Sunday, 12 January 2020

सफेद मूसली के फायदे एवम् नुक़सान( safed musli ke fayde evam nuksan)

Safed musli ka paudha
Safed musli ka paudha

सफेद मूसली के फायदे एवं उपयोग (safed musli ke fayde evam upyog)


सफेद मूसली एक पौधा है सफेद मूसली का उपयोग आयुर्वेद में बड़े पैमाने में किया जाता है क्योंकि इससे अनेक रोगों का उपचार किया जाता है ।  सफ़ेद मुसली में विटामिन,  प्रोटीन, स्टेरॉयड, कार्बोहाइड्रेट और पॉलीसैकराइड्स आदि प्रयाप्त मात्रा में होता है और यह सबसे कीमती जड़ी बूटी मानी जाती है । यह बहुत सी बिमारियों के इलाज में प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा इसे दूसरी चीजों के साथ मिलाकर भी औषधि तैयार की जाती है।


मुख्य रूप से सफेद मूसली का उपयोग सेक्स सम्बन्धित रोगों के लिए किया जाता है। मर्दों में शुक्राणुओं की कमी होनें पर इसका प्रयोग करते है। सफेद मूसली पौधे की जड़ में अनेक प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं। जैसे -  प्रोटीन, सैपोनिन, फाइबर, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम आदि । इसके अतिरिक्त सफेद मूसली की जड़ में ग्लूकोस, सुक्रोज भी पाए जाते हैं।


सफेद मूसली के फायदे (safed musli ke fayde)



कुछ विशेष फायदे निम्न प्रकार हैं। सफेद मूसली आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को भी ताकत प्रदान करती है, जिससे बाहरी रोगों से शरीर की रक्षा होती है । सफेद मूसली मर्दों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की मात्रा को भी  बढ़ाता है। इससे एड्रेनल ग्रंथि ठीक से कार्य करती है ।


1. सफेद मूसली रोग प्रतिरोधक छमता को बढ़ाती है: 


ऐसा माना जाता है कि सफेद मूसली शरीर की रोगप्रतिरोधक छमता में सुधार कर इसे मजबूत बनाता है। यह रोगों से लड़ सकता है, जिससे शरीर मजबूत हो सकता है। सफेद मूसली आपके पूरे स्वास्थ्य को बढा कर  शरीर की कमजोरी का मुकाबला करता है।





2. यौन रोगों में सफेद मूसली के फायदे(safed musli ke fayde):



सफेद मूसली का उपयोग यौन समस्याओं जैसे कि शीघ्रपतन एवम् स्तंभन दोष के उपचार के लिए किया जाता है। यौन कामेच्छा वृद्धि के लिए यह जड़ी बूटी एक टॉनिक के रूप में भी काम करती है। 


3. मुंह के इन्फेक्शन में सफेद मूसली के फायदे(safed musli ke fayde): 



सफेद मूसली की जड़ का पाउडर और शुद्ध मक्खन (घी) में तल कर सेवन करें इससे गले और मुंह के संक्रमण को कम करने में सहायता मिलती है।


safed musli ki jad, safed musli ka pawder
सफेद मूसली की जड़


4. डायरिया रोग में सफेद मूसली के उपयोग(safed musli ke upyog):



डायरिया में सफेद मूसली का फायदा यह है कि जो दस्त और पेचिश जैसे पाचन संबंधी समस्याओं से पीड़ित है। उन्हें सफ़ेद मुसली के सेवन करने से इस रोग का  प्रभावी उपचार किया जा सकता है। यहां तक ​​कि शिशुओं को दस्त का इलाज करने के लिए सफेद मूसली की एक छोटी सी खुराक दी जा सकती है।



5. जोड़ों के दर्द में सफेद मूसली के फायदे (safed musli ke fayde): 



सफ़ेद मुसली में ऐसे गुण होते हैं जो जोड़ों के दर्द, गठिया जैसे रोगों के उपचार में फायदा करता है । यह जोड़ों के फ्लूड के उत्पादन को बढ़ाता है और हड्डियों के क्षरण को कम करता है।



6. सफेद मूसली एंटीऑक्सीडेंट का कार्य करता है: 




सफेद मुसली को एक एंटीऑक्सिडेंट माना जाता है, यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में सहाइटा करता है है। यह शरीर से मुक्त कणों को समाप्त करता है,  यह आपको तनाव मुक्त करने और तनाव से संबंधित समस्याओं का इलाज करने में भी सहायता करता है।

7. मधुमेह में सफेद मूसली के फायदे( benefit of safed musli in sugar in hindi): 




सफेद मूसली एक ताकतवर एंटी- ऑक्सिडेंट है । यह रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करके मधुमेह के रोग की चिकित्सा में उपयोगी है। जबकि आयुर्वेद के अनुसार यह माना जाता है कि इस जड़ी बूटी का उपयोग केवल पतले मधुमेह रोगियों द्वारा किया जाना चाहिए।



8. शरीर को सुदृढ करने में सफेद मूसली की फायदे( safed musli ke fayde):  


सफेद मूसली मांसपेशियों की वृद्धि, नए उत्तकों का निर्माण में फायदा प्रदान करता है। इसमें ऐसा गुण होता है जो शरीर सौष्ठव में एक पूरक का काम करता है । सभी बॉडी बिल्डरों को सलाह दी जाती है कि वे अपने काम को नियमित करने, और शरीर बनाने के लिए इसका सेवन करें।



9. कम करनेवजन  में सहायक है(benefit of safed musli in weight loss in hindi):




अगर आप अपना वजन घटाना चाहते हैं तो सफेद मुसली का सेवन बहुत सहायता कर सकता है। यह पाचन तंत्र को ठीक रख कर चयापचय की क्रिया को बढ़ाता है। यह शरीर को शक्ति भी प्रदान करता है और थकान से छुटकारा पाने में सहायता करता है।



10. सफ़ेद मुसली का उपयोग (safed muli ka upyog)




सफेद मूसली का सेवन दिन में दो बार दूध के साथ किया जा सकता है। प्रति दिन इसकी 3-5 ग्राम की मात्रा काफी मानी जाती है।


स्तनपान कराने वाली महिलाओं पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह स्तनपान कराने वाली महिलाओं के दूध उत्पादन को बढ़ाता है और इसके कोई दुष्प्रभाव नहीं होते हैं।



सफेद मूसली का उपयोग करने के लिए कोई विशेष प्रतिबंध नहीं हैं। फिर भी इसका सेवन शुरू करने से पहले किसी चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।



सफेद मूसली की जड़, सफेद मूसली का पाउडर
सफेद मूसली


सफेद मूसली खाने के नुक़सान(safed musli khane ke nuksan)



सफेद मूसली के फायदों के अलावा कुछ नुकसान भी हो सकते हैं, इस लिए इसे उचित मात्रा में ही खाना चाहिए । इसके निम्न नुकसान हो सकते हैं ।



  • सफेद मूसली का सेवन यदि सही मात्रा में नहीं किया जाता है, तो वजन बढ़ने की संभावना रहती है। सेवन करने से पूर्व चिकित्सक से चर्चा करना अनिवार्य है।



  • इसे खाने के बाद पचने में समय लगता है, इसलिए पाचन तंत्र पर इसका असर पड़ सकता है।



  • कब्ज़ की समस्या हो सकती है।



  • कभी कभी भूख भी कम हो लगती  है।



  • सफेद मूसली तासीर में ठंडी होती है, इसलिए यह जुकाम और कफ की समस्या को पैदा सकता है।




  • त्वचा संबंधी परेशानियां हो सकती है।




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सफेद मूसली के उपयोग में सावधानियां 




  • बहुत अधिक सुरक्षित सफेद मूसली का सेवन अत्यधिक मात्रा में करने से शरीर में कुछ बदलाव हो सकते हैं, यही वजह है कि हमेशा निर्धारित मात्रा लेने के लिए कहा जाता है।


  • सफेद मुसली का सेवन आमतौर पर पानी या दूध के साथ किया जाता है। यह इन दोनों के साथ  सेवन करने की सलाह दी जाती है, शराब के साथ इसका सेवन करने का कोई हानिकारक प्रभाव हो सकते हैं।


  • सफ़ेद मुसली का दिन में दो बार सेवन करना पर्याप्त और प्रभावी है।


  • सफेद मूसली को भोजन के दो घंटे बाद लेना चाहिए


  • सफेद मूसली का सेवन पानी के साथ का सेवन कर सकते हैं। पानी के साथ सेवन करते समय ध्यान रखें कि पेट खाली हो 

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Saturday, 28 December 2019

क्या आप जानते है, सर्दी का वायरल संक्रमण क्या होता है और इसके उपाचार क्या है

Sardi, jukam, khaansi,
Viral infection



वायरल संक्रमण क्या होता है (what is the viral infection in hindi)




वायरल इंफेक्शन के लक्षण (viral infection ke lakshan)



सामान्यतः सर्दी में वायरल संक्रमण होता है, जो गले, नाक को प्रभावित करता है। इस रोग में बीमारी के लक्षण आमतौर पर दो या तीन दिन बाद शुरू होते हैं जब व्यक्ति वायरस के संपर्क में आ चुका होता है और इसमें बंद नाक, सिरदर्द, खांसी, छींक, गले में खराश और कभी-कभी बुखार होता है। ये लक्षण दो सप्ताह या उससे अधिक समय तक बने रह सकते हैं, वर्तमान में, इस वायरल संक्रमण (viral infection in hindi) का कोई पूर्ण असरकारक चिकित्सा उपचार नहीं है, लेकिन आम सर्दी के लिए कई घरेलू उपचार हैं। आइए आपको इस बारे में बताते हैं ।





सर्दी के दिनों में वायरस की वजह से बुखार, सर्दी, खांसी, गले में इन्फेक्शन, छाती में संक्रमण, न्यूमोनिया का खतरा ज्यादा हो जाता है। कॉमन कोल्ड या जुकाम, नाक बंद होना, छींके आना इसमें आम बात होती है । इसके फैलने का कारण वातावरण में उपस्थित वायरस है जो एक-दूसरे में सांस और वायु द्वारा, छींकने और खांसने पर फैलता है। बच्चों में वायरल संक्रमण (viral infection in hindi) की वजह से डायरिया होने का खतरा बहुत रहता है। कभी-कभी यह बड़ों को भी होता है। मुंह और नाक के द्वारा यह वायरस शरीर के अंदर पहुंचता है ।



सर्दी के वायरल संक्रमण के घरेलू नुस्खे( viral infection in hindi) 



यह खुद पर निर्भर करता है कि हम कैसे खुद को अंदर से मजबूत बना सकते हैं, और कैसे बीमारियों का सामना करने के लिए अपने को मजबूत बना सकते हैं । सर्दी खांसी की बीमारी कमजोर रोग प्रतिरोधक छमता के कारण होती है । इस लिए अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाना काफी आवश्यक है । बीमारियों से लडने में अमर खान पान भी काफी मायने रखता है । वायरल इनफेक्शन के दौरान सूप, अदरक शहद, और नींबू का सेवन करना महत्व पूर्ण है । प्रतिदिन योग और प्राणायाम भी करते रहना आवश्यक है । इससे बचाव के लिए निम्न उपाय करना आवश्यक है ।


सर्दी, जुकाम, खांसी
तरल पदार्थ


1. तरल पदार्थों का सेवन करें



जब कभी भी कोई बीमार होता है तो बहुत से तरल पदार्थ पीने की आवश्यकता होती है  इस व्यक्ति हाइड्रेटेड रहता है । ठंड में वायरस नाक के क्षेत्रों पर हमला करता है जिससे शरीर से बलगम को बाहर निकालती है । तरल पदार्थ पीने से बलगम पतला रहता है इसलिए यह आसानी से अपने आप बाहर निकाल जाता है। ग्रीन टी, ताज़े नींबू का रस, और पानी की भरपूर मात्रा लेने की कोशिश करें। अल्कोहल, कॉफ़ी और सोडा से बचें क्योंकि ये तरल पदार्थ शरीर को हाइड्रेशन से रोकता हैं।



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वायरल इंफेक्शन
व्यायाम



2. व्यायाम वायरल संक्रमण नियंत्रित करता है 



शारीरिक गतिविधि या व्यायाम नाक के रास्ते को खोलने और कंजेशन को तोड़ने में सहायता कर सकता है, और यह आपको बेहतर नींद में भी सहायता कर सकता है।  बुखार या जो लोग शरीर के दर्द का सामना कर रहे हैं उनके अंदर वायरल की संभावना रहती हैं, इससे पहले कि वायरल संक्रमण हो व्यायाम करते रहे ।



Viral infection in Hindi
Lemon tea



3. अदरक और नींबू की चाय पीने से वायरल संक्रमण ठीक करता है



नींबू और अदरक की चाय पिएं, इस चाय में पुदीना भी डाल ले तो और उत्तम होगा।


अदरक जुकाम के लिए अतिउत्तम है। यह न केवल आपके चाय में स्वाद बढ़ता है, बल्कि इसमें ठंड से त्रस्त शरीर के लिए फायदेमंद भी है, इसमें शक्तिशाली सूजन-रोधी गुण भी होते हैं। अदरक सिर दर्द को कम करने, संक्रमण से लड़ने और आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करने में सहायता कर सकता है। अदरक की चाय पीने से जुकाम या फ्लू से पीड़ित लोगों को फायदा होता है। अदरक गले में खराश को दूर करने में सहायता करता हैं और यह राइनोवायरस को भी मार सकता है। अदरक आपकी खांसी के लिए भी अच्छा है। अपनी अदरक की चाय में नींबू, या शहद मिला कर भी पाया का सकता है।


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4. गर्म पानी से स्नान करना  वायरल संक्रमण में लाभदायक है



गर्म पानी से स्नान करने से वायरस समाप्त तो नहीं होता है, लेकिन यह जुकाम से जुड़े परेशानी वाले लक्षणों को दूर करने में सहायता करता है।  यदि आपको सिरदर्द है, तो एक गर्म पानी से स्नान इस दर्द को कम कर सकता है ।







5. गरम पानी की अफरा लें



गर्म भाप का अफ़ारा लेने से, छाती के कंजेशन को कम करने में सहायता मिलती हैं। यह प्रक्रिया आपके नाक मार्ग को भी साफ करती है, जिससे सांस लेने में आसानी होती है। भाप लेने से मांसपेशियों में दर्द से राहत और नींद में सुधार होता हैं।






6. आराम अवश्य करें




आराम करना एक असरकारक तरीकों में से है। कभी-कभी, यह सिर्फ आपके शरीर को स्वस्थ करने के लिये पर्याप्त हो सकता है। यदि संभव हो तो, एक या दो दिन की छुट्टी लें, काम के तनाव के कारण ठीक होने में रुकावट आ सकती है। कम से कम आठ घंटे की नींद अवश्य लें, और समय पर सोने का प्रयास करें।



वायरल संक्रमण के अन्य आयुर्वेदिक नुस्खे(ayurvedic treatment of viral infection in hindi)




  • एक कप पानी में 5 से 6 पत्ते तुलसी के उबालकर दिन में 2 से 3 बार पीने से जुकाम से राहत मिलती है और वायरल संक्रमण कम होता है ।




  • खांसी और गले में खराश होने पर आधा चम्मच अदरक के रस में आधा चम्मच शहद मिला कर दिन में तीन बार चाटने से आराम मिलता है ।




  • तीन चार लोग को पीस कर या गर्म कर दूध में डाल कार सोते समय पीने से जुकाम तथा खांसी ठीक होता है ।




  • एक चम्मच शहद दो चुटकी कालीमिर्च के पाउडर मिला कर दिन में 3 से चार बार चाटने से गला साफ होता है और वायरल इंफेक्शन ( viral infection in hindi) में सुधार होता है ।




  • आधे गिलास ग्राम पानी में एक चुटकी हल्दी एक चुटकी सेंधा नमक, तीन चार बूंद नींबू का रस डाल कर  दिन में 3 से चार बार लेने से जुकाम में बहुत आराम मिलता है ।



आशा करते हैं वायरल संक्रमण से संबंधित यह लेख वायरल संक्रमण क्या होता है( what is the viral infection in Hindi) और इसके उपाय, आप को अवश्य पसंद आया होगा अगर पसंद आया हो तो इसे शेयर जरूर करें ।

धन्यवाद ।

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Friday, 13 December 2019

चाय पीने के फायदे और नुकसान ( chai pine ke fayde aur nuksan)



चाय पीने के फायदे और नुकसान ( chai pine ke fayde aur nuksan)




बहुत से लोग खाने साथ चाय पीते हैं, शायद आप भी ऐसा करते हैं। वैसे तो कई रिसर्च व जानकार चाय को बॉडी के लिए नुकसान दायक बताते हैं लेकिन कुछ रिसर्च में सामने आया है कि चाय आपकी बॉडी के पाचन के लिए अच्छा होता है और कुछ का मानना ​​है कि चाय में जो कैफिन होता है वह पौष्टिकता सोखने में बाधा उत्पन्न करता है।



जानकारी के मुताबिक कई अध्ययनों से साबित हुआ है कि चाय में मौजूद फेनोलिक नाम का तत्व आयरन को सोखने में बाधा उत्पन्न करता है। इसलिए इस बात की सलाह दी जाती है कि अगर कोई आयरनयुक्त खाद या विटामिन सी रिच फूड ले रहा है तो उसके दौरान चाय पीने से आयरन एबसोब्शन में बाधा उत्पन्न होगी। जिन लोगों के बॉडी में आयरन की कमी है उनके खाने के दौरान चाय पीने से व भी परेशानी होगी क्योंकि चाय में मौजूद टेनन आयरन के अवशोषण में बाधा पैदा होती है।






इसी के साथ चाय की पत्ती में कुछ ऐसे तत्व मौजूद होते हैं जो कि खाने के प्रोटीन के साथ मिलते हैं तो प्रोटीन कठोर हो जाता है और उससे आपको पाचन में कठिनाई आती है। इसी के साथ ही चाय पीने के समान भी कई नुकसान होते हैं, चाय में कैफीन की मात्रा होती है जिससे ब्लड प्रेशर होने की समस्या बढ़ जाती है।



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Sunday, 8 December 2019

सूरजमुखी के बीज के फायदे एवम् उपयोग ( surajmukhi ke beej ke fayde evam upyog)

Surajmukhi ke beej
Surajmukhi ke beej


सूरजमुखी के बीज के फायदे एवम् उपयोग(surajmukhi ke beej ke fayde evam upyog)



सूरजमुखी के बीज( surajmukhi ke beej), स्वास्थ्य के लिए बहुत ही फायदेमंद है । सूरजमुखी के बीजों का सेवन करने से हार्ट अटैक का खतरा कम हो जाता है, कोलेस्‍ट्रॉल में कमी आती है, त्‍वचा में चमक आती है एवम् बालों को स्वस्थ रखता है। सूरजमुखी के बीज विटामिन बी से भरपूर होते हैं और फॉस्फोरस, मैग्नीशियम, लोहा, कैल्शियम, पोटेशियम, प्रोटीन और विटामिन ई की अच्छी मात्रा होती हैं । इसमें खनिज, जस्ता, मैंगनीज भी पाये जाते हैं । 



जस्ता, सूरजमुखी के बीज का एक अच्छा प्राकृतिक स्रोत और प्रतिरक्षा बूस्टर हैं। यह हृदय रोग से बचाने में भी सहायता करता हैं ।



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सूरजमुखी की पहचान यह है कि यह दिनभर सुरी के चारो और गुमता रहता है, जिस दिशा में सुरी होता है सूर्यमुखी का पुष्प उसी दिशा में मुंह कर लेता है । इसके फूल सुबह सूर्य निकलने पर खिलते है तथा सूर्य अस्त होने पर शाम को मुरझा जाते हैं । सूरज मुखी के फूल पीले, बेगनी तथा सफेद रंग के होते हैं, बैगनी रंग का सूरजमुखी मुख्यता बिहार, उड़ीसा, गुजरात तथा दक्षिण भारत में पाया जाता है । सभी प्रकार के सूरजमुखी के गुण धर्म एक जैसे होते हैं ।



Surajmukhi ke beej
Surajmukhi ke phool



सूरजमुखी का पौधा 1 से 4 फुट ऊंचा होता है। सूरजमुखी के फूल के बीच भाग में बीज भरे रहते हैं, सूरज मुखी की पौधों का रोपण बीज द्वारा ही होता है ।



सूरजमुखी के रासायनिक संगठन




ताजे पौधे को कुचलने से एक तेल प्राप्त होता है । सूरजमुखी का तेल के गुण और कर्म, लहसुन और सरसों के समान होते हैं सूरजमुखी के बीज में एक स्थिर तेल पाया जाता है  ।



सूरजमुखी के औषधीय गुण (suraj mukhi ke aushdhiye gun)




सूरजमुखी कफ और वात का शमन करता है । सूरजमुखी के पांचों अंगो फूल, बीज, पत्ते, तना, जड़ में एल्कोहल के सत्व में कैंसर विरोधी क्रिया पाई जाती है । तीनों प्रकार के सूरजमुखी स्थानिक प्रयोग से राई के समान क्रिया करते हैं और उत्तेजक होते हैं ।



सूरज मुखी का वेज्ञानिक नाम Helianthus annuus L. है । यह  Asteraccae  कुल पौधा है । अंग्रेजी में इसे sunflower, lady elewen के नाम से जानते हैं ।


इसे अलग अलग छेत्र में निम्न नामों से जाना जाता है ।



हिंदी -  सूरजमुखी


संस्कृति-सर्यवृत्त


मराठी- सूच्चफूला


फारसी - आफताब, गुले आफताब


अरबी- अक्ष्वान


बंगाली - सूरजमुखी



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1. कान के रोग में सूरज मुखी के फायदे (surajmukhi ke fayde)




कान में यदि कीड़े पड़ गए हों तो सूरजमुखी के पत्ते के रस में थोड़ा सा त्रिकूट अर्थात सौंठ, कालीमिर्च, पीपल का बराबर मात्रा में चूर्ण मिलाकर गुनगुना करके इसके दो बूंद कान में डालने से कान के कीड़े मर जाते हैं । कान के दर्द होने पर इसके पत्ते का स्वरस का प्रयोग किया का सकता है ।



2. पेट दर्द में सूरजमुखी के फायदे (surajmukhi ke fayde in hindi)




बच्चों के पेट दर्द में सूरजमुखी के फूल के रस की 10 बूंद दूध में मिलाकर पिलाने से पेट दर्द ठीक हो जाता है ।



Surajmukhi ka paudha
Surajmukhi ka paudha 




3. पेट साफ करने में सूरज मुखी के उपयोग( surajmukhi ke upyog)




सूरजमुखी के बीज का तेल एक बूंद नाभी पर लगाने से रेचन क्रिया होकर पेट साफ हो जाता है ।



4. गल गंड में सूरज मुखी के लाभ (surajmukhi ke labh)




सूरजमुखी की जड़ तथा लहसुन दोनों को पीस कर इसकी टिकिया बना लें, इस टिकिया को गले पर बांधने से  गलगण्ड फूट कर बहकर साफ हो जाता है परन्तु इसमें दर्द काफी होता है।



5. अर्श ( बवासीर) में सूरज मुखी के बीज के फायदे(surajmukhi ke beej ke fayde)




सूरज मुखी के बीज का चूर्ण  की 3 ग्राम मात्रा में 3 ग्राम शक्कर मिलाकर प्रतेक दिन सुबह शाम खाने से वायु के कारण हुआ बवासीर नश्ट हो जाता है । लेकिन खाने में घी, खचडी और छाछ का ही प्रयोग करना है ।



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पेट की गैस से छुटकारा पाने के सरल आयुर्वेदिक घरेलू उपाय



6. कृमि को नष्ट करने में सूरज मुखी के बीज के उपयोग (surajmukhi ke beej ke upyog)




सूरजमुखी के बीज की 1 से 3 ग्राम मात्रा खाने से पेट में होने वाले केचुए और कृमि समाप्त हो जाते हैं ।



इसके बीजों का चूर्ण 2 से 3 ग्राम शक्कर मिलाकर दिन में दो बार दो दिन तक देते हैं, और तीसरे दिन अरंडी का तेल का विरेचन देते है, इससे कृमि बाहर निकाल जाते हैं ।



7. ज्वर में सूरज मुखी के पत्ते व जड़ के फायदे ( surajmukhi ke patte evam jad ke fayde )




सूरजमुखी की जड़( surajmukhi ki jad) का कवाथ बीस मिलीग्राम बनाकर, इसको सुबह शाम देने से हल्का ज्वर हट जाता है ।



सूरजमुखी के पत्ते( surajmukhi ke patte) और कालीमिर्च बराबर मात्रा में मिलाकर गोलियां बना लें । इन गोलियों में से एक एक गोली तीन दिन तक सुबह दोपहर और शाम खिलाने से शीत ज्वर समाप्त हो जाता है ।



सूरजमुखी के पत्ते (surajmukhi ke patte) का क्वाथ की लगभग 60 ग्राम मात्रा  दिन में दो बार पिलाने से  पेरा टायफाईड ज्वर उतार जाता है ।



8. सूजन में उपयोग ( sujan men surajmukhi ke upyog )




फोड़े के ऊपर सूरजमुखी के पत्ते बांधने से फोड़े की सूजन बिखर जाती है । घाव को सूरजमुखी के पत्ते के क्वाथ से धोने से फायदा होता है । सूरजमुखी की पत्तियों (surajmukhi ki patti) को पीस कर लेप करने से फोड़ा फूट कर पानी निकाल जाता है तथा सूजन कम हो जाती है ।



सूरजमुखी के बीज, सूरजमुखी के फूल
सूरजमुखी का फूल



9. अन्य  फायदे ( other benefit )




  • सूरजमुखी के बीज 15 ग्राम पीस कर पिलाने से सब प्रकार के विष उतर जाते हैं ।



  • इसके बीजों को अंकुरित कर खाने से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा नियमित होती है ।



  • इसके बीज को बारीक पीस कर बांसी पानी के साथ पीने से मूत्र का संक्रमण समाप्त होता है ।



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विशेष




सूरज मुखी का पौधा रोग उत्पन्न करने वाली दुर्गन्ध युक्त वायु का शोषण करने की छमता रखता है । पृथ्वी से को जहर की तरह भाप उड़कर संक्रामक मलेरिया बुखार के रूप में सब जगह फैलता है, उस विष रूपी मलेरिया वाली भाप को सोकता है । इसके पौधे से हवा शुद्ध होती है एवम् मलेरिया ज्वर, संधि वात और आद्रता से पैदा होने वाले बीमारियों को समाप्त करता है । इस लेख में आपको सूरजमुखी के बीज ( surajmukhi ke beej) के फायदे के बारे में बताया गया है । आशा करते हैं आप को यह लेख अवश्य पसंद आया होगा ।

धन्यवाद ।


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Monday, 11 November 2019

चने के फायदे जानकर हैरान हो जायेगें ( Chane ke fayde in hindi)


Safed chane
Safed chane


चने के फायदे ( chane ke fayde)


इस लेख में चने के फायदे ( chane ke fayde) के बारे में बताने जा रहे हैं । जानकारी के लिए बता दें कि चने में महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं जैसे कि मैग्नीशियम, फाइबर, प्रोटीन और कैल्शियम आदि । यह तत्व हमारे बॉडी के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। यदि चने का सेवन सही तरीके से व नियमित रूप से किया जाए तो यह अत्यंत लाभकारी होता है । इसलिए आपको हमेशा चने का सेवन जरूर करना चाहिए । जानकारों के अनुसार चना हमारे दिल की मांसपेशियों के लिए बेहद लाभकारी होता है क्योंकि अगर कोई आदमी नियमित रूप से चने का सेवन करता है तो उसके दिल के पास मौजूद मांसपेशियों को बेहद मजबूती मिलती है।


चने का सेवन प्रतिदिन नियमित रूप से करने से हड्डियों को बहुत मजबूती मिलती है। और  चने से  बॉडी को अनेक फायदे मिलते हैं ।



चना कुछ बातों में बादाम जैसे  ड्राय फ्रूट्स से ज्यादा लाभदायक होता है । एक डाइटीशियन का कहना है कि भिगे हुए चने में प्रोटीन, फाइबर, मिनरल और विटामिन की पर्याप्त मात्रा होती है जो कई बीमारियों से बचाव के अतिरिक्त सेहतमंद रहने में सहक होती है । 



भिगोए हुए देसी चने में प्रोटीन, फाइबर और मिनरल्स होते हैं जो हमें स्वस्थ रखते हैं । डाइटीशियन कहना है कि वैसे तो हर सभी के लिए चने खाने के फायदे ( chane khane ke fayde ) हैं, लेकिन विशेष रूप से पुरुषाें को ये अवश्य खाने चाहिए।



अंकुरित चने कैसे खाएं 




एक मुठ्ठी चने लेकर साफ कर लें । इन्हें मिट्टी या चीनी मिट्टी के बर्तन में डालकर ऊपर से साफ पानी डाल कर पूरी तरह से भिगो दे । रात भर इन चनों को पानी में भीगे रहने दें। सुबह इन चनो को अच्छी तरह से चबाकर खाएं । बाद में बचे पानी को भी छानकर पी सकते हैं । अनुकुरित चना खाने के फायदे ( chane khane ke fayde )  डबल हो जाएगा ।


चने के औषधीय प्रयोग( chane ke aushdhiye prayog)




चना बहुत ही पौष्टिक और फायदेमंद होता है, आहार के रूप में उपयोग किया जाता है। चना जिसे क्षेत्रीय भाषा में काले चने के नाम से भी जानते है। यह हमें बहुत से स्‍वास्‍थ्‍य फायदे दिलाने में सहायक है। यद्धपि इसकी बहुत सी प्रजातियां होती है जिनके आधार पर इनके पोषक तत्‍वों में भिन्‍नता हो सकती है। लेकिन फिर भी चने का नियमित सेवन करने पर यह वजन कम करने, हृदय को स्‍वस्‍थ्‍य रखने, कोलेस्‍ट्रॉल के स्‍तर को नियंत्रित करने, मधुमेह को नियंत्रित करने और पाचन को ठीक करने में चने के फायदे होते ( chane ke fayde ) है ।



चना ( chana) हमारे खाने का एक प्रमुख खाद्य पदार्थ है । आप इसका उपयोग विभिन्‍न प्रकार के व्‍यंजनों को बनाने में कर सकते हैं । यह आपके शरीर को एनर्जी दिलाने के साथ ही स्किन और अन्‍य स्‍वास्‍थ्‍य समस्‍याओं को दूर करने में सहायता करता है। आप चने से लाभ प्राप्‍त करने के लिए इसे भून कर, भिगों कर, पीस कर और अंकुरित करके, और सब्जी बनाकर प्रयोग कर सकते हैं। चने की विभिन्न फायदे हैं ।



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1. वजन कम करने में चने खाने के फायदे (Chana Benefits of Chana in Hindi)




व्यक्ति के संतुलित आहार में फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थों का होना अति आवश्‍यक है। फाइबर युक्‍त खाद्य पदार्थ वजन को कम करने में काफी सहायता करते हैं। चने में घुलनशील और अघुलनशील दोनो ही प्रकार के फाइबर अच्‍छी मात्रा में पाए जाते हैं। घुलनशील फाइबर पाचन तंत्र को मजबूत करता है। जबकि अघुलनशील फाइबर कब्‍ज और अन्‍य पाचन की समस्‍याओं को कम करता है। इसके अलावा फाइबर की उच्‍च मात्रा की उस्थिती से आपकी भूख बड़ जाती है, और खाना डर तक पेट में रहता है, जिसके कारण आपको बार-बार भूख का अहसास नहीं होता है।



उबला हुए चने का सेवन करने भूख कम हो जाती है। इस तरह से भूख कम होने पर आपके शरीर में मौजूद अतिरिक्‍त कैलोरी का उपयोग हो जाता है। इस तरह चना खाने से आपके वजन को कम करने में सहायता मिलती है ।



2. मधुमेह में चना के फायदे (Chana ke fayde For Diabetes in Hindi )




चने में भरपूर मात्रा में पोषक तत्‍व उपस्थित होते हैं। इन पोषक तत्‍वों की उपस्थिति आपको मधुमेह के खतरे से भी बचा सकते हैं। चना विशेष रूप से फाइबर भरा होता है। अध्‍ययनों से पता चला है कि टाइप 1 मधुमेह वाले लोग जो उच्‍च फाइबर वाले भोजन का सेवन करते हैं उनमें रक्‍त ग्‍लूकोज का स्‍तर कम होता है। इसी प्रकार टाइप 2 मधुमेह वाले लोगों के लिए उच्‍च फाइबर युक्त पदार्थों के सेवन रक्‍त शर्करा, लिपिड और इंसुलिन के लेवल में सुधार होता है । इसके अलावा चने में कार्बोहाइड्रेट भी होता है जिनका पाचन देर से होता है।



इस तरह से चना रक्‍त शर्करा के स्‍तर को कम करता हैं और इंसुलिन को नियंत्रित करता हैं। सुबह के समय चने का सेवन करने से आप अपनी इम्यून सिस्टम को भी बढ़ा सकते हैं। इसलिए चना मधुमेह रोगी के लिए बहुत ही फायदेमंद माना जाता है।



Chana in hindi
Kachha chana


3. हृदय रोग में चने के स्‍वास्‍थ्‍य लाभ (Chana Benefits in Hind )




चने में उपस्थित पोषक तत्‍व रक्‍त वाहिनियों को स्‍वस्‍थ रखने में सहायता करते हैं और ऑक्‍सीडेटिव तनाव को नहीं होने देते, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा कम हो जाता है। चने में मैग्‍नीशियम भरपूर मात्रा में होता है। चने में फोलेट भी होता है, फोलेट होमोसिस्‍टीन के स्‍तर को घटा देता है जिससे रक्‍त के थक्‍के, दिल के दौरे और हार्ट स्‍ट्रोक आदि की समस्या नहीं होती है ।



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4. कोलेस्‍ट्रॉल को कम करने में चने के उपयोग (uses of chana in Hindi)





शरीर में कोलेस्‍ट्रॉल की मात्रा अधिक होने पर रक्तचाप और हृदय का स्‍वास्‍थ्‍य ठीक नहीं रहता है । कोलेस्ट्रॉल को कम करने के लिए चने के उपयोग से लाभ प्राप्‍त कर सकते हैं। चने में घुलनशील फाइबर पित्‍त से हुए एसिड को कम करता है और इन्हें शरीर द्वारा अवशोषित होने से रोकता है। इस तरह यह शरीर में कोलेसट्रॉल के स्‍तर को कम करने में सहायता करता है। आधा कप चने का प्रतिदिन सेवन करें तो यह एलडीएल कोलेस्‍ट्रॉल और   ट्राइग्लिसराइड्स को कम करने में सहायता करता है। इसके अतिरिक्त यह रक्‍त वाहिनियों के अवरोध यानी कोलेस्‍ट्रॉल को कम करके  उन्‍हें स्‍वस्‍थ्‍य रखता है जिससे रक्‍त परिसंचरण सुव्‍यवस्थित रूप से चलता है । इस लिए चने को नियमित आधार में शामिल करना चाहिए ।



5. चने के फायदे पाचन में ( Chane Khane Ke Fayde in Hindi)




यदि आप को पाचन की  समस्‍या रहती है तो से चना आपकी सहायता कर सकता है। क्‍योंकि चने में फाइबर की भरपूर मात्रा होती है। इसमें घुलनशील और अघुलनशील दोनो ही तरह के फाइबर होते हैं। ये दोनो ही पाचन तंत्र को मजबूत करते हैं। फाइबर आंतों में तनाव को कम कर कब्‍ज और पेट की अन्‍य समस्‍याओं को कम करने में सहायता करते हैं।  दस्‍त या पेंचिस की समस्या होती है तो इसका उपचार करने के लिए 500 मिलीलीटर पानी में 2 मुठ्ठी चने को रात भर भीगो कर रख दें । और सुबह आप इस पानी का सेवन करें । बचे हुए भीगे चने भी चबा कर खा सकते हैं । यदि कब्ज की समस्या हो तो रात भर भीगे  चने में अदरक पाउडर और जीरा पाउडर मिलाकर और अगले दिन सुबह इस पानी का सेवन करें ।




6. चने से कैंसर का उपचार (treetment of cancer with gram in Hindi )





चना एक विशेष प्रकार के कैंसर की रोकथाम में सहायता करता हैं।  इसमे कुछ ऐसे यौगिक उपस्थित होते हैं जो  शरीर से एंटी-कैंसर कोशिका को ख़तम करने मे सहायता करते हैं । इसके अतरिक्त चना कोलन कोशिकाओं को स्‍वस्‍थ रहने में  सहायता करता है और विशेष रूप से कोलन कैंसर के खतरे को कम करता है और यह विभिन्‍न प्रकार के ट्यूमर और कैंसर से भी हमारी सुरक्षा करते हैं ।




Chana
Chana



7. स्त्री रोग में चने के फायदे ( Chane ke fayde in hindi )




चने के फायदे महिलाओं के लिए भी होते हैं। यह महिलाओं में होने वाली रोगों जैसे स्‍तन कैंसर, ऑस्टियोपोरोसिस आदि को रोकने में सहायता करता है। इसके अलावा यह रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में हॉट फ्लैश को कम करने में सहायता करता है। ब्राउन शुगर और देसी घी के साथ भुना हुआ चना खाने से ल्‍यूकोर्यिया (सफ़ेद पानी आना) का उपचार किया जाता है। इस तरह से चना महिलाओं के लिए भी बहुत ही उपयोगी होता है।



8. चने से शरीर की ऊर्जा नियंत्रित रहती है ( uses of chana in for energy in hindi )




शरीर को जब ऊर्जा की आवश्यकता हो तो ऊर्जा प्राप्‍त करने के लिए चने का उपयोग कर सकते हैं। चने में अधिक मात्रा में ऊर्जा होने के कारण ही घोड़ों को भी चना खिलाया जाता है। चना प्रोटीन से भी भरपूर होता है जो शरीर को पर्याप्‍त मात्रा में शक्ति और शरीर निर्माण में मदद करते हैं। इसके अलावा चने में मेथियोनीन नामक एक तत्व होता है जो कोशिकाओं की उचित विकास में मदद करता है। रात में भिगोए गए चनों को सुबह खाने से आप दिन भर पर्याप्त ऊर्जा प्राप्‍त कर सकते हैं। आप अपने शरीर को फिट रखने के लिए भी भुना चना खा सकते हैं।




9. चना का एनीमिया में फायदे  (Chane ke fayde in hindi )





शरीर में आयरन की कमी से एनीमिया रोग की संभावना हो जाती है। इसलिए इस समस्‍या से बचने के लिए चने का नियमित उपयोग फायदेमंद होता है। चने में आयरन की भरपूर मात्रा होती है जो हीमोग्‍लोबिन के स्‍तर को बढ़ाता है। एनीमिया का उपचार करने के लिए रात में भीगे हुए चनों को अगली सुबह खाएं । चने को स्‍वादिष्‍ट और असरदार बनाने के लिए सुबह के समय चनों को भूनकर और इसमे शहद मिलाकर भी खा सकते हैं। यह आपके शरीर में रक्त की कमी को भी दूर करने में सहायता करता है।



10. चने के फायदे त्‍वचा में  (Chane khane ke fayde For Skin in Hindi )





त्‍वचा को स्‍वसथ्‍य रखने और अन्‍य त्‍वचा संबंधित समस्‍याओं से बचने के लिए चनों का उपयोग ( chane ke upyog) किया जा  सकता हैं । यह त्‍वचा के लिए अत्यंत लाभकारी होता है क्‍योंकि चने में कार्बोहाइड्रेट, फाइबर, प्रोटीन, कॉपर और आयरन के तत्व पाए जाते है । चनों का उपयोग मुंहासों और अन्‍य त्‍वचा संक्रमण को रोकने में किया जा सकता है । चेहरे में चने के पाउडर और दूध के मिश्रण को लगाने से  आपके चेहरे के मुंहासों का उपचार करने में सहायता करता है । साथ ही यह चेहरे के रंग को साफ कर सकता है ।




11. बालों में चने के फायदे (  Benefits of gram For Hair in Hindi )




हम सभी की इच्छा होती है कि बाल स्‍वस्‍थ्‍य और चमकदार हो । लेकिन प्रदूषित वातावरण और खराब जीवनशैली के कारण ऐसा नहीं हो पाता है। आप वालों को स्‍वस्थ्‍य और मजबूत बनाने के लिए चने का उपयोग कर सकते हैं, यह आपके बालों को स्वस्थ रखने में सहायता करता है, ऐसा चने में विटामिन बी6 और जस्‍ता आदि के कारण होता है । ये दोनों ही खनिज बालों को पोषण देने में सहायक हैं । इसके अतिरिक्त चने में विटामिन ए और जस्‍ता बालों के झड़ने और डैंड्रफ को कम करने में सहायता करते हैं । इस तरह से आप चने के नियमित सेवन से बालों को भी स्‍वस्‍थ्‍य रख सकते हैं।


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भुने चने खाने के लाभ ( bhune chane khaane ke labh )




ज्यादा तर लोग स्वाद के लिए भुने हुए चने खाते हैं लकि चने अगर सही तरीके से चबा चबाकर गुड के साथ खाए  तो इससे अच्छी मर्दाना ताकत प्राप्त हो सकती है । सूखा चना कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन, नमी, चिकनाई, रेशे, कैल्शियम, आयरन व विटामिन्स का अच्छा स्रोत है । जिस कारण इसे गरीबो का बादाम भी कहा जाता है



भुने हुए चने और गुड़ कैसे खाए ।


समिग्री

एक किलो भुने चने
एक किलो गुड़



भुने चने खाने की विधि ( bhuna chana khaane ki vidhi ) 




एक मुठ्ठी चने और 25 ग्राम गुड़ दोनों को चबा चबा कर धीरे धीरे  खाए, खाने के बाद ऊपर से एक ग्लास पानी पी लें, ऐसा कुछ दी तक करते रहे । इससे वभिन्न फायदे होते है ।



1 . भुने चने को खाने से कुष्ठ रोग समाप्त होता है.



2. प्रतिदिन भुने चने खाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है जिससे बहुत सी बीमारियों से बचाव होता  है ।



3. भुने चने को हर दिन अपने भोजन में शामिल करने से वजन कम होता है और मोटापा घटता है । यह शरीर से फालतू चर्बी को निकालने में मदद करता है ।



4. भुने चने के उपयोग से पेशाब सम्बन्धी समस्याओं से छुटकारा मिल जाता है । जिनको भी बार-बार मूत्र आने की समस्या है उनको प्रतिदिन गुड़ और चने का उपयोग करना चाहिए ।



5. भुने चने को प्रतिदिन अपने आहार में शामिल करने से वजन कम होता है । यह शरीर से फालतू चर्बी को निकालने में सहायक है ।



6. भुने चने का शहद के साथ सेवन करने से नंपुसकता दूर होती है और पुरुषत्व में वृद्धि होती है ।



भीगे चने खाने के फायदे ( bhige chane khane ke fayde )




रात को एक गिलास पानी में एक मुट्ठी चने डाल दें और इसे रातभर के लिए ढककर रख दें ।


सुबह चने का पानी निकाल कर एक छोटा टुकड़ा गुड़ के साथ इसे खाली पेट चबाकर खाएं । प्रतेक दिन इस ढंग से चने खाने से अनेक फायदे होते हैं । इसका सबसे ज्यादा फायदा व्यक्ति की ताकत पर पड़ता है ।




चने खाने के नुकसान ( Chana khane ke nuksan in Hindi )




चने के बहुत से फायदे तो होते ही है साथ ही चने का सेवन करने से चने के नुकसान भी हो जाते हैं । यदि चने का सेवन उचित मात्रा में किया जाए तो यह फायदेमंद होता है । चने के पौधे में ओलिगोसाक्राइड्स होते हैं जिन्‍हें जटिल शर्करा कहा जाता है, जिस कारण शरीर को खाना पचाने में समय लगता है, इसके कारण आंतों में गैस बन सकती है । इसलिए इसका सेवन अधिक मात्रा में  नहीं करना चाहिए ।



विशेष



इसी के साथ यदि आप चने का सेवन लगातार करते हैं तो इससे शरीर की मांसपेशियों के विकास में चने के फायदे ( chane ke fayde in hindi ) होते है, और बॉडी की मांसपेशियों को भी मजबूती मिलती है। वही यदि आप दुबले पतले शरीर से परेशान हैं तो प्रतिदिन प्रात: काल उठकर चने का सेवन करें व आपकी बॉडी का वजन तेजी से बढ़ने लगेगा।


इस लेख में चने के फायदे ( chane ke fayde) का वर्णन किया गया है, आशा करते हैं यह लेख आपको अवश्य पसंद आया होगा ।

धन्यवाद ।

Monday, 14 October 2019

अमलतास के पेड़ के उपयोग और हनिया ( amaltas tree benefit in hindi)



अमलतास के पेड़ के उपयोग और हनिया ( amaltas tree benefit in hindi)




अमलतास का पेड़ ( amaltas tree in hindi) पूरे भरत में पाया जाता है । इसका पेड़ माध्यम आकर का होता है । मार्च अप्रैल में अमलतास के पेड़ की पत्तिया झड़ जाती है, उसके बाद नई पत्तियां व पीले रंग के फूल निकलते है फिर फली बनती है । फली के अंदर का भाग कोष्ट में विभक्त रहता है ।  अमलतास की फली से दो फीट तक लंबी होती है । अमलतास के फूल ( amaltas ke phool) चमकीले पीले रंग के गुच्छों में नीचे की और लटके रहते है ।





अमलतास के गुण फायदे (amaltas ke gun fayde)



अमलतास ( amaltas)  स्वाद में मीठा, भारी व तासीर का ठंडा होता है । यह अनेक रोगो जैसे ज्वर, वात, रक्तपित्त, हृदय रोग, और शूल में फायदा करता है । अमलतास की फली ( aamatas ki fali), रूचिकारक, पित्त और कफ नाशक, कुष्ठ नाशक होते हैं, अमलतास के पत्ते (amaltas ke patte) भी अनेक रोगों में फायदे करते हैं, यह कफ का नाश करते हैं । 




अमलतास के फूल (amaltas ke phool) कड़वे, कसैले, तासीर में ठंडे, वात वर्धक, कफ पित्त को हरने वाले होते हैं । अमलतास के फल ( amaltas ke fal) की माज्जा जठराग्नि को बढ़ाने वाली वात पित्त को हरने वाली होती है । अमलतास की जड़ (amaltas ki jad) दाद, चर्म रोग, छुए, गंडमाला आदि का नाश करती है ।



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अमलतास का वेगानिक नाम Cassia fistula L. होता है ।
अंग्रेजी में इसे Indian Laburnum, puddin pipe tree, Purging cassia. आदि नामों से जाना जाता है ।
इसे विभिन्न भाषाओं में निम्न नामों से जाना जाता है ।



हिंदी   - अमलतास, धनबहेडा

संस्कृत - राज वृक्ष, हेमपुष्प नृपद्रम,

मराठी - बाहव

गुजराती - गरमालो

पंजाबी -  गिर्दनली, अमलतास

बंगाली - सोनालू

तेलगु  - रेलचट्ट

कन्नड़  - कक्कमेर

असमी - सोनास

आदि नामों से जाना जाता है ।



अमलतास के औषधीय फायदे ( amaltas ke aushdhiye fayde )




1. खांसी में अमलतास का फायदे (amaltas ke fayde )




  • अमलतास की गिरी 5 से 10 ग्राम को पानी में पीस लें फिर इसका तीन गुना बूरा मिलालें, फिर इसकी चासनी बनाकर चाटने से सूखी खांसी में आराम मिलता है ।

  • अमलतास का 20 ग्राम खाने से खुस्क खांसी तर हो जाती है ।



2. श्वास रोग में अमलतास ( uses of amltas in hindi)




अमलतास के फल की मज्जा का क्वाथ बनाकर 40 से 50 ग्राम पिलाने से स्वास की रुकावट में आराम मिलता है ।


amaltas ke phool
amaltas flower


3.  टॉन्सिल में अमलतास के फायदे (amltas ke fayde in hindi)




कफ के कारण टॉन्सिल हो जाए और पानी निगलने से भी दर्द होता हो तो अमलतास की जड़ की छल को थोड़े से जल को पकाकर इस का बूंद बूंद करके मुंह में डालने से टॉन्सिल ठीक हो जाते हैं ।



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4. उदर्वात में अमलतास ( amltas in hindi)




अगर छ: से बारह वर्ष के बच्चे जलन तथा उदर्वात से पीड़ित हो तो अमलतास की मज्जा के दो नग मुनक्का के साथ देने से उदरवात में फायदा होता है । अमलतास के दो से तीन पत्ते नमक व मिर्च मिलकर खाने से उदर की शुद्धि हो जाती है ।



5. पित्त में अमलतास के उपयोग (amaltas ke upyog in hindi )




  • अमलतास के फल के गूदे का काढ़ा बनाकर कड़े की 40 से 80 ग्राम मात्रा में 5 से दस ग्राम इमली का गूदा मिलकर प्रातः काल पीने से पित्त का असर समाप्त होता है । अगर रोगी को कफ भी अधिक होती हो तो इसमें थोड़ा सा निशीथ का चूर्ण भी मिलाएं ।



  • बेल के कवाथ के साथ अमलतास की मज्जा का कल्क मिलाकर, इसमें थोड़ा सा नमक एवम् शहद मिलाकर देने से पित्त में फायदा होता है । इसकी 10 से 20 ग्राम मात्रा से अधिक नहीं पीना चाहिए ।



6. मुखपाक में अमतास के फायदे ( amaltas ke fayde in hindi )




अमलतास के फल की मंजा को धनिएं के साथ पीस कर  इसमें थोड़ा सा कत्था मिलकर इसको मुंह में रखने से मुंह पाक ठीक हो जाता है ।



7. पक्ष्घात में अमलतास के उपयोग ( amaltas ke upyog in hindi )




  • अमलतास के पत्ते का स्वरस पक्ष्घात से पीड़ित स्थान पर लगा कर मालिश करने से फायदा होता है ।



  • वात नलिकाओं से हुए आघात से उत्पन्न पक्ष्घात अमलतास के पत्ते का स्वरस पीने से ठीक हो जाता है।



  • इसके पाते ग्राम करके पश्चात वाले स्तान पर पुल्टिस बनाकर बांधने से फायदा होता है ।



8.  पीलिया में अमलतास के उपयोग ( amaltas ke upyog )




अमलतास के बीज व बराबर मात्रा में गन्ने का रस या आमले का रस मिलाकर पीने से कामला के मरीजों को फायदा होता है ।



9. बालो में अमलतास के फायदे  (Balo men amaltas ke Fayde)




यदि आप बालो और गंजेपन की बीमारी से जूझ रहे है, तो आप अमलतास की पत्तियों का सेवन कर सकते हैं । अमलतास की पत्तियों की राख बनाकर इसको बकरी के दूध के साथ मिलाकर बालों पर लगाने से गंजेपन, दोमुहे बालों की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है ।



10.  बवासीर में अमलतास के उपयोग (Bawaseer me amaltas ke upyog)



बवासीर के रोग में अमलतास बहुत ही फायदेमंद होता है। अमलतास के फलो का गूदा, मनुक्का और हरड इन तीनों को मिलाकर उबाल लें और रात को सोने से पहले इस काढ़े को पिने से बवासीर के रोग ठीक करने में सहायता करता है।


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11. ज्वर में अमलतास के फायदे (bukhar me amaltas ke Fayde )




अमलतास पेड़ की जड़ का उपयोग बुखार को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है। अमलतास की जड़ का काढ़ा बनाकर पीने से या इससे बनने वाली दारू का सेवन करने से बुखार को कम किया जाता है।



12. कब्ज में अमलतास के उपयोग (amaltas ke upyog )




अमलतास के पुष्पों का गुलकंद कब्ज को ठीक करता है । यह आंत रोग, सूक्ष्म ज्वर व कोषतबद्धता में फायदा करता है ।


amaltas ke phool, amaltas ki fali
Amaltas ki fali evam phool



13.  सुख प्रसव में अमलतास के लाभ ( amaltas ke labh )




अमलतास की फली के 4 से 5 नग के 25 ग्राम छिलके उबालकर इसमें शक्कर डालकर ग्रभ्वती स्त्री को सुबह शाम पिलाने से बच्चा सुख से पैदा होता है ।



14. आमवात एवम् बात रक्त में अमलतास के फायदे ( amaltas ke Fayde in hindi )




  • आर्गवाद अर्थात अमलतास के दो से तीन पत्ते सरसों के तेल में भूनकर शाम को भोजन के साथ खाने से आम वात में फायदा होता है ।



  • पांच से दस ग्राम अमलतास की जड़ को एक पाव दूध में उबालकर पिलाने से वात रक्त में फायदा होता है ।



15. कुष्ठ रोग में अमलतास के लाभ (amaltas ke labh )





  • अमलतास की जड़ का लेप बनाकर, कुष्ठ रोग के कारण विकृत त्वचा, पर लगाने से पुरानी त्वचा वर्ण स्थान से हटाकर त्वचा को प्लेन के देता है ।



  • अमलतास की 15 से 20 पत्ती का लेप त्वचा पर लगाने से कुष्ठ रोग का सफाया हो जाता है । इससे कुष्ठ तथा दूसरे चर्म रोग ठीक हो जाते हैं ।



16. दाद में अमातास के फायदे (daad men amaltas ke fayde )





  • अमलतास के पांचों अंग फूल, फल, पत्ती, जड़, बीज, को पीस कर दाद, खुजली और दूसरे चर्म रोग पर लगाने से आश्चर्य जनक लाभ होता है ।




  • अमलतास की 10 से 15 ग्राम जड़ को दूध में उबालकर फिर पीसकर, लेप बनाकर संक्रमित स्थान पर लगाने से दाद तथा दर्द में फायदा होता है ।



17. रक्तपित्त में अमलतास के उपयोग ( amaltas ke upyog in hindi)




अमलतास के फल की माज्जा की 25 से 50 ग्राम की मात्रा में 20 ग्राम शहद या शक्कर मिलाकर सुबह शा देने से रक्त पित्त में लाभ होता है ।


18. वर्ण( घाव) में अमलतास के लाभ ( amaltas ke labh )




अमलतास के पत्ते के साथ चमेली व कृंज के पत्ते को गो मूत्र के साथ पीस कर लेप करने से वर्ण, अर्श, और के वर्ण समाप्त हो जाते हैं ।



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19. फुंसी में अमलतास के फायदे (amaltas ke fayde in hindi )




अमलतास के कुछ पत्ते लेकर इसे गाय के दूध के साथ पीस कर नजात शिशु की फुंसी पर लगाने से छले तथा फुंसी में लाभ होता है ।



अमलतास के नुकसान (amaltas ke nuksan)




अमलतास का पेड़ औषधिये गुणों से भरपूर होता है। इसके द्वारा विभिन्न प्रकार की स्वास्थ संबंधित समस्याओं के इलाज किया जाता है। अमलतास के पेड़ का उपयोग करने से पहले इसके नुकसान के बारे में जानकारी अवश्य ले। आमतौर से अमलतास का उपयोग करने से कोई नुकसान नहीं होता है। परन्तु कभी कभी इससे कुछ नुकसान भी हो जाते हैं जो कि निम्नलिखित है।



१. अमलतास का अत्यधिक मात्रा में से सेवन करने से उल्टी और चक्कर आने की परेशानी हो सकती है।



२. गर्भवस्था में अमलतास का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योकि इससे गर्भधारण में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।



३. अमलतास का बच्चो को सेवन करने से पहले किसी चिकित्सक से सलाह अवश्य ले।


आशा करते हैं अमलतास पर लिखा लेख आपको अवश्य पसंद आया होगा, इस लेख में अमलतास का उपयोग ( amaltas ka upyog) का वर्णन किया गया है, इसका का मूल उद्देश्य लोगों को आयुर्वेद की प्रति जागरूक करना है । किसी भी गंभीर रोग में इसका उपयोग करने से पूर्व किसी चिकित्सक की सलाह अवश्य लें लेवें । धन्यवाद ।

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