Thursday, 20 December 2018

अजवाइन के उदर विकारों में प्रयोग व 6 महत्वपूर्ण फायदे एवम् गुण

अजवायन परिचय


इस लेख में आपको अजवाइन के उदर विकारों में प्रयोग व महत्वपूर्ण फायदे एवम् गुण के बारे में बताने जा रहे हैं । अजवाइन  का सेवन औषधि के रूप में हमारे देश में पुराने समय से किया जा रहा है । अजवाईन पाचक औषधि के रूप में प्रसिद्ध है । अजवाईन के प्रयोग से अनाज का पाचन ठीक से होता है, इससे भूख खुल कर लगती है । ऐसा कहा जाता है कि अकेली अजवाईन ही सैकड़ों प्रकार के अन्न को पचाने की छमता रखती है । अगर किसी को दूध न पचता हो तो दूध पीकर ऊपर से थोड़ी सी अजवाईन खाने से दूध का पाचन हो जाता है । अगर अनाज व मिठाई जैसी चीजें न पचती हो तो इसमें अजवाईन का चूर्ण मिलाकर सेवन करने से पाचन अच्छे से हो जाता है ।

Ajwain
अजवाइन


शरीर के किसी भी हिस्से में दर्द हो तो अजवान को पानी में पीस कर लेप करें व ऊपर से सिकाई कर दे, दर्द में आराम मिल जायेगा । अजवाईन का प्रयोग बहुत से रोगों में किया जाता है । अजवाइन के महत्वपूर्ण फायदे व गुण हैं, जैसे - जुकाम , खांसी, जलोदर, पेट के कीड़े, उदर विकार, बहुमुत्र आदि रोगी में किया जाता है । अजवायन को अंग्रेजी में Ajowan कहते हैं । इसे अलग अलग राज्यो में अलग अलग नामों से जाना जाता है ।

संस्कृत    : यवानि, अजमोडिका,

हिंदी।     : अजवायन, Ajwain

बंगाली।  :  जोवान

पंजाबी   : जवेन

मराठी    : ओवा

गुजराती :अज्जमो

तेलगु    : वामु

अजवाईन में एक द्रव्य पाया जाता है, जो सुगंधित व उड़न शील होता है, इस लिए इसमें खुशबू आती है, Ajwain से फूल सत निकाला जाता है जिसे अंग्रजी में थायमोल के नाम से जानते हैं । अजवाईन को पानी में भिगोने के बाद वाष्पन विधि से सत निकाला जाता है ।





अजवाईन के औषधीय प्रयोग:



1. अजवाइन का उदर विकार में  प्रयोग 




  • भोजन करने के बाद छाती में जलन होने पर एक ग्राम अजवायन व बादाम की एक गिरी को चबा चबा कर खाएं ।

  • अजवायन एक भाग, कालीमिर्च व सेंधा नमक आधा आधा भाग गरम जल के साथ सेवन करें।

  • 3 ग्राम अजवायन अधा ग्राम काला नमक मिलाकर फंकी लेने से पेट का अफरा दूर हो जाता है । इस चूर्ण की दो बार फंकी लेने से वायु गोल का नाश हो जाता है ।

  • अजवायन, हरड, सौंठ, सेंधा नमक की बराबर मात्रा के चूर्ण की 2 ग्राम मात्रा को गरम पानी के साथ सेवन करने से पेट दर्द ठीक हो जाता है ।

  • छोटे बच्चे के पेट में दर्द हो तो बारीक साफ़ कपड़े में अजवायन को रख शिशु को चाटते है, इससे बच्चे का पेट दर्द ठीक हो जाता है ।

  • अजवाईन की 2 ग्राम की फंकी लेने से पेट के कीड़े मरते हैं, पाचन होता है व भूख खुल कर लगती है एवम् प्रसूता स्त्रियों को प्रसूत रोग से बचाव होता है ।


Ajwain
Ajwain





2. पेट फूलने, गैस व दर्द संबंधित उदर विकार में अजवाइन के प्रयोग :




  • दस ग्राम अजवायन व छोटी हरड़ 6 ग्राम, सेंधा नमक 3 ग्राम, घी में भूनी हींग 3 ग्राम मिक्स कर चूर्ण बना लें, इस चूर्ण की 2 ग्राम मात्रा हल्के गरम जल के साथ सेवन करें ।

  • पेट में वायु गैस बनने पर 125 ग्राम दही के मठे में 2 ग्राम अजवायन तथा आधा गरम काला नमक मिलाकर भोजन के बाद आवश्यकता अनुसार लें ।

  • अजवायन का चूर्ण सुबह शाम गरम जल से सेवन करने से आराम मिलता है ।

  • डेढ़ लीटर पानी को उबालें, जब उबालकर सवा लीटर रह जाए तो उतर लें, इसमें आधा किलो अजवाईन डालकर ढक्कन बंद करदे । जा यह ठंडा हो जाए तो छानकर बोतल में भरकर रखें, इसका 50 -50 ग्राम दिन में तीन बार सेवन करने से  अफ़ारे व गैस संबंधित उदर विकार ठीक हो जाते हैं ।

  • एक किलो अजवाइन में एक किलो नींबू का रस व 50-50 ग्राम पांचों नमक मिलाकर कांच के बरतन में भर कर रख दें । जब यह सुख जाए तो इसकी 2 से 4 ग्राम की मात्रा दिन में दो बार सेवन करने से उदर संबंधी विकार दूर हो जाते हैं ।



3. पेट के कीड़े खत्म करने में अजवाईन के प्रयोग




  • 2 ग्राम अजवायन के चूर्ण में बराबर मात्रा में नमक मिलाकर प्रातः कल सेवन करने से कृमि जन्य रोग, संवत व अजीर्ण रोग ठीक हो जाते हैं।

  • अजवायन के महीन चूर्ण की 3 ग्राम मात्रा को दिन में दो बार छाछ के साथ सेवन करने से पेट के कीड़े का समूल नाश हो जाता है ।

  • अजवाइन के 500 मिली ग्राम चूर्ण में बराबर मात्रा में काला नमक मिलाकर रात को रोज ग्राम जल के साथ देने से बच्चों के कृमि रोग दूर हो जाते है ।

Ajwain
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4. खांसी में अजवाईन के प्रयोग



  • अजवाईन के चूर्ण की 2 से 3 ग्राम मात्रा को गर्म पानी या गरम धुद के साथ दिन में दो बार सेवन करने से जुकाम, नजला, सिरदर्द, खांसी में फायदा होता है ।

  • अजवाईन की दो ग्राम मात्रा छोटी पीपली आधा ग्राम, का क्वाथ बनाकर 2 से 3 ग्राम सेवन करने से खांसी व कफ ज्वर में फायदा होता है ।

  • बार बार खांसी आती हो व कफ अधिक गिरता हो तो ajwain का सत 125 ग्राम, शहद 5 ग्राम व घी 2 ग्राम मिलाकर दिन में 3 बार  सेवन करने से फायदा होता है ।

  • इसकी 5 ग्राम को 250 ग्राम पानी में पकाएं, जब आधा बाकी रह जाए तो इसे छान कर आवश्यकता अनुसार नमक मिला कर रात को सोते समय सेवन करें ।

  • खांसी पुरानी हो गई हो, व पीला कफ निकलता हो, पाचन क्रिया धीमी हो, तो इसका अर्क  25 मिलीग्राम दी में तीन बार पिलाने से लाभ होता है ।




5. जलोदर के उपचार में अजवाइन के गुण



  • इस रोग में पेट में नाभि के नीचे के हिस्से में पानी भर जाता है व पेट फूल जाता है । इसके लिए  Ajwain  को बारीक पीस कर इसमें थोड़ी मात्रा में हींग मिलाकर लेप बनाकर पेट में लगाने से जलोदर व पेट के अफारे में फायदा होता है ।

  • अजवाईन को पानी के साथ लेने से पेट में गुड़गुड़ाहट व खट्टी डकारें आना बंद हो जाती हैं  ।



6. बहुमूत्र में अजवायन के प्रयोग व फायदे



  • 2 ग्राम अजवायन को संभाग गुड के साथ कूट कर इसकी छोटी छोटी गोलियां बनाकर इसकी एक एक गोली दिन में तीन बार देने से बहूमुत्र की समस्या खत्म हो जाती है ।

  • जो बच्चे बिस्तर में पेशाब करते हैं उन्हें रात को सोते समय थोड़ी मात्रा में इसको खिलाने से यह समस्या दूर हो जाती है ।



विशेष



ऊपर बताए रोगी के अलावा अजवायन से सर्दी, जुकाम, उल्टी, दस्त, हिजा, अतिसार, मूत्र में रुकावट, प्रमेह आदि रोगी का उपचार भी किया जाता है । अजवाईन शराब छुड़वाने में बहुत ही कारगर है । जब शराब पीने की इच्छा हो और न रहा जा रहा हो तो इसकी 10 -10 ग्राम की मात्रा दो तीन बार चबाने को दें । या फिर आधा किलो अजवाईन को 400 ग्राम पानी में उबालें जब अधे से कम रह जाए तो इसे छान कर कांच की बोतल में भर के फ्रिज में रखे,  इस काढ़े की आधा कप मात्रा शराबी को पिलाएं ।

जो व्यक्ति शराब छोड़ना चाहते हैं लेकिन छोड़ नी पाते उनके लिए यह नुस्खा बहुत फायदेमंद है । यहां हमने आप को अजवाइन के उदर विकारों में प्रयोग व 6 महत्वपूर्ण फायदे एवम् गुण के बारे में अवगत कराया, आशा करता हूं कि आपको यह लेख पसंद आया होगा ।     

धन्यवाद







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