वाला तथा प्रदूषण युक्त जीवन जीने वाला व्यक्ति काम उम्र होता है ।

Fitness, jivan ke sutra
Sharirik swasth


3. सुबह के समय जल्दी उठना, प्राणायाम व व्यायाम करना, ध्यान करना, प्रयाप्त पानी पीना, भूख से कम भोजन करना, भोजन पूरी तरह चबा कर करना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभ दायक होता है ।


4. अपने खानपान को नियंत्रित करके पुरानी जीवनशैली से जन्मी बीमारियां जैसे - मोटापा, रक्तचाप, मधुमेह आदि को नियंत्रित किया जा सकता है ।


5. किसी भी खाने पीने की चीज को उचित मात्रा में ही लें, चाहे वह अन्न, तेल घी मसाले कुछ भी हो जरूरत से अधिक न ले, जिससे स्वास्थ्य सही बना रहता है ।


6. आंवले का जूस या आंवले के चूर्ण को अपने नियमित सेवन में शामिल करें। इससे कब्ज, बालों का झड़ना, बाल समय सफेद होना, एसिडिटी, नजर कमजोर होना आदि नहीं होते हैं ।


7. कुपोषण से होने वाले रोगों से बचने के लिए गेंहू, चना, ज्वर , बाजरा आदि अनाजों को मिला कर खाएं ।


8. बाजार में मिलने वाले डिब्बा बंद खाद्ध पदार्थ व कोल्ड्रिंक्स जैसी चीजों का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, इनका सेवन न करें ।


9. जितने तत्पर हम बीमार होने के बाद दवा लेने के लिए रहते हैं, उससे अधिक तत्परता हमें बीमार होने से पहले बीमारी से बचने के लिए लगना चाहिए


10. फास्ट फूड व जंक फूड का सेवा नहीं करना चाहि, इससे उच्च रक्त चाप, मोटापा, कब्ज, डायबिटीज, रोग होते है तथा रोगप्रतिरोधक छमता की कमी रहती है । इसके साथ शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी हो जाती है ।


11. दूध, पत्ते दार सब्जियां, दाल, आदि का सेवन अधिक करना चाहिए, दूध से प्रोटीन व कैल्शियम, डाल से प्रोटीन, पत्तेदार सब्जियों से कल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, मेगनीज, लौह, आदि तत्व मिलते है । इसी तरह आलू से पोटैशियम, आओर सेव से एंटीऑक्सिडेंट की कमी दिए होती है ।


12. शुद्ध आहार लेना चाहिए, इससे व्यक्ति अपने कार्यों में सफल रहता है जबकी अशुद आहार लेने से व्यक्ति रोगी तथा असफल होता है । नाश नहीं करना है, इससे व्यक्ति का पतन होता है । नाश किसी भी तरह का इससे शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, नैतिक, समजिक स्थर गिरता है ।


13. रोगी व्यक्ति की सामाजिक व आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं रहती, राष्ट्रीय की उन्नति में व्यक्ति की भागी दरी नहीं रहती है । और खुद की भी अवनति भी प्रारंभ हो जाती है ।

यह भी पढ़े: मासपेशियों में तनाव व दर्द दूर करने के देसी प्राकृतिक उपाय


12. वाहन के प्रति मोह कम कर उसका प्रयोग कम करने की आदत डालें। जहां तक ​​हो कम दूरी के लिए पैदल यात्रा पर जाएं। इससे मांसपेशियों का व्यायाम होगा, जिससे आप निरोगी रहकर आकर्षक बने रहेंगे, साथ ही पर्यावरण की रक्षा में भी सहायक होंगे।

13. भोजन में अधिक से अधिक मात्रा में फल-सब्जियों का प्रयोग करें। उन्हें आवश्यक तैलीय तत्व प्राप्त करें, शरीर के लिए आवश्यक तेल की पूर्ति प्राकृतिक रूप के पदार्थों से ही प्राप्त करें।

14. दिमाग में सुस्ती नहीं आने दें, कार्य को तत्परता से करने की चाहत रखें।

15. घर के कार्यों को स्वयं करें- यह कार्य कई व्यायाम का फल देते हैं ।

शारीरिक स्वास्थ्य
स्वस्थ रहने के लिए क्या खाएं

आदमी के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण है उसका स्वस्थ रहना । आदमी कितना स्वस्थ रह सकता है। उचित खान-पान, सही मन स्थिति, शांत, निश्चित रहकर आदमी का मन ही उसे पूर्ण स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करते हैं । फिर खाना-पीना थोड़ा अनियमित हो जाए तो चल सकता है । सोच सही होनी चाहिए किसी ने कहा है कि गलत खान-पान से ज्यादा महत्वपूर्ण है सोच का सकारात्मक होना । अगर वह नकारात्मक हुआ तो सब डर से दूर होकर व्यक्ति दैनिक चिन्तन से मुक्त हों जाएगा।  जीवनशैली अच्छी हो तो मन एवम् स्वास्थ्य आपके बस में हो जाएगा। इन Hindi me health tips को ध्यान में रखकर स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है ।



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Tuesday, 26 March 2019

गठिया वात, लीवर रोग, पेट रोग में अमर बेल के 5 घरेलू उपयोग ( Amarbel ke upyog)

अमर बेल का परिचय:


अमर बेल को आकाश बेल के नाम से भी जाना जाता है । इस लेख में आपको आकाश बेल के घरेलू उपयोग के बारे में बताने जा रहे हैं । जिससे आप गठिया वात, लिवर के रोग, पेट रोग का उपचार घरेलू नुस्खों से कर सकते है । आकाश बेल एक परजीवी दूसरे पेड़ पर आश्रित पौधा है । बेर व करोंदे के पेड़ पर विशेष रूप से फैली रहती है । जिस पौधे पर ये आश्रित रहती है वह पौधा धीरे धीरे सूख जाता है ।


Amarbel
अमर बेल


आकाश बल्ली पीली, कोमल व थोड़ी हरी होती है । इसके फल बिना व्रंत के सफेद रंग के होते हैं । आकाश बेल के फल उरद के आकर के होते हैं । अमर बेल आंखों के रोगो का नाश करती है । हृदये के लिए लाभदायक, पित्त कफ व आमवत नाशक होती है । आकाश बल्ली बलकराक भी होती है । इसका वैज्ञानिक cuscuta reflexa Roxb. नाम है ।

यह भी जाने:  जीरा के गुण, उपयोग व औषधीय फायदे ( Benefit of Cumin)



इसको अलग अलग भाषा में निम्न नामो से जाना जाता है ।

हिंदी     - अमर बेल, आकाश बेल

संस्कृत  - आकाश बल्ली

मराठी   - निर्मुली

बंगाली  - आलोक लता, स्वर्ण लता

गुजरती - अकास बेल

तेलगु    - नुलू तेगा 


अमर बेल के औषधीय प्रयोग:


1. गठिया वात में आकाश बेल के फायदे (Akash bel ke fayde ):


आकाश बेल का बफारा  देने से गठिया वात  का दर्द व सूजन तुरंत दूर हो जाती है । इसके बाद इसी पानी से नहा कर शरीर को तौलिए से अच्छी तरह से पौंछ लें, तथा घी का थोड़ा अधिक सेवन करें।


Akash bel
आकाश बेल



2. पेट के रोग में अमर बेल के फायदे(Amar bel ke fayde):



  • आकाश बेल का 1/२ किलो स्वरस निकालकर इसका सुबह शाम सेवन करने से वात रोग व पेट के दर्द में आराम मिल जाता है । आकाश बेल अगर सूखी अवस्था में हो तो आकाश बेल का चूर्ण 1 ग्राम व मिश्री 1 किलो  दोनों को मिलाकर मंद आग पर पकाएं व इसका शर्बत तैयार कर लें । इसकी 2 ग्राम मात्रा में बराबर मात्रा में पानी मिलाकर सुबह शाम पिया जा सकता है।


  • आकाश बेल को उबालकर पेट पर बांधने से डकारें आना बंद हो जाती हैं ।


3. आकाश बेल के लिवर में उपयोग(Akash bel ke upyog):




  • 5 से 10 मिली ग्राम अमरबेल का स्वरस सेवन करने से यकृत वृद्धि के कारण हुई कब्ज व ज्वर में फायदा करता है ।

  • अमरबेल का काढ़ा 40 से 50 ग्राम पीने से यकृत वृद्धि में लाभ मिलता है ।


4. बालों के रोग में अमर बेल के फायदे(Amar bel ke fayde):




  • 50 ग्राम अमर बेल को कूट कर 1 किलो पानी में पकाकर इससे बाल धोने से बाल नहीं झड़ते हैं, रूसी नहीं होती है, बाल चमकदार व सुंदर होते हैं ।

  • आकाश बेल को तिल के तेल के साथ पीस कर सिर में लगाने से बालों की जड़े मजबूत होती हैं व गंजापन दूर होता है ।


Amar bel
अमर बेल




5. अमर बेल के अर्श में उपयोग (Amar bel ke upyog):



अमर बेल के स्वरस की 10 ग्राम मात्रा में कालीमिर्च का चूर्ण 5 ग्राम मिलाकर इसे अच्छी तरह से घोट कर रोज सुबह पिलाने से 2 से 3 दिन में खूनी व बादी दोनों तरह की बवासीर ठीक हो जाती है । इससे पेट भी साफ़ हो जाता है  शरीर के अन्य अंगों की सूजन भी उतार जाती है ।


विशेष:


इस लेख में हमने आप को अमर बेल के औषधीय एवम् घरेलू उपयोग तथा अमर बेल के फायदे के बारे में वर्णन किया है, इसके अलावा आकाश बेल के और भी उपयोग हैं । यह मस्तिष्क के विकारों में भी फायदा करता है । अमर बेल के स्वरस के दस  से 20 ग्राम मात्रा को प्रातः जल के साथ सेवन करने से मस्तिष्क विकार में लाभ होता है ।

आकाश बेल बालवर्धक भी होती है । इसके लिए 10 ग्राम अमर बेल को कुचल कर साफ़ बारीक कपड़े में बांध कर आधा किलो गाय के दूध में लटका कर हलकी आग पर पकने दें । जब दूध 2/3 रह जाये तो ठंडा करके  इसमें मिश्री मिलाकर पीने से कमजोरी दूर हो जाती है । इस समय ब्रह्मचर्य से रहना आवश्यक है । अमर बेल का लेप खुजली वाले स्थान पर करने से खुजली दूर हो जाती है । अमर बेल कमजोरी में  अत्यधिक फायदा करता है ।



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Saturday, 16 March 2019

पलाश के औषधीय उपयोग एवम् टेसू का होली में महत्व( plash Flower Madicinal uses in hindi)

टेसू के फूल
पलाश के फूल


टेसू( पलाश) का परिचय:


इस लेख में आप को टेसू यानि पलाश के औषधीय उपयोग एवम् टेसू का होली में महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं। वसंत ऋतु की आभा बिना टेशू के फूल के पूरी नहीं होती है । फाल्गुन पूर्णिमा आते-आते पलाश के फूल पूरी तरह पक जाते हैं । इनका रंग केसरी लाल, और बनावट दीपक की ज्योति की तरह ही होती है। इस टेसू को केसू, पलाश व ढाक कहा जाता है। इन दिनों पलाश के पेड़ की डालियों पर पत्तियां व फल नहीं होते हैं । बल्कि केवल फूल ही फूल दिखते  हैं । टेसू के फूल तोता की चोंच की तरह दिखने वाले फूल का आकार होने के कारण इसे किंशुक नाम से भी जाना जाता है ।

पुराने समय में इन्हीं पलाश के फूलों के रंगों से होली होती थी । होली पर इसके फूलों के रंगों का बड़ा महत्व रहा है। आज भी कुछ लोग त्वचा का नुकसान की जगह लाभ पहुंचाने वाले टेसू के फूलों से रंग निकालकर होली खेलते हैं। बृज में आज भी इसके पलाश के फूलों के रंग से होली खेली जाती है ।

होली के त्योहार में प्राकृतिक रंग बनाने में उपयोग किए जाने वाले केसू के फूल अब कुछ दिन तक अपनी रंगत को बिखेरने के बाद झड़ना शुरू हो जाते हैं । होली के त्योहार पर बाजार में रासायनिक रंगों की अधिकता होने से लोगो ने टेसू के फूलों को भूला दिया है।

पलाश के औषधीय प्रयोग (Plash flawer madicinal uses in hindi):


टेसू के बहुत से औषधीय उपयोग भी है । प्राचीन काल से ही इसका उपयोग दिव्य औषधि के रूप में किया जाता है । पलाश के पेड़ पर फरवरी से मई तक फूल आते हैं व इसका फलकाल मई से जून तक होता है । टेसू को पलाश, किंशुक, रक्त पुष्पक, ढाक, प्लासू आदि नामों से जाना जाता है । इसके पत्तों का उपयोग देना पत्तल बनाने के लिए किया जाता है । पलाश के फूल से अतिसार, प्रमेह, अर्श, रक्तपित्त कुष्ठ आदि रोगों का इलाज किया जाता है । पलाश के फूल मुत्रल, रक्तस्तंभक, दाह शामक, व स्तंभक होते हैं ।

Read more:  अमरूद व अमरूद के पत्ते से पेट व अनेक रोगों का इलाज



Plash Flower
Tesu ke Phool



1. नेत्र रोग में टेशू के फायदे (Teshu ke Fayde) :



टेसू की जड़ (ताजी) का अर्क निकाल कर आंखो में डालने से रतोंधी, फूली, मतियाबिंड आदि रोग ठीक होते हैं ।


2. किडनी के रोग में पलाश के फायदे(Plash ke Fayde):



  • पलाश की जड़ का रस निकाल कर इसमें थोड़ी सी गेंहू भिगो कर तीन दिन के लिए रख दें । फिर इन दोनों को पीस कर हलुआ बना कर खाने से प्रमेह, शीघ्र पतन, व कमजोरी दूर होती है ।


  • प्रमेह  - पलाश की कोपलों को तोड़कर धूप में सुखा लें, फिर इसको कूट - छान कर इसकी 8 से 9 ग्राम मात्रा को सुबह के समय सेवन करने से प्रमेह में लाभ होता है ।


  • टेशू के सूखी हुई कोपल, गोंद, छाल, तथा फूलों को मिलाकर चूर्ण बना लें, इस चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर, इस चूर्ण की 2 से 4 ग्राम मात्रा को शाम को दूध के साथ सेवन करने से मूत्र खुल कर होने लगता है । मूत्र होने पर परेशानी नहीं होती है ।


  • 20 ग्राम पलाश के फूलों को 200 ग्राम ठंडे पानी में रात भर के लिए भीगा रहने दें, इसमें सुबह थोड़ी मिश्री मिलाकर पिलाने से गुर्दे का दर्द व पेशाब में खून आना बंद हो जाता है ।


3. त्वचा रोग में केशु के फायदे (kesu ke Fayde) :



  • दाद - पलाश के बीजों को नींबू के रस के साथ पीस कर संक्रमित स्थान पर लगाने से दाद व खुजली का नाश होता है ।


  • घाव - पलाश की गोंद का चूर्ण घावों पर छिड़कने से घाव तुरंत भर जाते हैं ।


  • कुष्ठ - पलाश के बीज का तेल लगाने से कुष्ठ रोग में लाभ मिलता है । दूध में उबल हुए पलाश के बीज, रस कपूर, तथा गंधक व चित्रक की शुष्क करके इसका चूर्ण बनाकर इसके 2 ग्राम मात्रा एक महीने तक प्रतिदिन लेने से मंडल कुष्ठ में फायदा होता है ।



Dhak ka ped
Palash Tree



4. पेट रोग में पलाश के उपयोग (Palash ke Upyog):



  • अफरा - पलाश की शल व सौंठ का काढा बनाकर इसकी 30 सए 40 मिली ग्राम मात्रा दिन में दो बार पीने से पर दर्द व अफारे में फायदा होता है । पलाश के पत्ते का क्वाथ बनाकर इसकी 30 से 40 मिली. मात्रा पिलाने से भी अफरा व पेट दर्द में लाभ मिलता है ।


  • मंदाग्नि - टेसू की ताजी जड़ का अर्क निकाल कर इस अर्क की 4 से 5 बूंदे पान के पत्ते पर रख कर खाने से भूख तेज हो जाती है ।


  • उदर कृमि-पलाश के बीज चूर्ण की एक चम्मच मात्रा दिन में दो बार सेवन करने से पेट के कीड़े मर जाते हैं ।

Read more:  धनिया व धनिया पत्ती के 6 लाभदायक प्रयोग(Benefit of coriander)


5. बाजीकरण में टेशू के लाभ (Palash ke Labh):



  • पलाश बीज चूर्ण 2 से 4 ग्राम मात्रा तथा बराबर मात्र में घी, आंवला चूर्ण, शर्करा बराबर मात्रा में में रात को सोने से पहले खाने से बल की वृद्धि होती है ।


  • पलाश के पांचों अंगो का चूर्ण चाय में शुष्क किया हुआ, शहद व एलोवेरा के साथ मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से निरोगी, बलशाली, व दीघायू होता है।


  • पलाश की काद के अर्क की 5 से 6 बूंद मात्रा दिन में दो बार सेवन करने से काम शक्ति प्रबल होती है ।


  • पलाश (टेसू) बीज के तेल की 2 से 4 बूंद को इंद्री पर लगाने से नपुंसकता समाप्त हो जाती है ।



विशेष:


पलाश का धार्मिक महत्व के साथ पलाश का आर्युवेद में अलग ही महत्व है। ऊपर बताए ढाक के उपयोग के अलावा यह आनेक रोगों के उपचार के काम आता है । अगर पलाश के पांचों अंगों के भस्म की 1 से 2 ग्राम मात्रा गुनगुने दूध के साथ दिन में तीन बार खाना खाने के बाद सेवन करने से बवासीर में काफी फायदेमंद होता है । इसी तरह टेसू की जड़ को पीस कर इसके रस की 4 से 5 बूंद नाक में टपकाने से मिर्गी का दौरा ठीक हो जाता है ।
इस लेख का मूल उद्देश्य लोगो को आर्युवेद के प्रति जागरूक करना है । किसी भी गंभीर रोग में पलाश का उपयोग किसी चिकित्सक की सलाह लेकर ही करें ।




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Sunday, 3 March 2019

बेल के उपयोग, फायदे एवम् औेषधीय गुण( bael ke upyog,fayde,)

बेल का पेड़
Bael tree in hindi


बेल का परिचय:


इस लेख में आपको बेल के उपयोग, फायदे, एवम् औषधीय गुण के बारे में बताने जा रहे हैं । बेल का पेड़ भारत में बहुतायत में पाया जाता है  है । बेल के वृक्ष की छाया ठंडी व रोगों से दूर रखने वाली होती है । बेल के गुण के कारण इसे पवित्र  माना जाता है । बेल में टेनिक एसिड, एक उड़न शील तेल एवम् एक चिकना लुआबदार पदार्थ पाया जाता है । बेल की जड़, बेल के पत्ते, और बेल की छाल में tenin व शक्कर को कम करने वाले पदार्थ पाए जाते हैं ।



बेल के गुण (Bael ke gun)


बेल की तासीर उष्ण होती है । बेल कफ व वात नाशक, दीपन, पाचक, मूत्र व शर्करा को काम करने वाला होता है । ये रक्तातिसर, अतिसार, मधुमेह श्वेत प्रदर, नाशक होता है । इसके बाल फल, आधपका फल, व पक्के फल, पत्ते, व बेल की जड़ में अलग अलग गुण होते हैं । बेल के पेड़ को अंग्रेजी में Bael fruit tree कहते हैं । हिंदी में बेल, विली, श्रीफल के नाम से जानते हैं ।


बेल के पेड़ के औषधीय प्रयोग(Bael ke ped ke aushdhiye prayog):



बेल के प्रयोग अनेक रोगों में किया जाता है लेकिन बेल का महत्व पेट रोग में बहुत है । जैसे संग्रहनी, अतिसार, आमतिसर, रक्त अतिसार पेट में जलन अम्लपित्त तथा मंदाग्नि आदि ।

Read more: बकायन के 9 उपयोग,लाभ, और हानियां



बेल फल व बेल के पत्ते
बेल फल व बेल के पत्ते



1. अतिसार में बेल के फायदे (atisar men bel ke fayde):



  • कच्चे बेल के फल को आग पर भून कर इसका गूदा निकाल लें, इस गूदा में मिश्री मिलाकर सेवन करने से अतिसार ठीक हो जाता है । इस विधि से आम अतिसार में भी फायदा होता है ।

  • पांच ग्राम बेल गिरी को घिस कर सौंफ के अर्क में मिला कर पिलाने से बच्चों के हरे पीले दस्त बंद हो जाते हैं ।

  • गर्भवती महिला (Pregnancy) अतिसार होने पर दस ग्राम बेल गिरी के पाउडर को चावल के मांड में पीस कर इसमें थोड़ी सी मिश्री मिलाकर दिन में दो से तीन बार सेवन करने से निश्चित रूप से लाभ होता है ।

  • चार लीटर जल में 200 ग्राम बेल गिरी को पकाकर जब इसकी मात्रा 1 किलो से कम रह जाए तो इसको छान कर, इसमें 200 ग्राम मिश्री मिलाकर  किसी बोतल में भर कर रख दें । अब इसकी 10 से 20 ग्राम मात्रा में 500 मिलीग्राम सौंठ मिला कर सेवन करने से अतिसार में अत्यधिक लाभ होता है ।

  • बेल का मुरब्बा खाने से पित्तातिसर मिटता है । पेट के सारे रोगों के लिए बेल का मुरब्बा सेवन योग्य है ।

बेल का मुरब्बा बनाने की विधि:

बेल का मुरब्बा बनाने के लिए निम्न सामग्री प्रयोग की जाती है । एक बेल फल का गूदा एक किलो, पिसी हुई इलायची एक चम्मच, केसर थोड़ा सा, डेढ़ किलो चीनी ।

सबसे पहले बेल फलों को धोकर कद्दूकस कर लें । फिर दबाकर पानी निकाल लें । अब इस गुदे में शक्कर डालें और अच्छी तरह मिला लें । जब चीनी पूरी तरह घुल जाए तो ऊपर से कपड़ा बांधकर धूप में रख देवें । इसे तब तक रखें जब तक चाशनी का रूप ना लेले । फिर इसे  छांव में रखे, इसके बाद इलायची और केसर मिला लें । अब  आपका स्वादिष्ट बेल फल का मुरब्बा तैयार हो गया है। ऐसा माना जाता है कि धूप में पकने वाले ये मुरब्बे दिमाग और आंखों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है ।


2. आमतिसार में बेल के उपयोग (bael ke upyog):



  • बेल की गिरी व आम की गुठली की मिंगी बराबर मात्रा लेकर पीस लें, इसकी दो से 4 ग्राम मात्रा को चावल की मानद या ठंडे पानी के साथ सुबह शाम लेने से लाभ अवश्य होगा । यह बहुत ही प्रभावशाली प्रयोग है।

  • बाल की गिरी व बराबर मात्रा में आम की गुठली की मींगी, बदाम की मिंगि व इसबगोल की भूसी सब की बराबर मात्रा मिलाकर पीस लें, इसकी 3 से चार चम्मच की मात्रा मिश्री के साथ मिलाकर सेवन करने से अतिसार, जीर्ण अतिसार, प्रवाहिका आदि में लाभ होता है ।

बेल फल
Bael fruit


3. रक्त अतिसार में बेल के फायदे (bael ke fayde):


  • बेल गिरी व धनियां संभाग लेकर इसमें दो भाग मिश्री मिलाकर चूर्ण बना लें, इस चूर्ण की 2 से 6 ग्राम मात्रा को ताजे जल के साथ सुबह शाम सेवन करने से रक्त अतिसार में बहुत लाभ होता है ।

  • बेल गिरी के 50 ग्राम गुदे को बीस ग्राम गुड़ के साथ सेवन करने से रक्त अतिसार में लाभ होता है ।


4. संग्राहनी में कच्चे बेल फल के फायदे (kachche bael fruit ke fayde):



  • कच्चे बेल फल को आग पर भून कर, इसका गूदा निकालकर, इसकी 10 से 20 ग्राम मात्रा में थोड़ी शक्कर या शहद मिलाकर सेवन करने से संग्रह्नी में फायदा होता है ।

  • 10 ग्राम बेल गिरी का चूर्ण, 6 ग्राम सौंठ चूर्ण, व 6 ग्राम पुराना गुड लेकर खरल में पीस लें, इसकी 3 ग्राम मात्रा दिन में तीन बार छाछ के साथ सेवन करने से फायदा होता है ।


5. मूत्र संक्रमण में बेल के उपयोग (bael ke upyog):



  • बेल के गुदे को दूध के साथ पीस कर, इसे छान कर चीनी के बूरे के साथ मिलाकर सेवन करने से पुराना मूत्र संक्रमण ठीक हो जाता है, अगर पेशाब रुक रुक कर होती हो तो इसमें भी बहुत लाभ करता है ।

  • बेल के 6 ग्राम ताजे पत्ते, 3 ग्राम सफेद जीरा व 6 ग्राम मिश्री को मिला का कूट लें, इस मिश्रण को खाकर ऊपर से पानी पीने से पूरी तरह से लाभ मिल जाता है । इसे खाने से मूत्र के अनेक रोग दूर हो जाते हैं ।

  • बेल की जड़ की 20 से 25 ग्राम मात्रा को रात में कूट कर, 500 ग्राम पानी में भिगो कर रख दे, सुबह इसे मसलकर, छानकर इसमें थोड़ी मिश्री मिलाकर पीने से मूत्र में जलन आदि की शिकायते दूर हो जाती हैं।


6. रक्तार्श में बेल के फायदे (bael ke fayde):




  • रोगी को मस्सों में दर्द हो तो बेल की जड़ का क्वाथ बनाकर हल्का गरम होने पर इसमें रोगी को इसमें बैठाने से शीघ्र ही दर्द दूर हो जाता है ।



  • बेल गिरी के चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर इसकी चार ग्राम मात्रा ठंडे जल के साथ सेवन करने से शीघ्र फायदा होता है ।


7. मधुमेह में बेल के पत्तों का उपयोग( bael ke patte ka upyog):



  • रोज प्रातःकाल 10 ग्राम पत्तों के रस का सेवन करने से मधुमेह में फायदा मिलता है ।



  • बेल के पत्ते 10 नग, नीम के पत्ते 10 नग, तुलसी के पत्ते 5 नग, तीनों को पीस कर गोली बना ले, इसका नित्य प्रातः काल के साथ सेवन करने से शुगर में लाभ होता है ।

  • बेल के ताजे पत्तों के 10 से 20 नग को पीस कर इसमें 5 से 7 कालीमिर्च कूट कर मिला लें, इसको सुबह खाली पेट पानी के साथ सेवन करने से उम्मीद से अधिक लाभ होता है ।


8. कमजोरी दूर करने में बेल के उपयोग( Bael ke upyog):



  • बेल गिरी, असगंध, व मिश्री बराबर मिलाकर चूर्ण बना लें, इसका एक चौथाई केसर का अच्छा चूर्ण मिलाकर इसकी चार ग्राम मात्रा सुबह शाम खाकर ऊपर से दूध पीने से लाभ होता है । कमजोरी दूर होती है।



  • बेल गिरी के चूर्ण को मिश्री मिले दूध के साथ सेवन करने से कमजोरी, शारीरिक दुर्बलता,  खून की कमी  दूर होती है  ।


  • बेल के पत्ते के चूर्ण को 3 ग्राम मात्रा में थोड़ा सा शहद मिलाकर पीने से धातु की दुर्बलता दूर होती है ।


विशेष:


बेल का उपयोग पेट के रोगों के लिए बहुत ही लाभकारी है । बेल की तासीर ठंडी होती है । शरीर की दुर्गंध दूर करने के लिए  बेल के पत्तों का उपयोग किया जाता है । अगर शरीर में कहीं कांटा दस जाय तो बेल के पत्ते की पुल्टिस बनाकर बांधने से कांटा गलकर नष्ट हो जाता है । बेल के पत्तों का क्वाथ बनाकर पीने से ज्वर व सूखी खांसी में भी लाभ होता है ।


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Tuesday, 5 February 2019

ग्रीन टी पीने के 14 फायदे, उपयोग एवम् नुकसान ( Green tea peene ke fayde upyog evam nuksan)

ग्रीन टी का उपयोग (green tea ka upyog)


आज इस लेख के ज़रिए हम आपको ग्रीन-टी क्या है, ग्रीन टी के उपयोग, ग्रीन-टी पीने के फायदे और ग्रीन-टी के नुकसान के बारे में बताने जा रहे हैं । चाय पीने वाले लोगों में बीस प्रतिशत लोग ग्रीन टी पीते है । पुराने समय से ही भारत में इसे औषधी के रूप में प्रयोग किया जाता है । इंडियन मेडिकल साइंस में ग्रीन-टी या काे काफी फायदेमंद माना जाता है ।




Green tea
Green tea



ग्रीन-टी पीने के फायदे ( green tea peene ke fayde ) :



ग्रीन-टी में उपस्थित पोषक तत्व स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होते हैं । ग्रीन-टी वज़न कम करने के लिए फायदेमंद होती है । इसमें मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट, मेटाबॉलिज़्म को बढाकर वज़न कम करने में सहायता करते है । इसमें मौजूद सक्रिय यौगिक, फैट बर्निंग हॉर्मोन को प्रभावित करते हैं ।

यूके में हुए एक अध्ययन में पाया गया है कि ग्रीन-टी पीने से व मध्यम  व्यायाम करने से फैट ऑक्सीडेशन बढ़ता है, और मोटापे से बचाता है । वहीं, इंसुलिन संवेदनशीलता में भी सुधार लाता है। ग्रीन-टी में मौजूद ईजीसीजी (EGCG) जादू का काम करता है । ग्रीन-टी से मेटाबॉलिक रेट दर बढ़ जाता है, और हर समय  थोड़ी न थोड़ी कैलोरी कम होती है । यहां तक कि जब आप सो रहे होते हैं, तब भी कैलोरी का लॉस होता है ।

यह भी पढ़े: भांग के पत्ते के फायदे, 6 महत्वपूर्ण रोगों के उपचार व नुकसान


1. मुंह के रोग में ग्रीन-टी ( green tea peene ke fayde ):



अध्ययनों के अनुसार, जो लोग ग्रीन-टी का सेवन करते हैं, उनके मुंह में किसी प्रकार का संक्रमण नहीं होता । एक भारतीय अध्ययन में बताया गया है कि किस प्रकार ग्रीन-टी, मसूड़ों के लिए वरदान है । ग्रीन-टी, बैक्टीरियल रोग व दांतों की मैल को नियंत्रित कर दांतों को खराब होने से बचाती है । हरी चाय में फ्लोराइड भी होता है, जो दांतों को खराब होने से बचाता है। यह चाय स्ट्रेप्टोकोकस म्यूटन्स (Streptococcus mutans) नामक बैक्टीरिया से भी लड़ती है, जो आमतौर पर दांतों में पाए जाते हैं ।





ग्रीन टी
Green tea



2. डायबिटीज़ के लिए ग्रीन-टी पीने के फायदे ( green tee pine ke fayde)



ग्रीन-टी शरीर की कोशिकाओं को संवेदनशील करती है, ताकि वो चीनी को अच्छे से हजम कर सकें, और मधुमेह के प्रभाव को कम कर सकें । एक अध्ययन के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति पूरे दिन में छह या उससे अधिक कप ग्रीन-टी का सेवन करे, तो टाइप-2 डायबिटीज़ का ख़तरा कुछ प्रतिशत तक कम हो सकता है ।  इस बारे में अपने डॉक्टर से सलाह लेना भी ज़रूरी है, क्योंकि एक दिन में 6 कप ग्रीन-टी पीना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है ।

ग्रीन-टी, एंजाइम करियाशीलत को रोकता है, जिससे रक्त प्रवाह में अवशोषित चीनी की मात्रा कम हो जाती है । ग्रीन-टी खासकर के टाइप-2 डायबिटीज़ में ज़्यादा फायदेमंद है, क्योंकि इसमें एंटी-डायबिटिक गुण होता हैं ।


3. कोलेस्ट्रॉल के लिए ग्रीन-टी के फायदे ( green tea Peene ke fayde):



हार्वर्ड मेडिकल कॉलेज की एक रिपोर्ट में कहा गया है, कि ग्रीन-टी दिल की बीमारी से रक्षा कर सकता है । ग्रीन-टी हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रित करता है । जिससे ह्रदय रोग होने की आशंका कम हो जाती है, क्लस्ट्रोल के स्तर को कम कर देती है । अधिकांश अध्ययन ग्रीन-टी कैप्सूल के उपयोग पर किए गए हैं, लेकिन ग्रीन टी भी काफी फायदेमंद हो सकती है ।



Green tea
ग्रीन टी



4. रोगप्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती है ग्रीन टी:



ग्रीन टी में मौजूद कैटेकिन (catechins) रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में मुख्य भूमिका निभाता है, चाय इम्युनिटी को बढ़ाकर एंटीऑक्सीडेंट्स का काम करती है । ग्रीन-टी में ईजीसीजी रेगुलेटरी मौजूद होता है, और इम्यून सिस्टम को नियंत्रित करता है ।

यह भी पढ़े: अमरूद (Guava) व अमरूद के पत्ते से पेट व अनेक रोगों का इलाज



5. पाचन के लिए ग्रीन-टी (green tea for digetion in Hindi)



ग्रीन-टी में मौजूद एंटी-ऑक्सीडेंट पाचन क्रिया को नियमित करता है। ग्रीन-टी में मौजूद कैटेकिन पाचन एंजाइम की क्रिया को धीमा करता है । इसका अर्थ है कि आंत पूरी कैलोरी को अवशोषित नहीं करती, जिससे वज़न कम करने में फायदा होता है । ग्रीन-टी में विटामिन-बी, सी और ई भी होता है,


6. कैंसर में ग्रीन-टी के फायदे (Green tea ke fayde )



एक और अध्ययन के अनुसार, ग्रीन-टी कई प्रकार के कैंसर (फेफड़े, त्वचा, स्तन, लिवर, पेट और आंत) से हमारी रक्षा करती है । ग्रीन-टी  कैंसर कोशिका के प्रसार को रोकती हैं । ईजीसीजी स्वस्थ कोशिकाओं को प्रभावित किए बगैर कैंसर कोशिकाओं को खत्म करता है, इस यह कैंसर के इलाज में मददगार साबित हो सकता है, कुछ शोध के अनुसार कैंसर के इलाज के समय एक दिन में चार कप ग्रीन-टी पीना लाभकारी साबित हो सकता है, लेकिन ऐसा करने से पहले चिकित्सक से परामर्श लेना ज़रूरी है ।


7. ब्लड प्रेशर में ग्रीन-टी के उपयोग ( green tea ke upyog ):



ऑक्सीडेटिव तनाव से खून में फैट बढ़ता है, जिससे धमनियों में सूजन आ जाती है और यह उच्च रक्तचाप का कारण बनता है वहीं, ग्रीन-टी पीने से इसमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट सूजन को कम करके रक्तचाप को कम करने में सहायता करता हैं,  यहां तक कि ग्रीन-टी हानिकारक कोलेस्ट्रॉल को भी कम करता है, जिससे ह्रदय संबंधी परेशानियां कम होती हैं, ग्रीन-टी के सेवन से ब्लड प्रेशर नियंत्रित हो सकता है, लगातार सेवन करने से रक्तचाप में सुधार होता है । इसके अलावा, कम रक्तचाप के मरीज़ों में कोरोनरी हृदय रोग और दिल के दौरे का ख़तरा कुछ प्रतिशत तक कम हो सकता है ।




green tea in hidi
green tea

 

8. गठिया में ग्रीन - टी के उपयोग ( Green tea ke upyog ):



ग्रीन-टी में ईजीसीजी के एंटीऑक्सीडेंट गुण के कारण सूजन और गठिया दर्द को कम करती हैं । ग्रीन-टी हड्डियों के स्वास्थ्य में सुधार लाती है और ऑस्टिओ आर्थइराइटिस (Osteoarthri tis) में गुणकारी होती है, ग्रीन टी में मौजूद ईजीसीजी आर्थराइटिस पर काफ़ी प्रभावी होता है। ग्रीन-टी  रूमेटोइड गठिया (rheumatoid arthritis) में सूजन को कम करके आराम पहुंचाती है


9. तनाव में ग्रीन-टी के लाभ ( green tea ke labh ):




ग्रीन-टी में उपस्थित कैफीन (caffeine) तनाव को कम करने में अहम भूमिका निभती है । एक दिन में तीन से चार कप ग्रीन-टी का सेवन तनाव को कम कर सकता है ।


10. मानसिक स्वास्थ्य में ग्रीन-टी (Green tea ke upyog ) :



आपको जानकर आश्चर्य होगा, लेकिन यह सच है कि ग्रीन-टी आपके मानसिक स्वास्थ के लिए बहुत फायदेमंद  है । ग्रीन-टी में कैफीन होता है, कैफीन मस्तिष्क के लिए अवरोधक न्यूरोट्रांसमीटर की गतिविधि को रोकता है । जिस कारण यह न्यूरॉन्स में सुधार कर मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ाता है, इससे यादाश्त तेज़ होती है, और ब्रेन फंक्शन भी ठीक से होने लगता है,

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11. अल्ज़ाइमर के खतरे को कम करती है ग्रीन-टी:



ग्रीन-टी के सेवन से कई मानसिक बीमारियों का जोखिम भी कम होता है । अल्ज़ाइमर और पार्किंसंस उन्हीं कुछ बीमारियों में से एक है । उम्र के साथ होने वाली मानसिक बीमारी अल्ज़ाइमर बहुत ही आम होती जा रही है । इसमें दिन-प्रतिदिन व्यक्ति की याददाश्त कमज़ोर होने लगती है, और निर्णय लेने की क्षमता कम होने लगती है । वहीं, पार्किसन में मनुष्य के हाथ-पांव कांपने लगते हैं । ये दोनों बीमारियां उम्र होने पर होती हैं, लेकिन कभी-कभी यह छोटी उम्र में भी होती हैं और उम्र के साथ-साथ बढ़ती चली जाती है । ऐसे में ग्रीन-टी का सेवन इन दोनों बीमारी के खतरे को कम करती है ।


12. मोटापा कम करने में ग्रीन टी के फायदे ( green tea ke fayde ):



ग्रीन टी जिसे हरी चाय भी कहते है, मोटापा कम करने के लिये बहुत ही उपयोगी  है । अगर आप अधिक वजन और पेट की चर्बी से तंग आ चुके है, तो सुबह व रात को सोते समय एक एक कप ग्रीन टी का सेवन करें । रोजाना पी जाने वाली चाय की जगह अगर हम ग्रीन टी पीना शुरू कर दे तो ये वजन कम कर शरीर को फुर्तीला बनाने में फायदा करती है । ग्रीन टी पीने से मेटाबॉलिज्म रेट बड़ जाता है । मेटाबॉलिज्म रेट बढ़ने से वजन कम होता है ।


विशेष:



ग्रीन टी के फायदे के अलावा कुछ ग्रीन टी के नुकसान भी हैं । ग्रीन टी में कैफीन की मात्रा कॉफी की अपेक्षा बहुत कम होती है, लेकिन  फिर भी दिन भर में ग्रीन टी का अत्यधि‍क सेवन करने से अनेक बीमारियां सकती है। इससे पेट की समस्या, अनिद्रा, उल्टी, दस्त आदि हो सकते हैं । दिन में दो कप सेज्यादा ग्रीन टी पीना गर्भवती महिलाओं के लिए नुकसान दायक हो सकता है ।

ग्रीन टी का अधि‍क सेवन करने से भूख  कम हो जाती है, जिस कारण व्यक्ति सही डाइट नहीं ले पाता और शरीर को जरूरी मात्रा में पोषक तत्व नहीं मिल पाते। जिससे व्यक्ति कमजोर हो जाता है । इस लिए ग्रीन टी का सेवन नियमित मात्रा में ही करें ।


धन्यवाद ।


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Saturday, 2 February 2019

गन्ने का रस पीने के फायदे, उपयोग व नुकसान (Ganne ke ras peene ke fayde evam upyog)

Ganna
गन्ने के पेड़


ईख का परिचय:


ईख के पौधे से सभी परिचित हैं । इसे गन्ने के नाम से भी जाना जाता है । गन्ना भारत की मुख्य फसलों में से एक है, इसे उष्ण प्रदेशों में उगाया जाता है । इसकी लाल, सफेद, काली आदि अनेक जातियां पाई जाती हैं । गन्ने का तना 6 से 12 फिट ऊंचा गोलाकार, स्थूल, तथा ग्रंथि युक्त होता है । गन्ने के रस में सुक्रोज, राल, वसा, लवाब, व जल होता है। गन्ने में कैलशियम ओगजेलेट पाया जाता है। ईख Poaceae कुल का पौधा है। गन्ने का विज्ञानिक नाम Saccharum officinarum । अंग्रेजी में इसे sugarcane के नाम से जाना जाता है। इसे भाषा के अनुसार अलग अलग नामों से जाना जाता है ।

हिंदी        : ईख, गन्ना

संस्कृत     : इक्छू, भुरिरस, असिपत्र

गुजरती    : शेरडी

मराठी।    : अंस

तेलगु       : चेरुकु

फारसी     : नैश्कर


गन्ने के गुण:



कच्ची ईख कफ कारक व प्रमेह उत्पन्न करने वाली होती है । आधी पकी ईख मीठी, वात हर, पित्तनशक होती है । पकी हुई ईख बलवर्धक, तथा रक्तपित्त नाशक होती है । गन्ने से निकला गुड मधुर, अग्निजनक, रूचिकारक व पुष्टि वर्धक होता है ।


गन्ने के घरेलू नुस्खे(Ganne ke Garelu Nuskhe) :



 1. अरुचि में गन्ने के रस के फायदे (ganne ke ras ke fayde) :



ईख के रस को आग पर गरम करके एक उफान आने दें । इसे थोड़ा ठंडा कर चीनी मिट्टी या कांच के बर्तन में भरकर रख लें । एक सप्ताह तक रखने के बाद इसे प्रयोग में लाएं । इसकी 1 0 से 20 ग्राम मात्रा पर्याप्त है । यह अरुचि को खतम करता है । यह उत्तम पाचक व स्वादिष्ट होता है ।

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गन्ने
Ganne


2. पीलिया में गन्ने के रस के फायदे (ganne ke ras ke fayde ):



ईख के टुकड़े करके इन्हे रात को बाहर या छत के ऊपर खुले में रख दें । सुबह उठकर कुल्ला करने के बाद इसका रस चूस कर सेवन करें । चर या पांच दिन में अत्यधिक लाभ होगा ।


3. पेट में दर्द में गन्ने के रस के उपयोग (ganne ke ras ke upyog):



गन्ने के रस की 5 किलो ग्राम मात्रा को चिकनी मिट्टी के बर्तन में भर, कर इसका मुंह कपड़े से बंद करके रख दें । एक सप्ताह बीत जाने के बाद इसे छान लें, व किसी बर्तन में भरकर रख दें । एक महीने बाद इसके सेवन करना है । इसकी दस ग्राम मात्रा, 2 ग्राम सेंधा नमक मिलाकर व थोड़ा ग्राम कर पीने से पेट का दर्द तुरंत ठीक हो जाता है ।


4.मूत्र विकार में ईख के उपयोग (ikh ke upyog):



  • ईख के ताजे रस को भर पेट पीने से मूत्र खुलकर होता है । इससे मूत्र संबंधी सभी विकार दूर हो जाते हैं ।



  • गन्ने की ताजी जड़ लेकर इसे उबालकर क्वाथ बनाकर पीने से मूत्र की जलन शांत होती है । एवम् मूत्र संबंधित विकार दूर हो जाते हैं ।

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5. जुकाम में गन्ने का रस पीने के फायदे (ganne ke ras pine ke fayde):



ईख का गुड 10 ग्राम व 40 ग्राम दही, मिर्च का चूर्ण 3 ग्राम, तीनों को मिलाकर प्रातः कल लगातार 3 दिन लेने से बिगड़ा हुआ जुकाम व नाक मुंह से दुर्गं आना, गला पक जाना, खांसी युक्त जुकाम खत्म हो जाता है ।


Ganna juice
गन्ने का जूस


6. अन्य रोगों में गन्ने के फायदे (ganne ke ras ke fayde):



1. ईख का पुराना गुड़ अदरक के साथ सेवन करने से कफ का नाश हो जाता है ।

2. ईख के रस को नाक में डालने से नकसीर में लाभ होता है ।

3. ईख का ताजा रस के साथ जों के सत्तू का प्रयोग करने से पीलिया रोग में फायदा होता है ।

4. गन्ने के रस को उबालकर, इसको ठंडा कर सेवन करने से अफरा ठीक हो जाता है ।

5. भोजन करने से पूर्व गन्ने के  रस का सेवन करने से पित्त में फायदा होता है ।

6.  गन्ने के रस को शहद में मिलाकर सेवन करने से पित्त के कारण होने वाली जलन समाप्त हो जाती है ।

7. गन्ने के गुड़ की पपड़ी खाने से हृदय मजबूत होता है ।

8. गन्ने के रस में आंवला और शहद मिलाकर सेवन करने से मूत्र संक्रमण मिटता है ।

9. खाना खाने से पूर्व ईख के रस का सेवन करने से खाना जल्दी पच जाता है ।

10. ईख के पुराने गुड़ को सौंठ के साथ पीने से वात संबंधी विकार दूर हो जाते हैं ।

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विशेष:



ऊपर बताए नुस्खों के अलावा ईख का रस अनेक रोगों के काम आता है । गन्ने की तासीर तंदी होने के बाबजूद गन्ने के रस से सिर दर्द , श्वास, रकतिसार, आदि का भी उपचार किया जा सकता है । ईख के गुड़ पांच ग्राम में अदरक या सौंठ या हरड़  इनमें से किसी एक के 5 ग्राम चूर्ण को मिलाकर, इसकी 10 ग्राम मात्रा सुबह शाम दूध के साथ सेवन करने से खांसी, श्वास, मुंह के रोग, गलरोग, जुकाम, अरुचि, बवासीर, आदि रोगों के विकार दूर हो जाते हैं । गन्ने का रस बहुत एनर्जी देता है, ईख का रस पीने से चुस्ती फुर्ती बनी रहती है ।

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