गेंहू के जवारे के 5 फायदे और नुकसान - wheat grass in hindi

गेंहू के जवारे के फायदे -wheatgrass benefits in hindi


इस लेख में आपको गेहूं के जवारे के फायदे - wheat grass in hindi के बारे में बताने जा रहे हैं । पहले तो ये जानना आवश्यक है कि गेंहू का जावरा क्‍या है, गेहूं की नवजात पौध को गेहूं का जवारा कहते हैं । गेहूं के बीज जब मिट्टी में रोपे जाते हैं तो 7 से 8 दिन में जो पौध बनकर तैयार होती है, यही पौध गेहूं का जवारा कहलाता है । इसके फायदे अनेक हैं ।


आजकल ये आयुर्वेदिक औषधि के रूप में सरलता से बाजार में मिल जाती है । इसे पोषक तत्वों का भंडार माना जाता है। आयुर्वेद में इसके रस को संजीवनी बूटी भी कहा गया है ।

genhu ka jawara
गेंहू के जवारे

गेहूं का जवारा, में आयडीन, सेलेनियम, आयरन और विटामिन A, B2, C और E आदि पोषक तत्व पाए जाते हैं । गेंहू के ज्वारे के रस में प्रचुर मात्रा में भी फाइबर पाया जाता है । फायदे अनेक हैं ।आयुर्वेद में इसके रस को संजीवनी बूटी भी कहा गया है ।

Wheatgrass का वैज्ञानिक नाम Triticum aestivum है । 

माना जाता है कि गेहूं के जवारे में अनेक प्रकार के विटामिन्स और एंटी ऑक्सिडेंट होते हैं। जिसमें विटामिन बी-12, कई खनिज लवण, सेलिनियम और अधिकतर अमीनो अम्ल पाए जाते हैं ।


गेहूं के जवारे में पाया जाने वाले एंजाइम्स शरीर को हानिकारक जहरीले पदार्थो से मुक्त करता है । इसलिए इसे अमृत का दर्जा भी दिया जाता है । गेहूं के ज्वारे की उपयोगिता को अमेरिका, यूरोप, एशिया और भारत के लोग तेजी से अपना रहे हैं और इसका लगातार नियमित रूप से सेवन कर फायदा उठा रहे हैं ।

विभिन्न बीमारियों से लड़ने के लिए प्रकृति ने हमें कई अनमोल चीजे दी हैं । उन्हीं में से एक है गेहूं का जवारा (wheat grass in hindi ) औषधीय गुणों की प्रचुरता को देखते हुए आहार विशेषज्ञों ने इसे भी प्रकृति की संजीवनी बूटी कहा है । क्या आप जानते हैं कि गेंहू के जवारे का जूस कैसे बनाते हैं । चलिए आप को बताते हैं ।

व्हीटग्रास जूस कैसे बनाएं - weatgrass juice kaise banaye


आइए आप को बताते है घर पर गेंहू के जवारे का जूस कैसे बनाए, इसके लिए आपको नीचे दिया गया तरीका प्रयोग करना है ।

1. आठ से दस गेंहू के ज्वारे की पत्तियां एक दम नीचे से काट कर अच्छी तरह से धो कर साफ़ कर लें। अब इसे सिल या मिक्सी में डाल कर पीस लेवे और इसका रस निकाल ले । अधिक मात्रा में रस निकालना हो तो मिक्सर अधिक उपयुक्त होता है ।

2. गेंहू की जवारे पीसने के बाद एक साफ़ कपडा लेकर पिसी हुई पत्तियां कपड़े में डाल कर इसका रस निचोड़ ले।

3. व्हीटग्रास जूस निकलने के बाद इसे लंबे समय तक न रखे तुरंत ही इसका सेवन करना है, और एक बात का विशेष ध्यान रखना है कि जूस को घूंट घूंट कर के ही पिए, एक बार में कभी ना पिए।

4. जूस निकालते समय इसमें आंवला, नीम, गिलोय, तुलसी अदरक तुलसी, शहद और भी डाला जा सकता है। इनके प्रयोग से जूस और अधिक पॉस्टिक और गुणवान हो जाता है।

5. इस बात का ध्यान रखना है की इसमें नींबू और नमक का प्रयोग बिल्कुल भी न करें ।

गेंहू का जवारा खाने की विधि:

गेहूं का जवारा, पाउडर, रस और कैप्सूल के रूप में मिलता हैं । इसके अलावा इसके स्वस्थ लाभ लेने का सबसे अच्छा तरीका है कि घर पर गेहूं का जवारा पैदा कर के इसका उपयोग कर सकते हैं । गेहूं के जवारे का रस पीने के अतिरिक्त, आप अपनी मनपसंद हरी सब्जी के साथ भी मिलाकर जूस बना कर पी सकते हैं।


गेहूं के जवारे के रस ( jaware ka juice ) को सलाद, चाय या अन्य पेय पदार्थों में भी मिलाकर सेवन कर सकते हैं।

गेहूं के जवारे का रस पीने का तारीका-wheatgrass juice in hindi


गेंहू के जवारे का रस पीने की एक विशेष पद्धति है । रस को एक साथ एक ही बार में तेजी से ना पियें, बल्कि एक-एक घूंट करके पीना चाहिए । ऐसा करने से रस में लार का मिश्रण मिक्स हो जाता है, जिस कारण यह पचकर शरीर में अच्छे से पहुंच जाता है।

जिन लोगों को जवारे का रस - jawara juice पीना बिल्कुल अच्छा ना लगता हो अथवा स्वादिष्ट न लगता हो या पीने से उबकाई आती हो वह लोग जवारे के रस में अंगूर या मौसम्मी का थोड़ा जूस मिला लेवें । लेकिन स्वाद के लिए जवारे के रस में नमक, कालीमिर्च या अन्य कोई भी मसाले न मिलाएं।

इसका सेवन करने का एक तरीका यह है कि, गेंहू के जवारे को चबाकर खाया जाए । गेंहू के जवारे को चबाकर खाने से उसमें मुंह की लार मिली होती है । इससे उनके पाचन की प्रक्रिया मुंह से ही प्रारंभ हो जाती है । जवारे चबा लेने के बाद बचे हुए रेशों को थूक दें । फिर भी यदि रेशों के कुछ टुकड़े पेट में चले जाते हैं तो उनसे लाभ ही होता है ।

जवारे के रेशे कब्ज को रोकते हैं और उसे दूर करते हैं । साथ ही जवारे को चबाकर खाने से दांतों कि कसरत हो जाती है, इससे दांत स्वच्छ और मजबूत बनते हैं, इसके अलावा जवारे में उपस्थित क्लोरोफिल दांतों की सड़न को दूर करता है ।

गेंहू के जवारा का रस पीने के एक घंटे बाद तक कोई भी आहार का सेवन न करें। ज्वारे के रस में फलों और सब्जियों के रस जैसे सेव,अन्नानास आदि के रस के साथ मिलकर पिया जा सकता है। इसमें कभी भी खट्टे फलों के रस जैसे नींबू, संतरा आदि के रस में न मिलाएं, क्योंकि यह ज्वारे के रस में उपस्थित एंजाइम्स को नष्ट कर देती है।


गेहूं के जवारे का रस कब पीना चाहिए


आमतौर से इसका सेवन किसी भी समय कर सकते हैं। लेकिन, अधिकतर लोग इसका सेवन सुबह के समय करते हैं। खाना खाने से पहले भी इसका सेवन किया जा सकता हैं, इससे शरीर को जरुरी पोषक तत्व की पूर्ति होती है और व्यक्ति स्वस्थ महसूस करता है ।


गेंहू के ज्वारे के फायदे -gehu ke jaware ke fayde


1. गेहूं के जवारा में शुद्ध रक्त बनाने की ताकत होती है, इस लिए  ज्वारा के रस - jaware ka juice को ग्रीन ब्लड कहा जाता है। इसे ग्रीन ब्लड कहने की एक वजह यह भी है कि गेहूं के ज्वारे के रस और मानव रक्त, दोनों का पी.एच. फैक्टर 7.4 ही है, जिसके कारण इसके रस का सेवन करने से इसका रक्त में अवशोषण शीघ्र हो जाता है।

2. गेहूं का ज्वारा ( genhu ka jawara ) रक्त व रक्तसंचार संबंधी रोगों, रक्त की कमी, शुुगर, कैंसर, त्वचा रोग, मोटापा, किडनी और पेट संबंधी रोग के उपचार में फायदेमंद हैं।

3. गेहूं के जवारे की तासीर क्षारीय होती हैं, जो अल्सर, कब्ज और दस्त से राहत प्रदान करता है। यह एग्जिमा, सर्दी-खांसी और दमा रोग में फायदे मंद हैं। साथ ही यह मलेरिया में भी फायदा करता है। डेंगू के बुखार में प्लेटलेट की संख्या बढ़ाने में सहायता करता है।

4. रोगी के अलावा स्वस्थ्य व्यक्ति भी इसका सेवन कर सकता है। जवारे का रस पाचन क्रिया को उत्प्रेरित करता है। शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, शरीर से हनिकराक पदार्थ बाहर निकालकर शरीर को शक्ति प्रदान करता है ।

5. गेहूं के जवारे को कच्चा चबाने से गले की खराश और मुंह की बदबू दूर होती है। इसके रस के गरारे करने से दांत और मसूड़ों के संक्रमण में फायदा मिलता है। स्किन पर ज्वारे का रस लगाने से त्वचा में चमक पैदा होती है।


व्हीटग्रास के फायदे - weatgrass in hindi


अगर किसी का जी मचलाता हो तो जवारे के रस का एक घूंट पीने से राहत मिलती है । ज्‍वारे का जूस कब्‍ज में भी फायदा करता है ।

1. व्हीटग्रास जूस के फायदे त्वचा में - wheat grass juice benefits in hindi


गेहूं के जवारे में एंटीएजिंग गुण पाए जाते हैं । इसका नियमित रूप से सेवन करने से चेहरे पर झुर्रियां नहीं पड़ती, ये त्‍वचा को साफ और चमकदार बनाए रखता है । इसे पीने से त्‍वचा से संबंधित समस्या नहीं होती है । इसमें क्‍लोरोफिल पाया जाता है जो त्‍वचा पर बुढ़ापे का असर नहीं पड़ने देता । 

चहरे पर चमक लाने के लिए गेंहू का जवारा फायदे करता है इसके लिए एक चम्मच गेहूं के जवारे का पाउडर थोड़े गुलाब जल के साथ मिला कर पेस्ट बना लेवें और चेहरे पर लगालें। फिर  थोड़े टाइम के बाद चेहरे को ठंडे पानी से धो लेवें ।

2. रक्त को शुद्ध करने में ज्वारे के रस के फायदे - wheat grass in hindi


ज्वारे का जूस हमारे शरीर में खून में उपस्थित लाल रक्‍त कोशिकाओं में वृद्धि करता है । इसे पीने से हमारे शरीर में ब्‍लड प्रेशर नियंत्रित रहता है । इसे पीने से हार्ट अटैक होने की संभावना काफी कम हो जाती है । इसका का रस पीने से पेट एकदम दुरुस्‍त रहता है । गैस व एसिड, अपच, पेट दर्द की समस्‍या नहीं होती है ।

गेहूं का जवारा चूर्ण में पाए जाने वाला तत्व क्लोरोफिल,  शरीर में हीमोग्लोबिन को बढ़ाता है। इसलिए, यह एनीमिया रोग को भी ठीक करने में सहायता करता है।

3. हड्डियों के दर्द में गेंहू के ज्वारे के फायदे - wheat grass benefits in hindi


गेंहू के जवारा में उपस्थित मिनरल्‍स मानव शरीर को अंदर से मजबूत बनाता हैं । यह हड्डियों को मजबूत करता हैं । इसके रस में कपड़ा भिहोकर दर्द वाली जगह पर बांधने से भी आराम मिलता है । उम्र बढ़ने पर जोड़ों के दर्द की समस्या नहीं रहती है, अगर जवानी से ही ज्‍वारे के रस से उपचार करना शुरू कर देना चाहिए । प्रतिदिन आधा गिलास जवारे का  रस का सेवन शरीर को स्वस्थ बनाए रखता है।

4. बाल झड़ने की समस्या में गेंहू जवारे के फायदे - gehu ke jaware ke fayde


बालों की सभी समस्‍याओं का रामबाण उपचार है ज्‍वारे का रस, ज्वारे के रस को रूई में भिगो कर बालों पर लगाएं, फिर अच्छी तरह से मसाज करें और फिर बालों को आधे घंटे पश्चात धो लें । इससे बालों में रूसी, रूखापन, झड़ने-गिरने की समस्या नहीं होती है । बाल जड़ से मजबूत और घने और काले हो जायेगें ।

अगर बाल गिरने की समस्या हो तो गेहूं के जवारे का पाउडर रातभर को भिगो कर रख दें और सुबह के समय उसे छान कर अपने बाल धो लेवें । ऐसा करने से झड़ते बाल ठीक हो।

5. गेंहू के जवारे में एंटीसेप्टिक गुण होता है


इसमें उपस्थित एंटीसेप्टिक गुण के कारण, गेहूं के जावरे का चूर्ण  घाव, कीड़े के काटने, त्वचा पर चकत्ते, और खरोंच को ठीक करने में सहायता करता है ।

गेंहू के जवारे के अन्य फायदे - wheat grass in hindi


  • गेहूं का जवारा मुँहासों को ठीक करने में सहायता करता हैं ।
  • गेहूं के ज्वारे से डायबिटीज की पहले स्तर या उन्नत स्तर को नियंत्रित किया जा सकता है ।
  • शराब पीने के बाद होने वाले हैंग ओवर का भी गेहूं के जवारे से नियंत्रित किया जा सकता है ।
  • इसमें बायोफालावोनॉयड होता है, जिसे एपिगेनिन कहा जाता है जो कैंसर कोशिकाओं के विकास को रोकता है ।
  • गेहूं के ज्वारे के पाउडर को नियमित रूप से खाने से पुरुषों और महिलाओं दोनों के ही प्रजनन तंंत्र को स्ववस्थ रखता है, गेंहू के जवारे में प्रचुर मात्रा में फाइबर होता है जिसके कारण मोटापा अथवा शरीर का वज़न कम करने में सहायता मिलती है ।
  • कब्ज़ से पीड़ित व्यक्ति अगर गेहूं के जवारे के रस का उपयोग करें तो उनका पेट साफ करने में सहायता मिलती है ।
  • अगर किसी को जी मचलाने या उबकाई आने की समस्या है तो गेहूं के जवारे का जूस पीने से इस रोग से निजात मिलती है ।
  • गेहूं के जवारे का सेवन प्रतिदिन लगातार करने से बुढ़ापा दूर रहता है और व्यक्ति जवान बना रहता है ।
  • गेहूं का जवारा ( genhu ka jawara ) शरीर में लाल रक्त कोशिकाओं को बढ़ाता है और हार्ट अटैक से रक्षा करता है।
  • गेहूं का ज्वारा शरीर के पी एच लेवल को नियंत्रित करता है तथा एसिडिटी की समस्या से आराम दिलाता है।
  • गेहूं के जवारे का सेवन करने से बुद्धि तेज़ होती है, और तनाव कम होता है।

गेंहू का जवारा घर पर उगाने की विधि


गेहूं के बीज को जब मिट्टी में बोया जाता है, तो कुछ ही दिनों में वह अंकुरित होकर बढ़ने लगता है और उसमें पत्तियां विकसित होने लगती हैं। जब यह पौधा पांच-छह पत्तियों का हो जाता है, तो यह गेहूं का जवारा कहलाता है। 

  • रात के समय लगभग 100 ग्राम गेहूँ के दाने एक बर्तन में भिगो कर छोड़ दें ।
  • पहले से ही 7 गमले तैयार कर लेवें इसके लिए एक गमले में मिट्टी की दो इंच मोटी परत बिछा दें और थोड़ा सा पानी छिड़क दें। 
  • मिटटी और खाद को अच्छी तरह मिला कर गमले के छेद को बंद करके इसमें खाद भर दें । इनमे कभी भी रासायनिक खाद या कीट नाशक दवाओं का प्रयोग न करें ।
  • पहचान के लिए सातों गमलो पर एक से सात तक नंबर डाल दें।
  • अगले दिन गेहूं के दानों को धोकर साफ़ कर पहले गमले में गेहूँ को परत के रूप में बिछा दें और ऊपर से थोड़ी मिट्टी डाल दें और पानी का छिड़काव के दें।
  • गमले को किसी छायादार स्थान पर जहां भरपूर हवा और सूर्य की रोशनी आती हो, पर सूर्य की किरणे सीधी गमलों पर न पड़े।
  • अगले दिन दूसरे नम्बर के गमले में गेहूं बो दीजिये और इस तरह रोज अगले नंबर के गमले में गेहूँ बोते रहें।
  • शुरूआत के दो-तीन दिन गमलों को गीले अखबार से ढक कर रखें और गमलों में प्रतेक दिन स्प्रे बोटल से दिन में दो बार पानी का छिड़काव करें जिससे मिट्टी में आवश्यक नमी बनी रहे।
  • जब गैहूँ के ज्वारे डेढ़ इंच साइज तक के हो जाये तो एक बार ही पानी देना प्रयाप्त है ।  कि गर्मी के सीजन में आवश्यक नमी बनी रहे और पानी की अधिकता भी न हो।
  • सात दिन बाद जब पौधे में 5-6 पत्तियां निकाल आएं और जवारा  7-8 इन्च लम्बा हो जाये तब इन को उखाड़ कर और इनकी जड़े काट कर पानी से अच्छी तरह धो कर पीस ले और इसका रस निकाल ले व इसका सेवन करे।
  • लंबे समय तक ज्वारा प्राप्त करने के लिए जैसे-जैसे गमले खाली होते जाये वैसे वैसे खाद मिटटी बदल कर नए बीज बोते जाएं ।
  • जब तक गंहु के ज्वारा की आवश्यकता हो तब तक इस प्रक्रिया को दोहराते रहे। इस तरह जवारा घर में ही पूरे वर्ष भर उगाया जा सकता है।



गेंहू के जवारे का रस पीने में सावधानियां


1. आरंभ में अगर रस पीने से परेशानी हो तो इसका सेवन कम मात्रा में करें फिर धीरे धीरे मात्रा बढ़ाते जाए ।

2. ज्वारे के ताजे रस का सेवन सामान्यतः 60-120 एमएल प्रति दिन खाली पेट करना चाहिये।

3. यदि आप किसी बीमारी से ग्रसित हैं तो 30-60 मिली ली. ज्वारे का रस दिन मे तीन चार बार तक लिया जा सकता हैं।

4. रस निकालकर तुरंत ही इसका सेवन कर लेना चाहिए। तीन घण्टे बाद जवारे के रस के पोषक तत्व समाप्त होने लगते हैं।

5. ज्वारे के रस में अदरक अथवा खाने वाला पान मिला कर सेवन कर सकते हैं इससे उसके स्वाद तथा गुण में वृद्धि होती है।

6. इसे गिलोय, लोकी, नीम के पत्ते व तुलसी के पत्तों के रस के साथ भी मिल कर पिया जा सकता है।

7. रस लेने के पहले व बाद में एक घण्टे तक कोई अन्य आहार का सेवन न करें ।

8. रस को धीरे-धीरे घूंट घूंट करके बैठ कर पीना चाहिए और सादा भोजन ही लेना चाहिए तथा तली भूनी हुई वस्तुओं का सेवन न करें।

9. कुछ लोगों को शुरु में इसका प्रयोग करने से उल्टी-दस्त हो सकते है । ऐसा तभी होता है जब व्यक्ति रोगी होता है । सर्दीं, उल्टी या दस्त होने से ऐसा माना जाता है कि शरीर से दूषित एकत्रित मल बाहर निकल रहा है, इसमें चिंता की कोई आवश्यकता नहीं है।

10. खटाई, चटनी आदि ज्वारे के रस में मौजूद एंजाइम्स को निष्क्रिय कर देती है। इसमें नमक, चीनी आदि भी नहीं मिलाना चाहिये।

गेंहू के जावरे के नुकसान - Wheatgrass Side Effects in hindi


1. गेंहू का जवारा अधिक सेवन करने से सिर-दर्द एवं उल्टी होने की समस्या हो सकती है।

2. जवारा का सेवन शुरुआत में थोड़ी ही मात्रा में करें। क्योंकि यदि शरीर इसे तरीके से नहीं पचा सका तो डायरिया की समस्या हो सकती है। इसकी खुराक की मात्रा को धीरे धीरे बड़ाया जा सकता हैं।

3. इससे एलर्जी होने की संभावना भी हो सकती है। इसका एलर्जिक होना आम बात हैं, सूजा हुआ मुंह या गला। ऐसे लक्षण होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें ।

4. इस लेख में गेंहू के जवारे के फायदे - wheat grass in hindi का वर्णन किया गया है । इसका मूल उद्देश्य लोगो को आयुर्वेद के प्रति जागरूक करना है, किसी रोग में इसका सेवन करने से पूर्व किसी चिकित्सक की सलाह अवश्य लेवें । किसी भी जड़ी बूटी कि अधिकता नुक़सानदायक हो सकता है । अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया पर जाकर पढ़े ।
धन्यवाद ।