Tuesday, July 21, 2020

गेंहू के जवारे के 5 फायदे - wheat grass in hindi

गेंहू के जवारे के फायदे - wheat grass benefits in hindi



इस लेख में आप को बातने जा रहे हैं गेहूं के ज्‍वारे - wheat grass in hindi के बारे में । पहले तो ये जान लेना आवश्यक है कि ये है क्‍या है, गेहूं की नवजात पौध को गेहूं का ज्वारा को कहते हैं ।  गेहूं के बीच जब मिट्टी में रोपे जाते हैं तो 7 से 8 दिन में जो पौध बनकर तैयार होती है वही गेहूं का जवारा कहलाती है ।



इसे अंगेजी में Wheat Grass के नाम से जाना जाता  हैं । इसके फायदे अनेक हैं, आयुर्वेद में इसके रस को संजीवनी बूटी भी कहा गया है । आजकल ये आयुर्वेदिक औषधि के रूप में सरलता से बाजार में मिल जाती है ।



गेहूं का जवारा,आयडीन, सेलेनियम, आयरन और विटामिन A, B2, C और E आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं । ज्वारे के रस में प्रचुर मात्रा में भी फाइबर पाया जाता है ।



Wheat grass in hindi
गेंहू के जवारे


Wheatgrass का वैज्ञानिक नाम Triticum aestivum है। इसे पोषक तत्वों का भंडार माना जाता है। 



माना जाता है कि गेहूं के ज्वारे में अनेक प्रकार के विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। जिसमें विटामिन बी-12, कई खनिज लवण, सेलिनियम और अधिकतर अमीनो अम्ल पाए जाते हैं।





गेहूं के ज्वारे में पाया जाने वाले एंजाइम्स शरीर को हानिकारक जहरीले पदार्थो से मुक्त करता है। इसलिए इसे अमृत का दर्जा भी दिया जाता है। गेहूं के ज्वारे की उपयोगिता को अमेरिका, यूरोप, एशिया और भारत के  लोग तेजी से अपना रहे हैं और इसका लगातार नियमित रूप से सेवन कर फायदा उठा रहे हैं।



विभिन्न बीमारियों से लड़ने के लिए प्रकृति ने हमें कई अनमोल चीजे दी हैं। उन्हीं में से एक है गेहूं का जवारा - wheat grass. औषधीय गुणों की प्रचुरता को देखते हुए आहार विशेषज्ञों ने इसे भी प्रकृति की संजीवनी बूटी कहा है।



गेंहू का ज्वारा खाने की विधि




गेहूं का जवारा, पाउडर, रस और कैप्सूल के रूप में मिलता हैं। इसके अलावा इसके स्वस्थ लाभ लेने का सबसे अच्छा तरीका है  कि घर पर गेहूं का जवारा पैदा कर के इसका  उपयोग कर सकते हैं । गेहूं के जवारे का रस पीने के अतिरिक्त, आप अपनी मनपसंद हरी सब्जी के साथ भी मिलाकर जूस बना कर पी सकते हैं।


Weatgrass in hindi


गेहूं के जवारे के रस को सलाद, चाय या अन्य पेय पदार्थों में भी मिलाकर सेवन कर सकते हैं।



Wheat grass juice in hindi
 Genhu ke jaware ka ras


गेहूं के जवारे का रस पीने का तारीका - wheat grass juice in hindi




गेंहू के जवारे का रस पीने की एक विशेष पद्धति है। रस को एक साथ एक ही बार में तेजी से ना पियें, बल्कि एक-एक घूंट करके पीना चाहिए। ऐसा करने से रस में लार का मिश्रण मिक्स हो जाता है, जिस कारण यह पचकर शरीर में अच्छे से पहुंच जाता है।



जिन लोगों को ज्वारों का रस पीना बिल्कुल अच्छा ना लगता हो अथवा स्वादिष्ट न लगता हो या पीने से उबकाई आती हो वह लोग जवारे के रस में अंगूर या मौसम्मी का थोड़ा जूस मिला लेवें । लेकिन स्वाद के लिए जवारे के रस में नमक, काली मिर्च या अन्य कोई भी मसाले न मिलाएं।



इसका सेवन करने का एक तरीका यह है कि, गेंहू के जवारे को चबाकर खाया जाए । गेंहू के जवारे को चबाकर खाने से उसमें मुंह की लार मिली होती है। इससे उनके पाचन की प्रक्रिया मुंह से ही प्रारंभ हो जाती है। जवारे चबा लेने के बाद बचे हुए रेशों को थूक दें। फिर भी यदि रेशों के कुछ टुकड़े पेट में चले जाते हैं तो उनसे लाभ ही होता है। जवारे के रेशे कब्ज को रोकते हैं और उसे दूर करते हैं। साथ ही जवारे को चबाकर खाने से दांतों कि कसरत हो जाती है, इससे दांत स्वच्छ और मजबूत बनते हैं, इसके अलावा जवारे में उपस्थित क्लोरोफिल दांतों की सड़न को दूर करता है।



Wheat grass in hindi



गेंहू के जवारा का रस पीने के एक घंटे बाद तक कोई भी आहार का सेवन न करें। ज्वारे के रस में फलों और सब्जियों के रस जैसे सेव,अन्नानास आदि के रस के साथ मिलकर पिया जा सकता है। इसमें कभी भी खट्टे फलों के रस जैसे नींबू, संतरा आदि के रस में न मिलाएं, क्योंकि यह ज्वारे के रस में उपस्थित एंजाइम्स को नष्ट कर देती है।


गेहूं के जवारे का रस कब पीना चाहिए



आमतौर से इसका सेवन किसी भी समय कर सकते हैं। लेकिन, अधिकतर लोग इसका सेवन सुबह के समय  करते हैं। खाना खाने से पहले भी इसका सेवन किया जा सकता हैं, इससे  शरीर को जरुरी पोषक तत्व की पूर्ति होती है और व्यक्ति स्वस्थ महसूस करता है ।


गेंहू के ज्वारे के गुण फायदे- wheat grass in Hindi



1. गेहूं के जवारा में शुद्ध रक्त बनाने की ताकत होती है, इस लिए  ज्वारा के रस को`ग्रीन ब्लड′ कहा जाता है। इसे ग्रीन ब्लड कहने की एक वजह यह भी है कि गेहूं के ज्वारे के रस और मानव रक्त, दोनों का पी.एच. फैक्टर 7.4 ही है, जिसके कारण इसके रस का सेवन करने से इसका रक्त में अवशोषण शीघ्र हो जाता है।



2. गेहूं के ज्वारे रक्त व रक्तसंचार संबंधी रोगों, रक्त की कमी, शुुगर, कैंसर, त्वचा रोग, मोटापा, किडनी और पेट संबंधी रोग के उपचार में फायदेमंद हैं।



3. गेहूं के ज्वारे की तासीर क्षारीय होती हैं, जो अल्सर, कब्ज और दस्त से राहत प्रदान करता है। यह एग्जिमा, सर्दी-खांसी और दमा रोग में फायदे मंद हैं। साथ ही यह मलेरिया में भी फायदा करता है। डेंगू के बुखार में प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाने में सहायता  करता है।



4. रोगी के अलावा स्वस्थ्य व्यक्ति भी इसका सेवन कर सकता है। ज्वारे का रस पाचन क्रिया को उत्प्रेरित करता है। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, शरीर से हनिकराक पदार्थ बाहर निकालकर शरीर को शक्ति प्रदान करता है ।



5. गेहूं के ज्वारे को कच्चा चबाने से गले की खराश और मुंह की बदबू दूर होती है। इसके रस के गरारे करने से दांत और मसूड़ों के संक्रमण में फायदा मिलता है। स्किन पर ज्वारे का रस लगाने से त्वचा में चमक पैदा होती है।






व्हीट ग्रास के औषधीय फायदे - wheat grass benefits in hindi




अगर किसी का जी मचलाता हो तो ज्‍वारे के रस का एक घूंट पीने से राहत मिलती है । ज्‍वारे का जूस कब्‍ज में भी फायदा करता है ।



1. व्हीटग्रास जूस के फायदे त्वचा में - wheatgrass juice benefits in hindi




गेहूं के ज्‍वारे में एंटीएजिंग गुण पाए जाते हैं । इसका नियमित रूप से सेवन करने से चेहरे पर झुर्रियां नहीं पड़ती, ये त्‍वचा को साफ और चमकदार बनाए रखता है । इसे पीने से त्‍वचा से संबंधित समस्या नहीं होती है ।  इसमें क्‍लोरोफिल पाया जाता है जो त्‍वचा पर बुढ़ापे का असर नहीं पड़ने देता । 



गेंहू के ज्वारे का रस
wheat grass juice



चहरे पर चमक लाने के लिए गेंहू का जवारा फायदे करता है इसके लिए एक चम्मच गेहूं के जवारे का पाउडर थोड़े गुलाब जल के साथ मिला कर पेस्ट बना लेवें और चेहरे पर लगालें। फिर  थोड़े टाइम के बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लेवें ।



2. रक्त को शुद्ध करने में ज्वारे के फायदे - wheat grass benefits in hindi




गेंहू के ज्वारे का रस हमारे शरीर में खून में उपस्थित लाल रक्‍त कोशिकाओं में वृद्धि करता है । इसे पीने से हमारे शरीर में ब्‍लड प्रेशर नियंत्रित रहता है । इसे पीने से हार्ट अटैक होने की संभावना काफी कम हो जाती है । गेहूं के ज्‍वारे का रस पीने से पेट एकदम दुरुस्‍त रहता है । गैस व एसिड, अपच, पेट दर्द की समस्‍या नहीं होती है ।



गेहूं का जवारा चूर्ण में पाए जाने वाला तत्व क्लोरोफिल,  शरीर में हीमोग्लोबिन को बढ़ाता है। इसलिए, यह एनीमिया रोग को भी ठीक करने में सहायता करता है।



3. हड्डियों के दर्द में गेंहू के ज्वारे के फायदे - wheat grass benefits in hindi




गेंहू के जवारा में उपस्थित मिनरल्‍स मानव शरीर को अंदर से मजबूत बनाता हैं । यह हड्डियों को मजबूत करता हैं । इसके रस में कपड़ा भिहोकर दर्द वाली जगह पर बांधने से भी आराम मिलता है । उम्र बढ़ने पर जोड़ों के दर्द की समस्या नहीं रहती है, अगर जवानी से ही ज्‍वारे के रस से उपचार करना शुरू कर देना चाहिए । प्रतिदिन आधा गिलास ज्वारे का  रस का सेवन शरीर को स्वस्थ बनाए रखता है।



4. बाल झड़ने की समस्या में गेंहू जवारे के फायदे - wheat grass in hindi




बालों की सभी समस्‍याओं का रामबाण उपचार है ज्‍वारे का रस, ज्वारे के रस को रूई में भिगो कर बालों पर लगाएं, फिर अच्छी तरह से मसाज करें और फिर बालों को आधे घंटे पश्चात धो लें । इससे बालों में रूसी, रूखापन, झड़ने-गिरने की समस्या नहीं होती है । बाल जड़ से मजबूत और घने और काले हो जायेगें ।



अगर बाल गिरने की समस्या हो तो गेहूं के जवारे का पाउडर रातभर को भिगो कर रख दें और सुबह के समय उसे छान कर अपने बाल धो लेवें। ऐसा करने से झड़ते बाल ठीक हो।



5. गेंहू के जवारे में एंटीसेप्टिक गुण होता है




इसमें उपस्थित एंटीसेप्टिक गुण के कारण, गेहूं के जावरे का चूर्ण  घाव, कीड़े के काटने, त्वचा पर चकत्ते, और खरोंच को ठीक करने में सहायता करता है।




गेंहू के ज्वारे के अन्य फायदे - wheatgrass juice benefits in hindi



  • गेहूं का जवारा मुँहासों को ठीक करने में सहायता करता हैं।


  • गेहूं के ज्वारे से डायबिटीज की पहले स्तर या उन्नत स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है।


  • शराब पीने के बाद होने वाले हैंग ओवर का भी गेहूं के जवारे से नियंत्रित किया जा सकता है।


  • इसमें बायोफालावोनॉयड होता है, जिसे एपिगेनिन कहा जाता है जो कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकता है।


  • गेहूं के ज्वारे के पाउडर को नियमित रूप से खाने से पुरुषों और महिलाओं दोनों के ही प्रजनन तंंत्र को स्ववस्थ रखता है, गेंहू के जवारे में प्रचुर मात्रा में फाइबर होता है जिसके कारण मोटापा अथवा शरीर का वज़न कम करने में सहायता मिलती है।


  • कब्ज़ से पीड़ित व्यक्ति अगर गेहूं के जवारे के रस का उपयोग करें तो उनका पेट साफ करने में सहायता मिलती है।


  • अगर किसी को जी मचलाने या उबकाई आने की समस्या है तो गेहूं के जवारे का जूस पीने से इस रोग से निजात मिलती है ।


  • गेहूं के जवारे का सेवन प्रतिदिन लगातार करने से बुढ़ापा दूर रहता है और व्यक्ति जवान बना रहता है ।

  • गेहूं का जवारा शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाता है और हार्ट अटैक से रक्षा करता है।


  • गेहूं का ज्वारा शरीर के पी एच लेवल को नियंत्रित करता है तथा एसिडिटी की समस्या से आराम दिलाता है।


  • गेहूं के जवारे का सेवन करने से बुद्धि तेज़ होती है, और तनाव कम होता है।




गेंहू का जवारा घर पर उगाने की विधि




गेहूं के बीज को जब मिट्टी में बोया जाता है, तो कुछ ही दिनों में वह अंकुरित होकर बढ़ने लगता है और उसमें पत्तियां विकसित होने लगती हैं। जब यह पौधा पांच-छह पत्तियों का हो जाता है, तो यह गेहूं का जवारा कहलाता है। 


  • रात के समय लगभग 100 ग्राम गेहूँ के दाने एक बर्तन में भिगो कर छोड़ दें ।


  • पहले से ही 7 गमले तैयार कर लेवें इसके लिए एक गमले में मिट्टी की दो इंच मोटी परत बिछा दें और थोड़ा सा पानी छिड़क दें। 


  • मिटटी और खाद को अच्छी तरह मिला कर गमले के छेद को बंद करके इसमें खाद भर दें । इनमे कभी भी रासायनिक खाद या कीट नाशक दवाओं का प्रयोग न करें ।


  • पहचान के लिए सातों गमलो पर एक से सात तक नंबर डाल दें।


  • अगले दिन गेहूं के दानों को धोकर साफ़ कर पहले गमले में गेहूँ को परत के रूप में बिछा दें और ऊपर से थोड़ी मिट्टी डाल दें और पानी का छिड़काव के दें।


  • गमले को किसी छायादार स्थान पर जहां भरपूर हवा और सूर्य की रोशनी आती हो, पर सूर्य की किरणे सीधी गमलों पर न पड़े।


  • अगले दिन दूसरे नम्बर के गमले में गेहूं बो दीजिये और इस तरह रोज अगले नंबर के गमले में गेहूँ बोते रहें। 


  • शुरूआत के दो-तीन दिन गमलों को गीले अखबार से ढक कर रखें और गमलों में प्रतेक दिन स्प्रे बोटल से दिन में दो बार पानी का छिड़काव करें जिससे मिट्टी में आवश्यक नमी बनी रहे।


  • जब गैहूँ के ज्वारे डेढ़ इंच साइज तक के हो जाये तो एक बार ही पानी देना प्रयाप्त है ।  कि गर्मी के सीजन में आवश्यक नमी बनी रहे और पानी की अधिकता भी न हो।


  • सात दिन बाद जब पौधे में 5-6 पत्तियां निकाल आएं और जवारा  7-8 इन्च लम्बा हो जाये तब इन को उखाड़ कर और इनकी जड़े काट कर पानी से अच्छी तरह धो कर पीस ले और इसका रस निकाल ले व इसका सेवन करे।


  • लंबे समय तक ज्वारा प्राप्त करने के लिए जैसे-जैसे गमले खाली होते जाये वैसे वैसे खाद मिटटी बदल कर नए बीज बोते जाएं ।


  • जब तक गंहु के ज्वारा की आवश्यकता हो तब तक इस प्रक्रिया को दोहराते रहे। इस तरह जवारा घर में ही पूरे वर्ष भर उगाया जा सकता है।





गेहूं के जवारे का रस बनाने की विधि - whealt grass juice kaise banaye




ताजे कटे हुए गेहूं के जवारा को पानी से धोकर उन्हें सिल या मिक्सी में पीस लें। इसके बाद एक साफ़ बारीक सूती कपड़े में रखकर उसे दबाकर रस निकाल लें । कपड़े की जगह जालीदार बारीक छलनी का भी प्रयोग कर सकते है। गेंहू के जवारे को पीसते समय थोड़ा पानी मिलाने से रस सरलता से निकलता है। 


मिक्सी में डालकर भी ज्वारा को पीसा जा सकता है। अधिक मात्रा में रस निकालने के लिए मिक्सर अधिक उपयुक्त होता है।



गेंहू का जवारा



गेंहू के जवारे का रस पीने में सावधानियां 



1. आरंभ में अगर रस पीने से परेशानी हो तो इसका सेवन कम मात्रा में करें फिर धीरे धीरे मात्रा बढ़ाते जाए ।



2. ज्वारे के ताजे रस का सेवन सामान्यतः 60-120 एमएल प्रति दिन खाली पेट करना चाहिये।



3. यदि आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो 30-60 मिली ली. ज्वारे का रस दिन मे तीन चार बार तक लिया जा सकता हैं।



4. रस निकालकर तुरंत ही इसका सेवन कर लेना चाहिए। तीन घण्टे बाद जवारे के रस के पोषक तत्व समाप्त होने लगते हैं।



5. ज्वारे के रस में अदरक अथवा खाने वाला पान मिला कर सेवन कर सकते हैं इससे उसके स्वाद तथा गुण में वृद्धि होती है।



6. इसे गिलोय, लोकी, नीम के पत्ते व तुलसी के पत्तों के रस के साथ भी मिल कर पिया जा सकता है।



7. रस लेने के पहले व बाद में एक घण्टे तक कोई अन्य आहार का सेवन न करें ।



8. रस को धीरे-धीरे घूंट घूंट करके बैठ कर पीना चाहिए और सादा भोजन ही लेना चाहिए तथा तली भूनी हुई वस्तुओं का सेवन न करें।



9. कुछ लोगों को शुरु में इसका प्रयोग करने से उल्टी-दस्त हो सकते है । ऐसा तभी होता है जब व्यक्ति रोगी होता है । सर्दीं, उल्टी या दस्त होने से ऐसा माना जाता है कि शरीर से दूषित एकत्रित मल बाहर निकल रहा है, इसमें चिंता की कोई आवश्यकता नहीं है।



10. खटाई, चटनी आदि ज्वारे के रस में मौजूद एंजाइम्स को निष्क्रिय कर देती है। इसमें नमक, चीनी आदि भी नहीं मिलाना चाहिये।



गेंहू के जावरे के नुकसान - wheatgrass side effects in hindi




1. गेंहू का जवारा अधिक सेवन करने से सिर-दर्द एवं उल्टी होने की समस्या हो सकती है।



2. जवारा का सेवन शुरुआत में थोड़ी ही मात्रा में करें। क्योंकि यदि शरीर इसे तरीके से नहीं पचा सका तो डायरिया की समस्या हो सकती है। इसकी खुराक की मात्रा को धीरे धीरे बड़ाया जा सकता हैं।



3. इससे एलर्जी होने की संभावना भी हो सकती है। इसका एलर्जिक होना आम बात हैं, सूजा हुआ मुंह या गला। ऐसे लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें ।



4. इस लेख में गेंहू के ज्वारे - wheat grass in hindi का वर्णन किया गया है । इसका मूल उद्देश्य लोगो को आयुर्वेद के प्रति जागरूक करना है, किसी रोग में इसका सेवन करने से पूर्व किसी चिकित्सक की सलाह अवश्य लेवें । किसी भी जड़ी बूटी कि अधिकता नुक़सान दायक हो सकती है ।


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Saturday, June 27, 2020

यह विटामिन्स बढ़ा सकते हैं इम्यूनिटी- Immunity in hindi

Immunity booster vitamins in hindi



विटामिन इंसान के इम्यून सिस्टम को मजबूत कर सकते हैं । इन विटामिन्स को डईट में शामिल करने से कई प्रकार के रोगों से बचा जा सकता है ।


भारत में कोरोना वायरस के रोगियों की संख्या बहुत तेजी से बढ़ी है । अब तक लाखो मामले सामने आ चुके हैं. जबकि पूरी दुनिया में कई कई लाख से भी ज्यादा लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं। हेल्थ एक्सपर्ट्स का कहना है कि कमजोर इम्यूनिटी वाले लोग इस वायरस से तेजी से ग्रसित होते हैं । हेल्थ एक्सपर्ट के अनुसार कुछ प्रकार के विटामिन इंसान के इम्यून सिस्टम को मजबूत कर सकते हैं । इन विटामिन्स को डईट में शामिल करने से कई प्रकार के रोगों से बचा जा सकता है ।


रोग प्रतिरोधक छमता


इन महत्वपूर्ण विटामिनों और खनिजों के बारे में आप लोगो को अवगत कराते हैं जिनका उपयोग कर संक्रमण से बचा जा सकता हैं। यह प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने व और संक्रमण से लड़ने के लिए शक्ति प्रदान करते हैं । जबकि कि विटामिन और खनिज पदार्थ आपको तुरंत वायरस से नहीं लड़ते हैं, लेकिन इनके सेवन से आपके पूरे स्वास्थ्य के लिए अत्यंत फायदेमंद है।  



1. विटामिन ' डी ' :



'विटामिन 'डी' जो अंडे, मछली, चिकन और कॉड लिवर ऑयल में प्रचुर मात्रा में पाया जाता है, विटामिन्स की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह जब भी रोगज़नक़ के संपर्क में आते है, तो यह प्रतिरक्षा प्रणाली की सक्रियता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं । इसलिए समय समय पर विटामिन डी के स्तर की जांच करना और जरूरत के अनुसार सही विटामिन्स लेना बहुत जरूरी है । 



विटामिन्स डी का सबसे अच्छा स्रोत यह है कि जब आप सूर्य की धूप के संपर्क में आते हैं तो आपके शरीर में मौजूद कोलेस्ट्रॉल से विटामिन डी - vitamins D in hindi के उत्पादन के लिए यू. वी. किरणें शरीर को प्रेरित करती हैं। सप्ताह में दो बार धूप की मात्रा लगभग पाँच से 20 मिनट तक लेनी होती है।






2. विटामिन 'सी'



विटामिन 'सी'- vitamins C in hindi का उपयोग करना हमारे शरीर के लिए बहुत ही फायदेमंद है। विटामिन सी के प्रतिदिन सेवन करने से हमारे शरीर को रोगों से लड़ने में सहायता करता है। विटामिन सी चहरे की झुर्रियों को ठीक करने में सहायता करता है। विटामिन सी हमारे शरीर की छोटी कोशिकाओं को आपस में बांध कर रखता है।



विटामिन सी वह गुण होता है जो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करता है। इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि विटामिन सी से भरपूर खाद्य पदार्थ जैसे आंवला, नींबू, कीवी, संतरे, अंगूर, टमाटर आदि का सेवन किया जाए हैं, “विटामिन सी, जिसे एस्कॉर्बिक एसिड के नाम से भी जाना जाता है ।  यह  प्रतिरक्षा प्रणाली बूस्ट करने का काम करता है ।



3. विटामिन 'ई':




विटामिन 'ई' एक शक्तिशाली एंटीऑक्सिडेंट के रूप में जाना जाता है जो शरीर को संक्रमण से लड़ने में शक्ति प्रदान करता है। बादाम, मूंगफली और सूरजमुखी के बीज विटामिन ई के अच्छे स्रोत हैं। सोयाबीन, जैतून, तिल के तेल, पालक, ऐलोवेरा, शतावरी के अतिरिक्त अनेक चीजों में वि‍टामिन-ई की मात्रा होती है। विटामिन ई होने वाले नुकसान से मनुष्य की कोशिकाओं की रक्षा करता है ।






अनेक तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को कम करने में सहायता करता है जिसमें कैंसर व दिल की बीमारी और भूलने की बीमारी जैसी अनेक बीमारियाँ आती है | विटामिन ई - vitamin E in hindi के अन्य बहत से फ़ायदे हैं । सेल संरक्षण के अतिरिक्त विटामिन ई प्रतिरक्षा प्रणाली की मजबूती के लिए महत्वपूर्ण है। विटामिन ई आंखों की रोशनी की लंबे समय तक रक्षा करता है ।


4. मैग्नीशियम और जस्ता



मैग्नीशियम और जस्ता ऐसे खनिज पदार्थ हैं जो हमारे शरीर में एंजाइम की सक्रियता को नियंत्रित करने में विशेष भूमिका निभाते हैं । चिकित्सक के अनुसार मैग्नीशियम विटामिन डी को क्रियाशीलता बढ़ाने में सहायता करता है और जस्ता हमारे शरीर की रक्षा करने में उत्प्रेरक का काम करता है और प्रतिरक्षा के नुक़सान के प्रति प्रति क्रियाशील रहता है। चॉकलेट में मैग्नीशियम की प्रचुर मात्रा होती है इससे व्यक्ति को गुड फीलिंग्स होती है।


5. सेलेनियम: 



सेलेनियम का प्रतिरक्षा प्रणाली immune system पर एक असरकारक प्रभाव है, जिसमें मानव शरीर में कैंसर के कुछ खतरनाक अति-सक्रिय रोगजनक को धीमा करने की क्षमता होती है, इसके लिए आप लहसुन, ब्रोकली, सार्डिन, और जौ को अपने खानपान में शामिल कर सकते हैं।

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Wednesday, May 13, 2020

Immunity means in hindi प्रतिरक्षा प्रणाली क्या है

प्रतिरक्षा प्रणाली क्या है 


प्रतिरक्षा प्रणाली क्या है Immunity means in hindi । जीव के अंदर होने वाली वह जैविक क्रियायें है, जो रोग उत्तपन्न करने वाली कोशिकाओं को पहचान कर और फिर मार कर जीव की रोगों से रक्षा करती है। इसमें विषाणु से और परजीवी कृमियों जैसे अनेक प्रकार के एजेंट की पहचान करने की छमता होती है । व्यक्ति की रोगों से लडने की छमता अर्थात रोग प्रतिरोधक छमता को ही immunity कहा जाता है ।


Immunity in hindi




कोरोना के प्रकोप से दुनिया में पूरी मनुष्य जाति पीड़ित है। ऐसे में शरीर की प्राकृतिक प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करना और अच्छा स्वास्थ्य बनाए रखना अत्यंत महत्वपूर्ण है। बदलते मौसम में या आमतौर तौर पर बार-बार किसी संक्रमण की चपेट में आना रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने का संकेत हो सकता है ।



immunity means in hindi इम्यूनिटी शरीर में मौजूद विषैले वायरस व जीवाणु से लड़ने की क्षमता होती है। शरीर के आसपास बहुत सारे बैक्टीरिया और वायरस उपस्थित होते हैं, जो कई तरह की बीमारियों का कारण हो सकते हैं इनसे लडने की छमता ही इम्यूनिटी है ।



बीमारियों से दूर रहने के लिए इम्यूनिटी सिस्टम का मजबूत होना  आवश्यक है। अगर इम्यूनिटी मजबूत होगी तो आप बदलते मौसम में होने वाली सर्दी, खांसी जैसी समस्या व हेपेटाइटिस, फेफड़े के संक्रमण, किडनी के संक्रमण जैसी अनेक गंभीर बीमारियों से भी बचे रह सकते हैं। 



हम सभी जानते हैं कि कोरोना रोग की रोकथाम करना इलाज करने से बेहतर है । क्योंकि अब तक कोविड -19  के रोग के इलाज के लिए लिए कोई दवा नहीं है । ऐसे समय में  उपाय  करना  अच्छा  रहेगा जिससे  हमारी  रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ेगी। जिस व्यक्ति की इम्यूनिटी अच्छी होगी उस व्यक्ति को कोरोना का इंफेक्शन होने के बाद भी वह स्वस्थ हो जाएगा ।




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कोरोना वायरस की महामारी के बढ़ते संक्रमण को दृष्टिगत रखते हुए देश के नागरिकों से कुछ सावधानियां रखने के लिए कहा था। उन्होंने कहा कि सभी देशवासी रोग प्रतिरोधक क्षमता Immunity in hindi बढ़ाने के लिए आयुष मंत्रालय के द्वारा बताए गए उपायों को अपनाएं।




आपको आयुष मंत्रालय द्वारा जारी किए गए टिप्स  बताते है । जिनसे रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायता मिलती है ।




31 मार्च 2020 को आयुष मंत्रालय भारत सरकार द्वारा घरेलू नुस्खों से संबंधित एक एडवाइजरी जारी की गई थी। जारी की गई एडवाइजरी में निम्नलिखित बातें शामिल की गई थी ।



1.प्रतिरक्षा प्रणाली कैसे मजबूत करें how to improve immune system in hindi



1.1.  दिन में गर्म पानी का सेवन करें ।




1.2. हर दिन योगा अभ्यास करें। कम से कम तीस मिनट तक प्राणायाम और योगा अवश्य करें ।




1.3. खाना में रोजाना हल्दी, जीरा, धनिया और लहसुन जैसे मसालों का प्रयोग करें।




1.4. हर रोज एक चम्मच च्यवनप्राश का सेवन करें। डायबिटीज के रोगी शुगरफ्री ज्यवनप्राश का सेवन कर सकते है ।




1.5. तुलसी, दालचीनी, काली मिर्च, सौंठ और मुनक्का का काढ़ा बनाकर सुबह शाम सेवन करें । इसमें आवश्यकता अनुसार गुड़ अथवा नीबू का रस मिलाया जा सकता हैं।




1.6. दूध में हल्दी मिलाकर  पिएं। एक ग्लास गर्म दूध में आधा चम्मच हल्दी मिलाए। ऐसा दूध दिन में एक से दो बार पी सकते हैं।




2. प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत करने के घरेलू उपाय - how to improve immunity in 




  • नारियल का तेल या घी को दोनों नाक के छिद्रों में दिन में एक या दो बार सुबह या शाम को प्रयोग करें । इससे प्रतिरक्षा तंत्र मजबूत होता है ।



  • एक चम्मच तिल का तेल अथवा नारियल तेल को मुंह में भरकर दो-तीन मिनट तक मुंह में ही घुमाते रहें इसके बाद कुल्ला कर दें। इसके उपरांत गर्म पानी से कुल्ला करें। इस प्रक्रिया को दिन में एक से दो बार करें।




  • सूखी खांसी/ गले में खराश होने पर पुदीने के ताजे पत्तों या अजवाईन  के  साथ  दिन  में  एक बारभाप लिया जा सकता है।




  • खांसी या गले में जलन होने पर लौंग पाउडर को गुड़ अथवा शहद के  साथ  मिलाकर  दिन  में  2  से  3  बार सेवन किया जा सकता है। यह उपाय सामान्यता साधारण सूखी खांसी और गले में खराश को ठीक करता हैं। अगर ये लक्षण  बने रहते हैं तो डॉक्‍टर से परामर्श लेना आवश्यक है ।

Immunity means in hindi



3. कमजाेर इम्यूनिटी के लक्षण immune system weak



1. बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम होना ।


2. हर समय सुस्ती का अहसास होना।


3. बीमार होने पर जल्दी ठीक न होना।


4. थोड़ा सा काम करने पर थक जाना।


Immunity system in hindi



रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के उपाय Immunity means in hindi




1. स्वस्थ जीवनचर्या का पालन करें



अपनी लाइफस्टाइल और खानपान में थोड़ा बहुत बदलाव कर आप खुद को स्वस्थ रखने के साथ-साथ अपनी रोग प्रतिरोधक छमता को भी सुधार सकते हैं। नियमित व्यायाम और खानपान में ध्यान रखने  के साथ अपने भोजन में उन चीजों को शामिल करना आवश्यक है, जो आपके शरीर को शक्ति प्रदान करने के साथ-साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक हो ।



2. सुबह का नाश्ता अवश्य करें



आम तौर पर बहुत से लोग सुबह के नाश्ते पर ध्यान नहीं देते है। इसका असर स्वास्थ्य के साथ साथ उनकी इम्यूनिटी पर भी पड़ता है। अगर आप अपनी इम्यूनिटी को दुरुस्त करना चाहते हैं, तो आप सुबह का नाश्ता करना अपनी आदत में डाल लेवें । सुबह के नाश्ता प्रोटीन से भरपूर व पॉस्टिक होना चाहिए। इसके लिए आप उबले हुए अंडे, मौसम के ताजे फल, ड्राय फ्रूट, अंकुरित अनाज के साथ जूस या लस्सी का सेवन कर सकते हैं। जब आपके दिन की शुरुआत पौष्टिक नाश्ते से होती है, तो इससे आपके शरीर और को पोषण मिलने के साथ रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।



3. अपने आप को एक्टिव रखने का प्रयास करें



अच्छी इम्यूनिटी के लिए एक्टिव रहना बहुत आवश्यक है।  निष्क्रिय रहने से आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक छमता को कम होती है । इससे लिए नियमित व्यायाम अवश्य करें । जब आप व्यायाम करते हैं, तो आपका स्टेमिना बढ़ता है। व्यायाम में योग को भी शामिल कर सकते हैं ।



4. अच्छी नींद है जरूरी



स्वस्थ रहने के लिए भरपूर नींद लेना अत्यंत आवश्यक है। विशेषज्ञों के अनुसार स्वास्थ्य रहने के लिए आठ घंटे की  नींद आवश्यक है। नींद पूरी न होने के कारण  से कई तरह की मानसिक और शारीरिक समस्याएं जन्म लेती हैं। अगर आप खुद को स्वस्थ रखने के साथ अपनी इम्यूनिटी को अच्छा करना चाहते हैं, तो इसके लिए यह अत्यंत आवश्यक है कि आप खुद को बेमतलब के तनाव से दूर रखें और गहरी नींद लें।



5. नशे से परहेज करें



नशे से दूरी बनाकर रखना सेहतमंद रहने का फार्मूला है। अगर नशे के आदी है तो इसकी लत को धीरे धीरे कम करके इसे छोड़ने का प्रयास करें। क्योंकि ये आपकी रोग प्रतिरोधक क्षमता को अत्यधिक प्रभावित करता है।




इम्यून सिस्टम मजबूत के लिए किस आहार का सेवन करें- immune system in hindi





1. इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए टमाटर को अपने आहार में अवश्य शामिल करें। इसमें उपस्थित लाइकोपीन नामक तत्व एंटी ऑक्सिडेंट होता है, यह आपके दिमाग की स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। इसके अतिरिक्त टमाटर में विटामिन के, विटामिन सी और फाइबर की प्रचुर मात्रा होती है, जो इम्यूनिटी बढ़ाने में सहायक होते हैं।




2.  सिट्रस फल यानी संतरा, नीबू, आंवला, मौसमी जैसे  फलों में विटामिन सी की प्रचुर मात्रा होती है, जो हर तरह के संक्रमण से लड़ने में सायक होते है ।  इन सारी चीजों को अपने आहार में नियमित रूप से शामिल किया जाना चाहिए।




3. लहसुन में ऐसा गुण होता है जो भरपूर मात्रा में एंटी ऑक्सिडेंट बनाकर हमारे शरीर की इम्यूनिटी को बीमारियों से लड़ने की शक्ति देता है। लहसुन में एलिसिन नामक ऐसा तत्व पाया जाता है, जो शरीर को किसी भी प्रकार के संक्रमण और बैक्टीरिया से लड़ने की शक्ति देता है। प्रतिदिन लहसुन की सीमित मात्रा में आहार में शामिल करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ने में सहायता करता है । प्रतिदिन सुबह लहसुन की दो कलियों का सेवन करने से ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रहता है और इम्यून सिस्टम immune system भी मजबूत रहता है। 




5. मशरूम शरीर की श्वेत रक्त कोशिकाओं को सक्रिय करने में सहायक होता है। इसमें सेलेनियम नामक तत्व मिनरल, एंटी ऑक्सिडेंट, विटामिन बी, नाइसिन आदि पाये जाते हैं। इनके अलावा मशरूम में ऐसे तत्व पाए जाते हैं जो एंटी वायरल, एंटी बैक्टीरियल और एंटी ट्यूमर होते हैं । मशरूम शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बनाए रखने में सहायक होता है ।




6.  बादाम के पांच से छे गिरी प्रतिदिन भिगो कर खाने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता तो बढ़ती ही है, और साथ में इसके सेवन से दिमाग को तनाव से लड़ने की ताकत भी मिलती है।




7. मौसमी फलों और सब्जियों को अपने भोजन में अवश्य शामिल करें। यह इम्यूनसिस्टम को मजबूत करने और इम्यूनिटी को बढ़ाने में सहायक है । इस लिए सब्जियों और फलों का सेवन करने के साथ-साथ भरपूर मात्रा में पानी पिएं।



इस लेख में प्रतिरक्षा प्रणाली किया है Immunity means in hindi, प्रतिरक्षा प्रणाली कैसे विकसित करें immune system how to improve in hindi, एवम् इम्मु्यूनिटी कमजोर होने के कारण एवम् लक्षण का वर्णन किया गया है । आशा करते हैं यह लेख आप को अवश्य पसंद आया होगा ।

धन्यवाद ।



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Friday, April 03, 2020

कब्ज के रोग में इसबगोल का उपयोग कैसे करें (how to use isabgol for constipation in hindi)

कब्ज के रोग में इसबगोल का उपयोग कैसे करें - how to use isabgol for constipation  in hindi




यहां आप को इसबगोल की भूसी का उपयोग - uses of isabgol in hindi के बारे में बताने जा रहे हैं । इसबगोल की भूसी का सामान्यता प्रयोग किया जाता है जो कि प्लांटैगो ओवेटा के बीज से प्राप्त होती है । इस पौधे के पत्ते लंबे और संकरे होते हैं और इसमें लगभग 70 प्रतिशत घुलनशील फाइबर और 30 प्रतिशत अघुलनशील फाइबर पाए जाते  हैं ।




इसबगोल का पौधा एशिया, भूमध्य सागरीय क्षेत्र और उत्तरी अफ्रीका में मूल रूप से पाए जाते है । यह वजन घटाने के लिए एक उत्तम औषधि के रूप में जाना जाता है, यह पाचनतंत्र से विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालने में मदद करता है, इसबगोल की भूसी के फायदे की सूची, स्वास्थ्य लाभ में बहुत लंबी है।


isabgole ki bhusi
Isabgol ki bhusi

इसबगोल को विभिन्न नामों से जाना जाता है । इसबगोल को इंग्लिश में spogel seeds  के नाम से जाना जाता है ।




संस्कृत - अश्व कर्ण



हिंदी।   - इसबगोल



गुजराती - जीरू



मरांठी।  - इसंबगोंल



पंजाबी  - इसपगोल



फारसी। - अस्पगोल



तेलगु - हस्पगोल




इसबगोल के फायदे ( isabgol ke fayde)




जिन लोगों को कब्ज या पेट की समस्या, खराब पाचन जैसी समस्या रहतीं हैं, उनके लिए इसबगोल एक आसान, प्राकृतिक उपाय है। इसबगोल की तासीर ठंडी होती है, इसे कब्ज़, पेचिश और आँत के रोगों के लिए बहुत अच्छा माना जाता है।इसबगोल पेट की आँतों में फंसे मल को निकाल कर पेट साफ़ करता है।



वैसे तो इसबगोल को पेट साफ़ करने में सबसे उत्तम माना जाता है, पर इसबगोल का उपयोग और भी बहुत हैं ।







इसबगोल की भूसी का उपयोग कैसे करें(how to use isabgol in hindi)





इसबगोल की भूसी को दो-तीन घंटे एक कप पानी में डालकर छोड़ दें। जब यह अच्छी तरह से फूल जाए फिर इसे खूब घोलकर इसमें जरुरत भर चीनी मिला लें। इसके बाद इसका सेवन करें।




1. कब्ज के रोग में इसबगोल का उपयोग कैसे करें  (how to use isabgol for constipation  in hindi)





इसबगोल का उपयोग कब्ज को दूर करने के लिए लंबे समय से एक रेचक के रूप में किया जाता रहा है। इसबगोल में उपस्थित अघुलनशील फाइबर मल को नरम और विस्तारित करने में मदद करता है, जिससे आंत के स्वास्थ्य में सुधार होता है। एक गिलास गर्म दूध में दो चम्मच ईसबगोल मिला कर इसका सेवन कुछ हफ्तों तक रोज रात को सोने से पहले करने से फायदा होता है ।




2. कोलेस्ट्रॉल में इसबगोल की भूसी खाने के फायदे ( isabgol ki bhusi ke fayde)





स्वास्थ्य जानकारों के अनुसार, ईसबगोल के रक्त से कोलेस्ट्रॉल को कम करने में सहायता करता हैं। यह आंतों के अंदुरूनी भाग में एक पतली परत बनाता है,  जो भोजन से कोलेस्ट्रॉल के अवशोषण को रोकता है और कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है।




3. वजन घटाने में इसबगोल के फायदे (isabgol ke fayde in hindi)





ईसबगोल का सेवन करने के बाद आपको लंबे समय तक पेट भरा हुआ महसूस होता है, जिससे और अधी खाने की इच्छा नहीं होती है। इसबगोल की भूसी को पानी और नींबू के रस के साथ मिलाकर सुबह खाली पेट उपयोग करने से वजन कम करने में सहायता मिलती है।




3. दस्त में इसबगोल का उपयोग ( dysentery me isabgol ka upyog)





जब इसबगोल की भूसी का दही के साथ सेवन किया जाता है, तो इसबगोल ढीले मल को टाइट कर राहत दिलाने में एक असरकारक उपाय के रूप में काम करता है। इसबगोल में उपस्थित फाइबर दस्त से पीड़ित रोगी को अच्छी तरह से पतले मल को सख्त करने में मदद करता है।




अमिबिक पेचिस में 100 ग्राम इसबगोल की भूसी में 50 ग्राम सौंफ व 50 ग्राम मिश्री मिलाकर इसकी 2 से 3 चम्मच की मात्रा दिन में दो बार सेवन करने से लाभ होता है ।







4. गॉल ब्लैडर की पथरी में इसबगोल खाने के फायदे ( isabgol khane ke fayde in hindi)




इसबगोल का प्रतिदिन सेवन गॉल ब्लैडर में पथरी बनने से रोकने में सहायता करता है ।साथ ही बवासीर के रोग में मलत्याग करते समय होने वाले असहनीय पीड़ा को भी इसबगोल का सेवन कम करने में असरकारक है।


5. पाचन में इसबगोल खाने के फायदे (digestion me isabgol khane ke fayde in Hindi)





इसबगोल में उपस्थित फाइबर पेट में आंतों के माध्यम से भोजन को पचाने के लिए मार्ग को साफ करके आंत्र संकुचन को नियमित करने में मदद करता है। दो चम्मच ईसबगोल को एक गिलास छाछ में मिलाकर रात को सोने से पहले सेवन कर सकते हैं।




6. दांत दर्द में इसबगोल का उपयोग (isabgol ka upyog in hindi)





इसबगोल की भूसी सिरके में डुबोकर संक्रमित दांत पर लगाने से दांत के दर्द में आराम मिलता है।


Isabgol ki bhusi



7. एसिडिटी में इसबगोल की भूसी खाने के फायदे ( acidity me isabgol ki bhusi khane ke fayde)




यदि आप अम्लता से पीड़ित हैं, तो इसबगोल से नियंत्रित किया जा सकता है। यह आंत में परत बनाकर पेट को  एसिडिटी से बचाता है।




इसबगोल एक प्रभावकारी आयुर्वेदिक औषधि है, जिसे पाचन सम्बन्धी विभिन्न प्रकार के रोगों में बहुत लाभकारी माना जाता है। इसबगोल एक पौधे ‘प्लेंटेगो ओवेटा’ और ‘प्लेंटेगो सीलियम’ के बीजों से प्राप्त होता है। इसके बेहतरीन गुणों के कारण इसबगोल को पेट से जुडी कई तरह की परेशानियों में बहुत कारगर माना जाता है।



8. ब्लड शुगर में इसबगोल का उपयोग  - isabgoli bhusi ka upyog




इसबगोल मधुमेह रोगियों के लिए बहुत ही असर कारक है क्योंकि इसमें जिलेटिन होता है जो शरीर में ग्लूकोज के टूटने और अवशोषण को धीमा करने में सहायता करता है। इस तरह यह शरीर में रक्त शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करने में सहायता करता है।







9. अल्सर में इसबगोल की भूसी का उपयोग (isabgol ki bhusi ka upyog )




इसबगोल का नियमित सेवन करने से यह पेट में बने अल्सर के ऊपर एक सुरक्षित लेयर बना देता है, जिसके कारण तीखा खाना खाने का कोई बुरा असर अल्सर पर नहीं पड़ पाता।




10. पेशाब में जलन की समस्या में इसबगोल की भूसी खाने के फायदे (isabgol ki bhusi khane ke fayde)




अगर आप पेशाब में जलन की समस्या रहती हैं तो एक गिलास पानी में चार चम्मच इसबगोल की भूसी एक चम्मच चीनी के साथ सेवन करने से फायदा होता है।



इस तरह कृतिक औषधि पेट के कई रोगों में रामबाण का काम करती है। विशेष रूप से  आँतों से मल निकालकर पेट हल्का और साफ़ करने में इसबगोल से बेहतरीन कोई उपाय नहीं है।




इसबगोल के नुक़सान :




यह औषधि प्रसूता के लिए नुक़सान दायक है, इसबगोल के बीज को पीसने के लिए मना कर जाता है, क्यों की इससे नुक़सान होने की संभावना रहती है ।




इस लेख में खास तौर में कब्ज के रोग में इसबगोल का उपयोग कैसे करें  (how to use isabgol for constipation  in hindi ) एवम् इसबगोल के फायदे व नुक़सान का वर्णन किया गया है, उम्मीद करते हैं कि यह लेख आप को पसंद आया होगा ।


धन्यवाद ।



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Monday, March 16, 2020

गर्म पानी के फायदे और नुक़सान (garam pani ke fayde aur nuksan)

गर्म पानी के फायदे - garam pani ke fayde



गर्म पानी पीना स्वास्थ्य के लिए लाभ दायक होता है, गरम पानी से तात्पर्य गुनगुने पानी से है जो कि पीने लायक होता है । गर्म पानी पीना अगर आदत में डाल लिया जाए तो सेहत से जुड़ी अनेक समस्यों से छुटकारा पाया जा सकता है ।




गर्म पानी पीने के फायदे( garam pani ke fayde) वजन कम करने में तो है ही लेकिन इसके साथ साथ गर्म पानी पीने के विभिन्न फायदे है गर्म पानी पीना आमतौर पर अच्छा नही लगता है लेकिन इसके अनेक लाभ देखने को मिलते है  ।



garam pani ke fayde,



गुनगुना पानी सर्दी गर्मी बरसात किसी भी मौसम में पिया का सकता है । गुनगुना पानी पीने से पाचन अच्छा रहता है और सॉच की समस्या नहीं होती है, पेट खुलकर साफ होता है । खाना पचाने में भी गर्म पानी के फायदे ( garam pani ke fayde) है । खाना सही नहीं पचेगा तो कब्ज की शिकायत रहेगी । गुनगुना पानी पीने से स्किन व बाल स्वस्थ रहते हैं ।



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गर्म अर्थात गुनगुना पानी पीने से गैस की समस्या नहीं होती है । इससे वजन भी नियंत्रित होता है । सर्दी जुखाम में भी गुनगुना पानी फायदे करता है । अगर आपका वजन लगातार बढ़ रहा है तो आप गर्म पानी में एक चम्मच शहद और नींबू मिलाकर लगातार तीन महीने पीने से आपको फायदा महसूस होगा । अगर आप ऐसा नहीं करना चाहते हैं तो आप खाना खाने के एक घंटे बाद एक ग्लास गुनगुना पानी पीना शुरू कर सकते हैं ।




शरीर से जुड़ी अनेक समस्याओं में गर्म पानी पीने के फायदे ( garam pani pine ke fayde) होते है, विभिन्न रोगों में पानी पीने के तरीके एवम् इसके प्रयोग के बारे वर्णन क्या का रहा है । जो निम्न प्रकार है ।



गर्म पानी कैसे पिये ( garam pani kaise piye)





1. गर्म पानी शरीर में उपस्थित हानिकारक तत्वों को शरीर से पसीने व मूत्र के द्वारा बाहर निकालने में सहायता करता है ।




2.  पेट को स्वस्थ रखने के लिए गर्म पानी पीना अमृत के समान माना जाता है । अगर सुबह उठकर गरम पानी पिया जाए तो कब्ज की समस्या नहीं रहती है और पेट साफ होकर हल्का रहता है । गैस की समस्या व खट्टे डकारों में भी लाभ मिलता है ।



Garam pani peene, garam pani ke fayde




3. एक ग्लास गर्म पानी में एक चम्मच शहद और अधा नींबू निचोड़ कर पीने से गले का संक्रमण ठीक होकर गले के दर्द में राहत मिलती है । गुनगुने पानी में थोड़ा सा नमक मिलाकर इस पानी से गरारे करने से भी गले के दर्द में आराम मिलता है ।



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4. गर्म यानी गुनगुना पानी पीने से रक्त का संचरण ठीक रहता है । गरम पानी में नींबू,  और नमक या चीनी मिला के पीने से शरीर की रोग प्रतिरोधक छमता बढ़ती है ।



गर्म पानी पीने के फायदे (garam pani ke fayde)




5. रात को सोते समय गर्म पानी पीने से अचानक होने वाले हृदय घात यानी हार्ट अटैक से बचा का सकता है ।




6. चहरे पर कील मुंहासे से राहत पाने के लिए गर्म पानी का अफ़ारा लिए जा सकता है ।




7.  चोट के दर्द व जोड़ो के दर्द में गर्म पानी में नमक मिलाकर सेकने से फायदा होता है ।



गरम पानी के फायदे, गुनगुना पानी




गर्म पानी पीने के नुक़सान( garam pani peene ke nuksan) 




गर्म पानी पीने के फायदे ( garam pani ke fayde) तो होते ही हैं, इस पानी का सेवन असावधानी से करने से नुुकसान भी हो सकते हैं । पानी बहुत अधिक गर्म नहीं पीना चाहिए, सिर्फ इतना गर्म हो जो की सहन करने के योग्य हो । पानी ना तो बहुत अधिक गरम और एक दम ठंडा नहीं होना चाहिए ।



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अगर आप प्रतिदिन अधिक गर्म पानी पी रहे हैं तो आपका ब्लड प्रेशर भी बढ़ सकता है। इससे हार्ट बीट बार-बार बढ़ती और घटती रहती है। जिनको ब्लड प्रेशर की प्रॉब्लम है उन्हें अधिक गर्म पानी नहीं पीना चाहिए।





अधिक गर्म पानी पीने से मुंह जल सकता है हो सकता है मुंह में छले भी हो जाएं । अधिक गरम पानी पीने से शरीर के अंदुरूनी भाग जैसे किडनी पर फर्क पड़ता है । अधिक गर्म पानी से सिर के रोग की समस्या होती है । अगर आप गर्म पानी के फायदे (garam pani ke fayde) लेना चाहते हैं तो पानी गुनगुना ही पिए ।


धन्यवाद ।


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Sunday, February 23, 2020

शतावरी के 20 फायदे एवम् उपयोग ( shatavari benefit in hindi )

शतावरी के फायदे - shatavari ke fayde



शतावरी के फायदे- shatavari ke fayde के बारे में बहुत कम लोग जानते हैं, इसलिए इसका उपयोग कम लोग ही कर पाते हैं । इस लेख में बताने जा रहे हैं कि शतावरी क्या है, शतावरी के फायदे क्या हैं, शतावरी का सेवन कैसे किया जा सकता है।




आयुर्वेद में शतावरी को एक बहुत ही लाभ दायक औषधि के रूप में जाना जाता है । इससे अनेक बीमारियों की रोकथाम, और उपचार किया जाता हैं।




shatavari



शतावरी क्या होती है




शतावरी एक औषधीय जड़ी-बूटी है। इसकी लताएं फैलने वाली होती है। एक ही बेल के नीचे लगभग 100 - 150  जड़ें होती हैं। यह जड़े आकर में लगभग 30 से 100 सेमी तक लम्बी, तथा 1 से 2 सेमी मोटी होती हैं। इन जड़ों के दोनों किनारे नोकदार होते हैं।



शतावरी की जड़ों के ऊपर भूरे रंग का, पतला छिलका होता है। इस छिलके को उतार देने के बाद अन्दर सफेद रंग की जड़ें निकलती हैं। इन जड़ों के बीचोबीच में सख्त रेशा होता है, इसे निकाल कर उपयोग में लाया जाता है ।



शतावरी दो प्रकार की होती हैं,



1. विरलकन्द शतावर




इस शतावरी के कन्द आकार में छोटे, मांसल, फूले हुए तथा एक गुच्छे के रूप में होते हैं। इसके कन्द का काढ़ा बनाकर उपयोग किया जाता है।



2. कुन्तपत्रा शतावर



यह शतावरी का एक झाड़ीनुमा पौधा होता है। इसके कन्द आकार में छोटे, व कुछ मोटे होते हैं। इसके फूलों का रंग सफेद होता हैं, फल गोल होते हैं। कच्चे फल हरे रंग के होते हैं और पकने पर लाल रंग के हो जाते हैं।



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शतावरी को अनेक नाम से जाना जाता है ।



अंग्रेजी - Wild asparagu



हिंदी - शतावर, सतावरि, सतमूली, शतावरी, 



संस्कृत- शतावरी, शतपदी, शतमूली, महाशीता, तालमूली,



उर्दू - सतावरा



उड़िया - चोत्तारु, मोहनोले



गुजराती - एकलकान्ता, शतावरी



तमिल -  किलावरि, पाणियीनाक्कु



तेलगु - छल्लागडडा, एट्टावलुडुटीगे



बंगाली- शतमूली, सतमूली



पंजाबी - बोजान्दन, बोजीदान



मराठी- अश्वेल, शतावरी



मलयालम - शतावरि, तावलि



नेपाली - सतामूलि, कुरीलो



अरबी - शकाकुल



शतावरी के फायदे (shatavari ke fayde )





1. अपच की समस्या में शतावरी की जड़ के फायदे (Benefits of Shatavari in Indigestion in Hindi)





खाना ठीक से नहीं पच रहा हो तो शतावरी का उपयोग करना फायदेमंद होता है । 5 मिली शतावर की जड़ के रस को शहद, और दूध के साथ मिला कर सेवन करने से अपच जैसी समस्या नहीं रहती है।



2. पेट दर्द में शतावरी के उपयोग (Shatavari Uses in Hindi)





पित्त के कारण होने वाले पेट दर्द में भी शतावरी का फायदा करता है। 10 मिली शतावरी के रस में 10-12 ग्राम शहद मिलाकर प्रतिदिन लेने से लाभ होता है।




3. शारीरिक दुर्बलता  में शतावरी के फायदे (shatavari benefits in Weakness in Hindi)





जो लोग कमजोर शरीर वाले होते है या शरीर में कमजोरी  महसूस करते हैं, वे लोग शतावरी को घी में पकाकर शरीर की मालिश करें, इससे कमजोरी दूर होकर शरीर पुष्ट होता है । सामान्य कमजोरी दूर करने में शतावरी बहुत ही फायदेमंद होती हैं।




4. पौरुष शक्ति में शतावरी चूर्ण के फायदे (shatavari churn ke fayde)





दूध के साथ शतावरी चूर्ण की खीर बनाकर खाने से पौरुष शक्ति में वृद्धि होती है।




shatvari ki jad
शतावरी




5. सांसों के रोग में शतावरी के लाभ (shatavari ke fayde in hindi)





शतावरी पेस्ट एक भाग, घी एक भाग, तथा दूध चार भाग लेकर इन्हें घी में पकाकर इसकी 5-10 ग्राम की मात्रा में सेवन करने से सांस से संबंधित रोग, रक्त से संबंधित रोग, सीने में जलन, वात और पित्त दोष, और बेहोशी की समस्या में फायदा मिलता है।







6. प्रीग्नेंसी में शतावरी के फायदे (benefit of shatavari in prignancy )




गर्भवती महिलाओं के लिए शतावरी के बहुत फायदे होते हैं। शतावरी, सोंठ, अजगंधा, मुलैठी तथा भृंगराज इन पांचों को समान मात्रा में लेकर इनका चूर्ण बना लें। इस चूर्ण की 1-2 ग्राम की मात्रा में लेकर बकरी के दूध के साथ सेवन करें। इससे गर्भस्थ शिशु स्वस्थ रहता है।



7. बवासीर में शतावरी के फायदे (shatavari ke fayde)



बवासीर में शतावरी का उपयोग करने से अच्छे परिणाम  मिलते है। 2-4 ग्राम शतावरी चूर्ण को दूध के साथ उपयोग करने से फायदा होता है।



8. पेचिश में फायदेमंद शतावरी का प्रयोग ( uses of shatavari in hindi )




ताजी शतावर को दूध के साथ पीस छान लें। इसका सेवन दिन में 3-4 बार करने से पेचिश में फायदा होता है । शतावरी से बने घी का सेवन करने से पेचिश में फायदा होता है।



9. अनिद्रा रोग में शतावरी के फायदे (Benefits of shatavari in Insomnia in Hindi)




अनेक लोगों को नींद ना आने की समस्या रहती है। वह लोग 2-4 ग्राम शतावरी के चूर्ण को दूध में पकाकर ऊपर से इसमें घी मिलाकर सेवन करने से नींद ना आने की समस्या समाप्त होती है।



10. शतावरी चूर्ण के फायदे स्वप्न दोष में (Shatavari churn benefits in hindi)




स्वप्न दोष को ठीक करने के लिए ताजी शतावर की जड़ का चूर्ण 250 ग्राम में 250 ग्राम मिश्री को मिलाकर कूट-पीस कर इसकी 6-10 ग्राम चूर्ण को, 250 मिली दूध के साथ सुबह-शाम लेने से स्वप्न दोष दूर होता है, शतावर चूर्ण का पूरा फायदा लेने की लिए इसका उपयोग उचित मात्रा में करें ।



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11. सर्दी-जुकाम में शतावरी का उपयोग ( shatavari ka upyog)




शतावरी का उपयोग सर्दी-जुकाम में भी फायदा करता है।  शतावरी की जड़ का काढ़ा 15-20 मिली मात्रा में पीने से फायदा मिलता है।



अधिक जोर से बोलने, अधिक बोलने पर, आवाज का बैठना आम बात है। ऐसी समस्या में शतावर, खिरैटी, को मधु के साथ चाटने से फायदा होता है।



12. सूखी खांसी में शरातवरी के फायदे ( shatavari ke fayde)




सूखी खांसी के रोग के लिए, 10 ग्राम शतावरी, 10 ग्राम अडूसे के पत्ते, और 10 ग्राम मिश्री को 150 मिली पानी के साथ उबाल लें। इसे दिन में 3 बार लेने से सूखी खांसी समाप्त हो जाती है।



13. सिर दर्द में फायदेमंद है शतावरी (shatavari ke fayde)




शतावरी सिर दर्द से भी फायदा करता है। शतावर की ताजी जड़ का रस निकाल कर इस रस में समान मात्रा में तिल का तेल डालकर उबाल कर रख लेवे । इस तेल से सिर की मालिश करने से सिर दर्द, और आधासीसी का दर्द दूर होता है।



14. पथरी के रोग में शतावरी के फायदे ( shatavari ke fayde)




पथरी के रोग से परेशान व्यक्ति 20-30 मिली शतावरी के जड़ से बने रस में समान मात्रा में गाय के दूध को मिलाकर पिने से पुरानी पथरी भी जल्दी गल कर बाहर निकल जाती है ।



15. नाक के रोग में शतावरी का प्रयोग (Uses of Shatavari for Nasal treatment in Hindi)




शतावर चूर्ण के फायदे नाक संबंधी रोगों के उपचार के काम आता है । नाक के रोग में 5 ग्राम शतावरी चूर्ण को 100 मिली दूध में पकाकर, छानकर पीने से नाक के रोग समाप्त होते हैं।



16.  शतावरी के इस्तेमाल से रतौंधी में लाभ (Benefits of Shatavari in Night Blindness in Hindi)




शतावरी के प्रयोग से रतौंधी में भी फायदा होता है। इसके लिए घी में शतावरी के मुलायम पत्तों को भूनकर सेवन करने से लाभ होता है।



17. शतावरी का प्रयोग दस्त में (Shatavari ke fayde)




लोग दस्त से परेशान रहते हैं, तो 5 ग्राम शतावरी घी का सेवन करें। इससे दस्त पर रोक लगती है।



18. मूत्र विकार में शतावरी के फायदे ( Shatavari benefit in hindi) 




कई लोग बार-बार पेशाब आने से परेशान रहते हैं, ऐसे में 10-30 मिली शतावर के जड़ का काढ़ा बना लें। इसमें मधु और चीनी मिलाकर पीने से लाभ होता है।



पेशाब की जलन की समस्या में 20 ग्राम गोखरू पंचांग में बराबर मात्रा में शतावर मिला लें। इसे आधा लीटर पानी में उबाल कर इसे छानकर 10 ग्राम मिश्री और 2 चम्मच शहद मिला कर रख लें। इसे थोड़ा-थोड़ा दिन में तीन बार पिलाने से पेशाब की जलन की समस्या और बार-बार पेशाब आने की समस्या में लाभ मिलता है।



19. बुखार में शतावरी में फायदे (shatavari ke fayde)




शतावर और गिलोय की समान मात्रा के 10 मिली रस में थोड़ा गुड़ मिलाकर पिने से बुखार में फायदा होता है। इसका 20-40 मिली काढ़ा में 2 चम्मच शहद मिलाकर सेवन करने से बुखार में फायदा होता है।




20. शतावरी का उपयोग घाव में (use of shatavari )




शतावरी के 20 ग्राम पत्ते का चूर्ण बनाकर 40 ग्राम घी में तल कर और अच्छी तरह पीस कर घाव पर लगाने से पुराने घाव भी ठीक हो जाते है।



इस लेख में शतावरी के फायदे shatavri ke fayde एवम् इसके उपयोग के बारे में वर्णन किया गया है, इस लेख का मूल उद्देश्य लोगो को आयुर्वेद के प्रति जागरूक करना है, किसी गंभीर रोग में और इसकी मात्रा का अंदाजा सही से न हो पाए तो इसका प्रयोग किसी चिकित्सक की सलाह से करें ।

धन्यवाद ।


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