Sunday, 23 June 2019

करी पत्ता के 11 जबरदस्त फायदे , बढ़ सकती है आंखों की रोशनी ( Kadi patta Ke Fayde)

kari patta ka ped
Kadi patte ka ped


करी पत्ता के जबरदस्त फायदे, आंखों की रोशनी भी बढ़ाने में सहायक (Curry patta ke fayde)



करी पत्ता (Curry Patta), जिसे ज्यादातर कडी पत्ती (Kadi Patta) के रूप में जाना जाता है, का व्यापक रूप से भारतीय पाक कला में उपयोग किया जाता है । इन सुगंधित पत्तियों से न केवल खाने में सुगंध आती है, बल्कि ये अनेक स्वास्थ्य लाभ से भरी होती हैं। करी पत्ते के बारे में हम में से अधिकांश इनहे सुगंधित पत्तियों के उपयोग को जानते हैं; हालाँकि, ये पत्ते सदियों से अपने औषधीय गुणों के लिए उपयोग में आते हैं। करी पत्ते का उपयोग भारतीय घरों में खाने मसालों के रूप में सब्ज़ियों में प्रयोग किया जाता है । जो हमारे स्वास्थ के लिए काफी फायदेमंद होते हैं । इसका का प्रयोग खाने के स्वाद को बढ़ाने के लिए किया जाता है और इस करी पत्ते को मीठी नीम के नाम से भी जाना जाता है । इस लेख में आप को बताने जा रहे हैं कि करी पत्ता उपयोग करने के क्या फायदे हैं ।

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1. करी पत्ते का उपयोग बालों के लिए (curry curta for hair in hindi)



सब पहले आपको बता दें कि की करी पत्तियों के सेवन से हमारे बालों को काफी फायदा मिलता है | करी पत्ता पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जिसमें विटामिन, कैल्शियम और फास्फोरस प्रचुर मात्रा में पाया जाता है । जिसका प्रतिदिन सेवन से बालों को लम्बा, काला और घना बनाने में किया जा सकता है, और इसका पेस्ट बना कर अपने बालों की जड़ों पर लगा सकते हैं, साथ ही इसके के प्रयोग से डैंड्रफ भी दूर हो जाता है ।



kari Leavs
Kurry patta


2.  करीपत्ता का उच्च रक्त चाप में उपयोग ( kari patte ka upyog)


जिनको उच्च रक्तचाप की समस्या होती है, वह लोग अगर हर दिन करी पत्ते के चार पांच पत्ते सुबह के समय चबा कर खाएगें तो उन्हें उच्च रक्त से फायदा मिल सकता है।


3. करी पत्ते का पेट रोग में उपयोग ( Curry patte ka upyog)



जिन लोगों को दस्त की समस्या हो जाती है उनके लिए भी करी पत्ता काफी लाभदायक होता है । करी पत्ते की कुछ पत्ती पानी में उबालकर उस पानी को पी लेने से दस्त के रोगी को तुरंत लाभ मिल जाता है ।




4. आंखों में करी पत्ते के फायदे (Curry patte ke fayde)


अगर किसी की आँखों की रोशनी कम हो रही है या हो चुकी है उनके लिए करी पत्ता बहुत फायदेमंद होता है । करी पत्ते को धूप में सूखा कर उसका चूर्ण बना लें, और फिर हर रोज़ उसे पानी के साथ फांकी लेने से आँखों की रौशनी भी बड जाती है । रतौंधी के रोग में भी आराम मिलता है ।



5. करीपत्ता वजन को नियंत्रित कर सकता है ( Curry patta for weight los in hindi)



यहां करी पत्ते के कुछ लाभ या स्वास्थ्य लाभ हैं । करी पत्ता वजन कम करने में मदद करता है। अतिरिक्त वजन ये पत्तियां आपको पतला करने के लिए दो तरह से काम करती हैं। सबसे पहले, ये पत्ते शरीर को विषाक्त पदार्थों से छुटकारा पाने में मदद करते हैं और दूसरी बात यह है कि यह शरीर की जमीं हुए वसा को जलाने में मदद करते हैं।



6. कोलेस्ट्रॉल के स्तर को नियंत्रित करता है करी पत्ता:


केलेस्टेरल के स्तर को कम करने में मदद करता है । कोलेस्ट्रॉल  के ऑक्सीकरण से एलडीएल (कम घनत्व वाले लिपोप्रोटीन) या शरीर में खराब कोलेस्ट्रॉल का निर्माण होता है । हालांकि, करी पत्ते, जो एंटीऑक्सिडेंट से भरपूर हैं, कोलेस्ट्रॉल के ऑक्सीकरण को कम करने में मदद करते हैं। इस तरह खराब कोलेस्ट्रॉल या एलडीएल का स्तर नियंत्रित या कम हो जाता है।


7. मधुमेह में फायदा करता है करी पत्ता ( kurry patta ke fayde)



एक सर्वे में पाया गया है कि मधुमेह को नियंत्रित रखने में सहायता करता है । नियमित रूप से करी पत्तों का सेवन इंसुलिन उत्पादक कोशिकाओं को उत्तेजित करने में मदद करता है। ये कोशिकाएं रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रण में रखने में सहायता करती हैं ।


8.  गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल स्वास्थ्य को बनाए रखने में करी पत्ता के फायदे:



पाचन से परेशान हो रहे रहे हैं, तो करी पत्ते फायदेमंद साबित हो सकते हैं। करी पत्ते में मौजूद पाचक एंजाइम पाचन स्वास्थ्य को दुरुस्त रखने में सहायक होते हैं, और रेचक गुण आंत्रों को नियंत्रित करने में असरकारक होते हैं। अगर आप पेट में दर्द, गैस या दस्त जैसी परेशानियों से जूझ रहे हैं, तो करी पत्ता का प्रयोग करें।



9. तनाव कम करने में फायदा करता है:



हममें से अधिकांश लोग तनाव में रहते हैं, लेकिन हमारी व्यस्त जीवनशैली में इससे बचना मुश्किल हो जाता है। तनाव प्रमुख रोगों को जन्म दे सकता है, और ये पत्ते आपको तनाव को नियंत्रित करने में भी मदद कर सकते हैं। इन पत्तियों की सुगंध आपके मन और शरीर को शांत करके तनाव के लक्षणों को दूर करने में सहायता करती है।



कड़ी पत्ता
करी पत्ते



 10. आंखों की सेहत सुधारने में फायदा (Curry patta ke fayde):



विटामिन ए आपकी आंखों के लिए आवश्यक विटामिनों में से एक है। करी पत्ते इस विटामिन के साथ भरी हुई हैं और इस प्रकार अपने दैनिक आहार में इन पत्तियों को खाने से आपकी आंखों को स्वस्थ स्थिति में रखने में फायदा मिल सकता है।


11. नाक और छाती के रोग में फायदा



करी पत्ते विटामिन ए और सी से भरपूर होते हैं, और इन पत्तियों में जीवाणुरोधी, एंटीफंगल, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण भी होते हैं, जो कंजेशन, साइनसाइटिस,  खांसी और सर्दी के लक्षणों को कम करने में सहायक होते हैं।


दोस्तों आपको करीपत्ता के फायदे से संबंधित जानकारी कैसी लगी ? कृपया हमें कमेंट करके बताएं । लेख अच्छा लगा हो तो इसे ज्यादा से ज्यादा लाइक और शेयर करें । अच्छे अच्छे स्वास्थ संबंधित जानकारी के बारे में पढ़ने के लिए हमें अवश्य फोलो करें -   Rand know desi health

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Monday, 10 June 2019

अनानास खाने के 8 फायदे एवम् नुकसान ( Ananas khane ke 8 fayde evam Nuksan)

Pineapple, Ananas,
Ananas


अनानास के फायदे (Pine apple benefit in hindi):




लेख में अनानास के फायदे व नुकसान के बारे में वर्णन करने जा रहे हैं । अनानास लगभग पूरे भारतवर्ष में पाया जाता है । मूलतः यह ब्राजील का आदिवासी पौधा है । भारत में इसकी खेती आसाम, बंगाल व समुद्रतटीय प्रदेशों में अधिक मात्रा में की जाती है । अनानास 2 फिट ऊंचा शकीय पौधा होता है । पौधे के शीर्ष मध्य भाग में  फल निकलता है जिसके मूल में पत्तों का पुंज होता है । इसका फल पककर नारंगी पीले रंग की हो जाता है । अनानास का पेड़ केवड़े या एलोवेरा से जैसे दिखते हैं । अनानास के पौधे के बीचोबीच एक छोटा कांड निकलता है, जो चारो तरफ से पत्तों के गुच्छों से ढका होता है । अनानास में ब्रोमोलिन्न नामक एक तत्व पाया जाता है जो हाजमे को मजबूत करता है । अनानास के फल के रस में अम्ल, शर्करा, विटामिन्स A तथा C पाए जाते हैं । इसमें दूध को जमाने वाला एक तत्व भी पाया जाता है ।

अनानास का वैज्ञानिक नाम Ananas comosus है, इसे इंग्लिश में pineapple कहते हैं । व हिंदी में अनानास एवम् संस्कृत में बहुनेत्र के नाम से जाना जाता है ।


Ananas ka ped, Ananas ka Paudha, Ananas ke patte
Ananas ka ped



अनानास के औषधीय गुण (Ananas ke aushdhiye gun):



अनानास के कच्चे फल के स्वरस में गर्भाशय उत्तेजक, व गर्भपात तत्व पाया जाता है । यह वात पित्त शामक, रेचन, अनमोल, दीपन, मुत्रल, रक्तपित्त शामक होता है ।

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1. मधुमेह में अनानास के जूस के फायदे ( Ananas ke juice ke fayde):


अननास मधुमेह में बहुत फायदा करता है । अनानास के सौ ग्राम रस में 10-10  ग्राम हरड़, बहेड़ा, आमला, तिल, गोखरू, तथा जामुन के बीज मिलाकर, सुखाकर इसके चूर्ण बना लें, इस चूर्ण की 3 ग्राम मात्रा सुबह शाम सेवन करने से मधुमेह व बहुमुत्र के रोगी को लाभ होता है । इसमें दूध चावल खाना फायदेमंद होता है, व नमक, खटाई, व लालमिर्च से परहेज़ करना है ।


2. पेट रोग में अनानास के जूस के फायदे (Ananas ke juce ke fayde):



  • अनानास के रस में इसकी आधी मात्रा में गुड़ मिलाकर सेवन करने से उदर में उपस्थित वात नश्ट हो जाता है, अगर पेट में बाल चला जाए तो अनानास का रस पीने से बाल गलकर शरीर से बाहर निकाल जाता है ।


  • परिपक्व अनानास के दस ग्राम रस में 125 मिली हिंग तथा सेंधा नमक 250 मिली, अदरक का रस 250 मिली, मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से पेट दर्द व गुल्म रोग में फायदा होता है ।


अनानास
अनानास



3. श्वास रोग में अनानास जूस के  फायदे ( pineapple juice fayde hindi):




  • अनानास के दस ग्राम पके हुए फल के  रस में पीपल की जड़, सौंठ व बहेडे का चूर्ण दो - दो ग्राम  तथा सुहागा भुना हुआ व शहद  मिलाकर उपयोग करने से श्वास रोग में जबरदस्त लाभ होता है ।

  • अनानास के जूस में बहेड़ा, मुलेठी व मिश्री मिलाकर सेवन करने से श्वास रोग में फायदा होता है ।

  • अनानास के फल के जूस में छोटी कटोरी की जड़, जीराआंवला की बराबर मात्रा का चूर्ण शहद के साथ सेवन करने से श्वास रोग में लाभ होता है ।


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4. अजीर्ण( बदहजमी) में अनानास (Ananas ke fayde):




  • अनानास के फल के छोटे टुकड़े कर के इसमें सेंधा नमक व कालीमिर्च मिलाकर सेवन करने से अजीर्ण में फायदा होता है ।


  • भोजन करने के बाद यदि पेट फूल जाय तो  अनानास के के 20 से 25 ग्राम रस का सेवन करने से गैस बाहर निकाल जाती है व आराम मिलता है ।


  • अनानास के पके फल के सौ ग्राम रस में 1 से 2 नग दाख एवम् 125 मिली सेंधा नामक मिलकर सेवन करने से बदहजमी दूर होता है ।



5. मासिक धर्म की रुकावट में अनानास के उपयोग (Ananas ke upyog):




  • अनानास के कच्चे फल के रस में पीपल की छाल का चूर्ण एक ग्राम व गुड़ एक ग्राम मिलकर सेवन करने से मसिकधर्म की रुकावट ठीक होती है ।


  • अनानास के पत्ते का काढ़ा 40 से 50 मिली पीने से भी रुकावट दूर हो जाती है ।


6. पीलिया में अनानास के लाभ  (Ananas ke labh):


अनानास के पके फल का 10 ग्राम रस में 2 ग्राम हल्दी व 3 ग्राम मिश्री मिलाकर रोगी को देने से कमला के रोग में फायदा होता है ।


अनानास, अनानास फल
अनानास( Pineapple )


7. पित्त में अनानास का फायदा  (Ananas ka fayda):



  • अनानास का मुरब्बा बनाकर खाने से पित्त रोग में लाभ मिलता है । अनानास का मुरब्बा बनाने के लिए  इसके छोटे छोटे टुकड़े कर चुने के पानी में एक दी रख कर सूखा लें, जब ये सूख जाए तो  इसमें शक्कर की चासनी डाल कर मुरब्बा बना लें ।


  • अनानास का शरबत भी पित रोग को शांत करता है । अनानास का शरबत बनाने के लिए एक बैग अनानास का रस व दो भाग चासनी मिलाकर तैयार किया जाता है । अनानास के शरबत से दिल को भी ब्ल मिलता है ।



8. कृमि रोग में अनानास के फायदे ( Ananas ke Fayde):



  • अनानास के पत्ते के रस में शहद मिलाकर इसकी 3 से 10 ग्राम मात्रा प्रतिदिन सेवन करने से कृमि नष्ट हो जाते हैं ।


  • अनानास के पके फल के रस में खुरासनी अजवाइन, छुआरा का चूर्ण मिलाकर थोड़े से शाद के साथ मिलाकर  लगभग 5 से 10 ग्राम की मात्रा चता देने से बच्चों का किमी रोग दूर हो जाता है ।


अनानास के नुकसान ( Ananas ke Nuksan):

अनानास का प्रयोग अत्यधिक नहीं करना चाहिए, इसकी अधिकता से कंठ में नुकसान पहुंचता है व गले में खराश हो जाती है । अनानास के साइड इफेक्ट को दूर करने के लिए चीनी, नींबू, व अदरक के रस का सेवन फायदा करता है ।

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Sunday, 26 May 2019

अजमोद के गुण फायदे तथा उपयोग ( celery in hindi)

Ajmod plant
Ajmod ka paodha


अजमोद का पेड़ कैसा होता है (Ajmod ka ped kaisa hota he )


अजमोद के पौधे अजवाइन की तरह के 1 से 3 फिट ऊंचे होते है, अजमोद के पत्ते के किनारे कटे होते है, इस लेख में आपको अजमोद के गुण फायदे उपयोग एवम् देसी नुस्खों के बारे में बताने जा रहे हैं । अजमोद के बीज अजवाइन से मिलते जुलते होते हैं । इसके फूल सफेद रंग के छोटे छोटे छत्री के आकार के होते हैं । भारत में लगभग सभी जगह पाया जाता है । इसकी खेती विशेष रूप से बंगाल में सर्दियों में शुरू हो जाती है । अजमोद में कपूर जैसा एक पदार्थ पाया जाता है । इसके अलावा इसमें गंधक, उदंशील तेल, लवण, छार, लुआब, व गोंद आदि पाए जाते हैं ।

अजमोद को अंग्रेजी में  Celery seeds  व संस्कृत में अजमोदा, मराठी में ओमादा, व पंजाबी में अजमुद तथा बंगाली में आजमूद के नाम से जाना जाता है ।

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अजमोद के घरेलू नुस्खे (Ajmoda ke ghrelu nuskhe):



1. पेट दर्द में अजमोद का फायदा (Ajmod ke fayde):



  • इसकी 3 ग्राम मात्रा व 1 ग्राम काला नमक मिलाकर इसकी फंकी देने से पेट दर्द में आराम मिलता है ।


  • इसके तेल की 2 से 3 बूंदे, एक ग्राम सौंठ के चूर्ण को गरम पानी के साथ सेवन करने से पेट दर्द में आराम मिलता है ।


Celery seed in hindi
Ajmoda


2. उल्टी में अजमोदा के उपयोग (Ulti me ajmoda ke upyog )


  • कुछ औषधियों का स्वाद अच्छा नहीं होता है, उन औषधियों के साथ 2 से 5 ग्राम ajmod का चूर्ण सेवन करने से वमन( उल्टी) कि संभावना नहीं रहती है ।


  • उल्टी हो रही हो तो 2 से 5 ग्राम अजमोद के चूर्ण व 2-3 लौंग की कली मिलाकर पीस कर एक चम्मच शहद के साथ सेवन करने से वमन रुक जाती है ।

3. अर्श में फायदा करता है अजमोदा (Ajmod me fayda krta he ajmod) : 



Ajmod को कपड़े में बांध कर गरम करके सिकाई करने से अर्श में फायदा होता है ।


4. मूत्र विकार में अजमोदा के लाभ(Ajmoda ke labh) : 


अजमोद की जड़ का 2 से 5 ग्राम चूर्ण  सुबह शाम लेने से मूत्र विकार में फायदा होता है ।


5. अफारा मेंअजमोद के उपयोग ( Afara men ajmod ke upyog)



इसके 3 से 5 ग्राम चूर्ण को 10 ग्राम गुड़ के साथ सेवन करने से अफ़ारे में लाभ मिलता है ।


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6. हिचकी में फायदा (Ajmod ke fayde): 


अगर खाना खाने के बाद हिचकी आती हो तो इसके 10 से 15 दने मुंह में रखने से हिचकी रुक जाती  है ।


अजमोद के फूल
Ajmod ke phool


7. सूखी खांसी में उपयोग (ajmod ke upyog):  


Ajmod की थोड़ी सी मात्रा पान में डाल कर खाने से सूखी खांसी में लाभ होता है ।


8. श्वास में फायदा (Ajmod ke fayde): 


अजमोद श्वास में बहुत ही फायदे मंद है, यह उत्तेजक व बाल वर्धक होता है ।श्वास रोग में इसका उपयोग किया जाता है । इसकी 3 से 6 ग्राम मात्रा दिन में तीन बार सेवन करने से श्वास रोग में लाभ मिलता है ।


9. मस्तिष्क में अजमोदा के लाभ (Ajmod ke labh) : 


अजमोद मस्तिष्क व वातनाडियों के लिए बहुत ही फायदेमंद होता है। अजमोद की जड़ की की कॉफी बनाकर पीने से लाभ होता है ।


अजमोद
अजमोद


10. बदन दर्द में लाभ (Ajmod ke labh): 


शरीर में दर्द व सूजन होने पर अजमोद की जड़ का क्वाथ दिन में दो तीन बार सेवन करने से फायदा होता है ।


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विशेष:



इस लेख में आप को अजमोद के औषधीय प्रयोग के बारे में बताया गया है, यह कुछ विशेष तरह के रोगियों को नुकसान भी कर सकता है, Ajmod खाने के बाद छाती में जलन पैदा करता है, इस लिए गर्भवती महिलाओं को इसका सेवन नहीं करना चाहिए । अप्समार के मरीजों का इसका प्रयोग नहीं करना चाहिए । पूरे शरीर की पीड़ा के लिए बहुत उपयोगी होता है, अजमोद के तेल को उबालकर शरीर की मालिश करने से अत्यंत अधिक लाभ होता है । घरेलू नुस्खों से संबंधित और अधिक जानकारी के लिए इस वेबसाइट  पर क्लिक करें ।




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Tuesday, 14 May 2019

आम के 5 औषधीय उपयोग, फायदे एवम् नुकसान ( benefit of mango in hindi)

आम का पेड़
आम वृक्ष


आम के प्रयोग ( Aam ke prayog)


भारत में आम की पैदावार बहुत होती है, यह ग्रीष्म ऋतु का फल है । देश, आकर, रंग, रूप के अनुसार इसकी अनेक जातियां पाई जाती हैं, देशी आम में रेशा अधिक होता है, इस लिए इसे चूस कर खाया जाता है, जबकि कल्मी आम काफी गूदे दार होता है, इसे काट कर खाया जाता है, कच्चे आम का प्रयोग, आम की चासनी व आम का पना, व अचार बनाने के काम आता है । और पके आम का प्रयोग खाने में एवम् मेंगोशेक के रूप में किया जाता है । औषधीय प्रयोग में कलमी आम की अपेक्षा देसी आम यानि चूसने वाले बीजू आम का प्रयोग अधिक लाभकारी होता है ।

आम का वैज्ञानिक नाम Mangifera idica L. है, अंग्रेजी में इसे Mango  के नाम से जाना जाता है । इसे गुजरती में आंबों, बंगाली में आम्र अरबी में अंबज, पंजाबी में आंब कहते हैं ।

आम के गुण(Aam ke gun):


आम अनेक गुणों से भरपूर होता है आम के फल में अनेक विटामिन्स व मिनरल पाए जाते हैं । इसमें विटामिन ए, बी, व सी प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। आम के फल की मज्जा रक्त शोधक, स्तंभन, कफ पित्त शामक, कच्चा आम  त्रिदोष कारक, पका आम वात पित्त शामक होता है । आम का बौर अर्थात आम का फूल दीपक, मलरोधक, वातकारक, शीतल, पित्त व कफ नाशक होता है । आम की जड़ रूचिकारक, कसैली, मालरोधक, वात पित्त व कफ का नाश करती है । आम की गुठली उल्टी, दस्त, हृदय के दर्द को दूर करती है । आम की गुठली का तेल रुख कड़वा तथा कसैला होता है, यह कफ व वात का नाश करता है ।


1. अतिसार में आम के फायदे (Aam ke fayde):


  • आम का गौंद व आम की गुठली की गिरी की बराबर मात्रा को मिलाकर इसकी एक ग्राम मात्रा एक दिन में दो तीन ग्राम सेवन करने से अतिसार में फायदा होता है ।

  • आम की गुठली की गिरी, बेलगीरी तथा मिश्री तीनो की बराबर लेकर चूर्ण बना लें,  इस चूर्ण की 3 से 6 ग्राम मात्रा पानी के साथ सेवन करने से अतिसार मिटता है ।


  • आम की गिरी की पांच ग्राम मात्रा सौ गरम जल में उबाल कर इसमें इतनी ही मात्रा में और गिरी मिलाकर पीस लें, इसका प्रयोग दिन में तीन बार दही के साथ सेवन करने से अतिसार में फायदा होता है।


  • आम की ताज़ी छाल को दही के पानी के साथ पीसकर पेट पर लगाने से लाभ होता है ।

Mango in hindi
Aam



2. लिवर की कमजोरी में आम का फायदा ( Amm ka fayda): 


यकृत कमजोर हो गया हो और इस कारण से भूख लगना बंद हो जाए, पतले दस्त होते हों, तो आम के पत्ते सूखे हुए 6 ग्राम को एक पाव जल में उबालें, जब आधा बाकी रह जाए तो इसे छान लेवें, प्रातः काल इसका सेवन दूध में मिलाकर पीने से फायदा होता है।



3. आम का तेल केश कल्प का काम करता है( Aam ka kesh kulp):


आम की गुठली का तेल सिर पर लगाने से सफेद बाल काले हो जाते हैं एवम् काले बाल जल्दी सफेद नहीं होते हैं । इससे बालों का जश्न भी बंद हो जाता है व रूसी की समस्या से भी निजात मिल जाती है ।

4. मधुमेह में आप के पत्ते के फायदे (Amm ke patte ke fayde):


छाया में सूखे आम के पत्ते एक ग्राम को आधा किलो पानी में उबालें, जब इसकी अधी मात्रा एक चौथाई रह जाए तो इस जल को छान कर सुबह शाम पीने से मधुमेह में लाभ होता है ।

5. हिचकी रोकने में कारगर हैं आम के पत्ते (Amm ke patte):


आम के पत्ते तथा धनिया दोनो को कूट कर इसकी 2 से 4 ग्राम मात्रा गुनगुने जल के साथ दिन में 2 से 3 बार  सेवन करने से हिचकी एक दम रुक जाती है ।


Mango tree in hindi
aam ka ped


आम के अन्य देसी घरेलू नुस्खे (Amm ke desi nuskhe):



  • आम की गोंद को बिवाई पर लगाने से बिवाई ठीक हो जाती है ।


  • आम के फूलों का नस्य लेने से नकसीर में फायदा होता है ।


  • आम के फल की छाल व पत्तों की बराबर मात्रा पीस कर मुंह में रखने से दांत व मसूड़े रोग रहित व मजबूत हो जाते हैं ।


  • आम के कोमल पत्ते व कालीमिर्च दोनो को पानी के साथ पीस कर गोलियां बनाकर रखे, भयंकर उल्टी दस्त भी इससे बंद हो जाते हैं ।


  • आम के फूल का काढ़ा या चूर्ण में एक चौथाई भाग मिश्री मिलाकर सेवन करने से पेचिस, प्रमेह, व जलन और पित्त के साइड इफेक्ट कम हो जाते हैं ।


  • 10 से 20 ग्राम आम के फूलों के रस में दस ग्राम खांड मिलाकर प्रयोग करने से पित्तविकर व प्रदर मिटता है ।


  • आम के फूलों के चूर्ण लगभग 10 ग्राम को दूध के साथ सेवन करने से काम शक्ति में वृद्धि होती है ।


  • ऐसा माना गया है कि आम में मक्खन से ज्यादा पोषक तत्व होते हैं, आम काप्रयोग उचित तरीके से करने से स्नायु तंत्र मजबूत होता है व शक्ति में वृद्धि होती है ।


  • आम के कल्प का सेवन करने से बहुत से रोगों में लाभ होता है । जिन लोगो को पुराना अतिसार, संग्रहनी, मंदाग्नि, अजीर्ण, वायुगोला, नसों में सूजन, वात व पित का निरंतर प्रकोप, कमजोर हृदय व कमजोर मस्तिष्क हो तो ऐसे व्यक्ति को आम के कल्प का सेवन करना चाहिए ।





  • आम के पत्ते की चाय - आम के दस पत्ते जो पेड़ पर पाक के पीले हो गए हों, को एक ली. पानी में एक दो इलायची डाल के पकाएं, जब पानी आधा बाकी रह जाए तो इसे उतार कर इसमें दूध व शक्कर डाल कर पिए, यह चाय पूरे शरीर को शक्ति देती है ।


  • आम वृक्ष का गोंद थोड़ा ग्राम करके फूड पर लगाने से  फोड़ा पककर फुट जाता है, और घाव आसानी से ठीक हो जाता है ।


  • आम की गुठली को जल के साथ पीसकर लगाने से बर, मधुमक्खी, बिच्छू, ततैया, मकोड़े आदि विशेले कीड़ों का दंश उतार जाता है ।


कच्चे आम
कच्चे आम


आम के अधिक खाने से नुकसान (Aam ke sevan se nuksan):


आम के कच्छे फल अधिक खाने से मदग्नी, रक्त विकार व नेत्ररोग आदि हो सकते हैं । आम के अधिक खाने से पाचन शक्ति खराब हो सकती है, अगर ऐसा हो तो ऊपर से दो तीन जामुन खा लें । जामुन न होने पर एक चुती नमक व पिसी सौंठ खा लें । आम का अधिक सेवन यकृत को नुकसान पहुंचता है, यकृत के रोगी को आम नहीं खाना चाहिए । आम खाने बाद ऊपर से पानी पीना नुकसान दायक हो सकता है, आम सेवन के बाद दूध पीना फायदेमंद होता है ।

इसी तरह के हैल्थ से संबंधित देसी नुस्खों को जानने के लिए Read more पर क्लिक करें ।


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Friday, 26 April 2019

लौंग के फायदे एवम् उपयोग (Laung ke Fayde evam Upyog)

Laung ke phool
लौंग के फूल

लौंग का परिचय:
इस लेख में आपको लौंग के फायदे एवम् उपयोग के बारे में बताने जा रहे हैं । लौंग की उत्पत्ति का मूल स्थान मलक्का द्वीप कहलाता है । लेकिन इसकी पैदावार भारत में दक्षिण भारत में केरल व तमिलनाडु में की जाती है । इसकी फूल व कलियां जब सूख जाती हैं तो इसको बाजार में लौंग के नाम से बेचा जाता है । लौंग के फूल बैंगनी रंग के व खुशबूदार होते हैं । लौंग को लवंग के नाम से भी जाना जाता है । आम तौर से लौंग का उपयोग मसाले के रूप में किया जाता है लेकिन इस लेख में आपको लौंग के फायदे व उपयोग के बारे में बताने जा रहे हैं ।

लौंग का वैज्ञानिक नाम है  syzygium aromaticum है ।  इसको छेत्र के अनुसार अलग  अलग नामों से जाना जाता है ।


Laung in english : Clove

संस्कृत : लवंड, देवकुसुम

हिंदी    : लौंग, लवंग

तेलगु   : कारावल्लू

बंगाली : लवंग

गुजरती: लवंग



लौंग के गुण (Cloves in hindi):



1. लौंग नेत्र के लिए लाभ दायक, कड़वी, ठंडी, चरपरी, रूचिकारक, पाचक, होती है ।

2.यह प्यास, वमन, पित्त, अफरा, श्वास, हिचकी, आदि रोगों को समाप्त करती है ।

3. लौंग का तेल वातनशक,अग्निवर्धक, कफ तथा दांत के दर्द का नाश करती है ।

4. लौंग खाने से भूख बढ़ती है, आमाशय की क्रियाशीलता को बढ़ाकर भोजन में रुचि उत्पन्न करता है ।

5. लौंग पेशाब खुलकर लाती है ।

6. लौंग मुंह की दुर्गं दूर करती है, व इसका तेल शरीर की दुर्गन्ध व दर्द को दूर करती है ।

7. लौंग पेट के कृमि को नष्ट करत है ।

8. यह चेतन शक्ति को जागृत करती है।

लौंग
लौंग



लौंग के औषधीय प्रयोग (Laung ke aushdhiye prayog):


1. कफ में लौंग के उपयोग (Kuf men Laung ke Upyog):


दो ग्राम लौंग को कूट कर इसको 125 मिली. पानी में उबाल लें, जब चौथा बहाग बाकी रह जाए  तो इसे आग से उतर कर छान लेवें, और इसको गरम ही पी लेवें । यह कफ निकालने की उत्तम औषधि है।



2. दमा में लौंग के फायदे (Dama me Laung Ke Fayde):


लौंग, आंकड़े के फूल तथा काला नमक बराबर मात्र में लेकर, चने के बराबर गोली बनाकर चूसने से दमा व श्वास नली के रोग दूर होते हैं ।

3. पेट के रोग में लौंग के फायदे (Laung Ke Fayde):


  • खट्टे दाकर हों अथवा बदहजमी हो तो लौंग , सौंठ, मिर्च पीपल अजवायन सभी की 10 -10 ग्राम मात्रा व 50 ग्राम सेंधा नमक, 50 ग्राम पीपली, 50 ग्राम मिश्री, इसका चूर्ण बनाकर चीनी मिट्टी के बरतन में रख कर नींबू का रस डाल कर तर कर लेवें, फिर इसे धूप में सूखा कर एयरटाइट डिब्बे में रख लेवें, भोजन के बाद इसके एक चम्मच का सेवन करने से बदहजमी, व खट्टे डकार आना बंद हो जाते हैं । मुंह का स्वाद अच्छा होकर भूख खुलकर लगती है ।


  • अजीर्ण व अम्ल रोग के लिए लौंग, अजवायन, सौंठ की 10 - 10 ग्राम मात्रा व सेंधा नमक 12 ग्राम सब को पीस कर चूर्ण बना लें, भोजन के बाद इसकी डेढ़ ग्राम मात्रा पानी के साथ सेवन करें ।


  • लौंग के दरदरे चूर्ण की 10 ग्राम मात्रा को आधा किलो उबलते हुए पानी में डालकर ढक दें, फिर इसे आधे घंटे बाद छान लें, इस जल की 25 से 50 ग्राम मात्रा दिन में तीन बार पीने से अपच दूर होती है व अग्नि प्रदीप होती है ।



4. अन्य उपयोग (Other Uses of Clove in Hindi):


  • लौंग को तांबे के बरतन में पीसकर इसको शहद में मिलाकर आंखों में अंजन करने से आंखों के सफेद भाग के रोग दूर हो जाते हैं ।


  • clove को मुंह में रखकर चूसने से मुंह की दुर्गन्ध दूर होती है ।


  • इसके के 2 से 4 नग पीसकर इसमें मिश्री मिलाकर पीने से हृदय की जलन समाप्त हो जाती है ।

Laung
Laung


  • 3 से 4 नग लौंग को आग पर भून कर, इसे पीस कर शहद मिलाकर चाटने से कुकुर खांसी में लाभ होता है


  • लौंग के चूर्ण एक ग्राम को मिश्री की चासनी या अनार के जूस में मिलकर चाटने से गर्भवती महिला को उल्टी होना बंद हो जाती है ।


  • दस ग्राम हल्दी व 5 से 6 लौंग को पीस कर लगाने से नासूर ठीक होता है ।


  • लौंग 2 नग व आधा ग्राम अफीम को पानी के साथ पीसकर गरम करके माथे पर लगाने से सिरदर्द ठीक हो जाता है ।

लौंग में यूजेनॉल नमक तत्व होता है, जो दांत दर्द जैसी स्वास्थ्य संबंधी बिमारियों को ठीक करने में सहायता करता है । लौंग की तासीर भी गर्म होती है, इसीलिए सर्दी में बहुत लाभदायक है । पेट दर्द के अलावा सिर दर्द ठीक करने में भी सहायक है लौंग । इसके लिए जब सिर में दर्द हो तो दर्द निवारक की जगह एक-दो लौंग गुनगुने पानी के साथ सेवन करें, थोड़ी ही देर में आराम मिल जाएगा। इसका अत्यधिक मात्र में सेवन न करें, इससे लिवर व आंतो में नुकसान पहुंचता है ।


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Thursday, 18 April 2019

उच्च रक्तचाप क्या है, इसके उपाय एवम् सावधानियां (High blood pressue ke upay evam savdhaniyan)

High blood pressure
High BP


उच्च रक्तचाप क्या होता है (highpertention in hindi ): 


उच्च रक्त चाप को हाइपरटेंशन भी कहते हैं । आम बोलचाल की भाषा में लोग है हाई ब्लड प्रेशर के नाम से जानते हैं (Hindi mai bp )। इस रोग के लक्षण बाहर से कुछ विशेष नहीं दिखाई देते हैं, लेकिन यह एक जानलेवा बीमारी है । जब रक्तचाप बिगड़ता है तो ये शरीर पर खतरनाक असर छोड़ता है । पहले रक्तचाप की समस्या उम्रदार लोगो को होती थी, लेकिन आजकल के खान पान व गलत जीवन शेली के कारण यह रोग काम उम्र के लोगों को भी होने लगा है ।

भारत में हर तीन व्यक्ति में से एक व्यक्ति उच्च रक्तचाप( high blood pressure) से पीड़ित रहता है । इसमें से 2/3 लोगो की उम्र 60 वर्ष से कम होती है । इस समय करोड़ों लोग उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं । इनमे से आधे लोग यह नहीं जानते कि उन्हें रक्तचाप की समस्या है । जिन लोगो को मालूम है वह चिकित्सा ही नहीं करवाते हैं ।

आर्युवेद से उच्च रक्तचाप को अच्छे ढंग से नियंत्रित किया जा सकता है । व्यक्ति का रक्तचाप दैनिक क्रियाओं से प्रभावित होता है । जिन व्यक्तियों का रक्त चाप 120/139mm Hg होता है इसी स्थति को प्री हाईपरटेंशन कहा जाता है, जब रक्त चप 140/90 mm Hg होता है । ऐसी स्थति को हाईपरटेंशन के नाम से जाना जाता है । हाइपरटेंशन को साइलेंट किलर के नाम से भी जाना जाता है । कुछ मामलों में प्राइमरी उच्च रक्तचाप होने का कारण स्पष्ट नहीं हो पाता है क्यों कि 90 प्रतिशत रोगियों में इसके लक्षण दिखाई नहीं देते हैं । जबकि सेकेंडरी हिपर्टेशन किसी रोग या बीमारी की वजह से हो सकता है । कुछ रोगियों में कुछ लक्षण दिखाई देते हैं ।


उच्च रक्तचाप के लक्षण (Uchch Raktchap ke lakshan):


चक्कर आना, सिरदर्द होना, उल्टी होना, भ्रम की स्थिति में रहना, दिखाई कम देना आदि अनेक तरह की परेशानी हो सकती हैं । अगर उच्च रक्तचाप का रोगी इलाज ठीक से न करवाएं तो बड़े हुए रक्तचाप से दिल, मस्तिष्क, गुर्दे, व आंखों पर विशेष रूप से असर होता है ।


1. लकवा (stroke)

2. हृदय घात (heart attack)

3. गुर्दे खराब होना ( Kidney failure)

4.अंधापन (Blindness)

5. दिमाग की नस फटना (Haemorrhage)


उच्च रक्तचाप से सावधानियां एवम् उपाय (high bp ke upay evam savdhaniyan):



किसी व्यक्ति को उच्च रक्त चाप की श्रेणी में तब रखा जाता है जब बीपी 140/90mmHg से अधिक हो । व लगतार कुछ दिन तक रहता हो । जब बीपी इससे कम हो तो खान पन में बदलाव करके इसे कम किया जा सकता है । रोगी को समय समय पर रक्तचाप की जांच करवाते रहना चाहिए, तथा बिना चिकित्सक की सलाह के दावा का सेवन नहीं करना चाहिए । अगर रक्त चप के रोगी नियमित रूप से योग व व्यायाम करें तो काफी हद तक इससे छुटकारा पाया जा सकता है । इसके लिए प्राणायाम, आसान, और ध्यान करना चाहिए । नित्य गायत्री मंत्र का जाप करने से भी लाभ होता है । संतुलित मात्रा में आहार का सेवन करें, फल व सब्जियों का सेवन मौसम के अनुसार करें । तीनो  समय का कहना जल्दी व निश्चित समय पर करें । जहां तक हो नींद पूरी लें । खुश रहना व हस्ट रहना उच्च रक्त चाप वालों के लिए बहुत ही फायदेमंद है ।

Uchch Raktchap
उच्च रक्तचाप


उच्च रक्तचाप से परहेज़:



1. खाने में कम नमक का प्रयोग करें ।

2. धूम्रपान व शराब का सेवन न करें ।

3. अपने वजन को नियंत्रित रखें ।

4. वसायुक्त आहार के सेवन से बचें ।

5. मोबाइल फोन का प्रयोग कम करें ।

6. तनाव से दूर रहें ।

7. लौकी के जूस का सेवन करें ।

8. अचार, पापड़, तले पदार्थ,आदि के सेवन से बचे ।

9.  सुबह शाम हल्का व्यायाम करें ।

10. नॉनवेज का सेवन कम करें । मछली का सेवन किया जा सकता है ।


उच्च रक्तचाप की आयुर्वेदिक औषधि:

उच्च रक्तचाप के रोगियों के लिए बाजार में आयुर्वेदिक औषधि उपलब्ध हैं, जैसे- मुक्ता वटी, मेधा वटी, अर्जुनारिष्ट, आदि । किन्तु किसी भी आयुर्वेदिक औषधि का सेवन चिकित्सक के परामर्श लेने के बाद ही करें ।


उच्च रक्तचाप का देसी नुस्खा (Uchch raktchap ka desi nuskha):


उच्च रक्तचाप में अर्जुन की छाल का चूर्ण बहुत ही फायदे मंद होता है । अर्जुन की छाल के चूर्ण का हलुआ बनाकर सेवन करने से उच्च रक्त चाप नियंत्रित रहता है तथा इससे दिल की बड़ी हुई धड़कन भी कम होती है । अर्जुन की छाल के चूर्ण की चुटकी भर मात्रा जीभ पर रख लेने से भी रक्तचाप में आराम मिलता है ।


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Friday, 5 April 2019

जीवन में स्वास्थ रहने के उपयोगी सूत्र ( Health tips in hindi)

सवस्थ जीवन के टिप्स(swasth jeevan ke tips)

अपने स्वास्थ्य को अच्छा रखने के लिए कुछ बाते ध्यान रखने की जरूरत है । इस लेख में हम आप को कुछ टिप्स (Health tips in hindi) देने जा रहे है । सबसे पहले खुद का ख्याल रखना आवश्यक है । यदि आप रोग-रहित और एक स्वस्थ जीवन चाहते है, और अपने बुढ़ापे का भरपूर आनंद लेना चाहते हैं तो अपनी दिनचर्या बदल लें।

किसी ने कहा है स्वास्थ्य ही धन है। हर व्यक्ति स्वस्थ और रोग रहित रह सकता है, यदि वह कुछ नियमों का पालन करें, जैसे की हमें सुबह जल्दी उठाना चाहिए, सुबह खाली पेट दो तीन गिलास पानी पीना चाहिए, खुली हवा में घुमने जाना चाहिए,  हल्का व्यायाम जरूर करना चाहिए, नाश्ते में दूध, फ्रूट, शामिल करें व कम वसायुक्त पदार्थों का सेवन करें । इसके साथ ही नीचे स्वास्थ संबंधी कुछ टिप्स नीचे दिए जा रहे हैं, जिनका पालन कर आप स्वस्थ जीवन पा सकते हैं ।


जीवन के कुछ महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सूत्र(Jeevan ke swasthy sutra)


1. स्वस्थ व्यक्ति अपने जीवन में हमेशा प्रगति करने, दुखों से दूर, एवम् सुख प्राप्त करने में समर्थ होते हैं ।


2. स्वच्छ जीवन जीने बाल व्यक्ति लंबी उम्र वाला तथा प्रदूषण युक्त जीवन जीने वाला व्यक्ति काम उम्र होता है ।

Fitness, jivan ke sutra
Sharirik swasth


3. सुबह के समय जल्दी उठना, प्राणायाम व व्यायाम करना, ध्यान करना, प्रयाप्त पानी पीना, भूख से कम भोजन करना, भोजन पूरी तरह चबा कर करना स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभ दायक होता है ।


4. अपने खानपान को नियंत्रित करके पुरानी जीवनशैली से जन्मी बीमारियां जैसे - मोटापा, रक्तचाप, मधुमेह आदि को नियंत्रित किया जा सकता है ।


5. किसी भी खाने पीने की चीज को उचित मात्रा में ही लें, चाहे वह अन्न, तेल घी मसाले कुछ भी हो जरूरत से अधिक न ले, जिससे स्वास्थ्य सही बना रहता है ।


6. आंवले का जूस या आंवले के चूर्ण को अपने नियमित सेवन में शामिल करें। इससे कब्ज, बालों का झड़ना, बाल समय सफेद होना, एसिडिटी, नजर कमजोर होना आदि नहीं होते हैं ।


7. कुपोषण से होने वाले रोगों से बचने के लिए गेंहू, चना, ज्वर , बाजरा आदि अनाजों को मिला कर खाएं ।


8. बाजार में मिलने वाले डिब्बा बंद खाद्ध पदार्थ व कोल्ड्रिंक्स जैसी चीजों का सेवन करना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, इनका सेवन न करें ।


9. जितने तत्पर हम बीमार होने के बाद दवा लेने के लिए रहते हैं, उससे अधिक तत्परता हमें बीमार होने से पहले बीमारी से बचने के लिए लगना चाहिए


10. फास्ट फूड व जंक फूड का सेवा नहीं करना चाहि, इससे उच्च रक्त चाप, मोटापा, कब्ज, डायबिटीज, रोग होते है तथा रोगप्रतिरोधक छमता की कमी रहती है । इसके साथ शरीर में पोषक तत्वों की कमी भी हो जाती है ।


11. दूध, पत्ते दार सब्जियां, दाल, आदि का सेवन अधिक करना चाहिए, दूध से प्रोटीन व कैल्शियम, डाल से प्रोटीन, पत्तेदार सब्जियों से कल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस, मेगनीज, लौह, आदि तत्व मिलते है । इसी तरह आलू से पोटैशियम, आओर सेव से एंटीऑक्सिडेंट की कमी दिए होती है ।


12. शुद्ध आहार लेना चाहिए, इससे व्यक्ति अपने कार्यों में सफल रहता है जबकी अशुद आहार लेने से व्यक्ति रोगी तथा असफल होता है । नाश नहीं करना है, इससे व्यक्ति का पतन होता है । नाश किसी भी तरह का इससे शारीरिक, मानसिक, आर्थिक, नैतिक, समजिक स्थर गिरता है ।


13. रोगी व्यक्ति की सामाजिक व आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं रहती, राष्ट्रीय की उन्नति में व्यक्ति की भागी दरी नहीं रहती है । और खुद की भी अवनति भी प्रारंभ हो जाती है ।

यह भी पढ़े: मासपेशियों में तनाव व दर्द दूर करने के देसी प्राकृतिक उपाय


12. वाहन के प्रति मोह कम कर उसका प्रयोग कम करने की आदत डालें। जहां तक ​​हो कम दूरी के लिए पैदल यात्रा पर जाएं। इससे मांसपेशियों का व्यायाम होगा, जिससे आप निरोगी रहकर आकर्षक बने रहेंगे, साथ ही पर्यावरण की रक्षा में भी सहायक होंगे।

13. भोजन में अधिक से अधिक मात्रा में फल-सब्जियों का प्रयोग करें। उन्हें आवश्यक तैलीय तत्व प्राप्त करें, शरीर के लिए आवश्यक तेल की पूर्ति प्राकृतिक रूप के पदार्थों से ही प्राप्त करें।

14. दिमाग में सुस्ती नहीं आने दें, कार्य को तत्परता से करने की चाहत रखें।

15. घर के कार्यों को स्वयं करें- यह कार्य कई व्यायाम का फल देते हैं ।

शारीरिक स्वास्थ्य
स्वस्थ रहने के लिए क्या खाएं

आदमी के जीवन में सबसे महत्वपूर्ण है उसका स्वस्थ रहना । आदमी कितना स्वस्थ रह सकता है। उचित खान-पान, सही मन स्थिति, शांत, निश्चित रहकर आदमी का मन ही उसे पूर्ण स्वस्थ रहने के लिए प्रेरित करते हैं । फिर खाना-पीना थोड़ा अनियमित हो जाए तो चल सकता है । सोच सही होनी चाहिए किसी ने कहा है कि गलत खान-पान से ज्यादा महत्वपूर्ण है सोच का सकारात्मक होना । अगर वह नकारात्मक हुआ तो सब डर से दूर होकर व्यक्ति दैनिक चिन्तन से मुक्त हों जाएगा।  जीवनशैली अच्छी हो तो मन एवम् स्वास्थ्य आपके बस में हो जाएगा। इन Hindi me health tips को ध्यान में रखकर स्वस्थ जीवन जिया जा सकता है ।



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Tuesday, 26 March 2019

गठिया वात, लीवर रोग, पेट रोग में अमर बेल के 5 घरेलू उपयोग ( Amarbel ke upyog)

अमर बेल का परिचय:


अमर बेल को आकाश बेल के नाम से भी जाना जाता है । इस लेख में आपको आकाश बेल के घरेलू उपयोग के बारे में बताने जा रहे हैं । जिससे आप गठिया वात, लिवर के रोग, पेट रोग का उपचार घरेलू नुस्खों से कर सकते है । आकाश बेल एक परजीवी दूसरे पेड़ पर आश्रित पौधा है । बेर व करोंदे के पेड़ पर विशेष रूप से फैली रहती है । जिस पौधे पर ये आश्रित रहती है वह पौधा धीरे धीरे सूख जाता है ।


Amarbel
अमर बेल


आकाश बल्ली पीली, कोमल व थोड़ी हरी होती है । इसके फल बिना व्रंत के सफेद रंग के होते हैं । आकाश बेल के फल उरद के आकर के होते हैं । अमर बेल आंखों के रोगो का नाश करती है । हृदये के लिए लाभदायक, पित्त कफ व आमवत नाशक होती है । आकाश बल्ली बलकराक भी होती है । इसका वैज्ञानिक cuscuta reflexa Roxb. नाम है ।

यह भी जाने:  जीरा के गुण, उपयोग व औषधीय फायदे ( Benefit of Cumin)



इसको अलग अलग भाषा में निम्न नामो से जाना जाता है ।

हिंदी     - अमर बेल, आकाश बेल

संस्कृत  - आकाश बल्ली

मराठी   - निर्मुली

बंगाली  - आलोक लता, स्वर्ण लता

गुजरती - अकास बेल

तेलगु    - नुलू तेगा 


अमर बेल के औषधीय प्रयोग:


1. गठिया वात में आकाश बेल के फायदे (Akash bel ke fayde ):


आकाश बेल का बफारा  देने से गठिया वात  का दर्द व सूजन तुरंत दूर हो जाती है । इसके बाद इसी पानी से नहा कर शरीर को तौलिए से अच्छी तरह से पौंछ लें, तथा घी का थोड़ा अधिक सेवन करें।


Akash bel
आकाश बेल



2. पेट के रोग में अमर बेल के फायदे(Amar bel ke fayde):



  • आकाश बेल का 1/२ किलो स्वरस निकालकर इसका सुबह शाम सेवन करने से वात रोग व पेट के दर्द में आराम मिल जाता है । आकाश बेल अगर सूखी अवस्था में हो तो आकाश बेल का चूर्ण 1 ग्राम व मिश्री 1 किलो  दोनों को मिलाकर मंद आग पर पकाएं व इसका शर्बत तैयार कर लें । इसकी 2 ग्राम मात्रा में बराबर मात्रा में पानी मिलाकर सुबह शाम पिया जा सकता है।


  • आकाश बेल को उबालकर पेट पर बांधने से डकारें आना बंद हो जाती हैं ।


3. आकाश बेल के लिवर में उपयोग(Akash bel ke upyog):




  • 5 से 10 मिली ग्राम अमरबेल का स्वरस सेवन करने से यकृत वृद्धि के कारण हुई कब्ज व ज्वर में फायदा करता है ।

  • अमरबेल का काढ़ा 40 से 50 ग्राम पीने से यकृत वृद्धि में लाभ मिलता है ।


4. बालों के रोग में अमर बेल के फायदे(Amar bel ke fayde):




  • 50 ग्राम अमर बेल को कूट कर 1 किलो पानी में पकाकर इससे बाल धोने से बाल नहीं झड़ते हैं, रूसी नहीं होती है, बाल चमकदार व सुंदर होते हैं ।

  • आकाश बेल को तिल के तेल के साथ पीस कर सिर में लगाने से बालों की जड़े मजबूत होती हैं व गंजापन दूर होता है ।


Amar bel
अमर बेल




5. अमर बेल के अर्श में उपयोग (Amar bel ke upyog):



अमर बेल के स्वरस की 10 ग्राम मात्रा में कालीमिर्च का चूर्ण 5 ग्राम मिलाकर इसे अच्छी तरह से घोट कर रोज सुबह पिलाने से 2 से 3 दिन में खूनी व बादी दोनों तरह की बवासीर ठीक हो जाती है । इससे पेट भी साफ़ हो जाता है  शरीर के अन्य अंगों की सूजन भी उतार जाती है ।


विशेष:


इस लेख में हमने आप को अमर बेल के औषधीय एवम् घरेलू उपयोग तथा अमर बेल के फायदे के बारे में वर्णन किया है, इसके अलावा आकाश बेल के और भी उपयोग हैं । यह मस्तिष्क के विकारों में भी फायदा करता है । अमर बेल के स्वरस के दस  से 20 ग्राम मात्रा को प्रातः जल के साथ सेवन करने से मस्तिष्क विकार में लाभ होता है ।

आकाश बेल बालवर्धक भी होती है । इसके लिए 10 ग्राम अमर बेल को कुचल कर साफ़ बारीक कपड़े में बांध कर आधा किलो गाय के दूध में लटका कर हलकी आग पर पकने दें । जब दूध 2/3 रह जाये तो ठंडा करके  इसमें मिश्री मिलाकर पीने से कमजोरी दूर हो जाती है । इस समय ब्रह्मचर्य से रहना आवश्यक है । अमर बेल का लेप खुजली वाले स्थान पर करने से खुजली दूर हो जाती है । अमर बेल कमजोरी में  अत्यधिक फायदा करता है ।



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Saturday, 16 March 2019

पलाश के औषधीय उपयोग एवम् टेसू का होली में महत्व( plash Flower Madicinal uses in hindi)

टेसू के फूल
पलाश के फूल


टेसू ( पलाश) औषधीय उपयोग:


इस लेख में आप को टेसू यानि पलाश के औषधीय उपयोग एवम् टेसू का होली में महत्व के बारे में बताने जा रहे हैं। वसंत ऋतु की आभा बिना टेशू के फूल के पूरी नहीं होती है । फाल्गुन पूर्णिमा आते-आते पलाश के फूल पूरी तरह पक जाते हैं । इनका रंग केसरी लाल, और बनावट दीपक की ज्योति की तरह ही होती है। इस टेसू को केसू, पलाश व ढाक कहा जाता है। इन दिनों पलाश के पेड़ की डालियों पर पत्तियां व फल नहीं होते हैं । बल्कि केवल फूल ही फूल दिखते  हैं । टेसू के फूल तोता की चोंच की तरह दिखने वाले फूल का आकार होने के कारण इसे किंशुक नाम से भी जाना जाता है ।

पुराने समय में इन्हीं पलाश के फूलों के रंगों से होली होती थी । होली पर इसके फूलों के रंगों का बड़ा महत्व रहा है। आज भी कुछ लोग त्वचा का नुकसान की जगह लाभ पहुंचाने वाले टेसू के फूलों से रंग निकालकर होली खेलते हैं। बृज में आज भी इसके पलाश के फूलों के रंग से होली खेली जाती है ।

होली के त्योहार में प्राकृतिक रंग बनाने में उपयोग किए जाने वाले केसू के फूल अब कुछ दिन तक अपनी रंगत को बिखेरने के बाद झड़ना शुरू हो जाते हैं । होली के त्योहार पर बाजार में रासायनिक रंगों की अधिकता होने से लोगो ने टेसू के फूलों को भूला दिया है।

पलाश के औषधीय प्रयोग (Plash flawer madicinal uses in hindi):


टेसू के बहुत से औषधीय उपयोग भी है । प्राचीन काल से ही इसका उपयोग दिव्य औषधि के रूप में किया जाता है । पलाश के पेड़ पर फरवरी से मई तक फूल आते हैं व इसका फलकाल मई से जून तक होता है । टेसू को पलाश, किंशुक, रक्त पुष्पक, ढाक, प्लासू आदि नामों से जाना जाता है । इसके पत्तों का उपयोग देना पत्तल बनाने के लिए किया जाता है । पलाश के फूल से अतिसार, प्रमेह, अर्श, रक्तपित्त कुष्ठ आदि रोगों का इलाज किया जाता है । पलाश के फूल मुत्रल, रक्तस्तंभक, दाह शामक, व स्तंभक होते हैं ।

Read more:  अमरूद व अमरूद के पत्ते से पेट व अनेक रोगों का इलाज



Plash Flower
Tesu ke Phool



1. नेत्र रोग में टेशू के फायदे (Teshu ke Fayde) :



टेसू की जड़ (ताजी) का अर्क निकाल कर आंखो में डालने से रतोंधी, फूली, मतियाबिंड आदि रोग ठीक होते हैं ।


2. किडनी के रोग में पलाश के फायदे(Plash ke Fayde):



  • पलाश की जड़ का रस निकाल कर इसमें थोड़ी सी गेंहू भिगो कर तीन दिन के लिए रख दें । फिर इन दोनों को पीस कर हलुआ बना कर खाने से प्रमेह, शीघ्र पतन, व कमजोरी दूर होती है ।


  • प्रमेह  - पलाश की कोपलों को तोड़कर धूप में सुखा लें, फिर इसको कूट - छान कर इसकी 8 से 9 ग्राम मात्रा को सुबह के समय सेवन करने से प्रमेह में लाभ होता है ।


  • टेशू के सूखी हुई कोपल, गोंद, छाल, तथा फूलों को मिलाकर चूर्ण बना लें, इस चूर्ण में बराबर मात्रा में मिश्री मिलाकर, इस चूर्ण की 2 से 4 ग्राम मात्रा को शाम को दूध के साथ सेवन करने से मूत्र खुल कर होने लगता है । मूत्र होने पर परेशानी नहीं होती है ।


  • 20 ग्राम पलाश के फूलों को 200 ग्राम ठंडे पानी में रात भर के लिए भीगा रहने दें, इसमें सुबह थोड़ी मिश्री मिलाकर पिलाने से गुर्दे का दर्द व पेशाब में खून आना बंद हो जाता है ।


3. त्वचा रोग में केशु के फायदे (kesu ke Fayde) :



  • दाद - पलाश के बीजों को नींबू के रस के साथ पीस कर संक्रमित स्थान पर लगाने से दाद व खुजली का नाश होता है ।


  • घाव - पलाश की गोंद का चूर्ण घावों पर छिड़कने से घाव तुरंत भर जाते हैं ।


  • कुष्ठ - पलाश के बीज का तेल लगाने से कुष्ठ रोग में लाभ मिलता है । दूध में उबल हुए पलाश के बीज, रस कपूर, तथा गंधक व चित्रक की शुष्क करके इसका चूर्ण बनाकर इसके 2 ग्राम मात्रा एक महीने तक प्रतिदिन लेने से मंडल कुष्ठ में फायदा होता है ।



Dhak ka ped
Palash Tree



4. पेट रोग में पलाश के उपयोग (Palash ke Upyog):



  • अफरा - पलाश की शल व सौंठ का काढा बनाकर इसकी 30 सए 40 मिली ग्राम मात्रा दिन में दो बार पीने से पर दर्द व अफारे में फायदा होता है । पलाश के पत्ते का क्वाथ बनाकर इसकी 30 से 40 मिली. मात्रा पिलाने से भी अफरा व पेट दर्द में लाभ मिलता है ।


  • मंदाग्नि - टेसू की ताजी जड़ का अर्क निकाल कर इस अर्क की 4 से 5 बूंदे पान के पत्ते पर रख कर खाने से भूख तेज हो जाती है ।


  • उदर कृमि-पलाश के बीज चूर्ण की एक चम्मच मात्रा दिन में दो बार सेवन करने से पेट के कीड़े मर जाते हैं ।

Read more:  धनिया व धनिया पत्ती के 6 लाभदायक प्रयोग (Benefit of coriander in hindi)


5. बाजीकरण में टेशू के लाभ (Palash ke Labh):



  • पलाश बीज चूर्ण 2 से 4 ग्राम मात्रा तथा बराबर मात्र में घी, आंवला चूर्ण, शर्करा बराबर मात्रा में में रात को सोने से पहले खाने से बल की वृद्धि होती है ।


  • पलाश के पांचों अंगो का चूर्ण चाय में शुष्क किया हुआ, शहद व एलोवेरा के साथ मिलाकर सुबह शाम सेवन करने से निरोगी, बलशाली, व दीघायू होता है।


  • पलाश की काद के अर्क की 5 से 6 बूंद मात्रा दिन में दो बार सेवन करने से काम शक्ति प्रबल होती है ।


  • पलाश (टेसू) बीज के तेल की 2 से 4 बूंद को इंद्री पर लगाने से नपुंसकता समाप्त हो जाती है ।



विशेष:


पलाश का धार्मिक महत्व के साथ पलाश का आर्युवेद में अलग ही महत्व है। ऊपर बताए ढाक के उपयोग के अलावा यह आनेक रोगों के उपचार के काम आता है । अगर पलाश के पांचों अंगों के भस्म की 1 से 2 ग्राम मात्रा गुनगुने दूध के साथ दिन में तीन बार खाना खाने के बाद सेवन करने से बवासीर में काफी फायदेमंद होता है । इसी तरह टेसू की जड़ को पीस कर इसके रस की 4 से 5 बूंद नाक में टपकाने से मिर्गी का दौरा ठीक हो जाता है ।
इस लेख का मूल उद्देश्य लोगो को आर्युवेद के प्रति जागरूक करना है । किसी भी गंभीर रोग में पलाश का उपयोग किसी चिकित्सक की सलाह लेकर ही करें ।




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