बुधवार, 13 मई 2020

Immunity means in hindi प्रतिरक्षा प्रणाली क्या है

Immunity means in hindi


प्रतिरक्षा प्रणाली क्या है Immunity means in hindi । जीव के अंदर होने वाली वह जैविक क्रियायें है, जो रोग उत्तपन्न करने वाली कोशिकाओं को पहचान कर और फिर मार कर जीव की रोगों से रक्षा करती है। इसमें विषाणु से और परजीवी कृमियों जैसे अनेक प्रकार के एजेंट की पहचान करने की छमता होती है । व्यक्ति की रोगों से लडने की छमता अर्थात रोग प्रतिरोधक छमता को ही immunity कहा जाता है ।


Immunity in hindi




कोरोना के प्रकोप से दुनिया में पूरी मनुष्य जाति पीड़ित है। ऐसे में शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करना और अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। बदलते मौसम में या आमतौर तौर पर बार-बार किसी संक्रमण की चपेट में आना रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने का संकेत हो सकता है ।



immunity means in hindi इम्यूनिटी शरीर में मौजूद विषैले वायरस व जीवाणु से लड़ने की क्षमता होती है। शरीर के आसपास बहुत सारे बैक्टीरिया और वायरस उपस्थित होते हैं, जो कई तरह की बीमारियों का कारण हो सकते हैं इनसे लडने की छमता ही इम्यूनिटी है ।





बीमारियों से दूर रहने के लिए इम्यूनिटी सिस्टम का मजबूत होना  आवश्यक है। अगर इम्यूनिटी मजबूत होगी तो आप बदलते मौसम में होने वाली सर्दी, खांसी जैसी समस्या व हेपेटाइटिस, फेफड़े के संक्रमण, किडनी के संक्रमण जैसी अनेक गंभीर बीमारियों से भी बचे रह सकते हैं। 



हम सभी जानते हैं कि कोरोना रोग की रोकथाम करना इलाज करने से बेहतर है । क्योंकि अब तक कोविड -19  के रोग के इलाज के लिए लिए कोई दवा नहीं है । ऐसे समय में  उपाय  करना  अच्छा  रहेगा जिससे  हमारी  रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी। जिस व्यक्ति की इम्यूनिटी अच्छी होगी उस व्यक्ति को कोरोना का इंफेक्शन होने के बाद भी वह स्वस्थ हो जाएगा ।




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस की महामारी के बढ़ते संक्रमण को दृष्टिगत रखते हुए देश के नागरिकों से कुछ सावधानियां रखने के लिए कहा था। उन्होंने कहा कि सभी देशवासी रोग प्रतिरोधक क्षमता Immunity in hindi बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय के द्वारा बताए गए उपायों को अपनाएं।




आपको आयुष मंत्रालय द्वारा जारी किए गए टिप्स  बताते है । जिनसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलती है ।




31 मार्च 2020 को आयुष मंत्रालय भारत सरकार द्वारा घरेलू नुस्खों से संबंधित एक एडवाइजरी जारी की गई थी। जारी की गई एडवाइजरी में निम्नलिखित बातें शामिल की गई थी ।



1.प्रतिरक्षा प्रणाली कैसे मजबूत करें how to improve immune system in hindi



1.1.  दिन में गर्म पानी का सेवन करें ।




1.2. हर दिन योगा अभ्यास करें। कम से कम तीस मिनट तक प्राणायाम और योगा अवश्य करें ।




1.3. खाना में रोजाना हल्दी, जीरा, धनिया और लहसुन जैसे मसालों का प्रयोग करें।




1.4. हर रोज एक चम्मच च्यवनप्राश का सेवन करें। डायबिटीज के रोगी शुगरफ्री ज्यवनप्राश का सेवन कर सकते है ।




1.5. तुलसी, दालचीनी, काली मिर्च, सौंठ और मुनक्का का काढ़ा बनाकर सुबह शाम सेवन करें । इसमें आवश्यकता अनुसार गुड़ अथवा नीबू का रस मिलाया जा सकता हैं।




1.6. दूध में हल्दी मिलाकर  पिएं। एक ग्लास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाए। ऐसा दूध दिन में एक से दो बार पी सकते हैं।




2. प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत करने के घरेलू उपाय how to improve immunity in hindi




  • नारियल का तेल या घी को दोनों नाक के छिद्रों में दिन में एक या दो बार सुबह या शाम को प्रयोग करें । इससे प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होता है ।



  • एक चम्मच तिल का तेल अथवा नारियल तेल को मुंह में भरकर दो-तीन मिनट तक मुंह में ही घुमाते रहें इसके बाद कुल्ला कर दें। इसके उपरांत गर्म पानी से कुल्ला करें। इस प्रक्रिया को दिन में एक से दो बार करें।




  • सूखी खांसी/ गले में खराश होने पर पुदीने के ताजे पत्तों या अजवाईन  के  साथ  दिन  में  एक बारभाप लिया जा सकता है।




  • खांसी या गले में जलन होने पर लौंग पाउडर को गुड़ अथवा शहद के  साथ  मिलाकर  दिन  में  2  से  3  बार सेवन किया जा सकता है। यह उपाय सामान्यता साधारण सूखी खांसी और गले में खराश को ठीक करता हैं। अगर ये लक्षण  बने रहते हैं तो डॉक्‍टर से परामर्श लेना आवश्यक है ।

Immunity means in hindi



3. कमजाेर इम्यूनिटी के लक्षण immune system weak



1. बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम होना ।


2. हर समय सुस्ती का अहसास होना।


3. बीमार होने पर जल्दी ठीक न होना।


4. थोड़ा सा काम करने पर थक जाना।


Immunity system in hindi



रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपाय Immunity means in hindi




1. स्वस्थ जीवनचर्या का पालन करें


अपनी लाइफस्टाइल और खानपान में थोड़ा बहुत बदलाव कर आप खुद को स्वस्थ रखने के साथ-साथ अपनी रोग प्रतिरोधक छमता को भी सुधार सकते हैं। नियमित व्यायाम और खानपान में ध्यान रखने  के साथ अपने भोजन में उन चीजों को शामिल करना आवश्यक है, जो आपके शरीर को शक्ति प्रदान करने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक हो ।

2. सुबह का नाश्ता अवश्य करें


आम तौर पर बहुत से लोग सुबह के नाश्ते पर ध्यान नहीं देते है। इसका असर स्वास्थ्य के साथ साथ उनकी इम्यूनिटी पर भी पड़ता है। अगर आप अपनी इम्यूनिटी को दुरुस्त करना चाहते हैं, तो आप सुबह का नाश्ता करना अपनी आदत में डाल लेवें । सुबह के नाश्ता प्रोटीन से भरपूर व पॉस्टिक होना चाहिए। इसके लिए आप उबले हुए अंडे, मौसम के ताजे फल, ड्राय फ्रूट, अंकुरित अनाज के साथ जूस या लस्सी का सेवन कर सकते हैं। जब आपके दिन की शुरुआत पौष्टिक नाश्ते से होती है, तो इससे आपके शरीर और को पोषण मिलने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।



3. अपने आप को एक्टिव रखने का प्रयास करें



अच्छी इम्यूनिटी के लिए एक्टिव रहना बहुत आवश्यक है।  निष्क्रिय रहने से आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक छमता को कम होती है । इससे लिए नियमित व्यायाम अवश्य करें । जब आप व्यायाम करते हैं, तो आपका स्टेमिना बढ़ता है। व्यायाम में योग को भी शामिल कर सकते हैं ।



4. अच्छी नींद है जरूरी



स्वस्थ रहने के लिए भरपूर नींद लेना अत्यंत आवश्यक है। विशेषज्ञों के अनुसार स्वास्थ्य रहने के लिए आठ घंटे की  नींद आवश्यक है। नींद पूरी न होने के कारण  से कई तरह की मानसिक और शारीरिक समस्याएं जन्म लेती हैं। अगर आप खुद को स्वस्थ रखने के साथ अपनी इम्यूनिटी को अच्छा करना चाहते हैं, तो इसके लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि आप खुद को बेमतलब के तनाव से दूर रखें और गहरी नींद लें।



5. नशे से परहेज करें



नशे से दूरी बनाकर रखना सेहतमंद रहने का फार्मूला है। अगर नशे के आदी है तो इसकी लत को धीरे धीरे कम करके इसे छोड़ने का प्रयास करें। क्योंकि ये आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को अत्यधिक प्रभावित करता है।




इम्यून सिस्टम मजबूत के लिए किस आहार का सेवन करें immune system in hindi





1. इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए  टमाटर  को अपने आहार में अवश्य शामिल करें। इसमें उपस्थित लाइकोपीन नामक तत्व एंटी ऑक्सिडेंट होता है, यह आपके दिमाग की स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। इसके अतिरिक्त टमाटर में विटामिन के, विटामिन सी और फाइबर की प्रचुर मात्रा होती है, जो इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक होते हैं।




2.  सिट्रस फल यानी संतरा, नीबू, आंवला, मौसमी जैसे  फलों में विटामिन सी की प्रचुर मात्रा होती है, जो हर तरह के संक्रमण से लड़ने में सायक होते है ।  इन सारी चीजों को अपने आहार में नियमित रूप से शामिल किया जाना चाहिए।




3. लहसुन में ऐसा गुण होता है जो भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सिडेंट बनाकर हमारे शरीर की इम्यूनिटी को बीमारियों से लड़ने की शक्ति देता है। लहसुन में एलिसिन नामक ऐसा तत्व पाया जाता है, जो शरीर को किसी भी प्रकार के संक्रमण और बैक्टीरिया से लड़ने की शक्ति देता है। प्रतिदिन लहसुन की सीमित मात्रा में आहार में शामिल करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने में सहायता करता है । प्रतिदिन सुबह लहसुन की दो कलियों का सेवन करने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है और इम्यून सिस्टम immune system in hindi भी मजबूत रहता है। 




5. मशरूम शरीर की श्वेत रक्त कोशिकाओं को सक्रिय करने में सहायक होता है। इसमें सेलेनियम नामक तत्व मिनरल, एंटी ऑक्सिडेंट, विटामिन बी, नाइसिन आदि पाये जाते हैं। इनके अलावा मशरूम में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो एंटी वायरल, एंटी बैक्टीरियल और एंटी ट्यूमर होते हैं । मशरूम शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने में सहायक होता है ।




6.  बादाम के पांच से छे गिरी प्रतिदिन भिगो कर खाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता तो बढ़ती ही है, और साथ में इसके सेवन से दिमाग को तनाव से लड़ने की ताकत भी मिलती है।




7. मौसमी फलों और सब्जियों को अपने भोजन में अवश्य शामिल करें। यह इम्यूनसिस्टम को मजबूत करने और इम्यूनिटी को बढ़ाने में सहायक है । इस लिए सब्जियों और फलों का सेवन करने के साथ-साथ भरपूर मात्रा में पानी पिएं।



इस लेख में प्रतिरक्षा प्रणाली किया है Immunity means in hindi, प्रतिरक्षा प्रणाली कैसे विकसित करें immune system how to improve in hindi, एवम् इसके कारण एवम् लक्षण का वर्णन किया गया है । आशा करते हैं यह लेख आप को अवश्य पसंद आया होगा ।

धन्यवाद ।



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शुक्रवार, 3 अप्रैल 2020

कब्ज के रोग में इसबगोल का उपयोग कैसे करें (how to use isabgol for constipation in hindi)

कब्ज के रोग में इसबगोल का उपयोग कैसे करें - how to use isabgol for constipation  in hindi



इसबगोल क्या है । 



इसबगोल की भूसी का सामान्यता प्रयोग किया जाता है जो कि प्लांटैगो ओवेटा के बीज से प्राप्त होती है । इस पौधे के पत्ते लंबे और संकरे होते हैं और इसमें लगभग 70 प्रतिशत घुलनशील फाइबर और 30 प्रतिशत अघुलनशील फाइबर पाए जाते  हैं ।




इसबगोल का पौधा एशिया, भूमध्य सागरीय क्षेत्र और उत्तरी अफ्रीका में मूल रूप से पाए जाते है । यह वजन घटाने के लिए एक उत्तम औषधि के रूप में जाना जाता है, यह पाचनतंत्र से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है, इसबगोल की भूसी के फायदे की सूची, स्वास्थ्य लाभ में बहुत लंबी है।



isabgole ki bhusi
Isabgol ki bhusi



इसबगोल को विभिन्न नामों से जाना जाता है । इसबगोल को इंग्लिश में spogel seeds  के नाम से जाना जाता है ।




संस्कृत - अश्व कर्ण



हिंदी।   - इसबगोल



गुजराती - जीरू



मरांठी।  - इसंबगोंल



पंजाबी  - इसपगोल



फारसी। - अस्पगोल



तेलगु - हस्पगोल




इसबगोल के फायदे ( isabgol ke fayde)




जिन लोगों को। कब्ज या पेट की समस्या, खराब पाचन जैसी समस्या रहतीं हैं, उनके लिए इसबगोल एक आसान, प्राकृतिक उपाय है। इसबगोल की तासीर ठंडी होती है, इसे कब्ज़, पेचिश और आँत के रोगों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इसबगोल पेट की आँतों में फंसे मल को निकाल कर पेट साफ़ करता है।



वैसे तो इसबगोल को पेट साफ़ करने में सबसे उत्तम माना जाता है, पर इसके और भी कई गुण हैं ।







इसबगोल की भूसी का उपयोग कैसे करें(how to use isabgol in hindi)





इसबगोल की भूसी को दो-तीन घंटे एक कप पानी में डालकर छोड़ दें। जब यह अच्छी तरह से फूल जाए फिर इसे खूब घोलकर इसमें जरुरत भर चीनी मिला लें। इसके बाद इसका सेवन करें।




1. कब्ज के रोग में इसबगोल का उपयोग कैसे करें  (how to use isabgol for constipation  in hindi)





इसबगोल का उपयोग कब्ज को दूर करने के लिए लंबे समय से एक रेचक के रूप में किया जाता रहा है। इसबगोल में उपस्थित अघुलनशील फाइबर मल को नरम और विस्तारित करने में मदद करता है, जिससे आंत के स्वास्थ्य में सुधार होता है। एक गिलास गर्म दूध में दो चम्मच ईसबगोल मिला कर इसका सेवन कुछ हफ्तों तक रोज रात को सोने से पहले करने से फायदा होता है ।




2. कोलेस्ट्रॉल में इसबगोल की भूसी खाने के फायदे ( isabgol ki bhusi ke fayde)





स्वास्थ्य जानकारों के अनुसार, ईसबगोल के रक्त से कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायता करता हैं। यह आंतों के अंदुरूनी भाग में एक पतली परत बनाता है,  जो भोजन से कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को रोकता है और कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।




3. वजन घटाने में इसबगोल के फायदे (isabgol ke fayde in hindi)





ईसबगोल का सेवन करने के बाद आपको लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है, जिससे और अधी खाने की इच्छा नहीं होती है। इसबगोल की भूसी को पानी और नींबू के रस के साथ मिलाकर सुबह खाली पेट उपयोग करने से वजन कम करने में सहायता मिलती है।




3. दस्त में इसबगोल का उपयोग ( dysentery me isabgol ka upyog)





जब इसबगोल की भूसी का दही के साथ सेवन किया जाता है, तो इसबगोल ढीले मल को टाइट कर राहत दिलाने में एक असरकारक उपाय के रूप में काम करता है। इसबगोल में उपस्थित फाइबर दस्त से पीड़ित रोगी को अच्छी तरह से पतले मल को सख्त करने में मदद करता है।




अमिबिक पेचिस में 100 ग्राम इसबगोल की भूसी में 50 ग्राम सौंफ व 50 ग्राम मिश्री मिलाकर इसकी 2 से 3 चम्मच की मात्रा दिन में दो बार सेवन करने से लाभ होता है ।







4. गॉल ब्लैडर की पथरी में इसबगोल खाने के फायदे ( isabgol khane ke fayde in hindi)




इसबगोल का प्रतिदिन सेवन गॉल ब्लैडर में पथरी बनने से रोकने में सहायता करता है ।साथ ही बवासीर के रोग में मलत्याग करते समय होने वाले असहनीय पीड़ा को भी इसबगोल का सेवन कम करने में असरकारक है।


5. पाचन में इसबगोल के फायदे (digestion me isabgol khane ke fayde in Hindi)





इसबगोल में उपस्थित फाइबर पेट में आंतों के माध्यम से भोजन को पचाने के लिए मार्ग को साफ करके आंत्र संकुचन को नियमित करने में मदद करता है। दो चम्मच ईसबगोल को एक गिलास छाछ में मिलाकर रात को सोने से पहले सेवन कर सकते हैं।




6. दांत दर्द में इसबगोल के फायदे (isabgol ke fayde in hindi)





इसबगोल की भूसी सिरके में डुबोकर संक्रमित दांत पर लगाने से दांत के दर्द में आराम मिलता है।



7. एसिडिटी में इसबगोल की भूसी खाने के फायदे ( acidity me isabgol ki bhusi khane ke fayde)




यदि आप अम्लता से पीड़ित हैं, तो इसबगोल से नियंत्रित किया जा सकता है। यह आंत में परत बनाकर पेट को  एसिडिटी से बचाता है।




इसबगोल एक प्रभावकारी आयुर्वेदिक औषधि है, जिसे पाचन सम्बन्धी विभिन्न प्रकार के रोगों में बहुत लाभकारी माना जाता है। इसबगोल एक पौधे ‘प्लेंटेगो ओवेटा’ और ‘प्लेंटेगो सीलियम’ के बीजों से प्राप्त होता है। इसके बेहतरीन गुणों के कारण इसबगोल को पेट से जुडी कई तरह की परेशानियों में बहुत कारगर माना जाता है।



8. ब्लड शुगर में इसबगोल की भूसी खाने के फायदे ( isabgol ki bhusi khane ke fayde)




इसबगोल मधुमेह रोगियों के लिए बहुत ही असर कारक है क्योंकि इसमें जिलेटिन होता है जो शरीर में ग्लूकोज के टूटने और अवशोषण को धीमा करने में सहायता करता है। इस तरह यह शरीर में रक्त शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करने में सहायता करता है।







9. अल्सर में इसबगोल की भूसी के फायदे (isabgol ki bhusi ki fayde )




इसबगोल का नियमित सेवन करने से यह पेट में बने अल्सर के ऊपर एक सुरक्षित लेयर बना देता है, जिसके कारण तीखा खाना खाने का कोई बुरा असर अल्सर पर नहीं पड़ पाता।




10. पेशाब में जलन की समस्या में इसबगोल की भूसी खाने के फायदे (isabgol ki bhusi khane ke fayde)




अगर आप पेशाब में जलन की समस्या रहती हैं तो एक गिलास पानी में चार चम्मच इसबगोल की भूसी एक चम्मच चीनी के साथ सेवन करने से फायदा होता है।



इस तरह कृतिक औषधि पेट के कई रोगों में रामबाण का काम करती है। विशेष रूप से  आँतों से मल निकालकर पेट हल्का और साफ़ करने में इसबगोल से बेहतरीन कोई उपाय नहीं है।




इसबगोल के नुक़सान :




यह औषधि प्रसूता के लिए नुक़सान दायक है, इसबगोल के बीज को पीसने के लिए मना कर जाता है, क्यों की इससे नुक़सान होने की संभावना रहती है ।




इस लेख में खासतौर में कब्ज के रोग में इसबगोल का उपयोग कैसे करें  (how to use isabgol for constipation  in hindi ) एवम् इसबगोल के फायदे व नुक़सान का वर्णन किया गया है, उम्मीद करते हैं कि यह लेख आप को पसंद आया होगा ।

धन्यवाद ।



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सोमवार, 16 मार्च 2020

गर्म पानी के फायदे और नुक़सान (garam pani ke fayde aur nuksan)

गर्म पानी के फायदे - garam pani ke fayde



गर्म पानी पीना स्वास्थ्य के लिए लाभ दायक होता है, गरम पानी से तात्पर्य गुनगुने पानी से है जो कि पीने लायक होता है । गर्म पानी पीना अगर आदत में डाल लिया जाए तो सेहत से जुड़ी अनेक समस्यों से छुटकारा पाया जा सकता है ।




गर्म पानी पीने के फायदे( garam pani ke fayde) वजन कम करने में तो है ही लेकिन इसके साथ साथ गर्म पानी पीने के विभिन्न फायदे है गर्म पानी पीना आमतौर पर अच्छा नही लगता है लेकिन इसके अनेक लाभ देखने को मिलते है  ।



garam pani ke fayde, gunguna pani



गुनगुना पानी सर्दी गर्मी बरसात किसी भी मौसम में पिया का सकता है । गुनगुना पानी पीने से पाचन अच्छा रहता है और सॉच की समस्या नहीं होती है, पेट खुलकर साफ होता है । खाना पचाने में भी गर्म पानी के फायदे ( garam pani ke fayde) है । खाना सही नहीं पचेगा तो कब्ज की शिकायत रहेगी । गुनगुना पानी पीने से स्किन व बाल स्वस्थ रहते हैं ।



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गर्म अर्थात गुनगुना पानी पीने से गैस की समस्या नहीं होती है । इससे वजन भी नियंत्रित होता है । सर्दी जुखाम में भी गुनगुना पानी फायदे करता है । अगर आपका वजन लगातार बढ़ रहा है तो आप गर्म पानी में एक चम्मच शहद और नींबू मिलाकर लगातार तीन महीने पीने से आपको फायदा महसूस होगा । अगर आप ऐसा नहीं करना चाहते हैं तो आप खाना खाने के एक घंटे बाद एक ग्लास गुनगुना पानी पीना शुरू कर सकते हैं ।




शरीर से जुड़ी अनेक समस्याओं में गर्म पानी पीने के फायदे ( garam pani pine ke fayde) होते है, विभिन्न रोगों में पानी पीने के तरीके एवम् इसके प्रयोग के बारे वर्णन क्या का रहा है । जो निम्न प्रकार है ।



गर्म पानी कैसे पिये ( garam pani kaise piye)





1. गर्म पानी शरीर में उपस्थित हानिकारक तत्वों को शरीर से पसीने व मूत्र के द्वारा बाहर निकालने में सहायता करता है ।




2.  पेट को स्वस्थ रखने के लिए गर्म पानी पीना अमृत के समान माना जाता है । अगर सुबह उठकर गरम पानी पिया जाए तो कब्ज की समस्या नहीं रहती है और पेट साफ होकर हल्का रहता है । गैस की समस्या व खट्टे डकारों में भी लाभ मिलता है ।



Garam pani peene, garam pani ke fayde




3. एक ग्लास गर्म पानी में एक चम्मच शहद और अधा नींबू निचोड़ कर पीने से गले का संक्रमण ठीक होकर गले के दर्द में राहत मिलती है । गुनगुने पानी में थोड़ा सा नमक मिलाकर इस पानी से गरारे करने से भी गले के दर्द में आराम मिलता है ।



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4. गर्म यानी गुनगुना पानी पीने से रक्त का संचरण ठीक रहता है । गरम पानी में नींबू,  और नमक या चीनी मिला के पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक छमता बढ़ती है ।



गर्म पानी पीने के फायदे (garam pani ke fayde)




5. रात को सोते समय गर्म पानी पीने से अचानक होने वाले हृदय घात यानी हार्ट अटैक से बचा का सकता है ।




6. चहरे पर कील मुंहासे से राहत पाने के लिए गर्म पानी का अफ़ारा लिए जा सकता है ।




7.  चोट के दर्द व जोड़ो के दर्द में गर्म पानी में नमक मिलाकर सेकने से फायदा होता है ।



गरम पानी के फायदे, गुनगुना पानी




गर्म पानी पीने के नुक़सान( garam pani peene ke nuksan) 




गर्म पानी पीने के फायदे ( garam pani ke fayde) तो होते ही हैं, इस पानी का सेवन असावधानी से करने से नुुकसान भी हो सकते हैं । पानी बहुत अधिक गर्म नहीं पीना चाहिए, सिर्फ इतना गर्म हो जो की सहन करने के योग्य हो । पानी ना तो बहुत अधिक गरम और एक दम ठंडा नहीं होना चाहिए ।



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अगर आप प्रतिदिन अधिक गर्म पानी पी रहे हैं तो आपका ब्लड प्रेशर भी बढ़ सकता है। इससे हार्ट बीट बार-बार बढ़ती और घटती रहती है। जिनको ब्लड प्रेशर की प्रॉब्लम है उन्हें अधिक गर्म पानी नहीं पीना चाहिए।





अधिक गर्म पानी पीने से मुंह जल सकता है हो सकता है मुंह में छले भी हो जाएं । अधिक गरम पानी पीने से शरीर के अंदुरूनी भाग जैसे किडनी पर फर्क पड़ता है । अधिक गर्म पानी से सिर के रोग की समस्या होती है । अगर आप गर्म पानी के फायदे (garam pani ke fayde) लेना चाहते हैं तो पानी गुनगुना ही पिए ।


धन्यवाद ।


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रविवार, 23 फ़रवरी 2020

शतावरी के 20 फायदे एवम् उपयोग ( shatavari benefit in hindi )

शतावरी के फायदे - shatavari ke fayde in hindi



शतावरी के फायदे ( shatavari benefit in hindi) के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं, इसलिए इसका उपयोग कम लोग ही कर पाते हैं । इस लेख में बताने जा रहे हैं कि शतावरी क्या है, शतावरी के फायदे क्या हैं, शतावरी का सेवन कैसे किया जा सकता है।




आयुर्वेद में शतावरी को एक बहुत ही लाभ दायक औषधि के रूप में जाना जाता है । इससे अनेक बीमारियों की रोकथाम, और उपचार किया जाता हैं।




Shatavari, शतावरी, Shatavari ke fayde



शतावरी क्या होती है




शतावरी एक औषधीय जड़ी-बूटी है। इसकी लताएं फैलने वाली होती है। एक ही बेल के नीचे लगभग 100 - 150  जड़ें होती हैं। यह जड़े आकर में लगभग 30 से 100 सेमी तक लम्बी, तथा 1 से 2 सेमी मोटी होती हैं। इन जड़ों के दोनों किनारे नोकदार होते हैं।



शतावरी की जड़ों के ऊपर भूरे रंग का, पतला छिलका होता है। इस छिलके को उतार देने के बाद अन्दर सफेद रंग की जड़ें निकलती हैं। इन जड़ों के बीचोबीच में सख्त रेशा होता है, इसे निकाल कर उपयोग में लाया जाता है ।



शतावरी दो प्रकार की होती हैं,



1. विरलकन्द शतावर




इस शतावरी के कन्द आकार में छोटे, मांसल, फूले हुए तथा एक गुच्छे के रूप में होते हैं। इसके कन्द का काढ़ा बनाकर उपयोग किया जाता है।



2. कुन्तपत्रा शतावर



यह शतावरी का एक झाड़ीनुमा पौधा होता है। इसके कन्द आकार में छोटे, व कुछ मोटे होते हैं। इसके फूलों का रंग सफेद होता हैं, फल गोल होते हैं। कच्चे फल हरे रंग के होते हैं और पकने पर लाल रंग के हो जाते हैं।



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शतावरी को अनेक नाम से जाना जाता है ।



अंग्रेजी - Wild asparagu



हिंदी - शतावर, सतावरि, सतमूली, शतावरी, 



संस्कृत- शतावरी, शतपदी, शतमूली, महाशीता, तालमूली,



उर्दू - सतावरा



उड़िया - चोत्तारु, मोहनोले



गुजराती - एकलकान्ता, शतावरी



तमिल -  किलावरि, पाणियीनाक्कु



तेलगु - छल्लागडडा, एट्टावलुडुटीगे



बंगाली- शतमूली, सतमूली



पंजाबी - बोजान्दन, बोजीदान



मराठी- अश्वेल, शतावरी



मलयालम - शतावरि, तावलि



नेपाली - सतामूलि, कुरीलो



अरबी - शकाकुल



शतावरी के फायदे (shatavari Benefits in hindi )





1. अपच की समस्या में शतावरी की जड़ के फायदे (Benefits of Shatavari in Indigestion in Hindi)





खाना ठीक से नहीं पच रहा हो तो शतावरी का उपयोग करना फायदेमंद होता है । 5 मिली शतावर की जड़ के रस को शहद, और दूध के साथ मिला कर सेवन करने से अपच जैसी समस्या नहीं रहती है।



2. पेट दर्द में शतावरी के प्रयोग (Shatavari Uses in Hindi)





पित्त के कारण होने वाले पेट दर्द में भी शतावरी का फायदा करता है। 10 मिली शतावरी के रस में 10-12 ग्राम शहद मिलाकर प्रतिदिन लेने से लाभ होता है।




3. शारीरिक दुर्बलता  में शतावरी के फायदे (shatavari benefits in Weakness in Hindi)





जो लोग कमजोर शरीर वाले होते है या शरीर में कमजोरी  महसूस करते हैं, वे लोग शतावरी को घी में पकाकर शरीर की मालिश करें, इससे कमजोरी दूर होकर शरीर पुष्ट होता है । सामान्य कमजोरी दूर करने में शतावरी बहुत ही फायदेमंद होती हैं।




4. पौरुष शक्ति में शतावरी चूर्ण के फायदे (shatavari ke churn ke fayde)





दूध के साथ शतावरी चूर्ण की खीर बनाकर खाने से पौरुष शक्ति में वृद्धि होती है।




शतावरी का पौधा, शतावरी, शतावरी की जड़
शतावरी




5. सांसों के रोग में शतावरी के लाभ (shatavari ke fayde)





शतावरी पेस्ट एक भाग, घी एक भाग, तथा दूध चार भाग लेकर इन्हें घी में पकाकर इसकी 5-10 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से सांस से संबंधित रोग, रक्त से संबंधित रोग, सीने में जलन, वात और पित्त दोष, और बेहोशी की समस्या में फायदा मिलता है।




6. प्रीग्नेंसी में शतावरी के फायदे (benefit of shatavari in prignancy )




गर्भवती महिलाओं के लिए शतावरी के बहुत फायदे होते हैं। शतावरी, सोंठ, अजगंधा, मुलैठी तथा भृंगराज इन पांचों को समान मात्रा में लेकर इनका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की 1-2 ग्राम की मात्रा में लेकर बकरी के दूध के साथ सेवन करें। इससे गर्भस्थ शिशु स्वस्थ रहता है।



7. बवासीर में शतावरी के फायदे( benefit of shatavari in hindi)




बवासीर में शतावरी का उपयोग करने से अच्छे परिणाम  मिलते है। 2-4 ग्राम शतावरी चूर्ण को दूध के साथ उपयोग करने से फायदा होता है।



8. पेचिश में फायदेमंद शतावरी का प्रयोग ( uses of shatavari in hindi )




ताजी शतावर को दूध के साथ पीस छान लें। इसका सेवन दिन में 3-4 बार करने से पेचिश में फायदा होता है । शतावरी से बने घी का सेवन करने से पेचिश में फायदा होता है।



9. अनिद्रा रोग में शतावरी के फायदे (Benefits of shatavari in Insomnia in Hindi)




अनेक लोगों को नींद ना आने की समस्या रहती है। वह लोग 2-4 ग्राम शतावरी के चूर्ण को दूध में पकाकर ऊपर से इसमें घी मिलाकर सेवन करने से नींद ना आने की समस्या समाप्त होती है।



10. शतावरी चूर्ण के फायदे स्वप्न दोष में (Shatavari churn benefits in hindi)




स्वप्न दोष को ठीक करने के लिए ताजी शतावर की जड़ का चूर्ण 250 ग्राम में 250 ग्राम मिश्री को मिलाकर कूट-पीस कर इसकी 6-10 ग्राम चूर्ण को, 250 मिली दूध के साथ सुबह-शाम लेने से स्वप्न दोष दूर होता है, शतावर चूर्ण का पूरा फायदा लेने की लिए इसका उपयोग उचित मात्रा में करें ।



यह भी पढ़े :जामुन के गुण, फायदे, उपयोग तथा हानियां



11. सर्दी-जुकाम में शतावरी का उपयोग ( shatavari ka upyog)




शतावरी का उपयोग सर्दी-जुकाम में भी फायदा करता है।  शतावरी की जड़ का काढ़ा 15-20 मिली मात्रा में पीने से फायदा मिलता है।



अधिक जोर से बोलने, अधिक बोलने पर, आवाज का बैठना आम बात है। ऐसी समस्या में शतावर, खिरैटी, को मधु के साथ चाटने से फायदा होता है।



12. सूखी खांसी में शरातवरी के फायदे ( shatavari ke fayde)




सूखी खांसी के रोग के लिए, 10 ग्राम शतावरी, 10 ग्राम अडूसे के पत्ते, और 10 ग्राम मिश्री को 150 मिली पानी के साथ उबाल लें। इसे दिन में 3 बार लेने से सूखी खांसी समाप्त हो जाती है।



13. सिर दर्द में फायदेमंद है शतावरी (shatavari ke fayde)




शतावरी सिर दर्द से भी फायदा करता है। शतावर की ताजी जड़ का रस निकाल कर इस रस में समान मात्रा में तिल का तेल डालकर उबाल कर रख लेवे । इस तेल से सिर की मालिश करने से सिर दर्द, और आधासीसी का दर्द दूर होता है।



14. पथरी के रोग में शतावरी के फायदे ( shatavari ke fayde)




पथरी के रोग से परेशान व्यक्ति 20-30 मिली शतावरी के जड़ से बने रस में समान मात्रा में गाय के दूध को मिलाकर पिने से पुरानी पथरी भी जल्दी गल कर बाहर निकल जाती है ।



15. नाक के रोग में शतावरी का प्रयोग (Uses of Shatavari for Nasal treatment in Hindi)




शतावर चूर्ण के फायदे नाक संबंधी रोगों के उपचार के काम आता है । नाक के रोग में 5 ग्राम शतावरी चूर्ण को 100 मिली दूध में पकाकर, छानकर पीने से नाक के रोग समाप्त होते हैं।



16.  शतावरी के इस्तेमाल से रतौंधी में लाभ (Benefits of Shatavari in Night Blindness in Hindi)




शतावरी के प्रयोग से रतौंधी में भी फायदा होता है। इसके लिए घी में शतावरी के मुलायम पत्तों को भूनकर सेवन करने से लाभ होता है।



17. शतावरी का प्रयोग दस्त में (Shatavari ke fayde in Hindi)




लोग दस्त से परेशान रहते हैं, तो 5 ग्राम शतावरी घी का सेवन करें। इससे दस्त पर रोक लगती है।



18. मूत्र विकार में शतावरी के फायदे ( Shatavari benefit in hindi) 




कई लोग बार-बार पेशाब आने से परेशान रहते हैं, ऐसे में 10-30 मिली शतावर के जड़ का काढ़ा बना लें। इसमें मधु और चीनी मिलाकर पीने से लाभ होता है।



पेशाब की जलन की समस्या में 20 ग्राम गोखरू पंचांग में बराबर मात्रा में शतावर मिला लें। इसे आधा लीटर पानी में उबाल कर इसे छानकर 10 ग्राम मिश्री और 2 चम्मच शहद मिला कर रख लें। इसे थोड़ा-थोड़ा दिन में तीन बार पिलाने से पेशाब की जलन की समस्या और बार-बार पेशाब आने की समस्या में लाभ मिलता है।



19. बुखार में शतावरी में फायदे (shatavari ke fayde)




शतावर और गिलोय की समान मात्रा के 10 मिली रस में थोड़ा गुड़ मिलाकर पिने से बुखार में फायदा होता है। इसका 20-40 मिली काढ़ा में 2 चम्मच शहद मिलाकर सेवन करने से बुखार में फायदा होता है।




20. शतावरी का उपयोग घाव में (use of shatavari for  wound in Hindi)




शतावरी के 20 ग्राम पत्ते का चूर्ण बनाकर 40 ग्राम घी में तल कर और अच्छी तरह पीस कर घाव पर लगाने से पुराने घाव भी ठीक हो जाते है।



इस लेख में शतावरी के फायदे एवम् इसके उपयोग के बारे में वर्णन किया गया है, इस लेख का मूल उद्देश्य लोगो को आयुर्वेद के प्रति जागरूक करना है, किसी गंभीर रोग में और इसकी मात्रा का अंदाजा सही से न हो पाए तो इसका प्रयोग किसी चिकित्सक की सलाह से करें ।

धन्यवाद ।


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गुरुवार, 30 जनवरी 2020

सिर दर्द के 14 चमत्कारी घरेलू उपाय( sir dard ke gharelu upay)

सिर दर्द के घरेलू उपाय ( sir dard ke gharelu upay)



आप सब लोग जानते ही हैं आजकल की भाग-दौड़ की जिंदगी में सिर दर्द एक आम बात हो गई है। लगभग सभी उम्र के लोग अक्सर सिरदर्द की बात करते हैं। सिरदर्द ठीक करने के लिए अनेक तरह की एलोपैथिक दवाओं का प्रयोग करते हैं, लेकिन इन दवाओं का असर कम समय तक रहता है । ऐसे लोगों  शायद यह नहीं जानते हैं कि सिर दर्द के घरेलू उपाय ( sir dard ke gharelu upay) के द्वारा भी आसानी से ठीक किया जा सकता है।




लगातार कंप्‍यूटर के सामने बैठ कर काम करने से भी कभी कभी सिर दर्द होता है । या फिर काम का दबाव अधिक होने से भी सिर दर्द होता है । सिर दर्द को ठीक करने के अनेक घरेलू उपाय हैं जिनका उपयोग कर आप अपनी समस्या का समाधान कर सकते हैं। चलिए हम आपाको सिर दर्द के कुछ उपाय के बारे में बताते हैं।




sir dard, सिरदर्द



लौंग एवम् नमक का पेस्ट सिर दर्द ठीक करने का एक असरदार उपचार है। इसके लिए लौंग पाउडर और नमक का पेस्ट बनाकर फिर इस पेस्ट को दूध में मिलाकर सेवन करने से सिर दर्द ठीक हो जाता है। नमक में एक ऐसा गुण पाया जाता है, जिससे यह सिर में उपस्थित द्रव्य पदार्थ जिनके कारण सिरदर्द होता है, को सोक लेता है । जिस कारण सिर दर्द से राहत मिलती है।




सिर दर्द के उपाय( sir dard ke upay)




1. बादाम के तेल से करें मसाज




सिर दर्द से राहत पाने के लिए बादाम का तेल भी काफी उत्तम होता है । करीब 20 मिनट तक बादाम के तेल से सिर की मालिश करने से सिर दर्द में फायदा होता है। 




2. नींबू का रस एवम् गर्म पानी से सिर दर्द  के घरेलू उपाय( sir dard ke gharelu upay)




एक ग्लास गर्म पानी में नींबू निचोड़ कर पीने से सिर दर्द में आराम मिलता है । कभी कभी पेट में गैस बनने के कारण भी सिर में दर्द होता है । नींबू पानी के घरेलू उपाय से सिर दर्द को आसानी से ठीक किया जा सकता है। नींबू पानी पीने से सिरदर्द तो ठीक होता ही है, साथ ही गैस की समस्या भी आराम मिलता है।



3. गर्म दूध से सिर दर्द का घरेलू उपाय ( sir dard ke gharelu upay)  




सिर दर्द से छुटकारा पाने के लिए गर्म दूध पीएं, कोशिश करें गाय के दूध का सेवन करे, गए का दूध उपलब्ध एन होने पर भैंस का दूध ले सकते हैं । साथ ही अपने आहार में देसी घी को अवश्य शामिल करें। 





4. यूकेलिप्टस के तेल से मसाज 




अगर आप सिर दर्द से राहत पाना चाहते हैं तो आप यूकेलिप्टस तेल से मसाज कर सकते हैं। इस तेल में दर्द निवारक का गुण होता है और इससे जल्दी राहत मिलती है।




5. नारियल तेल की मसाज करें




नारियल तेल से 10-15 मिनट सिर की मसाज करने से  सिर दर्द से आराम मिलता है । अगर आप गर्मी के कारण सिर दर्द से परेशान हैं तो यह उपाय बहुत ही असरकारक है । यह सिर को ठंडा रखता है और दर्द में आराम दिलाता है । 




6. दालचीनी के चूर्ण का पेस्ट से सिर दर्द का उपचार ( sir dard ka upchar)





सिर दर्द में आराम पाने का सबसे अच्छा उपाय यह है कि दालचीनी को पीस कर चूर्ण बना लें। इस चूर्ण को  पानी में मिला कर पेस्ट बना लेवें । इस पेस्ट को सिर पर या माथे पर लगाने से सिरदर्द में आराम मिलता है ।





सिरदर्द, sir dard hona




 7. चंदन घिस कर लगाएं




थोड़ी सी चंदन की लकड़ी लेकर पानी के साथ इसका पेस्ट तैयार करें। अब इस पेस्ट को मांथे पर लगाएं । ऐसा करने से सिर दर्द पूरी तरह से ठीक हो सकता है ।



8. गर्म पानी का सिर दर्द में उपयोग




पांव को गर्म पानी में रखने से सिर दर्द से राहत पाने का एक अच्छा तरीका है । बाल्टी में गरम पानी लेकर इसमें अपने पैर डुबो कर रखें । यह काम रात को सोने से पहले कम से कम 10 से 15 मिनट तक करें । अगर आप को लंबे समय से सिर दर्द हैं तो कम से कम 2 से 3 सप्ताह तक इस प्रक्रिया को करें । 







9. मासाले दार गरम चाय पिएं




मसाले दार चाय सिरदर्द के लिए एक अचूक उपाय है जिसको आसानी से घर में बना सकते है। यह एक उत्‍तेजक पेय पदार्थ है जो दिमाग को स्फूर्ति प्रदान करती है। स्फूर्ति के लिए अगर आप चाय बनायें तो उसमें थोडी से अदरख के साथ लौंग और इलायची और थोड़ी सी कालीमिर्च भी मिला लें।



10. लहसुन का रस का सेवन करें




लहसुन के 7 से 8 कली लेकर इसे निचोड़ का रस निकालें। यह मात्रा एक चम्मच हो जाए तो इसे पी लेवें । वास्तव में लहसुन एक दर्द निवारक का काम करता है ।



11. सेब का सेवन करें




आप जब सुबह उठें तो सेब पर नमक लगा कर खाएं। इसके बाद गर्म पानी या दूध पीएं। अगर आप लगातार 10 दिन तक ऐसा करेंगे तो पाएंगे कि आपका पुराना सिर दर्द की समस्या खत्म हो गई। 



12. पान के पत्ते द्वारा सिर दर्द के घरेलू उपाय ( sir dard ke gharelu upay)




पान के पत्ते में दर्द को हरने का गुण होता है। सिर दर्द में पान जल्दी आराम करता है। कुछ पान के पत्ते लेकर उसका पेस्ट बना लें। इस पेस्ट को माथे पर लगाने से सिर दर्द से बहुत आराम मिलता है।




सिर दर्द की समस्या, sir dard




13. पूरी नींद लेवें 




सिरदर्द होने का एक कारण पूरी नींद न लेना भी है, जो लोग पूरी तरह से नींद नहीं लेते हैं, उन्हें सिरदर्द की समस्या रहती है । इसलिए अगर आप सिरदर्द से छुटकारा पाना चाहते हैं तो अच्छी नींद अवश्य लें। अगर आप छें घंटे से कम नींद लेंगे तो आपको सिर दर्द की शिकायत हो सकती हैं । 



14. धनिया, जीरा और अदरक की चाय का सेवन करें




धनिया पत्ती, जीरा एवम् अदरक से बनी चाय पीने से  सिर दर्द में तुरंत राहत मिलती है। एक ग्लास पानी लेकर इसमें इन तीनों चीजों को डाल कर पांच से सात मिनट तक उबालें। यह प्रक्रिया दिन में दो बार करें।

इस लेख में सिरदर्द के घरेलू उपाय( sir dard ke gharelu upay) का वर्णन क्या गया है, ऊपर बताई बातों का ख्याल रखेंगे तो आप को सिर दर्द में फायदा हो सकता है ।

धन्यवाद ।



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रविवार, 12 जनवरी 2020

सफेद मूसली के फायदे एवम् नुक़सान( safed musli ke fayde evam nuksan)

सफेद मूसली के फायदे - safed musli ke fayde



सफेद मूसली एक पौधा है सफेद मूसली का उपयोग आयुर्वेद में बड़े पैमाने में किया जाता है क्योंकि इससे अनेक रोगों का उपचार किया जाता है । सफ़ेद मुसली में विटामिन,  प्रोटीन, स्टेरॉयड, कार्बोहाइड्रेट और पॉलीसैकराइड्स आदि प्रयाप्त मात्रा में होता है और यह सबसे कीमती जड़ी बूटी मानी जाती है ।



यह बहुत सी बिमारियों के इलाज में प्रयोग किया जाता है। इसके अलावा इसे दूसरी चीजों के साथ मिलाकर भी औषधि तैयार कर खाने के सफेद मूसली के फायदे - safed musli ke fayde होते है ।



मुख्य रूप सफेद मूसली का उपयोग सेक्स सम्बन्धित रोगों के लिए किया जाता है। मर्दों में शुक्राणुओं की कमी होनें पर इसका प्रयोग करते है। सफेद मूसली पौधे की जड़ में अनेक प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं। जैसे -  प्रोटीन, सैपोनिन, फाइबर, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम आदि । इसके अतिरिक्त सफेद मूसली की जड़ में ग्लूकोस, सुक्रोज भी पाए जाते हैं।



सफेद मूसली के फायदे -safed musli ke fayde in hindi





कुछ विशेष फायदे निम्न प्रकार हैं। सफेद मूसली आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को भी ताकत प्रदान करती है, जिससे बाहरी रोगों से शरीर की रक्षा होती है । सफेद मूसली मर्दों में टेस्टोस्टेरोन हार्मोन की मात्रा को भी  बढ़ाता है। इससे एड्रेनल ग्रंथि ठीक से कार्य करती है।



1. सफेद मूसली रोग प्रतिरोधक छमता को बढ़ाती है: 




ऐसा माना जाता है कि सफेद मूसली शरीर की रोगप्रतिरोधक छमता में सुधार कर इसे मजबूत बनाता है। यह रोगों से लड़ सकता है, जिससे शरीर मजबूत हो सकता है। सफेद मूसली आपके पूरे स्वास्थ्य को बढा कर  शरीर की कमजोरी का मुकाबला करता है।





2. यौन रोगों में सफेद मूसली के फायदे (safed musli ke fayde in hindi):




सफेद मूसली का उपयोग यौन समस्याओं जैसे दोष के उपचार के लिए किया जाता है। यौन कामेच्छा वृद्धि के लिए यह जड़ी बूटी एक टॉनिक के रूप में भी काम करती है। 



3. मुंह के इन्फेक्शन में सफेद मूसली के फायदे(safed musli ke fayde in hindi): 





सफेद मूसली की जड़ का पाउडर और शुद्ध मक्खन (घी) में तल कर सेवन करें इससे गले और मुंह के संक्रमण को कम करने में सहायता मिलती है।



सफेद मूसली की जड़, safed musli ka pawder
सफेद मूसली की जड़



4. डायरिया रोग में सफेद मूसली के उपयोग (safed musli ke upyog):




डायरिया में सफेद मूसली का फायदा यह है कि जो दस्त और पेचिश जैसे पाचन संबंधी समस्याओं से पीड़ित है। उन्हें सफ़ेद मुसली के सेवन करने से इस रोग का  प्रभावी उपचार किया जा सकता है। यहां तक ​​कि शिशुओं को दस्त का इलाज करने के लिए सफेद मूसली की एक छोटी सी खुराक दी जा सकती है।



5. जोड़ों के दर्द में सफेद मूसली के फायदे (safed musli ke fayde in hindi): 




सफ़ेद मुसली में ऐसे गुण होते हैं जो जोड़ों के दर्द, गठिया जैसे रोगों के उपचार में फायदा करता है । यह जोड़ों के फ्लूड के उत्पादन को बढ़ाता है और हड्डियों के क्षरण को कम करता है।



6. सफेद मूसली एंटीऑक्सीडेंट का कार्य करता है: 




सफेद मुसली को एक एंटीऑक्सिडेंट माना जाता है, यह शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में सहाइटा करता है है। यह शरीर से मुक्त कणों को समाप्त करता है,  यह आपको तनाव मुक्त करने और तनाव से संबंधित समस्याओं का इलाज करने में भी सहायता करता है।

7. मधुमेह में सफेद मूसली के फायदे( benefit of safed musli in sugar in hindi): 




सफेद मूसली एक ताकतवर एंटी- ऑक्सिडेंट है । यह रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करके मधुमेह के रोग की चिकित्सा में उपयोगी है। जबकि आयुर्वेद के अनुसार यह माना जाता है कि इस जड़ी बूटी का उपयोग केवल पतले मधुमेह रोगियों द्वारा किया जाना चाहिए।स



8. शरीर को सुदृढ करने में सफेद मूसली की फायदे ( safed musli ke fayde in hindi):  




मूसली मांसपेशियों की वृद्धि, नए उत्तकों का निर्माण में फायदा प्रदान करता है। इसमें ऐसा गुण होता है जो शरीर सौष्ठव में एक पूरक का काम करता है । सभी बॉडी बिल्डरों को सलाह दी जाती है कि वे अपने काम को नियमित करने, और शरीर बनाने के लिए इसका सेवन करें।



9. कम करनेवजन  में सहायक है(benefit of safed musli in weight loss in hindi):




अगर आप अपना वजन घटाना चाहते हैं तो सफेद मुसली का सेवन बहुत सहायता कर सकता है। यह पाचन तंत्र को ठीक रख कर चयापचय की क्रिया को बढ़ाता है। यह शरीर को शक्ति भी प्रदान करता है और थकान से छुटकारा पाने में सहायता करता है।



10. सफ़ेद मुसली का उपयोग (safed muli ka upyog)




सफेद मूसली का सेवन दिन में दो बार दूध के साथ किया जा सकता है। प्रति दिन इसकी 3-5 ग्राम की मात्रा काफी मानी जाती है।



स्तनपान कराने वाली महिलाओं पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। यह स्तनपान कराने वाली महिलाओं के दूध उत्पादन को बढ़ाता है और इसके कोई दुष्प्रभाव नहीं होते हैं।



सफेद मूसली का उपयोग करने के लिए कोई विशेष प्रतिबंध नहीं हैं। फिर भी इसका सेवन शुरू करने से पहले किसी चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।



सफेद मूसली की जड़, सफेद मूसली का पाउडर
सफेद मूसली



सफेद मूसली खाने के नुक़सान (safed musli khane ke nuksan)




सफेद मूसली के फायदों के अलावा कुछ नुकसान भी हो सकते हैं, इस लिए इसे उचित मात्रा में ही खाना चाहिए । इसके निम्न नुकसान हो सकते हैं ।



  • सफेद मूसली का सेवन यदि सही मात्रा में नहीं किया जाता है, तो वजन बढ़ने की संभावना रहती है। सेवन करने से पूर्व चिकित्सक से चर्चा करना अनिवार्य है।



  • इसे खाने के बाद पचने में समय लगता है, इसलिए पाचन तंत्र पर इसका असर पड़ सकता है।



  • कब्ज़ की समस्या हो सकती है।



  • कभी कभी भूख भी कम हो लगती  है।



  • सफेद मूसली तासीर में ठंडी होती है, इसलिए यह जुकाम और कफ की समस्या को पैदा सकता है।



  • त्वचा संबंधी परेशानियां हो सकती है।



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सफेद मूसली के उपयोग में सावधानियां 




  • बहुत अधिक सुरक्षित सफेद मूसली का सेवन अत्यधिक मात्रा में करने से शरीर में कुछ बदलाव हो सकते हैं, यही वजह है कि हमेशा निर्धारित मात्रा लेने के लिए कहा जाता है।



  • सफेद मुसली का सेवन आमतौर पर पानी या दूध के साथ किया जाता है। यह इन दोनों के साथ  सेवन करने की सलाह दी जाती है, शराब के साथ इसका सेवन करने का कोई हानिकारक प्रभाव हो सकते हैं।



  • सफ़ेद मुसली का दिन में दो बार सेवन करना पर्याप्त और प्रभावी है।



  • सफेद मूसली को भोजन के दो घंटे बाद लेना चाहिए



  • सफेद मूसली का सेवन पानी के साथ का सेवन कर सकते हैं। पानी के साथ सेवन करते समय ध्यान रखें कि पेट खाली हो 


इस लेख में सफेद मूसली के फायदे ( safed musli ke fayde in hindi ) का वर्णन किया गया है, आशा करते हैं यह लेख आपको अवश्य पसंद आया होगा ।
धन्यवाद ।


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