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Monday, 14 October 2019

अमलतास के पेड़ के उपयोग और हनिया ( amaltas tree benefit in hindi)



अमलतास के पेड़ के उपयोग और हनिया ( amaltas tree benefit in hindi)




अमलतास का पेड़ ( amaltas tree in hindi) पूरे भरत में पाया जाता है । इसका पेड़ माध्यम आकर का होता है । मार्च अप्रैल में अमलतास के पेड़ की पत्तिया झड़ जाती है, उसके बाद नई पत्तियां व पीले रंग के फूल निकलते है फिर फली बनती है । फली के अंदर का भाग कोष्ट में विभक्त रहता है ।  अमलतास की फली से दो फीट तक लंबी होती है । अमलतास के फूल ( amaltas ke phool) चमकीले पीले रंग के गुच्छों में नीचे की और लटके रहते है ।



अमलतास के गुण फायदे (amaltas ke gun fayde)



अमलतास ( amaltas)  स्वाद में मीठा, भारी व तासीर का ठंडा होता है । यह अनेक रोगो जैसे ज्वर, वात, रक्तपित्त, हृदय रोग, और शूल में फायदा करता है । अमलतास की फली ( aamatas ki fali), रूचिकारक, पित्त और कफ नाशक, कुष्ठ नाशक होते हैं, अमलतास के पत्ते (amaltas ke patte) भी अनेक रोगों में फायदे करते हैं, यह कफ का नाश करते हैं । 




अमलतास के फूल (amaltas ke phool) कड़वे, कसैले, तासीर में ठंडे, वात वर्धक, कफ पित्त को हरने वाले होते हैं । अमलतास के फल ( amaltas ke fal) की माज्जा जठराग्नि को बढ़ाने वाली वात पित्त को हरने वाली होती है । अमलतास की जड़ (amaltas ki jad) दाद, चर्म रोग, छुए, गंडमाला आदि का नाश करती है ।

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अमलतास का वेगानिक नाम Cassia fistula L. होता है ।
अंग्रेजी में इसे Indian Laburnum, puddin pipe tree, Purging cassia. आदि नामों से जाना जाता है ।
इसे विभिन्न भाषाओं में निम्न नामों से जाना जाता है ।



हिंदी   - अमलतास, धनबहेडा

संस्कृत - राज वृक्ष, हेमपुष्प नृपद्रम,

मराठी - बाहव

गुजराती - गरमालो

पंजाबी -  गिर्दनली, अमलतास

बंगाली - सोनालू

तेलगु  - रेलचट्ट

कन्नड़  - कक्कमेर

असमी - सोनास

आदि नामों से जाना जाता है ।



अमलतास के औषधीय फायदे ( amaltas ke aushdhiye fayde )




1. खांसी में अमलतास का फायदे (amaltas ke fayde )




  • अमलतास की गिरी 5 से 10 ग्राम को पानी में पीस लें फिर इसका तीन गुना बूरा मिलालें, फिर इसकी चासनी बनाकर चाटने से सूखी खांसी में आराम मिलता है ।

  • अमलतास का 20 ग्राम खाने से खुस्क खांसी तर हो जाती है ।



2. श्वास रोग में अमलतास ( uses of amltas in hindi)




अमलतास के फल की मज्जा का क्वाथ बनाकर 40 से 50 ग्राम पिलाने से स्वास की रुकावट में आराम मिलता है ।


amaltas ke phool
amaltas flower


3.  टॉन्सिल में अमलतास के फायदे (amltas ke fayde in hindi)




कफ के कारण टॉन्सिल हो जाए और पानी निगलने से भी दर्द होता हो तो अमलतास की जड़ की छल को थोड़े से जल को पकाकर इस का बूंद बूंद करके मुंह में डालने से टॉन्सिल ठीक हो जाते हैं ।



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4. उदर्वात में अमलतास ( amltas in hindi)




अगर छ: से बारह वर्ष के बच्चे जलन तथा उदर्वात से पीड़ित हो तो अमलतास की मज्जा के दो नग मुनक्का के साथ देने से उदरवात में फायदा होता है । अमलतास के दो से तीन पत्ते नमक व मिर्च मिलकर खाने से उदर की शुद्धि हो जाती है ।



5. पित्त में अमलतास के उपयोग (amaltas ke upyog in hindi )




  • अमलतास के फल के गूदे का काढ़ा बनाकर कड़े की 40 से 80 ग्राम मात्रा में 5 से दस ग्राम इमली का गूदा मिलकर प्रातः काल पीने से पित्त का असर समाप्त होता है । अगर रोगी को कफ भी अधिक होती हो तो इसमें थोड़ा सा निशीथ का चूर्ण भी मिलाएं ।



  • बेल के कवाथ के साथ अमलतास की मज्जा का कल्क मिलाकर, इसमें थोड़ा सा नमक एवम् शहद मिलाकर देने से पित्त में फायदा होता है । इसकी 10 से 20 ग्राम मात्रा से अधिक नहीं पीना चाहिए ।



6. मुखपाक में अमतास के फायदे ( amaltas ke fayde in hindi )




अमलतास के फल की मंजा को धनिएं के साथ पीस कर  इसमें थोड़ा सा कत्था मिलकर इसको मुंह में रखने से मुंह पाक ठीक हो जाता है ।



7. पक्ष्घात में अमलतास के उपयोग ( amaltas ke upyog in hindi )




  • अमलतास के पत्ते का स्वरस पक्ष्घात से पीड़ित स्थान पर लगा कर मालिश करने से फायदा होता है ।



  • वात नलिकाओं से हुए आघात से उत्पन्न पक्ष्घात अमलतास के पत्ते का स्वरस पीने से ठीक हो जाता है।



  • इसके पाते ग्राम करके पश्चात वाले स्तान पर पुल्टिस बनाकर बांधने से फायदा होता है ।



8.  पीलिया में अमलतास के उपयोग ( amaltas ke upyog )




अमलतास के बीज व बराबर मात्रा में गन्ने का रस या आमले का रस मिलाकर पीने से कामला के मरीजों को फायदा होता है ।



9. बालो में अमलतास के फायदे  (Balo men amaltas ke Fayde)




यदि आप बालो और गंजेपन की बीमारी से जूझ रहे है, तो आप अमलतास की पत्तियों का सेवन कर सकते हैं । अमलतास की पत्तियों की राख बनाकर इसको बकरी के दूध के साथ मिलाकर बालों पर लगाने से गंजेपन, दोमुहे बालों की समस्या से छुटकारा पाया जा सकता है ।



10.  बवासीर में अमलतास के उपयोग (Bawaseer me amaltas ke upyog)



बवासीर के रोग में अमलतास बहुत ही फायदेमंद होता है। अमलतास के फलो का गूदा, मनुक्का और हरड इन तीनों को मिलाकर उबाल लें और रात को सोने से पहले इस काढ़े को पिने से बवासीर के रोग ठीक करने में सहायता करता है।


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11. ज्वर में अमलतास के फायदे (bukhar me amaltas ke Fayde )




अमलतास पेड़ की जड़ का उपयोग बुखार को नियंत्रित करने के लिए किया जा सकता है। अमलतास की जड़ का काढ़ा बनाकर पीने से या इससे बनने वाली दारू का सेवन करने से बुखार को कम किया जाता है।



12. कब्ज में अमलतास के उपयोग (amaltas ke upyog )




अमलतास के पुष्पों का गुलकंद कब्ज को ठीक करता है । यह आंत रोग, सूक्ष्म ज्वर व कोषतबद्धता में फायदा करता है ।


amaltas ke phool, amaltas ki fali
Amaltas ki fali evam phool



13.  सुख प्रसव में अमलतास के लाभ ( amaltas ke labh )




अमलतास की फली के 4 से 5 नग के 25 ग्राम छिलके उबालकर इसमें शक्कर डालकर ग्रभ्वती स्त्री को सुबह शाम पिलाने से बच्चा सुख से पैदा होता है ।



14. आमवात एवम् बात रक्त में अमलतास के फायदे ( amaltas ke Fayde in hindi )




  • आर्गवाद अर्थात अमलतास के दो से तीन पत्ते सरसों के तेल में भूनकर शाम को भोजन के साथ खाने से आम वात में फायदा होता है ।



  • पांच से दस ग्राम अमलतास की जड़ को एक पाव दूध में उबालकर पिलाने से वात रक्त में फायदा होता है ।



15. कुष्ठ रोग में अमलतास के लाभ (amaltas ke labh )





  • अमलतास की जड़ का लेप बनाकर, कुष्ठ रोग के कारण विकृत त्वचा, पर लगाने से पुरानी त्वचा वर्ण स्थान से हटाकर त्वचा को प्लेन के देता है ।



  • अमलतास की 15 से 20 पत्ती का लेप त्वचा पर लगाने से कुष्ठ रोग का सफाया हो जाता है । इससे कुष्ठ तथा दूसरे चर्म रोग ठीक हो जाते हैं ।



16. दाद में अमातास के फायदे (daad men amaltas ke fayde )





  • अमलतास के पांचों अंग फूल, फल, पत्ती, जड़, बीज, को पीस कर दाद, खुजली और दूसरे चर्म रोग पर लगाने से आश्चर्य जनक लाभ होता है ।




  • अमलतास की 10 से 15 ग्राम जड़ को दूध में उबालकर फिर पीसकर, लेप बनाकर संक्रमित स्थान पर लगाने से दाद तथा दर्द में फायदा होता है ।



17. रक्तपित्त में अमलतास के उपयोग ( amaltas ke upyog in hindi)




अमलतास के फल की माज्जा की 25 से 50 ग्राम की मात्रा में 20 ग्राम शहद या शक्कर मिलाकर सुबह शा देने से रक्त पित्त में लाभ होता है ।


18. वर्ण( घाव) में अमलतास के लाभ ( amaltas ke labh )




अमलतास के पत्ते के साथ चमेली व कृंज के पत्ते को गो मूत्र के साथ पीस कर लेप करने से वर्ण, अर्श, और के वर्ण समाप्त हो जाते हैं ।



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19. फुंसी में अमलतास के फायदे (amaltas ke fayde in hindi )




अमलतास के कुछ पत्ते लेकर इसे गाय के दूध के साथ पीस कर नजात शिशु की फुंसी पर लगाने से छले तथा फुंसी में लाभ होता है ।



अमलतास के नुकसान (amaltas ke nuksan)




अमलतास का पेड़ औषधिये गुणों से भरपूर होता है। इसके द्वारा विभिन्न प्रकार की स्वास्थ संबंधित समस्याओं के इलाज किया जाता है। अमलतास के पेड़ का उपयोग करने से पहले इसके नुकसान के बारे में जानकारी अवश्य ले। आमतौर से अमलतास का उपयोग करने से कोई नुकसान नहीं होता है। परन्तु कभी कभी इससे कुछ नुकसान भी हो जाते हैं जो कि निम्नलिखित है।



१. अमलतास का अत्यधिक मात्रा में से सेवन करने से उल्टी और चक्कर आने की परेशानी हो सकती है।



२. गर्भवस्था में अमलतास का सेवन नहीं करना चाहिए। क्योकि इससे गर्भधारण में परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।



३. अमलतास का बच्चो को सेवन करने से पहले किसी चिकित्सक से सलाह अवश्य ले।


आशा करते हैं अमलतास पर लिखा लेख आपको अवश्य पसंद आया होगा, इस लेख में अमलतास का उपयोग ( amaltas ka upyog) का वर्णन किया गया है, इसका का मूल उद्देश्य लोगों को आयुर्वेद की प्रति जागरूक करना है । किसी भी गंभीर रोग में इसका उपयोग करने से पूर्व किसी चिकित्सक की सलाह अवश्य लें लेवें ।
धन्यवाद ।

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Thursday, 19 September 2019

बहेड़ा के गुण फायदे उपयोग एवम् नुकसान ( baheda ke fayde)

baheda
baheda ka ped


बहेड़ा के गुण फायदे उपयोग एवम् नुकसान ( baheda ke fayde)



बहेड़ा पूरे भारतवर्ष में पाया जाता है, खासतौर से यह निचले पर्वतीय प्रदेशों mencadhik होता है, बहेडे के पेड़ सेफर्वरी मार्च में पत्ते झड़ते हैं । फिर इस पर तांबे के रंग की कोपल निकलती है, फिर इसके साथ ही मई में बहेदे के पेड़ पर फूल आते हैं, फिर फल बक्र अगली जनवरी फरवरी तक फल पक जाते हैं ।



बहेड़ा के पेड़ का स्वरूप



बहेड का वृक्ष 60 से 80 फिट तक ऊंचा होता है । बहीडे के फूल सफेद अथवा पीले रंग के होते हैं । इसका फल आधा इंच व्यास का होता है । फल सुख कर धारीदार वी पंचकोणीय जैसा हो जाता है । बहेड़ा में एक बीज निकलता है ।


रासायनिक संगठन ( Rasayanic sangthan)



बहेड़ा के फल में tanin, बी- सिस्टरोल, गेलिक एसिड, मैनिटोल, ग्लूकोज, ग्लैक्टोज, फ्रक्टोज, रेमनोंज, आदि तत्व पाए जाते हैं । बहेड़ा की बीज मज्जा में चमकीले पीत वर्ण का एक स्थिर तेल पाया जाता है ।


बहेड़ा का वैज्ञानिक नाम है Terminalia bellirika ( Gaertn.) Roxb.
यह comretaceae कुल का पौधा है । अंग्रेजी में इस baheda के नाम से जानते हैं।


इसके नाम के निम्न मीनिंग हैं ।


संस्कृत - विभितक, अक्ष, कर्श फल

हिंदी    - बहेड़ा

मराठी  - बहेड़ा

गुजराती - बहेड़ा

बंगाली   - बायडा

पाजाबी  - बेहड़ा

तेलगु     - वडिकाय

अरबी    - ब्लेलज


बहेड़ा के गुण (baheada ke gun)



बहेड़ा तीनों दोषों वात, पित्त कफ तीनों दोषों को हरने वाले होता है । लेकिन इसका प्रयोग कफ से उत्तपन्न रोगों को दूर करने में किया जाता है । बहेड़ा बालों की वृद्धि, आंखों के लिए फायदे, नाक के रोग, खून के दोष, गले के रोग, खांसी, एवम् हृदे रोग में फायदेमंद है । बहेड़ा के फल के बीज की मगज आंखों के फूली का नाश करती है । बहेड़ा के बीज कड़वे , वामन नाशक तरह वाथर होते हैं, यह ब्रोंकाइटिस में भी फायदे करता है । बहेड़ा के फल का छिलका कफ नाशक होता है । बहेड़ा की गिरी वेदनशमक तथा शोथ हर होती है ।


Baheda fruit in hindi
बहेड़ा फल




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बहेड़ा के फायदे (Baheda ke fayde)



1. आमाशय में बहेड़ा के फायदे ( Baheda ke Fayde)



बहेड़ा के फल के 3 से 6 ग्राम चूर्ण की मात्रा भोजन करने के पश्चात फेंकी लेने से पाचन शक्ति तीव्र होती है, पेट की अग्नि तीव्र होती है तथा आमाशय को ताकत मिलती है ।




2. नेत्र ज्योति में बहेड़ा के फायदे ( Baheda ke Fayde)




  • बहेड़ा व शक्कर का चूर्ण बराबर मात्रा में प्रतिदिन कने से नेत्र ज्योति में फायदा होता है ।


  • बहेड़ा की छाल का चूर्ण एवम् मधु के साथ उपयोग करने से आंखों की पीड़ा मिटती है ।



3. ज्वर की कमजोरी में बहेड़ा के फायदे ( Baheda ke Fayde)



बहेड़ा एवम् जवासा के 40 से 50 ग्राम काढ़े में एक चम्मच घी मिलाकर सुबह दोपहर शाम पीने से कफ तथा पित्त से होने वाले बुखार हट जाता है । और कमजोरी के कारण चक्कर आना व आंखो के सामने अधेरा आने की समस्या समाप्त हो जाती है ।


4. खांसी में बहेड़ा के फायदे (Baheda ke Fayde)




  • बहेड़ा के छिलके को चूसने से खांसी मिट जाती है ।


  • बकरी के दूध में बहेड़ा, कला नामक , अंदुसा पकाकर सेवन करने से सूखी वी तर खांसी में फायदा होता है ।



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5. श्वास रोग में बहेड़ा के फायदे (Baheda ke Fayde)




बहेड़ा की छाल एवम् हरड़ की छाल की बराबर मात्रा का चूर्ण बनाकर इसकी चार ग्राम मात्रा प्रतिदिन लेने से स्वास रोग वी खांसी में फायदा होता है ।


baheda
Baheda plant



6. मूAdd Captionत्र संक्रमण में बहेड़ा के फायदे (benefit of baheda in Hindi)



बहेड़ा के फल की मिंगी का तीन से चार ग्राम चूर्ण  इतनी ही मात्रा में इसमें शहद मिलाकर चाटने से मूत्र संक्रमण में फायदा होता है ।




7. नपुंसक्ता में बहेड़ा के फायदे (Baheda ke Fayde)




बाहेदे के चूर्ण की तीन ग्राम मात्रा में 6 ग्राम गुड़ मिलाकर सुबह शाम रोज खाने से नमपुनसक्ता ठीक हो जाती है, व्यक्ति फुर्तीला हो जाता है ।


8. बंद गांठ में बहेड़ा के फायदे (Baheda ke Fayde)



बहेड़ा के छिलके को अंडी के तेल में भूनकर फिर सिके में पीसकर बंद गांठ पर हल्के से लेप लगाने से दो से तीन दिन में बंद गांठ बैठ जाती है ।


9. पित्त शोथ में बहेड़ा के फायदे (Benefit of Baheda in hindi)



बहेड़ा के फल की में को पीसकर इसका लेप बनाकर पित्तशोथ पर लगाने से पित्तशोथ मेंफायदा होता है ।




  मासपेशियों में तनाव व दर्द दूर करने के देसी प्राकृतिक उपाय



10. कंदू के रोग में फायदा करता है बहेड़ा (Baheda Benefit in Hindi)




बहेड़ा के फल की में का तेल कंडू रोग में फायदा करता है । ये जलन को भी शांत करता है । इस तेल की मालिश से खुजली तथा जलन समाप्त हो जाती है ।



11. दस्त में बहेड़ा के फायदे (Baheda ke Fayde)




  • बहेड़ा के पेड़ की छल 2 से 5 ग्राम वी एक से दो नग लोंग दोनों को पीस कर शहद के साथ तीन से चार बार चाटने से दस्त रुक जाते हैं ।



  • भुना हुआ बहेड़ा दो से तीन नग को पीस कर सेवन करने से  पुराने डस्त को भी बंद कर देता है ।


baheda ke patte
Baheda leavs 



 हरड़ बहेड़ा आंवला के फायदे (Benefit of harad baheda Amla)




आयुर्वेद के अनुसार ये तीन चीजे सही रहे तो मनुष्य स्वस्थ रहता है, इन्हें वात, कफ और पित्त कहा जाता है। जब ये गुण सही मात्रा एवं अनुपात में होते हैं तो हम दैहिक, दैविक एवं भौतिक सुख प्राप्त कर सकते हैं और जब इनका संतुलन ख़राब हो जाता है तब ये तीनों तरह की परेशानियाँ होने लगतीं हैं। वात, कफ तथा पित्त को पुनः संतुलित कर के हम न केवल शारीरिक बीमारियों को दूर कर सकते हैं बल्कि साथ ही मानसिक, आर्थिक एवं आध्यात्मिक  तरक्की भी कर सकते हैं। वात पित्त कफ को सही करने के लिए हमें त्रिफला की अवश्यता होती है ।


त्रिफला हरड़, बहेड़ा, तथा आंवला का मिश्रण होता है । हरड़ बहेड़ा आंवला अर्थात त्रिफला अर्थात तीन फल । हरड़, बहेड़ा एवं आंवला वे तीन फल हैं, जिनका ठीक तरह से प्रयोग कर हम वात, कफ एवं पित्त को फिर एस संतुलित कर सकते हैं।  त्रिफला के प्रयोग के द्वारा सफ़ेद हुए बाल पुनः काले होने लगते हैं । जबकि आधुनिक चिकित्सा शास्त्र के अनुसार जो बाल सफ़ेद हो गये हैं वे दुबारा काले नहीं हो सकते हैं ।




 सर्दियों में तिल व तिल के तेल के औषधीय प्रयोग एवम् उपाय



त्रिफला चूर्ण बनाने की विधि:



त्रिफला बनाने के लिये सूखी हुई बड़ी हरड़, बहेड़ा और आंवला की आवश्यकता होती है। तीनों ही फल साफ एवं कीड़े लगे नहीं होने चाहिये। इनकी गुठली निकाल कर बचे हुये भाग का अलग-अलग चूर्ण बना लें। बारीक छने हुये तीनों प्रकार के चूर्णों को 1 : 2 : 4 के अनुपात में मिलाकर छान कर चूर्ण तैयार करलें । उदहारण के तौर पर यदि 10 ग्राम हरड का चूर्ण लेते हैं तो उसमें 20 ग्राम बहेड़े का चूर्ण और 40 ग्राम आंवले का चूर्ण मिलाएं ।  चूर्ण बनते समय इसके अनुपात का विशेष ध्यान रखें ।  एक बार में उतना ही चूर्ण तैयार करें जितना कि 3 से 4 महीने में समाप्त जाये। क्योंकि 4 महीने से अधिक पुराने चूर्ण की ताकत समाप्त  होने लगती है। जहां तक हो सके घर पर बने चूर्ण का ही प्रयोग करें ।


बहेड़ा के नुकसान (bahede ke nuksan)



बहेड़ा ( baheda) का उपयोग सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, बहेड़ा का उपयोग अत्यधिक मात्रा में सेवन करने से पाचन खराब हो जाता है वी उल्टी होने की संभावना रहती है । इस लेख में बहेड़ा के फायदे एवम् इसके नुकसान का वर्णन किया गया है, आशा करते हैं कि यह लेख आप लोगो को अवश्य पसंद आया होगा ।



इस लेख का मूल उद्देश्य लोगों को आयुर्वेद के प्रति जागरूक करना है । किसी भी गंभीर रोग में इसका सेवन करने से पूर्व चिकित्सक की सलाह अवश्य  लें लेवें ।

धन्यवाद ।



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Sunday, 1 September 2019

दालचीनी, दालचीनी के फायदे ( dalchini, dalchini ke fayde)

dalchini
 dalchini

दालचीनी ( dalchini in hindi)



इस लेख में हम आपको दालचीनी के फायदे (dalchini ke fayde) के बारे में बताने जा रहे हैं । दालचीनी के बारे में लगभग सभी लोग जानते होगे, यह रसोई में प्रयोग होने वाला  एक मसाला है । दालचीनी मन को खुश करने वाली होती है । दालचीनी सभी तरह के दोषों को दूर करती है। यह पेशाब और  मासिक धर्म ठीक से होने में फायदे करती है। यह धातु को पुष्ट तथा पागलपन को दूर करने में सहायता करती है। दालचीनी का तेल सूजन तथा दर्द को शांत करता है। सिर दर्द के लिये यह बहुत ही उत्तम औषधि है ।



दालचीनी से तेल भी बनता है। दालचीनी, साबुन, दांतों के मंजन, चाकलेट, सुगंध व उत्तेजक पदार्थो  के रूप में प्रयोग की जाती  है। दालचीनी, स्तम्भक, कीटाणुनाशक, वात हर और उल्टी रोकने वाली, पेट की गैस से छुटकारा दिलाने वाली होती है। चाय, काफी में दालचीनी डालकर पीने से स्वादिष्ट हो जाती है तथा जुकाम में भी फायदे होते  है। दालचीनी की तासीर गर्म होती है ।



दालचीनी का पेड़ कैसा होता है



दालचीनी का पेड़ मुख्यता हिमाचल प्रदेश, श्रीलंका, व मालदीप में पैदा होती है । इस का हमेशा हरा रहने वाला वृक्ष 20 से 25 फिट ऊंचा होता है । इसके पत्ते 4 से 7 इंच लंबे होते हैं । इसकी पत्ती को हाथ से रगड़ने पर थिखी गंध आती है । इसका स्वाद थोड़ा कड़वा होता है । दालचीनी के फूल गुच्छों में दुरगंध युक्त होते हैं । दालचीनी के फल लंबे अंडाकार, गहरे बैंगनी रंग के होते हैं । फल को तोड़ने पर इसके अंदर से दालचीनी की गंध आती है । दालचीनी के पेड़ की छाल रूखी भूरे रंग की 5 एमएम मोटी होती है । दालचीनी के पत्ते तेजपात के रूप में प्रयोग किए जाते हैं ।





दालचीनी के रासायनिक संगठन



दालचीनी की छाल में प्राय:आधे से 1 प्रतिशत तेल पाया जाता है । शुरू में यह हल्के पीले रंग का होता है लेकिन रखने के बाद लाल रंग का हो जाता है । दाल चीनी की पत्ती में भी एक प्रकार का तेल होता है । दालचीनी के बीज में 33 प्रतिशत एक तेल पाया जाता है, यह रंगहीन व कपूर जैसी गंध आती है ।



दालचीनी का वैज्ञानिक नाम है Cinnamomum Zeylanicum Bl,यह Lauraceae कुल का पौधा है । इसे अंग्रेजी Cinnamon में के नाम से जानते हैं।


संस्कृत - दरूसिता, गुड़तवक, चोंच,

हिंदी    - दालचीनी

बंगाली - दरूचनी

मराठी - पुहरचक

गुजराती - तज, बालची

पंजाबी  - दालचीनी

तेलगु   - वक्कल

फारसी - दारचिनी

अरबी  - दारसीनी


दालचीनी के प्रकार



दालचीनी तीन प्रकार की होती है ।


1.  इसको C. cassia  के नाम से जाना जाता है । यह चीन से आती है, यह मोटी छाल की होती है


2.  इसका नाम इसका Cinnamomum sp इसको भारत  में लंका से मंगाया जाता है । यह चीन से मंगाई जाने वाली दालचीनी से पतली छाल की होती है । यह थोड़ी मीठी तथा काम तीखी होती है ।


3. इसका Cinnamomum tamal  नाम है । यही दालचीनी मसाले के रूप में घरों में प्रयोग की जाती है । यह मोटी, कम तीखी, इसी के पत्ते का प्रयोग तेजपात के रूप में किया जाता है । यह भारत में ही पाई जाती है । भारत व चीन की दालचीनी को तज कहते है । तज में तेल नहीं पाया जाता है ।


Dalchini chhal
Dalchini



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दालचीनी खाने के क्या फायदे हैं



1. दालचीनी एवम् दूध के फायदे (dalchni evam doodh ke fayde in hindi )




  • जिन लोगों को रात में नींद न आने की परेशानी होती है उन्हें सोने से पहले दालचीनी वाला 1 गिलास दूध का उपयोग अवश्य करना चाहिए । इससे नींद अच्छी आती है।


  • दालचीनी में ऐेसे ऐसे तत्व  होते हैं जो शरीर में शुगर के स्तर को नियंत्रित करते हैं। ऐसे में मधुमेह के रोगी के लिए दालचीनी वाला दूध काफी फायदे करता है।



  • दालचीनी वाला दूध पीने से पाचन सुदृढ होता है और पेट में अम्लता नहीं रहती है । ऐसे में जिन लोगों को खाना सही से नहीं पचता है उन्हें हर रोज दालचीनी सेवन अवश्य करना चाहिए। हड्डियां मजबूत करने में दालचीनी के फायदे होते हैं। जो लोगों को गठिया की समस्या से जूझ रहे है उन्हें नियमित रूप से दालचीनी व दूध का सेवन करना चाहिए।



  • दालचीनी पाउडर त्वचा में बहुत फायदे ही फायदे करता है। दालचीनी वाला दूध पीने से दालचीनी का एंटी- बैक्टेरियल गुण त्वचा और की कई परेशानियों से बचाता है।



2. पेट रोग में दालचीनी के फायदे ( dalchini ke fayde in hindi)




  • पांच ग्राम दालचीनी के चूर्ण में एक चममच शाह मिलाकर, दिन में तीन बार लेने से अतिसार, अफ़ारा, तथा ग्रहणी रोग में दालचीनी खाने के फायदे होते है ।



  • पेट दर्द एवम् उल्टी होने पर इसमें दालचीनी के तेल की 5 से 10 ग्राम मात्रा को मिश्री के साथ मिलाकर सेवन करने से पेट के रोग में फायदे होते है ।



  • अगर दस्त हो गए हों तो 4 ग्राम दालचीनी , कत्था 10 ग्राम दोनो को एक साथ पीसकर इसमें 250 ग्राम उबलता हुए पानी डालकर डाक दें, दो घंटे बाद इसे छान कर दो भाग कर रोगी को पिलाने से दस्त में फायदे होते हैं ।



  • पित्त के कारण होने वाली उल्टी में 10 से 20 ग्राम दालचीनी का क्वाथ पिलाने से वमन में फायदा होता है ।



  • अगर पेट की आंत में खींचाव हो जाए तो दालचीनी का तेल पेट पर मलने से आंत का खीचाव ठीक हो जाता है ।



  • अतिसार होने पर दालचीनी के चूर्ण की 2 से 5 ग्राम को बेल गिरी के शरबत में मिलाकर सुबह शाम दो बार पीने से अतिसार में फायदे होते है ।



  • दालचीनी का चूर्ण 750 मिली ग्राम व 500 मिलीग्राम कत्था दोनों को मिलाकर जल के साथ फंकी दिन में तीन बार लेने से लेने से दस्त में फायदा होता है ।



  • अमाशय में ऐठन हो जाए तो दालचीनी इलायची और तेजपत्ता बराबर मात्रा में लेकर इसका क्वाथ बना लेवें, इस दालचीनी क्वाथ का सेवन करने से अमाशय की ऐठन दूर होती है ।



  • दालचीनी एवम् लौंग को बराबर मात्रा में लेकर इसका क्वाथ बनाकर सेवन करने से वमन में फायदा होता है ।


Dalchini



3. मधुमेह में दाल चीनी के फायदे (dalchini ke fayde )



दालचीनी कैल्शियम बहुत ही उत्तम स्रोत है। दालचीनी शुगर को सन्तुलित करने के लिए एक बहुत अच्छी दावा है, इसलिए इसे आर्थिक रूप से काजोर व्यक्ति का इंसुलिन भी कहा जाता  हैं। दालचीनी खाने का स्वाद तो बढ़ाती है, बल्कि यह शरीर में उपस्थित रक्त शर्करा को भी नियंत्रित करता है। इसका सेवन करने वाला व्यक्ति मधु मेह से बचा रहता हैं और  साथ ही जो मधुमेह के रोगी हैं वे इसके उपयोग से रक्त में शर्करा के स्तर को नियंत्रित कर सकते है।



  • कप पानी में दालचीनी पाउडर को उबालकर, छानकर रोजाना सुबह पियें। इसे कॉफी में भी मिलाकर पी सकते हैं। इसे सेवन करने से मधुमेह में  फायदे होते हैं ।



  • एक कप पानी में दालचीनी चूर्ण को उबालकर, छानकर रोजाना सुबह पीने से मधुमेह में फायदे होते है । दालचीनी पाउडर को कॉफी में भी मिलाकर पी सकते हैं ।



  • नित्य तीन ग्राम दालचीनी का सेवन करने से न केवल रक्त में शर्करा की मात्रा कम होती है, बल्कि खुल कर भूख भी लगती है, पिसी हुई दालचीनी चाय में एक चुटकी मिलाकर रोज दिन में दो तीन बार पीने से मधुमेह की बीमारी में फायदा मिलता है। दालचीनी का पानी पीने से से रक्त में शर्करा के स्तर में कमी की जा सकती है।


4. कोलेस्ट्रॉल को कम करने में दालचीनी के फायदे ( dalchini ke fayde )



एक चम्मच शहद व तीन चम्मच दालचीनी चूर्ण एक कप पानी में मिलाकर प्रतेक दिन दो से तीन बार सेवन करने से रक्त में कोलेस्ट्रॉल को मात्रा काम होती है ।


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5. जोड़ो के दर्द में दालचीनी का पेड़ (dalchini ka ped)



दालचीनी के चूर्ण की 10 10 से 20 ग्राम मात्रा को 20 से 20 ग्राम शहद के साथ मिलकर पेस्ट बना लें, दर्द वाले स्थान पर हलकी मालिश करने से फायदा होता है । इसके साथ एक चम्मच शहद 2 ग्राम दालचीनी का चूर्ण को एक कप गुनगुने जल में मिला लें, इसको दिन में सुबह दोपहर व शाम को तीन बार लें ।


6. चर्मरोग में दालचीनी के फायदे (dalchini  ke fayde in hindi)



खुजली, फोड़े फुंसी, दाद होने पर दालचीनी पाउडर को शहद के साथ मिलकर रोग ग्रसित भाग पर लगाने से आराम मिलता है ।


7. दांतदर्द में दालचीनी का पेड़ (dalchini ka ped)





  • दांत में दर्द होने पर दालचीनी का तेल का फत दांतो पर लगाने से दांत दर्द में आराम मिलता है ।



  • दालचीनी के पत्ते यानी तेजपात के 5 से 6 एनजी पीस कर मंजन करने से दांत दर्द में आराम मिलता है ।

Dalchini


8. सिरदर्द में दालचीनी के फायदे (dalchini ke fayde)




  • दालचीनी के तेल को माथे पर लगाने से सर्दी के कारण हुआ सिरदर्द ठीक हो जाता है ।



  • अगर जुकाम के कारण सिर में दर्द हो तो दालचीनी को घिस कर गरम करके मांथे पर लेप लगाना चाहिए ।



  • दालचीनी के पत्ते यानि टेजपात के साथ से दस पत्ते पीस लेप बनाकर  कर कपाल पर लगाने से सर्दी और गर्मी के कारण हुआ सिरदर्द ठीक हो जाता है ।


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9. ज्वर में दालचीनी के फायदे ( dalchini ke fayde)



सर्दी के कारण हुए वायरल बुखार में पांच ग्राम दालचीनी में एक चम्मच शहद मिलाकर सुबह, दोपहर, शाम तीनों समय सेवन करने से ज्वर में फायदे होते है ।


दालचीनी के नुकसान ( dalchini ke nuksan)



दालचीनी का सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए, गरम प्रकृति वाले लोगो को इसका सेवन नहीं करना चाहिए, इससे इन लोगो के सिरदर्द पैदा हो जाता है । गर्भवती महिलाओं को भी दालचीनी सेवन नहीं करना चाहिए, इससे गर्भ गिरने की संभावना रहती है । इस लिए दालचीनी ( dalchini ) का उपयोग सही मात्रा में ही करें । सीमित मात्रा में सेवन करने से ही फायदे होते हैं ।


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Monday, 19 August 2019

टमाटर के 10 फायदे एवम् उपयोग

टमाटर के फायदे   (Tamato benefit in hindi):



इस लेख  में आपको टमाटर खाने के फायदे एवम् उपयोग के बारे में बताने जा रहे हैं । टमाटर को एक सब्जी माना जाता है,  जबकि वास्तव में यह एक फल हैं। चाहे आप इसे फल  कहें या सब्जी, टमाटर एक पोषण शक्ति का भंडार है, और जब आप इसे अपने भोजन में शामिल करते है, तो आपको टमाटर खाने के फायदे (Tamatar khane ke fayde) बहुत सारे मिल सकते हैं ।



इनमें विटामिन ए, सी, और के, फोलेट और पोटेशियम के साथ-साथ थियामिन, नियासिन, विटामिन बी 6, मैग्नीशियम, फास्फोरस और तांबे की अच्छी मात्रा होती है, जो कि अच्छे स्वास्थ्य को बनाए रखने के लिए आवश्यक हैं ।


सबसे अच्छी बात यह है कि टमाटर स्वाभाविक रूप से सोडियम, sachurated fat, कोलेस्ट्रॉल और कैलोरी में कम होते हैं। टमाटर का प्रयोग सलाद और सैंडविच में व सब्जियों के लिए ग्रेवी के रूप में और सॉस और सूप में किया जाता हैं ।


1. त्वचा के स्वस्थ में टमाटर खाने के फायदे (Tamater khane ke fayde) :



  • टमाटर का नियमित खाने से आपकी त्वचा को अच्छा बनाने में सहायता करता है । टमाटर में लाइकोपीन होता है, जो एक एंटीऑक्सिडेंट होता है, जो त्वचा को सूरज की धूप से बचाने में सहायता  करता है । यह पराबैंगनी प्रकाश से नुकसान के लिए त्वचा को सक्षम बनाता है, चेहरे पर  लाइनों और झुर्रियों को दूर करता है ।


  • इसके अलावा, टमाटर का उपयोग  मुँहासे और चकत्ते को ठीक करने या मामूली जलने का इलाज करने के लिए किया जा सकता है । सुस्त त्वचा पर टमाटर का गूदा रगड़ना एक स्वस्थ चमक को पुनर्जीवित करने का एक आसान तरीका है ।





2. हड्डियों के स्वास्थ्य में टमाटर खाने के फायदे (Tamatar khane ke fayde in hindi) :



  • टमाटर आपकी हड्डियों के लिए अच्छा है क्योंकि उनमें विटामिन के और कैल्शियम की उपस्थिति होती है। ये दोनों तत्व हड्डियों को मजबूत और मरम्मत के लिए उपयुक्त हैं।


  • एंटीऑक्सिडेंट लाइकोपीन को हड्डी के घनत्व में सुधार करने के लिए भी  उपयोगी है, जो ऑस्टियोपोरोसिस से लड़ने का एक अच्छा स्रोत है, यह वह बीमारी है जो हड्डी के फ्रैक्चर, विकलांगता और विकृति का कारण बन सकती है ।


3. दृष्टि में सुधार में टमाटर के फायदे (tamatar ke fayde):



  • टमाटर में विटामिन ए और सी की उच्च मात्रा आपकी दृष्टि को बेहतर बनाने और रतौंधी को होने से बचाता है।


  • मोतियाबिंद के वृद्धि में टमाटर खाने के फायदे होते हैं । यह मोतियाबिंद के खतरे को कम कर सकता हैं । साथ ही, टमाटर में फाइटोकेमिकल एंटीऑक्सिडेंट ज़ेक्सैन्थिन, ल्यूटिन और लाइकोपीन होते हैं। ये सभी यौगिक आंखों को नुकसान से बचाते हैं ।



बालों झड़ने की समस्याओं में टमाटर के फायदे ( benefit of tomato in hair loss in Hindi ):



  • टमाटर आपके बालों को भी बेहतर बना सकता है। टमाटर में मौजूद विटामिन (विशेष रूप से विटामिन ए) और आयरन बालों को मजबूत बनाने के साथ-साथ सुस्त, क्षतिग्रस्त और बेजान बालों में चमक बढाने में मदद करते हैं।


  • इसके अलावा, टमाटर में अम्लता आपके बालों में पीएच स्तर को संतुलित करने में मदद करती है ।


  • यदि आपके खुजली व रूसी है, तो बस शैम्पू करने के बाद अपने खोपड़ी और बालों पर ताजा टमाटर का रस लगा लें, इसे चार से पांच मिनट के लिए छोड़ दें और फिर ठंडे पानी से धो लें।


नोट: अपने बालों पर नियमित रूप से टमाटर का उपयोग न करें, क्योंकि उनकी अम्लता आपके बालों में खुश्की कर सकता है।


5. ब्लड शुगर लेवल को कम करने में टमाटर खाने के फायदे ( Tamatar khane ke Fayde) :



  • डायबिटीज के मरीजों के ब्लड शुगर लेवल को कम करने के लिए टमाटर एक अच्छा स्रोत है। इनमें बहुत कम मात्रा में कार्बोहाइड्रेट होते हैं, जो मूत्र के ग्लूकोज स्तर को नियंत्रित करने में सहायता करता है।


  • टमाटर क्रोमियम का एक बहुत अच्छा स्रोत हैं जो रक्त शर्करा, साथ ही फाइबर को नियंत्रित करने में सहायता करता है, जो रक्त शर्करा के स्तर को बहुत अधिक होने से रोकने में सहायक है।


  • अनेक अध्ययनों से मालूम चला है कि टमाटर में उपस्थित एंटीऑक्सिडेंट गुर्दे और रक्तप्रवाह को सुरक्षा प्रदान करते हैं, मधुमेह से प्रभावित दो क्षेत्रों ।





6. प्रोस्टेट कैंसर में टमाटर के फायदे (Tomato benefit in hindi) :



  • नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट के जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन से पता चलता है कि अधिक टमाटर खाने से प्रोस्टेट कैंसर का खतरा कम होता है । इस लिए टमाटर का सेवन सीमित मात्रा में करें, इससे बालों में फायदे होते हैं ।


  • यह फेफड़े, पेट, गर्दन, मुंह, ग्रसनी,  बड़ी आंत, छोटी आंत, मलाशय और डिम्बग्रंथि के कैंसर जैसे अन्य कैंसर के खतरे को भी कम करने में टमाटर खाने के फायदे होते हैं । ऐसा मुख्य रूप से टमाटर में उपस्थित एंटीऑक्सीडेंट 'लाइकोपीन' के कारण होता है .


7. वजन को नियंत्रित करने में कच्चा टमाटर खाने के फायदे ( kachha Tamatar khane ke fayde) :



  • टमाटर आपको वजन कम करने में भी फायदा कर सकता है । टमाटर में  वसा में बहुत कम मात्रा में होता हैं और कोलेस्ट्रॉल नहीं होता है । इनमें बहुत सारा पानी और फाइबर होता है, इसलिए ये बहुत सारे कैलोरी के बिना आपके पेट को भरने को भरने का काम करता हैं ।


  • इसलिए, यदि आप अपना वजन कम करना चाहते हैं, तो अपने खाने में बहुत सारे टमाटर शामिल करें । आप टमाटर कच्चा खा सकते हैं या सलाद, सैंडविच और अन्य भोजन में शामिल कर सकते हैं ।


8.  अनिद्रा में टमाटर के फायदे (tomato benefit in hindi) :



  • पेंसिल्वेनिया यूनिवर्सिटी के पेरेलमैन स्कूल ऑफ मेडिसिन के एक अध्ययन के अनुसार, जो लोग अधिक लाइकोपीन का सेवन करते हैं, वे उन लोगों की तुलना में बेहतर नींद का आनंद लेते हैं, जो नहीं करते हैं । (टमाटर में लाइकोपीन की अच्छी मात्रा होती है)


  •  अपने आहार में विटामिन सी के उच्च स्तर से नींद को बढ़ा सकते हैं और टमाटर विटामिन सी का एक बड़ा स्रोत हैं। इसलिए, यदि आप ठीक से नहीं सो रहे हैं, तो रात के खाने के समय टमाटर का सूप या टमाटर के साथ सलाद खाने की प्रयास करें। इससे नींद आने में फायदे होते हैं ।



9. ब्लड प्रेशर में टमाटर खाने के फायदे (Tamatar khane ke fayde):



  • टमाटर, पोटेशियम में भरपूर मात्रा में नी हैं, निम्न रक्तचाप को कम करने में टमाटर खाने का फायदा होता हैं । यह पाया गया है, कि आपके आहार में पोटेशियम की कमी होने पर रक्तचाप बढ़ सकता है, खासकर यदि आप बहुत अधिक सोडियम का सेवन करते हैं। पोटेशियम आपके शरीर से सोडियम को कम करने में सहायता करता है।


  • सिर्फ एक कप ताजा टमाटर में पोटेशियम की आपकी दैनिक आवश्यकता का 11.4 प्रतिशत होता है, इसलिए अधिक टमाटर खाने से उच्च रक्तचाप से लड़ने और विभिन्न हृदय स्थितियों के खतरे को कम करने का एक शानदार तरीका है।


  • इसी समय, टमाटर में लाइकोपीन, विटामिन ए और सी, फाइबर और कैरोटीनॉयड जैसे शक्तिशाली पोषक तत्व होते हैं, जो हृदय रोग के खतरे को कम करने का काम करते हैं।


10. क्रॉनिक दर्द में टमाटर के फायदे ( Tamatar ke fayde) :



बायोफ्लेवोनॉइड्स और कैरोटेनॉइड जैसे एंटी-इंफ्लेमेटरी एजेंटों की उपस्थिति के कारण टमाटर खाने से पुराने दर्द को भी कम करने में फायदा करता है। जो लोग नियमित रूप से हल्के से मध्यम दर्द से पीड़ित होते हैं, उनमें अक्सर सूजन होती है। सूजन कम करने से दर्द में आराम मिलेगा।



अगली बार जब आप खरीदारी कर रहे हों, तो अपनी टोकरी में टमाटर डालना न भूलें। चाहे ताजा, स्टू, रसदार, शुद्ध या धूप में सुखाया हुआ हो, टमाटर खाना स्वस्थ रहने का एक आसान और स्वादिष्ट तरीका है ।



इस लेख में टमाटर के फायदे (Tamatar khane ke fayde) के बारे में वर्णन किया गया है, आशा करते हैं यह लेख आपको अवश्य पसंद आया होगा । पसंद आए तो शेयर जरूर करें ।

धन्यवाद ।


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Tuesday, 6 August 2019

इमली खाने के फायदे जानकर दंग रहे जाएंगे ( Imli khane ke fayde)

इमली खाने के फायदे ( Imli khane ke fayde)


इमली खाने के फायदे ( imli khane ke fayde) व स्वास्थ्य लाभ के बारे में जानकारों द्वारा अच्छी तरह अध्ययन किया गया है, कि यह पूरे शरीर में सूजन को कम करने, दृष्टि में सुधार, श्वसन तंत्र को ठीक करने, त्वचा रोग  को ठीक करने और पाचन तंत्र में सुधार की क्षमता रखता है ।


इमली खाने से हृदय के स्वास्थ्य में सुधार, बवासीर के इलाज और परजीवियों और कृमियों से बचाने के लिए, कोलेस्ट्रॉल को कम करने में फायदा कर सकता है।

इमली का वैज्ञानिक नाम Tamarindus indica L. है। इमली का पेड़ अफ्रीका के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों, विशेष रूप से यह सूडान का मूल निवासी है। हालाँकि, इसकी खेती अपने अद्वितीय स्वाद और पौशक्ता के कारण दुनिया के लगभग सभी क्षेत्रों में फैल गई है।

इमली को निम्न नामों से जाना जा है ।

अंग्रेजी    -  Tamarind

संस्कृत    -  अमलिका

गुजराती  -  आंब्ली

हिंदी       -  इमली

बंगाली    -  तेतुला

मराठी   -   चिंच

फारसी  -  तिमिर हिंदी

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इमली के गुण धर्म:


कच्ची इमली  खट्टी, वतनाशक, पितनाशक, काफनाशक, तथा रुधिर विकारों को हरती है ।

पकी इमली गरम, रूखी, अग्निदीपक, कफ व वात नाशक होती है ।

इमली के बीज प्रमेह नाशक, आमतिसार, व अतिसार में लाभ दायक होती है ।


इमली, इमली के पत्ते
इमली व इमली के पत्ते

इमली खाने के फायदे:


1. अतिसार में इमली के उपयोग (tamarind in hindi):




  • इमली के 10 से 15 पत्ते के रस की की मात्रा को 400 मिली पानी में उबालकर जब चौथा भाग बाकी रह जाय तो इस कवाथ को रोगी को पिलाने से आमतिसर ठीक होता है ।



  • इमली के पत्ते के रस को थोड़ा गरम करके रोगी को पिलाने से भी आमातिसार में लाभ मिलता है ।



  • इमली के बीज की मिंगी का चूर्ण सुबह शाम पानी के साथ फेंकी देने से आमातीसार व अतिसार में फायदा होता है ।



  • पुराने इमली के वृक्ष की जड़ की छल व कालीमिर्च की बराबर मात्रा लेकर दोनो को छाछ के साथ पीस कर मात्र के आकार की गोलियां बना लें ।  इन गोलियों की 1 से 2 नग दिन में तीन बार सेवन करने से आम अतिसार में तुरंत लाभ होता है ।



  • इमली के 12 से 15 ग्राम छिलके तथा 6 ग्राम जीरा व थोड़ी सी ताड़ की शक्कर  लेकर इन तीन को पीस के तीन से चार घंटे के अंतराल पर फेंकी लेने से पुराने से पुराना आमाातिसार ठीक हो जाता है ।



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2. पेट दर्द में इमली खाने के फायदे (imli khane ke Fayde):



इमली की छाल तथा सेंधा नामक को मिट्टी के बर्तन में रख कर जला लें, इसकी 125  मिली ग्राम मात्रा का सेवन करने से पेट दर्द में फायदा होता है ।


Imli, kachhi imli
इमली



3. बहुमूत्र में इमली के बीज के फायदे ( Imli ke beej ke fayde):



इमली के  बीज की 10 ग्राम मात्रा को सुबह पानी में भिगोकर रख दें, शाम के समय इसका छिलका उतार कर इमली कि मींगी का सेवन कर ऊपर से गए का दूध पीने से बहूमुत्र की समस्या ठीक हो जाती है ।


4. लू के असर में इमली का फायदा(Imli ka Fayda):


  • इमली के फल के गूदे को तंदे जल के साथ पीसकर सिर पर लगाने से लू का असर खत्म हो जाता है । यह प्रयोग अगर मुंडे सिर पर किया जाय तो उत्तम है ।


  • पकी इमली को पानी में मसल कर इस पानी में कपड़ा भिगोकर शरीर को कुछ समय तक पौछने से लू में राहत मिलती है व मूर्छा में भी फायदा होता है ।



5. पित्त विकार में इमली के प्रयोग( Imli ke upyog):



  • इमली के कोमल पत्तियों की सब्जी बनाकर खाने से दह तथा पित्त विकार समाप्त होते है ।

  • इमली व मिश्री का शरबत मिलाकर पीने से  हृदेय की जलन समाप्त होती है ।

  • 25 ग्राम छुआरे व 10 ग्र इमली को एक किलो दूध में उबालकर तथा छानकर पीने से जलन व घबराहट समाप्त होती है ।


6. दाद, फोड़े, फुंसियां में इमली खाने के फायदे ( Imli khane ke fayde ):



  •  फोड़े फुंसी इमलीमें इमली के बीज खाने के फायदे होते हैं, बीज की पुल्टिस बनाकर फुंसी पर बांधने से  फुंसी ठीक हो जाती हैं ।

  • दस ग्राम इमली के पत्ते की पुल्टिस बनाकर बांधने से फोड़ा पक कर टूट जाता है ।

  • इमली के बीजों को नीबू के रस को पीसकर दाद पर लगाने से दाद दूर होता है ।



Imli, kachchi imli
Kachhi imli



अन्य प्रयोग:



  • इमली को पानी में घोल कर कुल्ला करने से पित्त के कारण हुआ मुंह पाक ठीक हो जाता है ।


  • इमली के फूलों की पुल्टिस आंखों पर बांधने से  आंखो की सूजन उतर जाती है ।


  • दस ग्राम इमली को 150 मिली पानी में भिगो कर, घोल छान कर शक्कर मिलाकर पीने से सिरदर्द में आराम मिलता है ।


  • पकी हुई इमली का पानी बनाकर पीने से आंतों के घाव ठीक होते हैं व भूख बढ़ती है ।


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विशेष प्रयोग:


पुरानी इमली का गूदा एक किलो को दो किलो जल में भिगोकर, अगले दिन सुबह दो तीन उबले देने के बाद नीचे उतार कर थोड़ा ठंडा होने के बाद मसल कर छान लें, फिर इसमें दो किलो खंड मिलाकर चासनी बना लें । इस गरम चासनी को छानकर ठंडा होने के बाद बोतल में भरकर फ्रिज में रख दें । इस चासनी की 10 से 40 ग्राम मात्रा तीन तीन घंटे बाद सेवन करने से  उल्टी, पित्त, लू, अजीर्ण, तृष्णा, मंदाग्नि व शराब का नशा दूर होता है । इस लेख में इमली खाने के फायदे का वर्णन किया गया है, आशा करते हैं कि यह लेख आपको पसंद आया होगा ।

धन्यवाद ।


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Wednesday, 17 July 2019

जामुन के गुण, 8 फायदे, उपयोग तथा हानियां ( Jambul in hindi)

Jamun
jamun


जामुन के 8 फायदे, उपयोग तथा हानियां ( Jambul in hindi):





जामुन को जम्बु फल के नाम से भी जाना जाता है । जामुन का पेड़ अथवा वृक्ष से सभी लोग परिचित होंगे, इसका पेड़ हमेशा हरा रहने वाला अधिकतम 100 फिट ऊंचा व 12 फिट गोलाई तक का होता है । जामुन के फूल हरा रंग लिए सफेद रंग खुशबू दार होते है । इसके पेड़ पर अप्रैल से जून तक फूल आते हैं व जून जुलाई में फल लगते है । जामुन के बीज में  एक उड़नशील तेल, क्लोरोफिल, वसा, राल, एल्ब्यूमिन आदि तत्व पाए जाते है । जामुन की गुठली में मधुमेह निवारक तत्व पाए जाते है । जामुन की छाल में टेनीन नमक पदार्थ पाया जाता है जो कि 12 प्रतिशत होता है तथा एक गोंद भी पाया जाता है ।


जामुन के सभी अंग जामुन के पत्ते, जामुन की लकड़ी, जामुन की छाल, जामुन के फल का गूदा, जामुन की गुठली, आदि सभी औषधीय कामो में उपयोग किए जाते हैं । जामुन का सिरका भी बनाया जाता है ।


जामुन को अंग्रेजी में Jambul, jaman के नाम से जाना जाता है, इसे मराठी में जांभूल, संस्कृत में जंबू, व बंगाली में कलाजाम कहते हैं।


जामुन के गुण (jamun ke gun):



जामुन फल अग्निवर्धक, पितशामक, स्तंभन, पाचन तथा लिवर को उत्तेजित करने वाला होता है । जामुन वातवर्धक भी होता है । जामुन की गिरी पाचन शक्ति को बढ़ाती है साथ ही यह रक्त एवम् मूत्र में उपस्थित शर्करा को नियंत्रित करती है । इसके अलवा जामुन का उपयोग मधुमेह, दांत के रोग, बवसीर, अतिसार, मुंह के छाले, पथरी रक्तपित्त आदि रोगों में किया जाता है ।


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जामुन के औषधीय फायदे (Jamun ke aushdhiye fayde):



1. मधुमेह में जामुन का फायदे (Jamun ke fayde):



  • जामुन के बीज का चूर्ण 300  मिली ग्राम से एक ग्राम तक दिन में तीन बार लेने से मूत्र में शक्कर का आना बंद हो जाता है ।


  • जामुन की जड़ सौ ग्राम जड़ को 250 ग्राम पानी में पीस कर इसमें 20 ग्राम मिश्री डालकर सुबह शाम भोजन से पहले सेवन करने से मधुमेह में फायदा होता है ।


  • पुष्ट जामुन पके हुए 250 ग्राम को उबलते हुए पानी में डालकर कुछ देर के लिए उबालें, इसे उतार कर ठंडा करें, फिर फलों को मसलकर कप्पड़ छान कर दीं में तीन बार सेवन करने से मधुमेह में फायदा होता है ।


  • जामुन के छाल की राख की 2 से 3 ग्राम की मात्रा का दिन में तीन बार सेवन करने से पेशाब में शक्कर आना रुक जाती है । यह मधुमेह के लिए एक अच्छी औषधि है ।


2. दांत रोग में जामुन के फायदे (Jamun ke fayde):



  • जामुन के पत्ते की राख बनाकर दांतों व मसूड़ों पर रगड़ने से  फायदा होता है । व दांत मजबूत होते हैं ।


  • पके हुए जामुन के रस को मुंह में भर कर कुल्ला करने से दांतों का पायरिया ठीक हो जाता है ।



3. अर्श में जामुन का उपयोग (Jamun ka upyog ):



  • दस ग्राम जामुन के पत्ते को दो सौ पचास ग्राम गए के दूध में में घोटकर दिन में तीन बार सत दिन तक पीने से  अर्श में फायदा होता है ।


  • इसकी कोमल कोपलों के रस की बीस ग्राम मात्रा में थोड़ी सी शक्कर मिलाकर सेवन करने से अर्श में रक्त का आना रुक जाता है ।


4. पथरी में जामुन के फायदे ( Jamun ke fayde):



  • पके हुए जामुन लगातार कुछ दी खाने से गुर्दे की पथरी गलकर बाहर निकल जाती है ।


  • जामुन के 10 से 15 पत्तों का कल्क बनाकर इसमें 2 से 3 कालीमिर्च का चूर्ण छिड़क सुबह शाम कुछ दी सेवन करने से पथरी के टुकड़े होकर मूत्र द्वारा बाहर निकाल जाते हैं ।


  • जामुन के फल के दस ग्राम रस में 250 मिली ग्राम सेंधा नमक  मिलाकर दिन में दो बार लगातार कुछ दी सेवन करने से  गुर्दे की पथरी मूत्र मार्ग से बाहर हो जाती है । पथरी का यह असर दायक प्रयोग है ।

जामुन फल
जामुन


5. दस्त में जामुन के प्रयोग (Jamun ke prayog):



  • जामुन की गुठली खाने से दस्त में आराम मिलता है । आम की गुठली व कली हरड़ को बराबर मात्रा में भून कर खाने से दस्त में लाभ मिलता है ।


  • इसके ताजे कोमल पत्ते के रस के पांच से दस ग्राम रस में 10 ग्राम बकरी का दूध मिलाकर सेवन करने से अतिसार तथा आम वात में फायदा होता है ।


6. यकृत विकारों को दूर करता है जामुन:


जामुन के दस ग्राम सिरका रोज खाने से यकृत व तिल्ली की वृद्धि में फायदा होता है । यह फल सौम्य होता है, इसमें लोहे के अंश पाए जाते हैं जो शरीर के लिए बहुत लाभदायक होता है।


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7. मुंह के छाले में जामुन का उपयोग (Jamun ka upyog):


जामुन के 5 से 6 ताजा पत्ते जो मुलायम हों को पीस कर इसमें पानी मिलाकर कुल्ला करने से मुंह के भयंकर से भयंकर छाले भी ठीक हो जाते हैं ।


Jamun ka fal


8. जामुन खाने के नुकसान (Jamun khane se hania):



जामुन का पाचन देर से होता है । इस फल को खाने से पेट व फेफड़ों को हानियां होती हैं । यह कफ को बढ़ाता है।  इससे फेफड़ों में वायु भर जाती है । इसका अधिक मात्रा में सेवन करने से भुखार आने की संभावना रहती है ।
जामुन को जब भी खाएं तो नमक मिलकर ही खाएं ।


विशेष:


हृदेय की धड़कन को सामान्य करने के लिए जामुन के फल का प्रयोग किया जाता है । इसे खाने से रक्त विकार दूर होकर फॉडे फुंसियां निकलना बंद हो जाते हैं । जामुन पित्त तथा अतिसार संबंधित रोग नष्ट होते है । जामुन गले के लिए बहुत फायदेमंद होता है, इससे गला साफ होता है । जामुन का शरबत पीने से उल्टी, दस्त, तथा बवासीर में लाभ मिलता है । तंग जुता पहनने से अथवा जुता काटने से पैर में जख्म हो जाता है तो जामुन की गुठली को पीस कर पैर में लगने से घाव भर जाता है ।

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