Tuesday, July 21, 2020

गेंहू के जवारे के 5 फायदे - wheat grass in hindi

गेंहू के जवारे के फायदे - wheat grass benefits in hindi



इस लेख में आप को बातने जा रहे हैं गेहूं के ज्‍वारे - wheat grass in hindi के बारे में । पहले तो ये जान लेना आवश्यक है कि ये है क्‍या है, गेहूं की नवजात पौध को गेहूं का ज्वारा को कहते हैं ।  गेहूं के बीच जब मिट्टी में रोपे जाते हैं तो 7 से 8 दिन में जो पौध बनकर तैयार होती है वही गेहूं का जवारा कहलाती है ।



इसे अंगेजी में Wheat Grass के नाम से जाना जाता  हैं । इसके फायदे अनेक हैं, आयुर्वेद में इसके रस को संजीवनी बूटी भी कहा गया है । आजकल ये आयुर्वेदिक औषधि के रूप में सरलता से बाजार में मिल जाती है ।



गेहूं का जवारा,आयडीन, सेलेनियम, आयरन और विटामिन A, B2, C और E आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं । ज्वारे के रस में प्रचुर मात्रा में भी फाइबर पाया जाता है ।



Wheat grass in hindi
गेंहू के जवारे


Wheatgrass का वैज्ञानिक नाम Triticum aestivum है। इसे पोषक तत्वों का भंडार माना जाता है। 



माना जाता है कि गेहूं के ज्वारे में अनेक प्रकार के विटामिन्स और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं। जिसमें विटामिन बी-12, कई खनिज लवण, सेलिनियम और अधिकतर अमीनो अम्ल पाए जाते हैं।





गेहूं के ज्वारे में पाया जाने वाले एंजाइम्स शरीर को हानिकारक जहरीले पदार्थो से मुक्त करता है। इसलिए इसे अमृत का दर्जा भी दिया जाता है। गेहूं के ज्वारे की उपयोगिता को अमेरिका, यूरोप, एशिया और भारत के  लोग तेजी से अपना रहे हैं और इसका लगातार नियमित रूप से सेवन कर फायदा उठा रहे हैं।



विभिन्न बीमारियों से लड़ने के लिए प्रकृति ने हमें कई अनमोल चीजे दी हैं। उन्हीं में से एक है गेहूं का जवारा - wheat grass. औषधीय गुणों की प्रचुरता को देखते हुए आहार विशेषज्ञों ने इसे भी प्रकृति की संजीवनी बूटी कहा है।



गेंहू का ज्वारा खाने की विधि




गेहूं का जवारा, पाउडर, रस और कैप्सूल के रूप में मिलता हैं। इसके अलावा इसके स्वस्थ लाभ लेने का सबसे अच्छा तरीका है  कि घर पर गेहूं का जवारा पैदा कर के इसका  उपयोग कर सकते हैं । गेहूं के जवारे का रस पीने के अतिरिक्त, आप अपनी मनपसंद हरी सब्जी के साथ भी मिलाकर जूस बना कर पी सकते हैं।


Weatgrass in hindi


गेहूं के जवारे के रस को सलाद, चाय या अन्य पेय पदार्थों में भी मिलाकर सेवन कर सकते हैं।



Wheat grass juice in hindi
 Genhu ke jaware ka ras


गेहूं के जवारे का रस पीने का तारीका - wheat grass juice in hindi




गेंहू के जवारे का रस पीने की एक विशेष पद्धति है। रस को एक साथ एक ही बार में तेजी से ना पियें, बल्कि एक-एक घूंट करके पीना चाहिए। ऐसा करने से रस में लार का मिश्रण मिक्स हो जाता है, जिस कारण यह पचकर शरीर में अच्छे से पहुंच जाता है।



जिन लोगों को ज्वारों का रस पीना बिल्कुल अच्छा ना लगता हो अथवा स्वादिष्ट न लगता हो या पीने से उबकाई आती हो वह लोग जवारे के रस में अंगूर या मौसम्मी का थोड़ा जूस मिला लेवें । लेकिन स्वाद के लिए जवारे के रस में नमक, काली मिर्च या अन्य कोई भी मसाले न मिलाएं।



इसका सेवन करने का एक तरीका यह है कि, गेंहू के जवारे को चबाकर खाया जाए । गेंहू के जवारे को चबाकर खाने से उसमें मुंह की लार मिली होती है। इससे उनके पाचन की प्रक्रिया मुंह से ही प्रारंभ हो जाती है। जवारे चबा लेने के बाद बचे हुए रेशों को थूक दें। फिर भी यदि रेशों के कुछ टुकड़े पेट में चले जाते हैं तो उनसे लाभ ही होता है। जवारे के रेशे कब्ज को रोकते हैं और उसे दूर करते हैं। साथ ही जवारे को चबाकर खाने से दांतों कि कसरत हो जाती है, इससे दांत स्वच्छ और मजबूत बनते हैं, इसके अलावा जवारे में उपस्थित क्लोरोफिल दांतों की सड़न को दूर करता है।



Wheat grass in hindi



गेंहू के जवारा का रस पीने के एक घंटे बाद तक कोई भी आहार का सेवन न करें। ज्वारे के रस में फलों और सब्जियों के रस जैसे सेव,अन्नानास आदि के रस के साथ मिलकर पिया जा सकता है। इसमें कभी भी खट्टे फलों के रस जैसे नींबू, संतरा आदि के रस में न मिलाएं, क्योंकि यह ज्वारे के रस में उपस्थित एंजाइम्स को नष्ट कर देती है।


गेहूं के जवारे का रस कब पीना चाहिए



आमतौर से इसका सेवन किसी भी समय कर सकते हैं। लेकिन, अधिकतर लोग इसका सेवन सुबह के समय  करते हैं। खाना खाने से पहले भी इसका सेवन किया जा सकता हैं, इससे  शरीर को जरुरी पोषक तत्व की पूर्ति होती है और व्यक्ति स्वस्थ महसूस करता है ।


गेंहू के ज्वारे के गुण फायदे- wheat grass in Hindi



1. गेहूं के जवारा में शुद्ध रक्त बनाने की ताकत होती है, इस लिए  ज्वारा के रस को`ग्रीन ब्लड′ कहा जाता है। इसे ग्रीन ब्लड कहने की एक वजह यह भी है कि गेहूं के ज्वारे के रस और मानव रक्त, दोनों का पी.एच. फैक्टर 7.4 ही है, जिसके कारण इसके रस का सेवन करने से इसका रक्त में अवशोषण शीघ्र हो जाता है।



2. गेहूं के ज्वारे रक्त व रक्तसंचार संबंधी रोगों, रक्त की कमी, शुुगर, कैंसर, त्वचा रोग, मोटापा, किडनी और पेट संबंधी रोग के उपचार में फायदेमंद हैं।



3. गेहूं के ज्वारे की तासीर क्षारीय होती हैं, जो अल्सर, कब्ज और दस्त से राहत प्रदान करता है। यह एग्जिमा, सर्दी-खांसी और दमा रोग में फायदे मंद हैं। साथ ही यह मलेरिया में भी फायदा करता है। डेंगू के बुखार में प्लेटलेट्स की संख्या बढ़ाने में सहायता  करता है।



4. रोगी के अलावा स्वस्थ्य व्यक्ति भी इसका सेवन कर सकता है। ज्वारे का रस पाचन क्रिया को उत्प्रेरित करता है। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, शरीर से हनिकराक पदार्थ बाहर निकालकर शरीर को शक्ति प्रदान करता है ।



5. गेहूं के ज्वारे को कच्चा चबाने से गले की खराश और मुंह की बदबू दूर होती है। इसके रस के गरारे करने से दांत और मसूड़ों के संक्रमण में फायदा मिलता है। स्किन पर ज्वारे का रस लगाने से त्वचा में चमक पैदा होती है।






व्हीट ग्रास के औषधीय फायदे - wheat grass benefits in hindi




अगर किसी का जी मचलाता हो तो ज्‍वारे के रस का एक घूंट पीने से राहत मिलती है । ज्‍वारे का जूस कब्‍ज में भी फायदा करता है ।



1. व्हीटग्रास जूस के फायदे त्वचा में - wheatgrass juice benefits in hindi




गेहूं के ज्‍वारे में एंटीएजिंग गुण पाए जाते हैं । इसका नियमित रूप से सेवन करने से चेहरे पर झुर्रियां नहीं पड़ती, ये त्‍वचा को साफ और चमकदार बनाए रखता है । इसे पीने से त्‍वचा से संबंधित समस्या नहीं होती है ।  इसमें क्‍लोरोफिल पाया जाता है जो त्‍वचा पर बुढ़ापे का असर नहीं पड़ने देता । 



गेंहू के ज्वारे का रस
wheat grass juice



चहरे पर चमक लाने के लिए गेंहू का जवारा फायदे करता है इसके लिए एक चम्मच गेहूं के जवारे का पाउडर थोड़े गुलाब जल के साथ मिला कर पेस्ट बना लेवें और चेहरे पर लगालें। फिर  थोड़े टाइम के बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लेवें ।



2. रक्त को शुद्ध करने में ज्वारे के फायदे - wheat grass benefits in hindi




गेंहू के ज्वारे का रस हमारे शरीर में खून में उपस्थित लाल रक्‍त कोशिकाओं में वृद्धि करता है । इसे पीने से हमारे शरीर में ब्‍लड प्रेशर नियंत्रित रहता है । इसे पीने से हार्ट अटैक होने की संभावना काफी कम हो जाती है । गेहूं के ज्‍वारे का रस पीने से पेट एकदम दुरुस्‍त रहता है । गैस व एसिड, अपच, पेट दर्द की समस्‍या नहीं होती है ।



गेहूं का जवारा चूर्ण में पाए जाने वाला तत्व क्लोरोफिल,  शरीर में हीमोग्लोबिन को बढ़ाता है। इसलिए, यह एनीमिया रोग को भी ठीक करने में सहायता करता है।



3. हड्डियों के दर्द में गेंहू के ज्वारे के फायदे - wheat grass benefits in hindi




गेंहू के जवारा में उपस्थित मिनरल्‍स मानव शरीर को अंदर से मजबूत बनाता हैं । यह हड्डियों को मजबूत करता हैं । इसके रस में कपड़ा भिहोकर दर्द वाली जगह पर बांधने से भी आराम मिलता है । उम्र बढ़ने पर जोड़ों के दर्द की समस्या नहीं रहती है, अगर जवानी से ही ज्‍वारे के रस से उपचार करना शुरू कर देना चाहिए । प्रतिदिन आधा गिलास ज्वारे का  रस का सेवन शरीर को स्वस्थ बनाए रखता है।



4. बाल झड़ने की समस्या में गेंहू जवारे के फायदे - wheat grass in hindi




बालों की सभी समस्‍याओं का रामबाण उपचार है ज्‍वारे का रस, ज्वारे के रस को रूई में भिगो कर बालों पर लगाएं, फिर अच्छी तरह से मसाज करें और फिर बालों को आधे घंटे पश्चात धो लें । इससे बालों में रूसी, रूखापन, झड़ने-गिरने की समस्या नहीं होती है । बाल जड़ से मजबूत और घने और काले हो जायेगें ।



अगर बाल गिरने की समस्या हो तो गेहूं के जवारे का पाउडर रातभर को भिगो कर रख दें और सुबह के समय उसे छान कर अपने बाल धो लेवें। ऐसा करने से झड़ते बाल ठीक हो।



5. गेंहू के जवारे में एंटीसेप्टिक गुण होता है




इसमें उपस्थित एंटीसेप्टिक गुण के कारण, गेहूं के जावरे का चूर्ण  घाव, कीड़े के काटने, त्वचा पर चकत्ते, और खरोंच को ठीक करने में सहायता करता है।




गेंहू के ज्वारे के अन्य फायदे - wheatgrass juice benefits in hindi



  • गेहूं का जवारा मुँहासों को ठीक करने में सहायता करता हैं।


  • गेहूं के ज्वारे से डायबिटीज की पहले स्तर या उन्नत स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है।


  • शराब पीने के बाद होने वाले हैंग ओवर का भी गेहूं के जवारे से नियंत्रित किया जा सकता है।


  • इसमें बायोफालावोनॉयड होता है, जिसे एपिगेनिन कहा जाता है जो कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकता है।


  • गेहूं के ज्वारे के पाउडर को नियमित रूप से खाने से पुरुषों और महिलाओं दोनों के ही प्रजनन तंंत्र को स्ववस्थ रखता है, गेंहू के जवारे में प्रचुर मात्रा में फाइबर होता है जिसके कारण मोटापा अथवा शरीर का वज़न कम करने में सहायता मिलती है।


  • कब्ज़ से पीड़ित व्यक्ति अगर गेहूं के जवारे के रस का उपयोग करें तो उनका पेट साफ करने में सहायता मिलती है।


  • अगर किसी को जी मचलाने या उबकाई आने की समस्या है तो गेहूं के जवारे का जूस पीने से इस रोग से निजात मिलती है ।


  • गेहूं के जवारे का सेवन प्रतिदिन लगातार करने से बुढ़ापा दूर रहता है और व्यक्ति जवान बना रहता है ।

  • गेहूं का जवारा शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाता है और हार्ट अटैक से रक्षा करता है।


  • गेहूं का ज्वारा शरीर के पी एच लेवल को नियंत्रित करता है तथा एसिडिटी की समस्या से आराम दिलाता है।


  • गेहूं के जवारे का सेवन करने से बुद्धि तेज़ होती है, और तनाव कम होता है।




गेंहू का जवारा घर पर उगाने की विधि




गेहूं के बीज को जब मिट्टी में बोया जाता है, तो कुछ ही दिनों में वह अंकुरित होकर बढ़ने लगता है और उसमें पत्तियां विकसित होने लगती हैं। जब यह पौधा पांच-छह पत्तियों का हो जाता है, तो यह गेहूं का जवारा कहलाता है। 


  • रात के समय लगभग 100 ग्राम गेहूँ के दाने एक बर्तन में भिगो कर छोड़ दें ।


  • पहले से ही 7 गमले तैयार कर लेवें इसके लिए एक गमले में मिट्टी की दो इंच मोटी परत बिछा दें और थोड़ा सा पानी छिड़क दें। 


  • मिटटी और खाद को अच्छी तरह मिला कर गमले के छेद को बंद करके इसमें खाद भर दें । इनमे कभी भी रासायनिक खाद या कीट नाशक दवाओं का प्रयोग न करें ।


  • पहचान के लिए सातों गमलो पर एक से सात तक नंबर डाल दें।


  • अगले दिन गेहूं के दानों को धोकर साफ़ कर पहले गमले में गेहूँ को परत के रूप में बिछा दें और ऊपर से थोड़ी मिट्टी डाल दें और पानी का छिड़काव के दें।


  • गमले को किसी छायादार स्थान पर जहां भरपूर हवा और सूर्य की रोशनी आती हो, पर सूर्य की किरणे सीधी गमलों पर न पड़े।


  • अगले दिन दूसरे नम्बर के गमले में गेहूं बो दीजिये और इस तरह रोज अगले नंबर के गमले में गेहूँ बोते रहें। 


  • शुरूआत के दो-तीन दिन गमलों को गीले अखबार से ढक कर रखें और गमलों में प्रतेक दिन स्प्रे बोटल से दिन में दो बार पानी का छिड़काव करें जिससे मिट्टी में आवश्यक नमी बनी रहे।


  • जब गैहूँ के ज्वारे डेढ़ इंच साइज तक के हो जाये तो एक बार ही पानी देना प्रयाप्त है ।  कि गर्मी के सीजन में आवश्यक नमी बनी रहे और पानी की अधिकता भी न हो।


  • सात दिन बाद जब पौधे में 5-6 पत्तियां निकाल आएं और जवारा  7-8 इन्च लम्बा हो जाये तब इन को उखाड़ कर और इनकी जड़े काट कर पानी से अच्छी तरह धो कर पीस ले और इसका रस निकाल ले व इसका सेवन करे।


  • लंबे समय तक ज्वारा प्राप्त करने के लिए जैसे-जैसे गमले खाली होते जाये वैसे वैसे खाद मिटटी बदल कर नए बीज बोते जाएं ।


  • जब तक गंहु के ज्वारा की आवश्यकता हो तब तक इस प्रक्रिया को दोहराते रहे। इस तरह जवारा घर में ही पूरे वर्ष भर उगाया जा सकता है।





गेहूं के जवारे का रस बनाने की विधि - whealt grass juice kaise banaye




ताजे कटे हुए गेहूं के जवारा को पानी से धोकर उन्हें सिल या मिक्सी में पीस लें। इसके बाद एक साफ़ बारीक सूती कपड़े में रखकर उसे दबाकर रस निकाल लें । कपड़े की जगह जालीदार बारीक छलनी का भी प्रयोग कर सकते है। गेंहू के जवारे को पीसते समय थोड़ा पानी मिलाने से रस सरलता से निकलता है। 


मिक्सी में डालकर भी ज्वारा को पीसा जा सकता है। अधिक मात्रा में रस निकालने के लिए मिक्सर अधिक उपयुक्त होता है।



गेंहू का जवारा



गेंहू के जवारे का रस पीने में सावधानियां 



1. आरंभ में अगर रस पीने से परेशानी हो तो इसका सेवन कम मात्रा में करें फिर धीरे धीरे मात्रा बढ़ाते जाए ।



2. ज्वारे के ताजे रस का सेवन सामान्यतः 60-120 एमएल प्रति दिन खाली पेट करना चाहिये।



3. यदि आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो 30-60 मिली ली. ज्वारे का रस दिन मे तीन चार बार तक लिया जा सकता हैं।



4. रस निकालकर तुरंत ही इसका सेवन कर लेना चाहिए। तीन घण्टे बाद जवारे के रस के पोषक तत्व समाप्त होने लगते हैं।



5. ज्वारे के रस में अदरक अथवा खाने वाला पान मिला कर सेवन कर सकते हैं इससे उसके स्वाद तथा गुण में वृद्धि होती है।



6. इसे गिलोय, लोकी, नीम के पत्ते व तुलसी के पत्तों के रस के साथ भी मिल कर पिया जा सकता है।



7. रस लेने के पहले व बाद में एक घण्टे तक कोई अन्य आहार का सेवन न करें ।



8. रस को धीरे-धीरे घूंट घूंट करके बैठ कर पीना चाहिए और सादा भोजन ही लेना चाहिए तथा तली भूनी हुई वस्तुओं का सेवन न करें।



9. कुछ लोगों को शुरु में इसका प्रयोग करने से उल्टी-दस्त हो सकते है । ऐसा तभी होता है जब व्यक्ति रोगी होता है । सर्दीं, उल्टी या दस्त होने से ऐसा माना जाता है कि शरीर से दूषित एकत्रित मल बाहर निकल रहा है, इसमें चिंता की कोई आवश्यकता नहीं है।



10. खटाई, चटनी आदि ज्वारे के रस में मौजूद एंजाइम्स को निष्क्रिय कर देती है। इसमें नमक, चीनी आदि भी नहीं मिलाना चाहिये।



गेंहू के जावरे के नुकसान - wheatgrass side effects in hindi




1. गेंहू का जवारा अधिक सेवन करने से सिर-दर्द एवं उल्टी होने की समस्या हो सकती है।



2. जवारा का सेवन शुरुआत में थोड़ी ही मात्रा में करें। क्योंकि यदि शरीर इसे तरीके से नहीं पचा सका तो डायरिया की समस्या हो सकती है। इसकी खुराक की मात्रा को धीरे धीरे बड़ाया जा सकता हैं।



3. इससे एलर्जी होने की संभावना भी हो सकती है। इसका एलर्जिक होना आम बात हैं, सूजा हुआ मुंह या गला। ऐसे लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें ।



4. इस लेख में गेंहू के ज्वारे - wheat grass in hindi का वर्णन किया गया है । इसका मूल उद्देश्य लोगो को आयुर्वेद के प्रति जागरूक करना है, किसी रोग में इसका सेवन करने से पूर्व किसी चिकित्सक की सलाह अवश्य लेवें । किसी भी जड़ी बूटी कि अधिकता नुक़सान दायक हो सकती है ।


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